Diary Of My Love
(0)
Author:
Deesha SanganiPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Academics-and-references₹
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अगर आपका दिल धड़कता है, तो आप अब भी सपने देख सकते हैं। अनुष्का युवा है, उत्साह और उमंग से भरी है, जिसने अपने लक्ष्य निश्चित कर लिये हैं। अपने सपनों को सच करते हुए उसने अभी-अभी कॉरपोरेट जगत् में कदम रखा है। जीवन शानदार लग रहा है। नौकरी के पहले ही दिन आयुष की मुलाकात अनुष्का से होती है और उसमें एक तरंग सी दौड़ने लगती है। अनायास ही अनुष्का से हुई बातचीत मन में ऐसी भावनाएँ जगाती है, जिनका एहसास उसे बरसों से नहीं हुआ था। वह एकदम परफेक्ट लगती है। पर क्या जीवन में कुछ भी परफेक्ट होता है? चार साल बाद जब दोनों फिर से मिलते हैं, तो उनके दिल टूट चुके होते हैं और प्यार करने की इच्छा खत्म हो चुकी है। दोनों एक-दूसरे के दिल का दर्द दूर करते हैं और अपने-अपने सपनों को सच करने में मदद करते हैं। आखिर में जब दोनों अपने और एक-दूसरे के लिए जीने लगते हैं, तब जिंदगी एक क्रूर खेल खेलती है। अनुष्का की डायरी ही उसकी सच्ची साथी है, जिसके पन्नों में ऐसे राज दफन हैं, जिन्हें कोई कभी नहीं जान पाएगा। आइए, भावनाओं के इस उतार-चढ़ाव भरे सफर में आयुष और अनुष्का के साथ चलें तथा उन रहस्यों को जानें, जिन्हें अनुष्का ने ‘डायरी ऑफ माई लव’ में दफन कर रखा है।
Read moreAbout the Book
अगर आपका दिल धड़कता है, तो आप अब भी सपने देख सकते हैं। अनुष्का युवा है, उत्साह और उमंग से भरी है, जिसने अपने लक्ष्य निश्चित कर लिये हैं। अपने सपनों को सच करते हुए उसने अभी-अभी कॉरपोरेट जगत् में कदम रखा है। जीवन शानदार लग रहा है।
नौकरी के पहले ही दिन आयुष की मुलाकात अनुष्का से होती है और उसमें एक तरंग सी दौड़ने लगती है। अनायास ही अनुष्का से हुई बातचीत मन में ऐसी भावनाएँ जगाती है, जिनका एहसास उसे बरसों से नहीं हुआ था।
वह एकदम परफेक्ट लगती है।
पर क्या जीवन में कुछ भी परफेक्ट होता है?
चार साल बाद जब दोनों फिर से मिलते हैं, तो उनके दिल टूट चुके होते हैं और प्यार करने की इच्छा खत्म हो चुकी है। दोनों एक-दूसरे के दिल का दर्द दूर करते हैं और अपने-अपने सपनों को सच करने में मदद करते हैं। आखिर में जब दोनों अपने और एक-दूसरे के लिए जीने लगते हैं, तब जिंदगी एक क्रूर खेल खेलती है।
अनुष्का की डायरी ही उसकी सच्ची साथी है, जिसके पन्नों में ऐसे राज दफन हैं, जिन्हें कोई कभी नहीं जान पाएगा। आइए, भावनाओं के इस उतार-चढ़ाव भरे सफर में आयुष और अनुष्का के साथ चलें तथा उन रहस्यों को जानें, जिन्हें अनुष्का ने ‘डायरी ऑफ माई लव’ में दफन कर रखा है।
Book Details
-
ISBN9789390900459
-
Pages176
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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बाबू के इन निबन्धों में प्रवाह और ताजगी तो है ही भाषा की सुन्दर छवियाँ भी हैं। मनुष्य की मुक्ति उनकी चिन्ताओं का सबसे बड़ा केन्द्र है और उसके लिए वे समता को आवश्यक शर्त मानते हैं। गैर-बराबरी से अधिक मनुष्य विरोधी उन्हें शायद कुछ नहीं लगता और इस विषय पर वे अनेक बार लिखते हैं। नंद बाबू ने ‘धर्मयुग’ जैसी पत्रिका के लिए लिखा तो लघु पत्रिकाओं और लघु समाचार-पत्रों के लिए भी लिखा। उनके इस गद्य लेखन में जहाँ काव्य की सौन्दर्यपक्षीय चिन्ताएँ हैं वहीं काव्य के उपयोगपक्ष की वस्तुनिष्ठ चिन्ताओं पर भी लगातार जिरह भी। कवि का यह गद्य उनके काव्य संसार को बेहतर ढंग से समझने का रास्ता देता है, मनुष्यता के रास्तों का संधान करता है तो इसे पढ़ना प्रसन्न गद्य को पढ़ना भी है। ‘रचनावली’ के तीसरे खंड में नंद चतुर्वेदी के कथेतर लेखन को सहेजा गया है जिसमें संस्मरण, डायरी, पत्रों के साथ व्याख्यान और साक्षात्कार भी हैं। वे इस गद्य लेखन में अपने समय और समाज की छोटी बड़ी तमाम व्याधियों पर नज़र दौड़ाते हैं और राजनीति व राजनेताओं के सम्बन्ध में भी दो-टूक लिखने में संकोच नहीं करते। एक लेखक के रूप में उन्होंने समाजवादी 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राममनोहर लोहिया पर भी उन्होंने लिखा। उनकी डायरी और अपने पत्रों में वे अपने निजी दायरे सार्वजनिक करते हैं। दो-टूक टिप्पणियाँ और निर्भीक कथन। इनमें बहुधा आत्मीयता का रस भी है तो बेहद निजी निराशाएँ भी। कथेतर की विभिन्न विधाओं में संकलित इस खंड में नंद चतुर्वेदी की रचनाशीलता के अनेक रूप विद्यमान हैं जो कवि के व्यापक दाय का प्रमाण बन गए हैं। ‘नंद चतुर्वेदी रचनावली’ के चौथे और अन्तिम खंड में मुख्यत: कवि का अनुवाद कर्म है। नंद बाबू ने कविता और गद्य दोनों का अनुवाद किया। माना जाता है कि काव्यानुवाद बहुत मुश्किल साहित्य कर्म है क्योंकि अनुवादक ऐसा ही व्यक्ति होना चाहिए जो दोनों भाषाओं को ठीक से जानता हो। नंद बाबू ने साहित्यिक पत्रिकाओं के आग्रह पर काव्यानुवाद किये। ये काव्यानुवाद बहुत पुरानी प्राकृत की कविताओं के थे जो हाल कवि की गाथा सप्तशती से अंग्रेजी के रास्ते आए थे। ठीक इसी तरह कुछ संथाली कविताओं का अनुवाद भी उन्होंने किया जिन्हें अंग्रेजी में कवि सीताकांत महापात्र ने प्रस्तुत किया था। इन दोनों काव्यानुवादों में नंद बाबू की अपनी मेधा दिखाई देती है जो इन कविताओं की मूल संवदेना तक पाठकों को पहुँचाने में समर्थ है। इससे पहले उन्होंने अपनी पत्रिका बिंदु और उस दौर की अनेक पत्रिकाओं के लिए साहित्य शास्त्र तथा साहित्य के अन्य प्रासंगिक विषयों पर लिखे प्रसिद्ध अंग्रेजी निबंधों का अनुवाद भी किया। इस खंड में नंद बाबू द्वारा अनुवादित दो सम्पूर्ण कृतियाँ भी पढ़ी जा सकती हैं। ए. अप्पादुराई की एक अत्यन्त विचारोत्तेजक और महत्त्वपूर्ण किताब को उन्होंने अंग्रेजी से हिन्दी में अनुवाद के लिए चुना। लगभग सवा दो सौ पृष्ठों की इस किताब का नाम था ‘भारतीय राजनीतिक चिन्तन’ जिसका अनुवाद नंद बाबू ने रघुवर दयाल के साथ मिलकर किया। 1990 में आई इस पुस्तक की गम्भीर सामग्री को जिस सहज और प्रभावी हिन्दी में नंद बाबू ने अनुवादित किया वह उनकी अद्भुत भाषिक क्षमता का उदाहरण है। दूसरी पुस्तक ‘दहेज पीड़ित महिलाएँ : एक अध्ययन’ लेखिका रंजना कुमारी की है जो भारत में महिला आन्दोलन में अग्रणी रही हैं। मुजफ्फरपुर, बिहार से 1991 में छपी इस छोटी-सी किताब में उस दौर की दहेज समस्या का गम्भीरता से अध्ययन किया गया था। ये दोनों पुस्तकें हिन्दी अनुवाद के बाद और चर्चित हो गईं। अपने जीवन के उत्तरार्ध में भी वे अनुवाद करते रहे। कभी कला प्रयोजन के सम्पादक हेमन्त शेष के आग्रह पर तो कभी और किसी पत्रिका के कहने पर। असल बात यही है कि साहित्य में जिस जीवन दृष्टि के लिए नंद बाबू संकल्पवान थे उसे बनाए रखने और गति देने के लिए अनुवाद भी एक जरूरी रास्ता लगता था।
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