Comprehensive Guide B.Sc Nursing General Nursing & Midwifery (GNM) Recruitment Exam
Author:
Team PrabhatPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
EnglishCategory:
Academics-and-references0 Ratings
Price: ₹ 500
₹
625
Available
Awating description for this book
ISBN: 9789390389438
Pages: 672
Avg Reading Time: 22 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Brahman Ki Beti & Viraj Bahu
- Author Name:
Sarat Chandra Chattopadhyay
- Book Type:

- Description: मुहल्ले भर घूमकर तीसरे पहर रासमणि घर लौट रही थीं। आगे-आगे उनकी पोती मु. रही थी, जिसकी उम्र कोई दस-बारह साल की थी। गाँव का सँकरा रास्ता, जिसकी बगल की खूँटी में बँधा हुआ बकरी का बच्चा एक किनारे पड़ा सो रहा था। उस पर नजर पड़ते ही पोती को लक्ष्यकर वे चिल्ला पड़ीं, '' अरी छोकरी, कहीं रस्सी मत लाँव जाना ! सामने रस्सी मत 'लाँघ गई क्या ? हरामजादी, आसमान में देखती हुई चलती है। आँख से दिखलाई नहीं पड़ा कि सामने बकरी बँथी है ?'' पोती ने सहज भाव से कहा, '“बकरी तो सो रही है दादी।'' “सो रही है तो क्या दोष नहीं लगा ? आज मंगलवार के दिन तू बेखटके रस्सी लाँघ गई ?!!
BPSC Bihar Shikshak Bahali Rajniti Vigyan Bhag-1 (Political Science) 15 Practice Sets
- Author Name:
Dr. Ranjit Kumar Singh, IAS (AIR-49)
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
KVS PRT Primary Teacher Written Examination 2023 15 Practice Sets includes Latest Solved Paper
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Akshar Katha
- Author Name:
Gunakar Muley
- Book Type:

-
Description:
प्राचीन नदी घाटी सभ्यताओं में जब नगरों की स्थापना होने लगती है, पहली बार लिपियाँ तभी जन्म लेती दिखाई देती हैं। यह कोई छह हजार साल पहले की बात है।
वर्णमालात्मक लिपियाँ ई.पू. दसवीं सदी के आस-पास पहली बार सामने आती हैं। तब से आज तक लिपियों का विशेष विकास नहीं हुआ। बहुत-सी पुरालिपियाँ मर गईं, उनका ज्ञान भी लुप्त हो गया। पिछले क़रीब दो सौ वर्षों में संसार के अनेक पुरालिपिविदों ने पुनः उन पुरालिपियों का उद्घाटन किया है।
इस ग्रन्थ में गुणाकर जी ने मुख्यतः संसार की प्रमुख पुरालिपियों की जानकारी दी है। पाठक इससे जान जाएँगे कि किस देश में कौन-सी लिपि का अस्तित्व था, उसका स्वरूप कैसा था, उसके संकेत या अक्षर कैसे थे और आधुनिक काल में उन पुरालिपियों का उद्घाटन कैसे हुआ। पुस्तक के दूसरे खंड में भारतीय लिपियों की जानकारी है। आरम्भ में सिन्धु लिपि (अज्ञात) तथा खरोष्ठी लिपि का विवरण है। फिर ब्राह्मी लिपि के उद्भव तथा विकास के बारे में यथासम्भव पूरी जानकारी दी गई है। पुस्तक का परिशिष्ट संसार के प्रमुख भाषा-परिवारों पर केन्द्रित है। भाषा सम्बन्धी जिज्ञासु पाठकों और छात्रों के लिए प्रामाणिक तथ्यों, चित्रों और तालिकाओं से समृद्ध यह पुस्तक निश्चित रूप से उपादेय होगी।
Aatmkatha Ke Elake Mein
- Author Name:
Bharat Singh +1
- Book Type:

-
Description:
बनारसीदास जैन ने 'अर्धकथा' (1641) में लिखा कि 'गर्भित कथा कहाँ हिय खोल।' छिपाए जानेवाले या कहें कि गोपन प्रसंगों को भी दिल खोलकर अथवा खुलकर बताना आत्मकथा को प्रसिद्धि दिलाता है, निवैयक्तिक बनाता है। आत्मकथा चर्चित विधा है और आत्मकथा- लेखन की एक समृद्ध परम्परा है, लेकिन यह आलोचना से परे विधा हो, ऐसा भी नहीं है। बाबू बनारसीदास चतुर्वेदी ने आत्मकथा लेखक की पात्रता का सवाल उठाया था। चतुर्वेदी जी ने 'जागरण' में यह सवाल उठाया था कि आत्मकथा किसे लिखनी चाहिए। भाव यह था कि आत्मकथा किसे नहीं लिखनी चाहिए। हालाँकि उनके द्वारा तय की गई शर्तों पर आगे लोगों ने आत्मकथा लिखी, ऐसा भी नहीं है। जब प्रेमचन्द ने 'हंस' का आत्मकथांक (1932) निकाला तो नन्ददुलारे वाजपेयी ने यह कहकर विरोध किया था कि इससे आत्म-विज्ञापन का भाव बढ़ेगा जो कि हिन्दी के हित में नहीं होगा।
लेखिकाओं की आत्मकथा में स्त्री-वेदना के विविध स्वर सुनाई पड़ते हैं। इनकी वेदना समस्त स्त्रियों को शोषण के खिलाफ विरोध की ताकत देती है। इन्होंने अपने आत्मकथा-साहित्य के द्वारा जहाँ स्त्री करुणा, शोक, वेदना, विवशता को व्यक्त किया वहीं उसे हिंसा, शोषण, अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने की शक्ति भी प्रदान की। इन्होंने स्त्री स्वतन्त्रता, समानता, सम्मान, सहभागिता इत्यादि जैसे प्रश्नों पर विचार करते हुए पितृसत्तात्मक व्यवस्था से स्त्री-मुक्ति की भी वकालत की।
आत्मकथाओं में अपने भीतर की यात्रा के जरिये बाहर का जो सफ़र तय होता है उसमें केवल अपनी दुनिया की ही बात नहीं होती है पूरा सामयिक सन्दर्भ आ जाना स्वाभाविक है। दलित आत्मकथाओं को आत्मकथात्मक उपन्यास यूँ ही नहीं कहा जाता है। जीवन का पूरा विस्तार है यथार्थ को देखने की एक नई दृष्टि के साथ ये आत्मकथाएँ हिन्दी साहित्य के मुख्य धारा के साहित्य की चेतना को झकझोरती हैं और उसकी चली आ रही परम्परा में एक तरह की वैचारिक हलचल पैदा करती हैं, दलित आत्मकथाएँ, साहित्य की दुनिया में निर्मित 'औदात्य' की धारणा को बदलकर रख देती हैं और जीवन के नए-नए मुहावरों के बीच अपने पाठकों को ले जाकर खड़ा करती हैं।
Sant Ravidas
- Author Name:
Mahesh Dutt Sharma
- Book Type:

- Description: संत रविदास प्रसिद्ध भारतीय संत, कवि और समाज सुधारक थे। उनका प्रेरक जीवन सामाजिक न्याय और समानता के प्रति असीम प्रतिबद्धता का प्रतीक था। उनकी रचनाएँ आध्यात्मिकता, नैतिकता और सामाजिक न्याय की पैरवी करती हैं और सभी मनुष्यों के लिए करुणा तथा प्रेम की गहरी भावना से ओत-प्रोत हैं। संत रविदास कबीरदास के समकालीन थे। वे कबीर की तरह स्वामी रामानंदजी के शिष्य थे। गुरु ग्रंथसाहिब में संत रविदास की वाणियों का भी संकलन है। उनकी योग्यता एवं महत्ता से प्रभावित होकर मीराबाई ने उन्हें अपना गुरु बनाया और उनसे दीक्षा ली। वे मूल रूप से एक भक्त और साधक थे। उनकी वाणियों और पदों में दैन्य भावना, शरणागत, ध्यान की तल्लीनता तथा आत्मनिवेदन की भावना प्रमुखता से पाई जाती है। भक्ति के सहज एवं सरल मार्ग को उन्होंने अपनाया था; सत्संग को भी महत्त्व दिया है। जात-पाँत के भेदभाव को मिटाने का महत्त्वपूर्ण कार्य उनके सरल काव्य ने किया और मानव को जीवन जीने की कला तथा मानवता का पाठ पढ़ाया। अधिक पढ़े-लिखे न होते हुए भी उन्होंने समाज को जाग्रत् करने का अद्भुत कार्य किया। समरसता और समभाव का अमर संदेश देनेवाले शिरोमणि संत रविदास की प्रेरक जीवनगाथा ।
1000 Bhagat Singh Prashnottari
- Author Name:
Yavindar Singh Sandhu
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Pankaj Subeer Ki Kahaniyon Ka Samaj Shastreey Adhdhyan
- Author Name:
Dinesh Pal
- Book Type:

- Description: Book
Warahmihir : Jal Jeevan Hai
- Author Name:
Pandit Ishnarayan Joshi
- Book Type:

-
Description:
जीवन के लिए जल एक अनिवार्य पदार्थ है। वनस्पति की उत्पत्ति और कृषि जल पर ही निर्भर है। हमारा देश कृषि-प्रधान देश है, इसलिए खेती के लिए वांछित जल की आवश्यकता सदा बनी रहती है। मनुष्य के जीवन के लिए और खेती बाड़ी के लिए हमें नदियों, तालाबों और कुओं से जल मिलता है। नदियाँ अथवा तालाब प्रत्येक गाँव, क़स्बे तथा नगर में उपलब्ध नहीं हैं और सरलता से हर कहीं बनाए भी नहीं जा सकते, इसलिए पानी की आवश्यकता को पूरा करने के लिए लोग कुआँ खोदते हैं।
हमारे देश में प्राचीनकाल में ही समाजसेवी विद्वान मनुष्यों की इस परम और अनिवार्य आवश्यकता का अनुभव कर भू-गर्भ के जल का पता लगाने के अनेक प्रयास और प्रयोग भू-भागों में निरन्तर चलते रहे। इस विषय का जो ग्रन्थ मुद्रित उपलब्ध होता है, वह आचार्य वराहमिहिर की ‘वृहत्-संहिता’ है। ‘वृहत्-संहिता’ ज्योतिष का ग्रन्थ है।
इस ग्रन्थ का 53वाँ अध्याय—दृकार्गल है। इसमें भू-गर्भ के जल का ज्ञान करने, पता लगाने की विधि बताई गई है। वराहमिहिर ने इस विज्ञान को दृकार्गल कहा है, जिसका अर्थ है भूमि के अन्दर के जल (उदक, दक) का लकड़ी की छड़ी के माध्यम से निश्चय करना, पता लगाना।
आचार्य वराहमिहिर ने पानी की खोज में जिन विषयों-विज्ञानों को आधार बनाया है। इस पुस्तक का अनुवाद करने में आवश्यक था कि उन विज्ञानों के जानकार विद्वानों से चर्चा की जाए और आधुनिक विज्ञान कहाँ तक पुरानी खोजों और प्रयोगों का समर्थन करते हैं।
Indradhanush Ke Kitne Rang (2nd Edition)
- Author Name:
Dr. Piyush Ranjan
- Book Type:

- Description: पुस्तक के पहले संस्करण को पढ़ कर बहुत सारे लोगों को सुखद आश्चर्य हुआ। आमतौर पर विज्ञान के विद्यार्थी और चिकित्सक भाषा और साहित्य के मामले में रूखे और नीरस माने जाते हैं। इस पुस्तक के प्रकाशन के बाद (‘डॉ. साहब, आपकी कविताएँ भावना-प्रधान और उच्च स्तरीय है’, ‘बहुत रोचक हैं’, ‘बिल्कुल हटकर हैं’, ‘पढ़ कर मजा आ गया’ आदि सरीखे) प्रशंसा का भाव लिये हुए कई बधाई सूचक शब्द सुनने को मिलते रहे, इस संस्करण में एक नए गीत ‘मोहे रँग दे’ को सम्मिलित किया गया है। इस गीत की रिकॉर्डिंग हो चुकी है और फागुन के अवसर पर लोकार्पण करने की योजना है। पुस्तक के बारे में— भावनाओं के कई रंग होते हैं और सभी रंगों का अपना एक अलग ही मजा होता है। जब से जिंदगी को समझा है, जिंदगी को सिर्फ अपने दिल की सुनकर, भावनाओं से परिपूर्ण जीया है। यह पुस्तक इंसान के इंद्रधनुषी भावनाओं के उन रंगों को सहेजने का एक प्रयास है, जिसका अनुभव जिंदगी के किसी-न-किसी मोड़ पर मुझे हुआ है। ‘इंद्रधनुष के कितने रंग’ जिंदगी के विविध रंगों को पन्नों पर उतरने की एक कोशिश है। ‘फलसफा’ में जिंदगी के मूल्य को समझते हुए, अपने कृत्य के द्वारा जिंदगी को और भी ज्याद मूल्यवान बनाने का संदेश दिया गया है। ‘जिंदगी दो पल की’ होती है। अफसोस, ज्यादातर लोग इस बात को जब तक समझ पाते हैं, तब तक ये पल बीत गए होते हैं। शपथ-पत्र—रचनाकार इस पुस्तक के विक्रय से होनेवाले समस्त धन-लाभ को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली के गरीब मरीजों के इलाज के लिए दान देने की शपथ लेता है।
Kalam Ko Teer Hone Do
- Author Name:
Vidya Bhooshan
- Book Type:

- Description: देश-देशांतर तक पसरे हिंदी-संसार में सृजनशीलता का जो केंद्रीय प्रवाह है, उसमें दूरस्थ अंचलों और दिशाओं की लेखकीय ऊर्जा भी विसर्जित होती है, किंतु उस विराट संगम में जानी-मानी नदियों की जलधाराएँ तो यथेष्ट मान-पहचान पाती हैं, मगर अनगिनत प्रपातों और अंत:सलिलाओं के अंशदान की लगातार अनदेखी होती आई है। हिंदी सर्जना के आंचलिक परिदृश्य को अगर समग्रता में परखें तो कई बुनियादी सवाल सिर उठाते हैं; जैसे क्या श्रेष्ठ और प्रभावी कृतियों की अंतर्वस्तु का कोई स्थानिक पहलू नहीं होता? क्या कोई आंचलिक या स्थानीय प्रेरणा अभिव्यक्ति के आकार-प्रकार को निर्धारित नहीं करती? क्या कृति और परिवेश के जैविक संबंधों की अनदेखी से रचना का संदेश संदर्भ रहित होकर अमूर्त नहीं रह जाता? सच तो यह भी है कि राजधानियों का लेखक सिर्फ अपने निकट परिवेश से उत्प्रेरित नहीं होता। अपने मूल और गुमनाम स्त्रोतों से सुलभ हो रही दिशा-दृष्टि भी उसे उच्चतर जीवनमूल्यों से जोड़ती है। प्रस्तुत पुस्तक सृजन और विचार के प्रसंग में, केंद्र और हाशिए के बीच के फासलों पर खोजी नजर डालती है। पुस्तक-संसार में झारखंड की सांस्कृतिक परंपरा पर अधीत सामग्री की कमी नहीं है, लेकिन उसके साहित्य की हिंदी परंपरा के विविध पहलुओं पर समग्र विचार अभी तक प्रतीक्षारत है। निश्चय ही इस पुस्तक में सम्मिलित आलेख सूचनाओं के नए क्षितिजों से निकट परिचय कराएँगे।
GS SCORE Concept Mapping Workbook Indian Polity & Governance
- Author Name:
Manoj K. Jha
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Punarjanma
- Author Name:
Dr. Walter Semkiw
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
CTET Central Teacher Eligibility Test Paper -1 (Class 1-5 ) 15 Practice Sets Evam 11 Solved Papers
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
UTTAR PRADESH POLICE (FIREMAN, JAIL WARDER EVAM ARAKSHI GHUDSAWAR) BHARTI PARIKSHA-2020
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: उत्तर प्रदेश पुलिस (फायरमैन, जेल वार्डर, आरक्षी घुडसवार) भर्ती परीक्षा
Abhagi Ka Swarg
- Author Name:
Sarat Chandra Chattopadhyay
- Book Type:

- Description: बांग्ला के उपन्यास-सम्राट् शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की संपूर्ण अमर कृतियाँ देश-विदेश की अनेक भाषाओं में अनूदित होकर प्रकाश में आ चुकी हैं; परंतु हिंदी में जहाँ एक ओर उनके उपन्यास तथा उपन्यास के रूप में बड़ी-बड़ी कहानियों के अनेक अनुवाद हुए हैं, वहाँ उनकी लघु-कथाओं के अनुवाद अपेक्षाकृत बहुत कम हो प्रकाश में आए हैं। प्रस्तुत पुस्तक में शरतबाबू की सात लघु-कथाएँ संकलित हैं। सभी कहानियाँ एक-से-एक सुंदर, प्रेरणाप्रद, मर्मस्पर्शी एवं शिल्प की दृष्टि से अत्युत्तम हैं। अनुवाद में केवल मूल भावों की ही रक्षा नहीं की गई है, अपितु वह अक्षरश: हो और प्रभाव में भी शिथिलता न पड़े, इसका भी विशेष ध्यान रखा गया है। आशा है, रवींद्रकथा-माला की भाँति शरतकथा-माला को भी स्नेहपूर्वक अपनाकर हिंदी-पाठक हमारे श्रम को सार्थक करेंगे।
GS SCORE Concept Mapping Workbook History Vol-2 Modern History
- Author Name:
Manoj K. Jha
- Rating:
- Book Type:

- Description: —Public Service Examinations across the Board in India offers immense opportunity for young talent to secure not only employment at prestigious positions but also gives them the chance to serve the nation in various capacities. —These examinations are of a highly diverse nature as they test the candidates on diverse subjects, further spanning multiple dimensions largely the subjects related to Polity, Economy, History, Geography, Science and Technology, environmental sciences and miscellaneous topics like sports, awards and other events of national and international importance. —All of this demand not only to study of these varied subjects but also practice in tackling the questions which are asked in the examination. Highlights of the Book Approach towards the subject —The book introduces you to the subject and the way in which this subject should be approached in order to score maximum. Micro Detailing of the Syllabus—The entire UPSC CSE syllabus has been clubbed into broad themes and each theme will be covered with the help of MCQs. Chronological Arrangement of Theme Based Questions—The various identified themes are arranged chronologically so that the entire Syllabus of a subject is roped in a logical line. Last Minute Concept Revision—The end of the book contains the summary of important concepts related to the subject which can be used as your effective revision notes. About GS SCORE—GS SCORE has been home to numerous toppers of UPSC's prestigious Civil Services Examination. Learning at GS SCORE is driven by two predominant objectives i.e. excellence and empowerment.
Dushyant Kumar : Ek Shodharthi Ki Nazar Se
- Author Name:
Jaimini Pandya
- Book Type:

- Description: book on the life of famous poet dushyant kumar
Loksanskriti Mein Rashtravad
- Author Name:
Badri Narayan
- Book Type:

-
Description:
प्रस्तुत पुस्तक ‘लोकसंस्कृति में राष्ट्रवाद’ में शोध को एक ढाँचा प्रदान करने के लिए तीन लोक-कवियों पर ध्यान केन्द्रित किया गया है जो लोक-चेतना के तीन कालखंडों में प्रतिनिधि हैं। लोकसंस्कृति के कुछ अन्य रूपों का उपयोग इतिहास लेखन और लोकसंस्कृति में किया गया है। इसमें सन् 1857 के ग़दर की झलक भी शामिल है। लोकसंस्कृति को समय में बाँधने के कारण इस अध्ययन की कई सीमाएँ बन गई हैं।
पुस्तक में अन्तःअनुशासनिक तकनीकों एवं प्रविधियों का उपयोग किया गया है। इसमें मौखिक इतिहास की उपलब्ध प्रविधि को विकसित करने का प्रयास है। पुस्तक छह खंडों में विभाजित है—‘राष्ट्रवाद का प्रमेय’, ‘इतिहास-लेखन और लोकसंस्कृति’, ‘रचना-काल (1857 से 1900 ई.) : लोक-सजगता एवं सुखदेव भगत की संघटना का वृत्तान्त’, ‘विरचना-काल (1900-1920 ई.) : लोकसंस्कृति में स्वीकार और बहिष्कार : निर्धिनराम की गाथा’, ‘पुनर्रचना-काल (1920-1947 ई.) : लोकचेतना की क्रियात्मक क्षमता का पुनर्निर्माण और कवि कैलाश का सन्दर्भ’ तथा ‘निष्कर्ष’।
पुस्तक निश्चय ही पठनीय और संग्रहणीय है।
Lok Sanskriti Ki Rooprekha
- Author Name:
Krishnadev Upadhyaya
- Book Type:

-
Description:
लोक-साहित्य लोक-संस्कृति की एक महत्त्वपूर्ण इकाई है। यह इसका अविच्छिन्न अंग अथवा अवयव है। जब से लोक-साहित्य का भारतीय विश्वविद्यालयों में अध्ययन तथा अध्यापन के लिए प्रवेश हुआ है, तब से इस विषय को लेकर अनेक महत्त्वपूर्ण ग्रन्थों की रचना हुई है। प्रस्तुत ग्रन्थ को छह खंडों तथा 18 अध्यायों में विभक्त किया गया है।
प्रथम अध्याय में लोक-संस्कृति शब्द के जन्म की कथा, इसका अर्थ, इसकी परिभाषा, सभ्यता और संस्कृति में अन्तर, लोक-साहित्य तथा लोक-संस्कृति में अन्तर, हिन्दी में फोक लोर का समानार्थक शब्द लोक-संस्कृति तथा लोक-संस्कृति के विराट स्वरूप की मीमांसा की गई है। दि्वतीय अध्याय में लोक-संस्कृति के अध्ययन का इतिहास प्रस्तुत किया गया है। यूरोप के विभिन्न देशों जैसे—जर्मनी, फ़्रांस, इंग्लैंड, स्वीडेन तथा फ़िनलैंड आदि में लोक-साहित्य का अध्ययन किन विद्वानों द्वारा किया गया, इसकी संक्षिप्त चर्चा की गई है।
दि्वतीय खंड पूर्णतया लोक-विश्वासों से सम्बन्धित है। अतः आकाश-लोक और भू-लोक में जितनी भी वस्तुएँ उपलब्ध हैं और उनके सम्बन्ध में जो भी लोक-विश्वास समाज में प्रचलित है, उनका सांगोपांग विवेचन इस खंड में प्रस्तुत किया गया है।
तीसरे खंड में सामाजिक संस्थाओं का वर्णन किया है जिसमें दो अध्याय हैं—(1) वर्ण और आश्रम तथा (2) संस्कार। वर्ण के अन्तर्गत ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य एवं शूद्रों के कर्तव्य, अधिकार तथा समाज में इनके स्थान का प्रतिपादन किया गया है। चौथे खंड में आश्रम वाले प्रकरण में चारों आश्रमों की चर्चा की गई है। जातिप्रथा से होनेवाले लाभ तथा हानियों की चर्चा के पश्चात् संयुक्त परिवार के सदस्यों के कर्तव्यों का परिचय दिया गया है।
पंचम खंड में ललित कलाओं का विवरण प्रस्तुत किया गया है। इन कलाओं के अन्तर्गत संगीतकला, नृत्यकला, नाट्यकला, वास्तुकला, चित्रकला, मूर्तिकला आती हैं। संगीत लोकगीतों का प्राण है। इसके बिना लोकगीत निष्प्राण, निर्जीव तथा नीरस है।
षष्ठ तथा अन्तिम खंड में लोक-साहित्य का समास रूप में विवेचन प्रस्तुत किया गया है। लोक-साहित्य का पाँच श्रेणियों में विभाजन करके, प्रत्येक वर्ग की विशिष्टता दिखलाई गई है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book