Dharma and Communalism
(0)
Author:
Narendra MohanPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
EnglishCategory:
Academics-and-references₹
500
400 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
Selfishness and arrogance have become so inextricably associated with distortion and misconception of religion that the ordinary person is forgetting the real concept of religion has started accepting divided consciousness as the true form. Many of the different religions that have emerged from divided and self- oriented consciousness are flourishing only because of their ego, selfishness and aggressiveness. This very aggressiveness adopted under the cover of religion is ‘Communalism’. This aggressiveness was adopted sometimes for political reasons, sometimes for economic reasons and sometimes for social reasons. Today, the situation has deteriorated to the extent that the money power, wiles and muscle power are being used openly by different groups to impose their own so-called religious philosophies, that too in the name of civilisation and culture. The goal of religion is to eliminate discriminatory misconceptions and ignorance. But the reality is that this elimination has to be done through cognition at the individual level itself. From this point of view, the existence of the power of duality cannot be denied. Just as the existence of wave in the ocean cannot be denied, the existence of the wave of duality in the ocean of the Supreme Consciousness will have to be accepted; but keeping in mind that the real existence is not that of the wave but of the ocean.
Read moreAbout the Book
Selfishness and arrogance have become so inextricably associated with distortion and misconception of religion that the ordinary person is forgetting the real concept of religion has started accepting divided consciousness as the true form. Many of the different religions that have emerged from divided and self- oriented consciousness are flourishing only because of their ego, selfishness and aggressiveness. This very aggressiveness adopted under the cover of religion is ‘Communalism’. This aggressiveness was adopted sometimes for political reasons, sometimes for economic reasons and sometimes for social reasons. Today, the situation has deteriorated to the extent that the money power, wiles and muscle power are being used openly by different groups to impose their own so-called religious philosophies, that too in the name of civilisation and culture. The goal of religion is to eliminate discriminatory misconceptions and ignorance. But the reality is that this elimination has to be done through cognition at the individual level itself. From this point of view, the existence of the power of duality cannot be denied. Just as the existence of wave in the ocean cannot be denied, the existence of the wave of duality in the ocean of the Supreme Consciousness will have to be accepted; but keeping in mind that the real existence is not that of the wave but of the ocean.
Book Details
-
ISBN9789390366569
-
Pages192
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Jharkhand Lok Seva Ayog Prarambhik Pariksha Samanya Adhyayan Shrinkhala Jharkhand Samanya Gyan Evam Anya Vividh Tathaya
- Author Name:
Rahul Pradhan
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Ganit Se Kar Lo Dosti
- Author Name:
Rajesh Kumar Thakur
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Ahinsa Ki Sanskriti : Aadhar Aur Aayam
- Author Name:
Nandkishore Acharya
- Book Type:

- Description: ''हम भयावह रूप से हिंसक समय में रह रहे हैं। हिंसा, हत्या, आतंक, मारपीट, असहिष्णुता, घृणा आदि भीषण दुर्भाग्य से एक नई नागरिक शैली ही बन गए हैं। असहमति की जगह समाज और सार्वजनिक संवाद में तेज़ी से सिकुड़ रही है। हमारे युग में अहिंसा के सबसे बड़े सार्वजनिक प्रयोक्ता महात्मा गाँधी का 150वाँ वर्ष हमने हाल ही में मनाया है। रज़ा निजी रूप से गाँधी जी से बहुत प्रभावित थे। ‘रज़ा पुस्तक माला’ के अन्तर्गत हम गाँधी-दृष्टि, जीवन और विचार से सम्बन्धित सामग्री नियमित रूप से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। नन्दकिशोर आचार्य ने एक बौद्धिक के रूप में अहिंसा पर लम्बे अरसे से बहुत महत्त्वपूर्ण काम किया है। एक ऐसे दौर में जब भारत में क्षुद्र वीरता और नीच हिंसा को अहिंसा से बेहतर बताया जा रहा है और संस्कृति के नाम पर अनेक कदाचार रोज़ हो रहे हैं, अहिंसा की संस्कृति को समझने और उस पर इसरार करने का विशेष महत्त्व है।’’ —अशोक वाजपेयी
Devi-Devtaon Ki Alaukik Ghatanayen
- Author Name:
Prof. Ram Gopal Gupt
- Book Type:

- Description: समाज उसी व्यक्ति को महान् मानता है, जो अपने कार्य व ध्येय में सफलता प्राप्त कर ले | असफल व्यक्ति कितना भी ग़ुणवान व सक्षम क्यों न हो, वह न तो महान् माना जाएणा और न उसके बाद उसके साथ कोई अलौकिक व चामत्कारिक घटनाएँ ही जुड़ेंगी | सफल विभूतियों के जीवनकाल में जो महत्त्वपूर्ण घटनाएँ घटी थीं, वे निश्चय ही विशेष या अत्यधिक कठिन तो अवश्य थीं, परंतु असंभव नहीं थीं, बल्कि पूर्णतया विज्ञान-सम्मत एवं तर्क-सम्मत थीं | सूक्ष्म दृष्टि से परीक्षण करने पर उनका सराहनीय लौकिक रूप समझ में आने लगता है | इस पुस्तक में दिए हुए तर्कसंगत मत पूर्णतया लेखक की अपनी कल्पना पर आधारित हैं, जिनमें अलौकिकता न होकर वास्तविकता का दिग्दर्शन मात्र ही है | यह पुस्तक हमारी श्रद्धा और आस्था के केंद्र देवी-देवताओं के अनुकरणीय, वंदनीय एवं पूजनीय जीवन के ऐसे दृष्टांत बताती है, जिन्हें पढ़कर उनके प्रति सम्मान और आदरभाव बढ़ जाता है| भक्ति, समर्पण और श्रद्धा जाग्रत् कर जीवन में संतोष व सार्थकता देनेवाली एक अनुपम कृति।.
Kavirajamarga and the kannada world
- Author Name:
K V Subbanna +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: Kavirajamarga was formative in the literary growth of Kannada and is a guide book to the Kannada grammar that existed in that period. It laid the "royal path" for guiding many aspiring writers.
UP PRATHAMIK VID. SAHAYAK ADH. BHARTI PARIKSH-NEW
- Author Name:
Shashi Bhushan Verma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Virus Se Vaccine Tak
- Author Name:
Aditya Shrivastava
- Book Type:

- Description: कोरोना के साथ बीते शुरुआती एक साल की यादें, सबक़, सब याद रखा जाना चाहिए। इसलिए मेरे प्रिय अनुज, सहयोगी आदित्य की किताब ‘वायरस से वैक्सीन तक' की उपयोगिता आज तो है ही, पर जैसे-जैसे साल बीतेंगे इसकी उपयोगिता और बढ़ती जाएगी। -अशोक श्रीवास्तव, वरिष्ठ टीवी पत्रकार एवं लेखक ये किताब न सिर्फ़ कोरोनाकाल को देखने वाले बल्कि आने वाली पीढ़ी को उस दौर को जानने और समझने का सबसे सशक्त दस्तावेज़ है। पुस्तक में जिस संवेदना के साथ घटनाओं का वर्णन किया गया है वो पाठकों को उद्दवेलित करेगा, हमें स्वार्थी होने से रोकेगा। -सईद अंसारी, जाने-माने टीवी न्यूज़ एंकर कोरोना के आने से लेकर कोरोना के पैर पसारने और फिर वैक्सीनेशन तक के सारे कभी न भुलाये जाने वाले अनुभवों को पत्रकार और लेखक आदित्य ने हम सबके लिए सरल भाषा में संजोया है, इस समझाइश के साथ की इतिहास भूलने की नहीं सबक़ लेने की चीज़ है। -डॉ ब्रजेश राजपूत, वरिष्ठ टीवी पत्रकार एवं लेखक लेखक आदित्य श्रीवास्तव की तीसरी किताब है "वायरस से वैक्सीन तक"... पेशे से टीवी पत्रकार आदित्य श्रीवास्तव की ये तीसरी किताब साहित्य की ‘रिपोर्ताज’ विधा में प्रकाशित हुई है। आदित्य श्रीवास्तव ने इससे पहले जहाँ युवा पीढ़ी के जीवन के अंदर झाँककर उसके अंदर चलने वाले द्वंद्व को अपने एक उपन्यास 'द्वंद्व कहाँ तक पाला जाए' में लिखा तो वहीं एक कविता संग्रह 'तुम ही मैं हूँ' में हर व्यक्ति के अंदर के दूसरे और अदृश्य चेहरे को पाठकों के बीच रखा है। एक संवेदनशील पत्रकार होने की वजह से आदित्य के लेखन में मानव जीवन की संवेदनाएं बहुत सरल भाषा में महसूस की जा सकती हैं
Bharat Ka Sangharsh: 1920-42 (Hindi Translation of The Indian Struggle)
- Author Name:
Subhash Chandra Bose
- Book Type:

- Description: 1857 की क्रांति के बाद गोरों को समझ आ गया कि वे केवल बर्बर बल प्रयोग के आधार पर लंबे समय तक भारत में नहीं टिक पाएँगे, इसलिए उन्होंने देश को निहत्था करना शुरू कर दिया। हमारे पूर्वजों की दूसरी सबसे बड़ी मूर्खता और गलती यह रही कि उन्होंने अंग्रेजों की इस करतूत को सिर झुकाकर स्वीकार कर लिया। अगर उन्होंने अपने हथियार इतनी आसानी से नहीं सौंपे होते तो 1857 के बाद से भारत का इतिहास संभवत: आज के इतिहास से भिन्न होता। भारत में युवा पीढ़ी पिछले 20 सालों के अनुभव से यह सीख चुकी है कि सविनय अवज्ञा आंदोलन एक विदेशी प्रशासन को बंधक बना सकता है या पंगु तो कर सकता है, लेकिन बिना भौतिक बल के यह उसे उखाड़कर नहीं फेंक सकता या निष्कासित नहीं कर सकता। एक अंतिम चरण आएगा, जब सक्रिय प्रतिरोध सशस्त्र क्रांति में विकसित हो जाएगा, तब भारत में ब्रिटिश शासन का अंत होगा। —इसी पुस्तक से यह पुस्तक नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा स्वतंत्रता संग्राम का एक प्रमुख राजनीतिक अध्ययन है, जिसमें उनकी स्वयं अपनी एक प्रमुख भूमिका थी। यह पुस्तक असहयोग और खिलाफत आंदोलनों के घुमड़ते बादलों से लेकर तूफान का रूप लेनेवाले 'भारत छोड़ो' तथा आजाद हिंद आंदोलनों तक का विशद और विश्लेषणात्मक विमर्श उपलब्ध कराती है। नेताजी की दूरदर्शिता, चिंतन और राष्ट्रीय भाव को रेखांकित करती एक पठनीय कृति।
Vimarsh-Akaal Me Utsav
- Author Name:
Sudha Om Dhingra
- Book Type:

- Description: ‘‘इस साल उपन्यासों में केवल एक किताब उल्लेखनीय है -पंकज सुबीर का उपन्यास ‘अकाल में उत्सव’। यह गाँव और किसान जीवन के दुख-दर्द कहने वाली रचना है। इस उपन्यास को पढ़कर कहा जा सकता है कि किसान जीवन में आजकल सुख कम और दुख ज़्यादा है। इस उपन्यास में एक किसान की आत्महत्या भी है। शासन-प्रशासन द्वारा उस किसान को पागल घोषित कर अपनी ज़िम्मेदारी से बचने की कोशिश की जाती है।’’ -डॉ. मैनेजर पांडेय (शीर्ष आलोचक) ‘जनसत्ता’ समाचार पत्र में ‘साहित्य इस बरस’ चर्चा के अंतर्गत वर्ष 2016 की महत्त्वपूर्ण पुस्तकों की चर्चा करते हुए।
Saral Nibandh
- Author Name:
Shyam Chandra Kapoor
- Book Type:

- Description: निबंध लिखते हुए संकोच, भय और लज्जा त्याग देनी चाहिए। झिझकने तथा डरने से निबंध अच्छा नहीं बन पड़ता। निबंध-लेखक से यह आशा कोई नहीं करता कि वह जिस विषय पर निबंध लिख रहा है, उसके विषय में वह संपूर्ण तथ्यों को जानता ही हो। उससे तो केवल इतनी ही अपेक्षा की जाती है कि वह प्रस्तुत विषय के बारे में जो कुछ भी जानता है, उसे बिना छिपाये, संक्षेप में और सरलता से प्रकट कर दे। निबंध तो वास्तव में शुद्ध हृदय की विचार-तरंग ही है।
32000 Saal Pahale
- Author Name:
Ratneshwar Kumar Singh
- Book Type:

- Description: हाल के दिनों में गल्फ ऑफ खंभात (गुजरात) की गहराइयों में बत्तीस हजार साल पुराने हिमयुग में नगर होने के साक्ष्य मिले हैं। संसार में अबतक मिली नगरीय सभ्यताओं में यह सबसे पुराना नगर होने का अनुमान है। वैज्ञानिकों-पुरातत्त्ववेत्ताओं के नवीन शोध और खोज को केंद्र में रखकर महायुग उपन्यास-त्रयी लिखा गया है। '32000 साल पहले तीन उपन्यासों की शृंखला का पहला उपन्यास है। उन दिनों संसार में सांस्कृतिक विकास के साथ कई नवीन प्रयोग हुए। संसार में पहली बार देह ढकने से लेकर, तेल का दीया जलाने, दूध का सेवन करने, बाँसुरी बजाने, नृत्य करने, गीत गाने, कथा वाचन आदि शुरू हुए। इन्हीं लोगों ने पहली बार नौका, हिमवाहन और चक्के के साथ विविध अस्त्रों का निर्माण किया। पहली बार मनुष्य के ओठों ने खाने और बोलने के आलावा प्रेम करना सीखा। खुले सेक्स की अवधारणा के साथ पहले परिवार की परिकल्पना भी शुरू हुई। कुछ अज्ञात-प्राकृतिक संघर्ष के कारण वहाँ प्रार्थना की शुरुआत हुई। परग्रहियों ने होमो सेपियंस के डी.एन.ए. का पुनर्लेखन किया। कुछ वैज्ञानिकों और पुरातत्त्ववेत्ताओं ने समुद्र की गहराइयों से जीरो पॉइंट फील्ड में संरक्षित ध्वनियों को संगृहीत कर उसे फिल्टर किया। कड़ी मेहनत के बाद उनकी भाषा को डिकोड किया गया और उसे इंडस अल्ट्रा कंप्यूटर पर चित्रित किया गया। उनकी आवाजों से ही बत्तीस हजार साल पहले की पूरी कहानी सामने आई।
MAHARANA Sahastr varsho ka Dharmayuddh
- Author Name:
Dr. Omendra Ratnu
- Book Type:

- Description: इस क्षणभंगुर अस्तित्व में यदि कोई तत्त्व स्थायी हैं तो वे हैं आत्मसम्मान तथा स्वतंत्रता। ये तत्त्व, बहुत मूल्य चुका कर प्राप्त होते हैं। मेवाड़ के महान सिसोदिया राजवंश ने अपने सुख, संपत्ति व जीवन का मूल्य चुकाकर ये तत्त्व हिंदू समाज को सहजता से दे दिए। एक सहस्त्र वर्षो तक अरावली में यायावरों का सा जीवन जीने वाले मेवाड़ के इन अवतारी पुरुषों के कारण ही भारत में आज केसरिया लहराता है। यह पुस्तक उन महापुरुषों के प्रति हिंदू समाज की कृतज्ञता व्यक्त करने का एक प्रयास है। लेखक ने निष्पक्ष प्रामाणिकता से भारत के इतिहास के साथ हुए व्यभिचार को उजागर किया है । यह पुस्तक स्थापित भ्रांतियों को भंग करने के अतिरिक्त नई मान्यताओं को भी स्थापित करती है। भारतीय उपमहाद्वीप में गत चौदह शताब्दियों से चले आ रहे हिंदू-मुस्लिम संघर्ष को यह पुस्तक उसकी भयानक नग्नता में प्रकट करती है। हत्यारे व बलात्कारी आक्रांताओं के समूह से हिंदू धर्म को बचाकर लानेवाले इन देवपुरुषों के इतिहास को किस निर्लज्जता व निकृष्टता से पोंछ डाला गया है, यह इस पुस्तक का आधार है। सत्य कोई अवधारणा नहीं, बल्कि जीवन का मूल स्रोत है । जो समाज असत्य में जिएगा, वह बच नहीं सकता। जो समाज सत्य धारण करेगा, वह शाश्वत अमरत्व को प्राप्त होगा। मेवाड़ के महान् पुरखे तो सत्य में जीकर इहलोक व परलोक में परमगति पा गए। क्या आज के हिंदू समाज में इतना आत्मबल है कि सत्य के लिए लड़ सके, जी सके, मर सके! इन प्रश्नों के उत्तर ही निश्चित करेंगे कि हिंदू समाज सफलता के शिखर को छुएगा या अब्राह्मिक मतों की दासता भोगता हुआ मिट जाएगा।
Hindi Gadya Vinyas Aur Vikas
- Author Name:
Ramswaroop Chaturvedi
- Book Type:

- Description: Hindi Gadya Vinyas Aur Vikas
Shabdeshwari
- Author Name:
Kusum Kumar +1
- Book Type:

-
Description:
दर्शन और चिंतन के क्षेत्र में भारत ने, विशेषकर सनातन धर्म ने, विश्व को एक विशद शब्दावली दी है। अमूर्त धारणाओं के मनन के लिए मूर्त प्रतीक और शब्द दिए है। उस दार्शनिक शब्दावली और बिंब विधान की बराबरी संसार की कोई अन्य संस्कृति शायद ही कर पाए...देवीदेवताओं के अनेक नाम अमूर्त धारणाओं के प्रतीक हैं। कई बार इन नामों में छिपा होता है एक पूरा दार्शनिक, सांस्कृतिक और सामाजिक, राजनीतिक इतिहास। कई बार इन में आयुर्वेद, ज्योतिष, गणित, व्याकरण और पिंगल शास्त्रों के प्रतिबिंब मिलते हैं। इन में होती हैं जन साधारण की आकांक्षाएँ, भावनाएँ, मान्यताएँ, विश्वज्ञान की उन की समझ...सूर्य, कुंती, कर्ण और व्यास के नामों में कोई ज्यामितीय संदर्भ है या धूपघड़ी का प्रतीक? अनजुती भूमि की प्रतीक अहल्या का उद्धार और जुती भूमि की प्रतीक सीता का स्वयंवर एक ही सिक्के के दो पहलू हैं क्या?
पौराणिक नामों के आग्रहहीन भाषाशास्त्रीय अध्ययन से हम बहुत कुछ जान सकते हैं।
हमारे सांस्कृतिक इतिहास के अध्ययन में नामों के भाषाशास्त्रीय अध्ययन को नणण्य स्थान मिलता रहा है। इस का एक कारण है ऐसे नामों के आधुनिक संकलनों का अभाव। शब्देश्वरी के द्वारा अरविंद कुमार दंपती ने इस कमी को दूर करने का प्रयास किया है।
एक ओर यह संकलन साधारण विश्वासी जन, पंडितों और पुजारियों के लिए रोचक होगा, तो दूसरी ओर सांस्कृतिक शोध में लगे विद्वान भी इसे उपयोगी पाएँगे...
Aadhunik Hindi Proyog Kosh
- Author Name:
Badrinath Kapoor
- Book Type:

-
Description:
भाषा शब्दों से बनती है। शब्दों के बारे में जानकारी व्याकरण देता है और उनके अर्थों का विवरण कोश प्रस्तुत करता है। इस प्रकार भाषा को जानने-समझने के लिए व्याकरण और कोश दो आधार माने जाते हैं। लेकिन भाषा का एक तीसरा महत्त्वपूर्ण आधार भी है—प्रयोग।
भाषा के स्वाभाविक विकास की प्रक्रिया में नए-नए सन्दर्भों के अनुरूप नए-नए प्रयोग चलते रहते हैं। प्रयोगों से भाषा की प्रभावकता और क्षमता में वृद्धि होती है। इनकी महत्ता इस तथ्य में निहित है कि बहुधा ये व्याकरण और कोश को पीछे छोड़ जाते हैं।
प्रयोगों के फलस्वरूप ही नए-नए पदबन्ध और मुहावरे अस्तित्व में आते हैं। लेखक की लेखनी और वक्ता की वाणी को उनसे ऊर्जा मिलती है। उनके अर्थ अक्सर आप सामान्य कोशों में ढूँढ़ नहीं पाते, व्याकरण से वे सिद्ध नहीं होते, फिर भी वे मान्य और अपरिहार्य होते हैं। एक प्रामाणिक प्रयोग कोश की अनिवार्यता ऐसी ही स्थिति में सामने आती है। यह ‘आधुनिक हिन्दी प्रयोग कोश’ इसी अभाव की पूर्ति की दिशा में पहला सार्थक प्रयास है।
सुप्रसिद्ध कोशकार डॉ. बदरीनाथ कपूर द्वारा प्रस्तुत ‘आधुनिक हिन्दी प्रयोग कोश’ उनकी दीर्घकालीन श्रम-साधना का सुफल है। इसमें ऐसे तमाम प्रयोगों के बारे में उदाहरणसहित जानकारी दी गई है जो हिन्दी में प्रचलित और मान्य हैं। आधुनिक प्रयोग इसमें ऐसे हैं जो अभी तक अन्य कोशों में अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करा पाए हैं।
‘आधुनिक हिन्दी प्रयोग कोश’ में इस बात का पूरा ध्यान रखा गया है कि यह समान रूप से भाषा के प्रति जागरूक पाठकों, लेखकों, पत्रकारों, शिक्षकों और छात्रों के लिए उपयोगी सिद्ध हो।
Operation Khukri
- Author Name:
Major General Rajpal Punia +1
- Book Type:

- Description: This book doesn’t have description
O Ri Gauraiya
- Author Name:
Sanjay Kumar
- Book Type:

- Description: कहाँ चली गई चुनमुन गौरैया, जो हमारी नानी-दादी की कहानी में चीना सोंवा की बाल टूँगकर खाती थी? भूरी, पीली, धूसर—कई रंगोंवाली छोटी चिडिय़ा। घरों में अपने घोंसले बनानेवाली, काँस के झाड़ में, बाँध, सड़क के किनारेवाले बबूल और कठजिलेबी के पेड़ में डबल स्टोरी घोंसला बनानेवाली दर्जिन गौरैया कहाँ गई? क्या हमारी क्षुधा ने सबको उदरस्थ कर लिया? प्रचंड गरमी, बेहद ठंड ने उसकी जान ले ली? पर्यावरण के असंतुलन ने गला घोंट दिया या खेतों, पौधों पर छिड़के जाने कीटनाशकों ने नष्ट कर दिया? इतने कुछ कारण तो हैं ही, कुछ और भी हो सकते हैं। वह चंचल भोली चिडिय़ा हमारे जीवन से गायब होने लग गई। बाग-बगीचे कटकर, खेत नष्ट कर बिल्डिंगें बन गईं, कहाँ रहेगी गरीब चिडिय़ा? लेकिन संवेदनशील लोगों की टीम ने मिलकर इसे पुन: अपने जीवन में लौटाने के लिए प्रयास किया। —पद्मश्री उषाकिरण खान प्रख्यात लेखिका
History of Indian English Literature
- Author Name:
M.K. Naik
- Rating:
- Book Type:

- Description: Indian English literature began as an interesting by-product of an eventful encounter in the late eighteenth cntury between a vigorous and enterprising Britain and a stagnant and chaotic India, and is now nealy twi hundred years old. It is literature written originally in English by authors Indian by birth, ancestry or nationality. It is no part of English literature any more than American literature or Australian lterature can be said to be branch of British literature. It is legitimatly a part of Indian literature, since its differntia is the expression in it of an Indian ethos.
UP TGT Vigyan 15 Practice Sets in Hindi Uttar Pradesh Madhyamik Shiksha Sewa Chayan Board (UPSESSB TGT Science Practice Book in Hindi)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Prathmik Chikitsa Aur Swasthya
- Author Name:
Puneet Bisaria +2
- Book Type:

- Description: प्रत्येक व्यक्ति कभी-न-कभी बीमार अवश्य पड़ता है, अथवा उसके सगे-संबंधी, मित्र आदि अवश्य बीमार पड़ते हैं, अथवा दुर्घटना के शिकार हो सकते हैं। ऐसे में कई बार तत्काल प्राथमिक चिकित्सा की आवश्यकता होती है, जिसके विषय में समुचित जानकारी के अभाव में रोगी के लिए परिस्थितियाँ भयावह हो सकती हैं, किंतु समुचित प्राथमिक चिकित्सा का ज्ञान होने पर किसी व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा स्नातक के द्वितीय सेमेस्टर के सभी विद्यार्थियों के लिए प्राथमिक चिकित्सा का पाठ्यक्रम अनिवार्य किया गया है। तदनुरूप यह पाठ्य पुस्तक 'प्राथमिक चिकित्सा और स्वास्थ्य' स्वास्थ्य के सभी पक्षों को सरल एवं सुबोध ढंग से विद्यार्थियों के समक्ष रखने का एक विनम्र प्रयास है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book