Kosh Kala
(0)
Author:
Ramchandra VermaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Academics-and-references₹
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‘कोश निर्माण' की विधा पर लिखी गई विश्व साहित्य में यह पहली पुस्तक है। वर्मा जी ‘हिन्दी शब्द सागर’ के अन्यतम सम्पादकों में से थे। वही एक ऐसे सम्पादक भी थे जिन्होंने आरम्भ से अन्त तक, अपने इस दायित्व का निर्वाह किया। इसके उपरान्त उन्होंने ‘संक्षिप्त शब्द सागर’, ‘उर्दू हिन्दी कोश’, ‘प्रामाणिक हिन्दी’ तथा ‘मानक हिन्दी कोश’ की भी रचना की। इस प्रकार उनके जीवन का अधिकांश कोश-निर्माण में ही व्यतीत हुआ। ‘कोशकला’ को उनके कोश-निर्माण काल के अनुभवों का निचोड़ कहें तो अत्युक्ति न होगी।</p> <p>‘कोश-निर्माण’ का कार्य विज्ञान भी है और कला भी। कोश की रचना का आधार वैज्ञानिक पद्धति तथा नियम हैं इसलिए यह विज्ञान है। जो सत्य है और सुन्दर है उसकी अभिव्यक्ति इसका सरोकार है, इसलिए यह कला है। वर्मा जी ने कोश निर्माण के हर पहलू पर इस कृति में गम्भीरता और सूक्ष्मता से विचार किया है।</p> <p>‘कोशकला’ के प्रस्तुत संस्करण में नए तथ्यों का समावेश तो हुआ ही है, कई नई प्रस्थापनाओं पर भी पुनर्विचार हुआ है।
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‘कोश निर्माण' की विधा पर लिखी गई विश्व साहित्य में यह पहली पुस्तक है। वर्मा जी ‘हिन्दी शब्द सागर’ के अन्यतम सम्पादकों में से थे। वही एक ऐसे सम्पादक भी थे जिन्होंने आरम्भ से अन्त तक, अपने इस दायित्व का निर्वाह किया। इसके उपरान्त उन्होंने ‘संक्षिप्त शब्द सागर’, ‘उर्दू हिन्दी कोश’, ‘प्रामाणिक हिन्दी’ तथा ‘मानक हिन्दी कोश’ की भी रचना की। इस प्रकार उनके जीवन का अधिकांश कोश-निर्माण में ही व्यतीत हुआ। ‘कोशकला’ को उनके कोश-निर्माण काल के अनुभवों का निचोड़ कहें तो अत्युक्ति न होगी।</p>
<p>‘कोश-निर्माण’ का कार्य विज्ञान भी है और कला भी। कोश की रचना का आधार वैज्ञानिक पद्धति तथा नियम हैं इसलिए यह विज्ञान है। जो सत्य है और सुन्दर है उसकी अभिव्यक्ति इसका सरोकार है, इसलिए यह कला है। वर्मा जी ने कोश निर्माण के हर पहलू पर इस कृति में गम्भीरता और सूक्ष्मता से विचार किया है।</p>
<p>‘कोशकला’ के प्रस्तुत संस्करण में नए तथ्यों का समावेश तो हुआ ही है, कई नई प्रस्थापनाओं पर भी पुनर्विचार हुआ है।
Book Details
-
ISBN9788180311772
-
Pages160
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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