Arthshastra Paribhasha Kosh
(0)
Author:
Sudarshan Kumar KapoorPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Academics-and-references₹
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हिन्दी में अर्थशास्त्र की मानक शब्दावली को परिभाषित और व्याख्यायित करता अपने तरह का पहला कोश है—‘अर्थशास्त्र परिभाषा कोश’, जिसे गहन अध्ययन-मनन के पश्चात् ख्यात शिक्षाविद् सुदर्शन कुमार कपूर ने परिश्रमपूर्वक तैयार किया है।</p> <p>उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए तमाम सरकारी शैक्षिक संस्थानों द्वारा प्रकाशित पुस्तकों, सन्दर्भ ग्रन्थों और अन्य पठन सामग्रियों में वैज्ञानिक व तकनीकी शब्दावली आयोग द्वारा निर्मित हिन्दी शब्दावली के प्रयोग का निर्देश दिया गया है, जिससे सभी पुस्तकों में हिन्दी तकनीकी शब्दावली की एकरूपता सुनिश्चित की जा सके। लेखक ने उक्त सारी बातों का ध्यान कोश में रखा है।</p> <p>यह कोश विद्यालयीन, स्नातक, स्नातकोत्तर स्तर के लाखों छात्रों के लिए अत्यन्त उपयोगी है, जिनकी शिक्षा का माध्यम हिन्दी है। इस कोश में प्रवेशक अर्थशास्त्र, व्यष्टि अर्थशास्त्र, समष्टि अर्थशास्त्र और अर्थतंत्र से सम्बन्धित लगभग आठ सौ संकल्पनाओं की व्याख्या की गई है। तमाम तकनीकी शब्दावलियों के सार्थक प्रयोग बतानेवाली यह पुस्तक बरसों की रिक्तता की पूर्ति करती है।</p> <p>छात्रों, शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए अत्यन्त संग्रहणीय कोश।
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हिन्दी में अर्थशास्त्र की मानक शब्दावली को परिभाषित और व्याख्यायित करता अपने तरह का पहला कोश है—‘अर्थशास्त्र परिभाषा कोश’, जिसे गहन अध्ययन-मनन के पश्चात् ख्यात शिक्षाविद् सुदर्शन कुमार कपूर ने परिश्रमपूर्वक तैयार किया है।</p>
<p>उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए तमाम सरकारी शैक्षिक संस्थानों द्वारा प्रकाशित पुस्तकों, सन्दर्भ ग्रन्थों और अन्य पठन सामग्रियों में वैज्ञानिक व तकनीकी शब्दावली आयोग द्वारा निर्मित हिन्दी शब्दावली के प्रयोग का निर्देश दिया गया है, जिससे सभी पुस्तकों में हिन्दी तकनीकी शब्दावली की एकरूपता सुनिश्चित की जा सके। लेखक ने उक्त सारी बातों का ध्यान कोश में रखा है।</p>
<p>यह कोश विद्यालयीन, स्नातक, स्नातकोत्तर स्तर के लाखों छात्रों के लिए अत्यन्त उपयोगी है, जिनकी शिक्षा का माध्यम हिन्दी है। इस कोश में प्रवेशक अर्थशास्त्र, व्यष्टि अर्थशास्त्र, समष्टि अर्थशास्त्र और अर्थतंत्र से सम्बन्धित लगभग आठ सौ संकल्पनाओं की व्याख्या की गई है। तमाम तकनीकी शब्दावलियों के सार्थक प्रयोग बतानेवाली यह पुस्तक बरसों की रिक्तता की पूर्ति करती है।</p>
<p>छात्रों, शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए अत्यन्त संग्रहणीय कोश।
Book Details
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ISBN9788126714285
-
Pages212
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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