Asha (Hindi)
Author:
Shri Bhuvendra TyagiPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Academics-and-references0 Ratings
Price: ₹ 160
₹
200
Available
जब हर तरफ दहशत हो, मायूसी हो, लाचारी हो, तो नाउम्मीदी के अँधेरे चारों ओर उग ही आते हैं। तब जरूरत होती है नई आशा की, जो इन अँधेरों को दूर करके मनोबल बढ़ाए और हालात से जूझने का जज्बा दिलाए।
‘आशा’ संग्रह की कविताएँ इसी रोशनी और संबल के प्रसार के लिए हैं। अंग्रेजी के 46 कवियों की 51 कविताओं के अनुवाद का यह कविता संग्रह कोरोना-काल ही नहीं, तमाम विषम परिस्थितियों में एक सच्चे दोस्त और शुभचिंतक की तरह हौसला बनाए रखने की ताकत देनेवाला है।
माया एंजेलो की कालजयी कविता ‘फिर भी उठूँगी मैं’, रुडयार्ड किपलिंग की ‘अगर’, कैटी ए. ब्राउन की ‘खुद से हार कभी मत मानो’, जॉयस अलकांतारा की ‘देखोगे नहीं मुझे कभी हारते’, हेनरी वर्ड्सवर्थ लॉन्गफेलो की ‘जीवन-मंत्र’, लैंग्स्टन ह्यूजेस की ‘अब भी जंग में डटा हुआ हूँ’, थॉमस हार्डी की ‘आशा का गीत’, मैक्स एरमन की बहुचर्चित कविता ‘मनोकामनाएँ’ (डेसिडराटा) और बर्टन ब्रैली की ‘चाह जीत की’ जैसी ओजस्वी कविताएँ किसी के भी मन से निराशा दूर करके आशा जगाने और किसी भी निरुत्साही को उत्साह और उमंग से भरकर जीवन को सुंदर बनाने में सक्षम हैं।
ये आशा जाग्रत् करने के लिए सहज, सरल, शाश्वत, सार्वभौमिक और सर्वकालीन कविताएँ हैं।
ISBN: 9789393111401
Pages: 104
Avg Reading Time: 3 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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बाबू के इन निबन्धों में प्रवाह और ताजगी तो है ही भाषा की सुन्दर छवियाँ भी हैं। मनुष्य की मुक्ति उनकी चिन्ताओं का सबसे बड़ा केन्द्र है और उसके लिए वे समता को आवश्यक शर्त मानते हैं। गैर-बराबरी से अधिक मनुष्य विरोधी उन्हें शायद कुछ नहीं लगता और इस विषय पर वे अनेक बार लिखते हैं। नंद बाबू ने ‘धर्मयुग’ जैसी पत्रिका के लिए लिखा तो लघु पत्रिकाओं और लघु समाचार-पत्रों के लिए भी लिखा। उनके इस गद्य लेखन में जहाँ काव्य की सौन्दर्यपक्षीय चिन्ताएँ हैं वहीं काव्य के उपयोगपक्ष की वस्तुनिष्ठ चिन्ताओं पर भी लगातार जिरह भी। कवि का यह गद्य उनके काव्य संसार को बेहतर ढंग से समझने का रास्ता देता है, मनुष्यता के रास्तों का संधान करता है तो इसे पढ़ना प्रसन्न गद्य को पढ़ना भी है। ‘रचनावली’ के तीसरे खंड में नंद चतुर्वेदी के कथेतर लेखन को सहेजा गया है जिसमें संस्मरण, डायरी, पत्रों के साथ व्याख्यान और साक्षात्कार भी हैं। वे इस गद्य लेखन में अपने समय और समाज की छोटी बड़ी तमाम व्याधियों पर नज़र दौड़ाते हैं और राजनीति व राजनेताओं के सम्बन्ध में भी दो-टूक लिखने में संकोच नहीं करते। एक लेखक के रूप में उन्होंने समाजवादी 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छायावाद हिन्दी कविता का एक समृद्ध कालखंड है। प्रसाद, निराला, पंत और महादेवी की इस दौर की कविताओं से प्रविष्टियाँ लेकर इस कोश का निर्माण किया गया है। शब्द और पदबंध के साथ काव्य-पंक्तियाँ दी गयी हैं ताकि छायावादी काव्य-प्रयोगों को व्यवस्थित रूप दिया जा सके। शब्द और पदबंध के प्रासंगिक अर्थ-निर्धारण का प्रयास किया गया है ताकि काव्यार्थ की दिशा को समझने में मदद मिल सके। प्रयुक्त शब्द और पदबंध से जुड़ी काव्य-पंक्तियों के सन्दर्भों को रचनावली/ग्रंथावली की पृष्ठ संख्या के साथ दर्शाया गया है। यह भी दर्ज किया गया है कि काव्य-पंक्ति किस कविता या पुस्तक से ली गयी है।
छायावाद शतायु को प्राप्त कर चुका है। इसकी काव्य-भाषा आकर्षक भी है और शास्त्रीय भी! बदलते दौर में इस काव्य-भाषा को समझने के लिए काव्य-कोश की आवश्यकता बढ़ती जाएगी। छायावादी काव्य के पाठकों, अध्यापकों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए ‘छायावादी काव्य-कोश’ मददगार होगा।
कोश का निर्माण वर्णानुक्रम से तो किया ही जाता है, इस कोश में काव्य-प्रयोगों को यथासंभव कालानुक्रम से भी रखने का प्रयास किया गया है। छायावादी कवियों के काव्य-प्रयोगों को तुलनात्मक रूप से समझने की प्रभूत सामग्री यह कोश प्रदान करता है।
इस कोश की भूमिका और परिशिष्ट में कई तरह की सूचियाँ दी गयी हैं जिनकी मदद से छायावाद को नये ढंग से समझने में मदद मिलेगी।
Manas Mein Nari
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Super Cracker Series NTA CUET (UG) Sanskrit (CUET Sanskrit in Hindi 2022)
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Team Prabhat
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