Savita
Author:
Sarat Chandra ChattopadhyayPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Academics-and-references0 Ratings
Price: ₹ 280
₹
350
Available
तारकनाथ और राखाल केवल तीन महीने के ही साथ-संग से घनिष्ठ मित्र हो गए। जब तीन बज गए और तारक अभी तक नहीं आया, तब राखाल के हृदय में घबराहट और बेचेनी पैदा होने लगी। भवानीपुर में आज स्त्रियों की एक सभा होनेवाली है। वहाँ पर बहुत से शिक्षित परिवारों को लड़कियाँ इकट्ठी होंगी और इस समय राखाल वहाँ के लिए चल देने को बेचैन होता जा रहा था। जाने के सब इंतजाम कर चुका था। सफेद कुरता, धोतो और सिल्क का साफा पलंग पर तैयार रखे थे और पास ही ताजा पॉलिश किया हुआ जूता चमचमा रहा था। मेज पर रखी हुई सोने को रिस्टवॉच भी सोने को चेन के साथ चमचमा रही थी।
ISBN: 9789352662654
Pages: 312
Avg Reading Time: 10 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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व्रत दो प्रकार के होते हैं, ‘काम्य’ और ‘नित्य’। काम्य उन्हें कहते हैं जो किसी विशेष कामना को लेकर किये जाते हैं और नित्य वे हैं, जिनमें किसी कामना का समावेश नहीं होता, वरन् जो भक्ति और प्रेम के कारण आध्यात्मिक प्रेरणा से किये जाते हैं। निष्काम अथवा नि:स्वार्थ व्रत का ही स्थान ऊँचा होता है।
व्रत का सामान्य अर्थ आज ‘उपवास’ हो गया है। उपवास शब्द का अर्थ है दुर्गुणों एवं दोषों से बचकर आत्मा अथवा गुणों के साथ वास अर्थात् निवास। इन व्रतों अथवा पर्वों में हमारे देश के भिन्न-भिन्न मतावलम्बी लोगों के लिए अपनी-अपनी कुल-परम्परागत मान्यता के अनुसार चलने की पूरी सुविधाएँ प्रदान की गयी हैं। एक धर्म अथवा सम्प्रदाय के देवता का अन्य धर्म अथवा सम्प्रदाय में बड़ी उदारता एवं सहानुभूति के साथ चित्रण किया गया है। सनातन हिन्दू धर्म में तो इस व्यापक दृष्टिकोण का पदे-पदे परिचय मिलता है। भगवान् विष्णु के चौबीसों अवतारों में जैन धर्म के आदि प्रवर्तक भगवान् ऋषभदेव तथा बुद्ध धर्म के प्रतिष्ठापक भगवान् गौतम बुद्ध का भी गिनाया गया है और इनकी जयन्तियों तथा पुण्यकथाओं को सुनने-सुनाने का बड़ा माहात्म्य वर्णित है।
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