Aadhunik Hindi Proyog Kosh
About the book
भाषा शब्दों से बनती है। शब्दों के बारे में जानकारी व्याकरण देता है और उनके अर्थों का विवरण कोश प्रस्तुत करता है। इस प्रकार भाषा को जानने-समझने के लिए व्याकरण और कोश दो आधार माने जाते हैं। लेकिन भाषा का एक तीसरा महत्त्वपूर्ण आधार भी है—प्रयोग। भाषा के स्वाभाविक विकास की प्रक्रिया में नए-नए सन्दर्भों के अनुरूप नए-नए प्रयोग चलते रहते हैं। प्रयोगों से भाषा की प्रभावकता और क्षमता में वृद्धि होती है। इनकी महत्ता इस तथ्य में निहित है कि बहुधा ये व्याकरण और कोश को पीछे छोड़ जाते हैं। प्रयोगों के फलस्वरूप ही नए-नए पदबन्ध और मुहावरे अस्तित्व में आते हैं। लेखक की लेखनी और वक्ता की वाणी को उनसे ऊर्जा मिलती है। उनके अर्थ अक्सर आप सामान्य कोशों में ढूँढ़ नहीं पाते, व्याकरण से वे सिद्ध नहीं होते, फिर भी वे मान्य और अपरिहार्य होते हैं। एक प्रामाणिक प्रयोग कोश की अनिवार्यता ऐसी ही स्थिति में सामने आती है। यह ‘आधुनिक हिन्दी प्रयोग कोश’ इसी अभाव की पूर्ति की दिशा में पहला सार्थक प्रयास है। सुप्रसिद्ध कोशकार डॉ. बदरीनाथ कपूर द्वारा प्रस्तुत ‘आधुनिक हिन्दी प्रयोग कोश’ उनकी दीर्घकालीन श्रम-साधना का सुफल है। इसमें ऐसे तमाम प्रयोगों के बारे में उदाहरणसहित जानकारी दी गई है जो हिन्दी में प्रचलित और मान्य हैं। आधुनिक प्रयोग इसमें ऐसे हैं जो अभी तक अन्य कोशों में अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करा पाए हैं। ‘आधुनिक हिन्दी प्रयोग कोश’ में इस बात का पूरा ध्यान रखा गया है कि यह समान रूप से भाषा के प्रति जागरूक पाठकों, लेखकों, पत्रकारों, शिक्षकों और छात्रों के लिए उपयोगी सिद्ध हो।
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About the Book
भाषा शब्दों से बनती है। शब्दों के बारे में जानकारी व्याकरण देता है और उनके अर्थों का विवरण कोश प्रस्तुत करता है। इस प्रकार भाषा को जानने-समझने के लिए व्याकरण और कोश दो आधार माने जाते हैं। लेकिन भाषा का एक तीसरा महत्त्वपूर्ण आधार भी है—प्रयोग।
भाषा के स्वाभाविक विकास की प्रक्रिया में नए-नए सन्दर्भों के अनुरूप नए-नए प्रयोग चलते रहते हैं। प्रयोगों से भाषा की प्रभावकता और क्षमता में वृद्धि होती है। इनकी महत्ता इस तथ्य में निहित है कि बहुधा ये व्याकरण और कोश को पीछे छोड़ जाते हैं।
प्रयोगों के फलस्वरूप ही नए-नए पदबन्ध और मुहावरे अस्तित्व में आते हैं। लेखक की लेखनी और वक्ता की वाणी को उनसे ऊर्जा मिलती है। उनके अर्थ अक्सर आप सामान्य कोशों में ढूँढ़ नहीं पाते, व्याकरण से वे सिद्ध नहीं होते, फिर भी वे मान्य और अपरिहार्य होते हैं। एक प्रामाणिक प्रयोग कोश की अनिवार्यता ऐसी ही स्थिति में सामने आती है। यह ‘आधुनिक हिन्दी प्रयोग कोश’ इसी अभाव की पूर्ति की दिशा में पहला सार्थक प्रयास है।
सुप्रसिद्ध कोशकार डॉ. बदरीनाथ कपूर द्वारा प्रस्तुत ‘आधुनिक हिन्दी प्रयोग कोश’ उनकी दीर्घकालीन श्रम-साधना का सुफल है। इसमें ऐसे तमाम प्रयोगों के बारे में उदाहरणसहित जानकारी दी गई है जो हिन्दी में प्रचलित और मान्य हैं। आधुनिक प्रयोग इसमें ऐसे हैं जो अभी तक अन्य कोशों में अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करा पाए हैं।
‘आधुनिक हिन्दी प्रयोग कोश’ में इस बात का पूरा ध्यान रखा गया है कि यह समान रूप से भाषा के प्रति जागरूक पाठकों, लेखकों, पत्रकारों, शिक्षकों और छात्रों के लिए उपयोगी सिद्ध हो।
Book details
- Format
- Hardbound
- Publisher
- Rajkamal Prakashan Samuh
- Edition
- 3rd
- Publication year
- 1977
- Weight
- 290 grams
- ISBN-13
- 9788171192649
- Pages
- 26
- Reading time
- ~1 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Language
- Hindi
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