Jhatpat English Seekhen
(0)
Author:
S. Bhushan, S.P. UpadhyayPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Academics-and-references₹
400
₹ 320 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
आज English ग्लोबल संपर्क भाषा बन चुकी है। अदालतों, दफ्तरों, अस्पतालों इत्यादि सब जगह संवाद का माध्यम English ही है। पत्र-व्यवहार, कार्यालयों इत्यादि में अधिकतर काम English भाषा में ही किए जाते हैं। बड़े-बड़े अंतरराष्ट्रीय कार्यालयों में तो संवाद का एकमात्र माध्यम English ही है। इसलिए आज जीवन के हर क्षेत्र में अच्छी English बोलना सफलता की गारंटी माना जाता है। चाहे आप Student हों, मैनेजर हों, क्चक्कहृ में काम करते हों या Businessman हों—हर जगह आप कितने आत्मविश्वास के साथ श्वठ्ठद्दद्यद्बह्यद्ध बोल सकते हैं, वही आपकी सफलता के लिए एक महत्त्वपूर्ण कारक है। यही नहीं, अच्छी English बोलना सीखकर आप कॉल सेंटर, टेलीमार्केटिंग में अच्छी नौकरी पा सकते हैं—भले ही आपके पास कोई तकनीकी ज्ञान न हो। अगर आपको आधुनिक परिवेश में स्वयं के लिए जगह बनानी है तो English का ज्ञान होना नितांत आवश्यक है। ‘झटपट English सीखें’ ऐसी पुस्तक है, जो बहुत आसानी से और बहुत जल्दी किसी को भी English बोलना, लिखना व पढ़ना सिखा सकती है। लेखक ने अपने 25 वर्षों के Teaching अनुभव और 7 वर्षों के अथक परिश्रम के बाद इस कोर्स को 60 दिन के रूशस्रह्वद्यद्ग के रूप में तैयार किया है। English रटने की भाषा नहीं है, यह तो समझकर अधिकारपूर्वक बोलने व लिखने की भाषा है। यह पुस्तक Step by Step शैली में तैयार की गई है। इसलिए इसके अध्ययन से आप झटपट श्वठ्ठद्दद्यद्बह्यद्ध सीखकर सफलता के शिखर को छू सकते हैं।
Read moreDon’t Miss Out
Pick a membership and see exactly what it gets you
- 15 Free Deliveries
- 1 Free Book up to ₹500 MRP
- 0% off every book, every time
Subscribed already? Continue to your
benefits Login
You pay ₹1,499/Year
You will be auto-charged ₹1,499 every year. Cancel auto-charge anytime.
Benefits with Rachnaye Connoisseur
1 Free Physical Book up to ₹500 MRP
Personal Recommendations
15 Free Deliveries Per Year
Format:
Piracy Free
Express Delivery
Secure Payment
About the Book
आज English ग्लोबल संपर्क भाषा बन चुकी है। अदालतों, दफ्तरों, अस्पतालों इत्यादि सब जगह संवाद का माध्यम English ही है। पत्र-व्यवहार, कार्यालयों इत्यादि में अधिकतर काम English भाषा में ही किए जाते हैं। बड़े-बड़े अंतरराष्ट्रीय कार्यालयों में तो संवाद का एकमात्र माध्यम English ही है। इसलिए आज जीवन के हर क्षेत्र में अच्छी English बोलना सफलता की गारंटी माना जाता है।
चाहे आप Student हों, मैनेजर हों, क्चक्कहृ में काम करते हों या Businessman हों—हर जगह आप कितने आत्मविश्वास के साथ श्वठ्ठद्दद्यद्बह्यद्ध बोल सकते हैं, वही आपकी सफलता के लिए एक महत्त्वपूर्ण कारक है। यही नहीं, अच्छी English बोलना सीखकर आप कॉल सेंटर, टेलीमार्केटिंग में अच्छी नौकरी पा सकते हैं—भले ही आपके पास कोई तकनीकी ज्ञान न हो। अगर आपको आधुनिक परिवेश में स्वयं के लिए जगह बनानी है तो English का ज्ञान होना नितांत आवश्यक है।
‘झटपट English सीखें’ ऐसी पुस्तक है, जो बहुत आसानी से और बहुत जल्दी किसी को भी English बोलना, लिखना व पढ़ना सिखा सकती है।
लेखक ने अपने 25 वर्षों के Teaching अनुभव और 7 वर्षों के अथक परिश्रम के बाद इस कोर्स को 60 दिन के रूशस्रह्वद्यद्ग के रूप में तैयार किया है। English रटने की भाषा नहीं है, यह तो समझकर अधिकारपूर्वक बोलने व लिखने की भाषा है। यह पुस्तक Step by Step शैली में तैयार की गई है। इसलिए इसके अध्ययन से आप झटपट श्वठ्ठद्दद्यद्बह्यद्ध सीखकर सफलता के शिखर को छू सकते हैं।
Book Details
-
ISBN9789350487600
-
Pages340
-
Avg Reading Time11 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
English Speaking Course
- Author Name:
Rajkumar Prasad
- Book Type:

Sharirik Shiksha Evam Khel Gyankosh
- Author Name:
Ved Prakash
- Book Type:

Sankhayaparak Shabd Kosh
- Author Name:
Shaligram Gupta
- Book Type:

- Description:
सम् उपसर्ग पूर्वक ख्या (प्रकथने) धातु से ‘संख्या’ शब्द बना है। ‘प्रकथन’ का अर्थ है ‘नाम निर्देश’ करना। गिनतियों में भावों के नाम होने के कारण इनको ‘संख्या’ शब्द से व्यक्त किया गया है। शास्त्र और लोक की व्यवहार परम्परा में संख्यावाचक शब्दों का प्रयोग विभिन्न स्तरों पर प्राचीन काल से होता रहा है। पालि त्रिपिटक के अन्तर्गत सुत्तों की जो विशेषताएँ कही गई हैं, उनमें से एक 'संख्यात्मक परिगणन प्रणाली' का प्रयोग भी है। संख्यात्मक वर्गीकरण के प्रयोग सांख्य और जैन दर्शन में विशेष दिखाई पड़ने के साथ वाल्मीकि रामायण, महाभारत एवं पौराणिक साहित्य में भी दिखते हैं जो प्रबुद्ध प्रतिभा और उर्वर कल्पना का संस्पर्श पाकर गूढ़ एवं रहस्यगर्भित संकेतों के द्योतक प्रतीकों के रूप में सार्थक हो उठे हैं। भारतीय धर्म साधना एवं साहित्य की विविध विधाओं में जिन अनेक गूढ़ार्थपरक संख्यावाचक शब्दों का प्रयोग हुआ है, उन सबका संचयन और विवेचन एवं मूल सन्दर्भ ग्रन्थों से आवश्यक उद्धरणांश देकर प्रस्तुत कोश को भरसक उपादेय बनाने के लिए एक से लेकर एक सौ आठ संख्या पर्यन्त प्राप्त हुए 4090 संख्या शब्दों का यहाँ विवेचन किया गया है। विश्वास है, प्रस्तुत मौलिक प्रयास सर्वोपयोगी सिद्ध होगा। प्रस्तुत कोश में संगृहीत लगभग पाँच हज़ार संख्यापरक शब्दों को तत्सम्बन्धी अस्सी संख्या शीर्षकों में अकारादि क्रम से विभाजित कर उपस्थित किया गया है जिससे किसी भी शब्द से सम्बन्धित आवश्यक जानकारी प्राप्त करने में कोई असुविधा न हो। उदाहरणार्थ यदि ‘तैंतीस देवता' शब्द देखना है तो कोश में ‘तैंतीस’ संख्या शीर्षक के अन्तर्गत ‘देवता तैंतीय' देखना होगा। इसी तरह यदि ‘एकादश रुद्र’ शब्द देखना है तो ‘ग्यारह’ संख्या शीर्षक के अन्तर्गत ‘रुद्र एकादश’ शब्द खोजना होगा। आदि-आदि।
Sex & You
- Author Name:
Prakash Kothari
- Book Type:

Sanskrit Vangmai Kosh : Granth Aur Granthakar Vol. 1-2
- Author Name:
Sridhar Bhaskar Varnekar
- Book Type:

- Description:
प्रस्तुत ‘संस्कृत वाङ्मय कोश’ में संस्कृत वाङ्मय की प्राय: सभी शाखाओं में योगदान करनेवाले ग्रन्थ एवं ग्रन्थकारों का एकत्र संकलन है। इस प्रकार का ‘सर्वंकष’ संस्कृत वाङ्मय कोश बनाने का प्रयास अभी तक कहीं नहीं हुआ। इस कोश के ग्रन्थकार खंड में केवल संस्कृत भाषा के ही ग्रन्थकारों का उल्लेख है। फिर भी हिन्दी, मराठी, बांग्ला, तमिल, तेलुगू इत्यादि प्रादेशिक भाषाओं के जिन प्रख्यात लेखकों ने संस्कृत में भी कुछ वाङ्मय सेवा की है, उनका भी उल्लेख यथावसर ग्रन्थकार खंड में हुआ है। प्रथम खंड में ग्रन्थकारों का और द्वितीय खंड में अन्यों का परिचय वर्णानुक्रम से ग्रथित है। किन्तु इस सामग्री के साथ और भी कुछ अत्यावश्यक सामग्री का चयन दोनों खंड़ों में किया गया है। प्रथम खंड के प्रारम्भिक विभाग के अन्तर्गत ‘संस्कृत वाङ्मय दर्शन’ का समावेश हुआ है। संस्कृत वाङ्मय के अन्तर्गत, सैकड़ों लेखकों ने जो मौलिक विचारधन विद्यारसिकों को समर्पित किया, उसका समेकित परिचय विषयानुक्रम से देना ही इस विभाग का उद्देश्य है। पुराण-इतिहास विषयक प्रकरण में अठारह पुराणों के साथ ‘रामायण’ और ‘महाभारत’ इन इतिहास-ग्रन्थों के अन्तरंग का एवं तद्विषयक कुछ विवादों का स्वरूप कथन दिया गया है। ‘महाभारत’ की सम्पूर्ण कथा पर्वानुक्रम से दी गई है। दार्शनिक वाङ्मय के विचारों का परिचय न्याय-वैशेषिक, सांख्य-योग, तंत्र और मीमांसा-वेदान्त विभागों के अनुसार दिया गया है। इसमें न्याय के अन्तर्गत बौद्ध और जैन न्याय का विहंगावलोकन किया गया है। योग विषय के अन्तर्गत पातंजल योगसूत्रोक्त विचारों के साथ हठयोग, बौद्धयोग, भक्तियोग, कर्मयोग और ज्ञानयोग का भी परिणाम दिया गया है। वेदान्त परिचय के अन्तर्गत शंकर, रामानुज, वल्लभ, मध्व और चैतन्य जैसे महान तत्त्वदर्शी-ज्ञानियों के निष्कर्षभूत द्वैत-अद्वैत सिद्धान्तों का विवेचन किया गया है।
Sanskrit Vangmai Kosh : Granth Aur Granthakar Vol. 1-2
Sridhar Bhaskar Varnekar
20% off₹ 3000
₹ 2400
Available
Hindi Gadya : Swaroop, Itihas Evam Chayanit Rachnayein
- Author Name:
Niranjan Sahay
- Book Type:

Hindi Gadya : Swaroop, Itihas Evam Chayanit Rachnayein
Niranjan Sahay
20% off₹ 299
₹ 239.2
Available
Vedic Ankganit
- Author Name:
Virendra Kumar +1
- Book Type:

- Description:
अंकगणित का मूल आधार संख्याएँ तथा उनका योग, व्यवकलन, गुणन, विभाजन आदि प्रमुख संक्रियाएँ हैं । इसके अतिरिक्त संख्याओं के गुणनखंड, मूल तथा घात निकालने की भी आवश्यकता पड़ती है । दो संख्याओं का मध्यानुपाती ज्ञात करने, दिए क्षेत्रफल के वर्गाकार क्षेत्र की भुजा ज्ञात करने, दिए क्षेत्रफल के वृत की त्रिज्या ज्ञात करने, मानक विचलन निकालने आदि अनेक प्रकार के प्रश्नों में वर्गमूल निकालने की आवश्यकता होती है । क्षेत्रफल और आयतन के प्रश्नों में, बोधायन-पाइथागोरस प्रमेय के अनुप्रयोग में, दो बिंदुओं के बीच की दूरी की गणना करने में, चक्रवृद्धि ब्याज के प्रश्न हल करने में, संख्याओं के वर्गफल या घनफल निकालने की आवश्यकता होती है । हमारे देश के विद्वानों ने ऐसी अनेक विधियाँ खोजी हैं, जो गणनाओं को अति अल्प समय में करने में सहायक होती हैं तथा मौखिक रूप से गणनाएँ सरलता से की जा सकती हैं । प्रस्तुत पुस्तक का उद्देश्य ' वैदिक गणित ' के ज्ञान को व्यावहारिक बनाना है, जिससे जन-जन में इसकी पैठ हो सके । इसमें मात्र अंकगणित के क्षेत्र में ' वैदिक गणित ' की उपयोगिता पर प्रकाश डाला गया है । वैदिक विधियाँ अत्यंत सरल हैं, जो गणनाओं के करने में छात्रों के समय तथा श्रम की बचत करती हैं, जिसका लाभ प्राथमिक से लेकर उच्च कक्षाओं तक के सभी छात्र उठा सकते हैं । व्यावहारिक जीतन में तो. ये विधियों अति उपयोगी हैं ही, साथ ही जनसामान्य के लिए भी अति उपयोगी हैं ।
Share Market Dictionary
- Author Name:
A. Sulthan
- Book Type:

- Description:
Share Market Dictionary has been produced to aid beginning traders in the challenging task of becoming familiar with the new Vocabulary and terminology used in Stock Exchanges. The book could be a valuable reference tool for use while attending seminars, watching or listening to financial programmes, and reading material on the financial market. The book contains a 600-glossary and over 100 commonly used abbreviations and acronyms in finance and the stock market.
Manikarnika : Drishti Aur Vimarsh
- Author Name:
Anand Das
- Book Type:

- Description:
समकालीन हिन्दी दलित साहित्य और आत्मकथा विधा के वैचारिक आधार को गहराई से समझने के लिए “मणिकर्णिका : दृष्टि और विमर्श” एक महत्वपूर्ण कृति है। लेखक आनंद दास ने इस पुस्तक के माध्यम से समाज में व्याप्त असमानता, शोषण और संघर्ष की वास्तविकताओं का सटीक एवं गंभीर विश्लेषण प्रस्तुत किया है। यह पुस्तक न केवल साहित्यिक दृष्टि से समृद्ध है, बल्कि सामाजिक चेतना जगाने का भी कार्य करती है। शोधार्थियों और साहित्य-प्रेमियों के लिए एक अत्यंत उपयोगी एवं पठनीय पुस्तक!
District Saharanpur (Environmental Challenges and Population Scenario)
- Author Name:
Dr. Narendar Kumar +1
- Book Type:

- Description:
जनपद सहारनपुर अपनी प्राचीन ऐतिहासिक विरासत, भौगोलिक स्थिति, विविधतापूर्ण सांस्कृतिक परम्पराओं तथा प्राकृतिक संसाधनों के कारण प्रदेश में अपनी एक विशिष्ट पहचान रखता है। उत्तर प्रदेश राज्य के इस प्रसिद्ध जनपद की जनसंख्या, संस्कृति एवं पर्यावरण जैसे ज्वलन्त विषयों पर आधारित यह पुस्तक लेखकों द्वारा अत्यन्त सराहनीय एवं समयानुकूल प्रयास है। वर्तमान समय में तीव्र गति से बढ़ती जनसंख्या, नगरीयकरण तथा औद्योगिक गतिविधियों के कारण जनपद में अनेक पर्यावणीय चुनौतियाँ सामने आ रही है। अतः वर्तमान परिस्थितियों में इस प्रकार का सार्थक प्रयास न केवल शैक्षणिक समाज की दृष्टि से अर्पित नीति निर्धारकों और सामाजिक विकास के लिए भी मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है। लेखकों का यह प्रयास सहारनपुर जनपद की सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान और पर्यावरण सन्तुलन के प्रति जागरूकता लाने के दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका प्रस्तुत करेगा। मैं लेखकों को इस अत्यन्त ही सार्थक प्रयास के लिए हार्दिक बधाई और उज्जवल भविष्य के लिए हृदय की गहराइयों से अपनी ढेरों शुभकामनाएँ प्रेषित करता हूँ। - प्रो. बीरेन्द्र सिंह : पूर्व प्राचार्य, आर.एस.एम. (पी.जी.) कालेज धामपुर, बिजनौर (उ.प्र.)
Aalim Sir Ki English Class
- Author Name:
Aalim
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Brahman Ki Beti & Viraj Bahu
- Author Name:
Sarat Chandra Chattopadhyay
- Book Type:

- Description:
मुहल्ले भर घूमकर तीसरे पहर रासमणि घर लौट रही थीं। आगे-आगे उनकी पोती मु. रही थी, जिसकी उम्र कोई दस-बारह साल की थी। गाँव का सँकरा रास्ता, जिसकी बगल की खूँटी में बँधा हुआ बकरी का बच्चा एक किनारे पड़ा सो रहा था। उस पर नजर पड़ते ही पोती को लक्ष्यकर वे चिल्ला पड़ीं, '' अरी छोकरी, कहीं रस्सी मत लाँव जाना ! सामने रस्सी मत 'लाँघ गई क्या ? हरामजादी, आसमान में देखती हुई चलती है। आँख से दिखलाई नहीं पड़ा कि सामने बकरी बँथी है ?'' पोती ने सहज भाव से कहा, '“बकरी तो सो रही है दादी।'' “सो रही है तो क्या दोष नहीं लगा ? आज मंगलवार के दिन तू बेखटके रस्सी लाँघ गई ?!!
Mai urdu Hoon
- Author Name:
Dheerendra Singh Fayyaz
- Book Type:

- Description:
मैं उर्दू हूँ’ एक भाषा के सफ़र का संस्मरण है। ये किताब उर्दू के प्रारम्भिक युग से शुरू होती है और मीर-ओ-ग़लिब से लेकर आधुनिक युग के नामचीन साहित्यकारों की उँगली थामे उस जगह तक जा पहुँचती है, जहाँ प्राचीन भाषाओं और लिपियों का ज़िक्र स्वाभाविक हो जाता है। इस संस्मरण में धीरे-धीरे ये भेद भी खुलता है कि सभी भाषाओं में कुछ न कुछ साम्य है और प्रत्यक्ष रूप से असंबद्ध लगने वाली देवनागरी, फ़ारसी और अरबी लिपियाँ दर-अस्ल एक ही मूल से निकली हैं। ये किताब लेखक और उर्दू के बीच होने वाला एक रोचक वार्तालाप है जो भाषाओं की व्युत्पत्ति, विकास और प्रसार के विषयों पर रौशनी डालता है।
Sarjnatmak Shiksha
- Author Name:
Raghav Prakash +2
- Book Type:

- Description:
आज हर समझदार माता-पिता अपने बच्चे को सही शिक्षा दिलवाने के लिए बेचैन हैं, हर चैतन्य शिक्षक अपने विद्यार्थी को ऊँचाइयाँ देने के लिए आतुर है और हर प्रबुद्ध शिक्षा-प्रशासक अपने स्कूल-कॉलेज की शिक्षण-पद्धति को परवान चढ़ाकर उसे उत्कृष्ट बनाने के लिए संकल्पित है। किन्तु, कुछ अपवादों को छोड़कर, दुनिया भर की शिक्षा सर के बल खड़ी है। असल में, व्यवस्था-केन्द्रित शिक्षा-पद्धति को विद्यार्थी-केन्द्रित होना चाहिए। शिक्षा की मूल्य-दृष्टि, उसका पाठ्यक्रम शिक्षण-पद्धति और मूल्यांकन-पद्धति सबकुछ विद्यार्थी की वृत्ति, रुचि, योग्यता और गति के अनुरूप होनी चाहिए; विद्यार्थी की चेतना में गहरे छिपी उसकी मूल्यवान सर्जनात्मक क्षमता का, अधिकतम विकास कैसे किया जा सकता है, उसकी तजबीज ‘सर्जनात्मक शिक्षा’ में प्रस्तुत की गई है। इसमें जीवन-दृष्टि और शिक्षा-दृष्टि के ठहराव को उजागर कर कल्याणकारी जीवन-दृष्टि और उसी के अनुरूप सर्जनात्मक पाठ्यक्रम, सर्जनात्मक शिक्षण-पद्धति, सर्जनात्मक मूल्यांकन पद्धति एवं रचनात्मक शिक्षा-प्रशासन-व्यवस्था को प्रस्तुत किया गया है। पूर्व और पश्चिम के लगभग सौ शिक्षाशास्त्रियों, समाजशास्त्रियों, मनोवैज्ञानिकों, धर्मशास्त्रियों, शिक्षा-वैज्ञानिकों आदि द्वारा लिखित शोधपूर्ण पुस्तकों का गहन मंथन करने के उपरांत जो शिक्षा-दृष्टि और शिक्षा-व्यवहार विकसित हुआ है; ‘सर्जनात्मक शिक्षा’ उसी का ऐसा ‘अमृत तत्त्व’ है जो उत्कृष्ट की तलाश में जुटे हुए प्रत्येक शिक्षाविद्, अभिभावक, शिक्षक, शिक्षा-प्रबन्धक और चैतन्य विद्यार्थी के लिए अनिवार्य रूप से पठनीय है।
SUDHA OM DHINGRA KI KAHANIYON ME PRVASI JEEVAN
- Author Name:
Shahnaz
- Book Type:

- Description:
Book
SUDHA OM DHINGRA KI KAHANIYON ME NIHIT TATHA ABHIVYAKT SAMASYAEN
- Author Name:
Nidhiraj Bhadana +1
- Book Type:

- Description:
प्रवासी कहानीकार डाॅ सुधा ओम ढींगरा की कहानियों पर यह दो शोध कार्य हैं जो निधिराज भडाना तथा रेशू पाण्डेय ने किये हैं।
Keshav Mishr Ke Granthon Me Orchha Ka Itihas
- Author Name:
Dr. Ramswaroop Dengula
- Book Type:

- Description:
डॉ. रामस्वरूप ढेंगुला द्वारा लिखित इस विस्तृत हिंदी साहित्य पुस्तक के माध्यम से ओरछा के समृद्ध ऐतिहासिक ताने-बाने में गोता लगाएँ। यह विद्वत्तापूर्ण कार्य शानदार शहर ओरछा के बारे में महाकवि केशव मिश्र के लेखन में दर्शाई गई ऐतिहासिक चेतना की बारीकी से जाँच करता है। यह पुस्तक पाठकों को इस बात का गहन विश्लेषण प्रदान करती है कि कैसे इस मध्यकालीन कवि ने अपने विभिन्न साहित्यिक कार्यों में इस ऐतिहासिक शहर के सार, वास्तुकला, संस्कृति और सामाजिक ताने-बाने को उकेरा। सावधानीपूर्वक शोध और अकादमिक कठोरता के माध्यम से, लेखक केशव मिश्र के लेखन में प्रलेखित ओरछा के राजसी मंदिरों, महलों और सांस्कृतिक विरासत के ऐतिहासिक महत्व को उजागर करता है। यह अकादमिक पाठ शोधकर्ताओं, इतिहासकारों और साहित्य प्रेमियों के लिए एक अमूल्य संसाधन के रूप में कार्य करता है, जो शास्त्रीय हिंदी साहित्य के लेंस के माध्यम से ओरछा की ऐतिहासिक कथा को समझने में रुचि रखते हैं।
Adyatan Hindi Vyakaran
- Author Name:
B.N. Pandey
- Book Type:

- Description:
"यह पुस्तक चार अध्यायों में विभक्त है : प्रथम अध्याय में हिंदी भाषा में उपलब्ध सभी ध्वनियों एवं उनके लिखित रूप अक्षरों एवं संयुक्ताक्षरों की लेखन विधि, उच्चारण एवं उनसे शब्द-निर्माण की व्याख्या की गई है, ताकि हिंदीतरभाषी भारतीय एवं विदेशी परीक्षार्थी उनकी स्पष्ट समझ के साथ-साथ कम-से-कम समय में उनका अभ्यास कर उनपर अधिकार कर सकें। दूसरे अध्याय में सभी प्रकार के शब्दों की प्रकृति, निर्माण एवं पहचान की व्याख्या के साथ-साथ वाक्य गठन के दौरान लिंग, वचन विभक्ति, काल आदि के प्रभाव से उनमें होनेवाले रूप परिवर्तन को विवेचित-विश्लेषित किया गया है। तीसरे अध्याय में हिंदी भाषा में उपलब्ध सभी प्रकार के वाक्यों के गठन के अंतर्निहित नियमों को विश्लेषित किया गया है। वाक्य किसी भाषा के दैनिक प्रयोग की सबसे महत्त्वपूर्ण इकाई हैं और सभी प्रकार के अधिक-से-अधिक वाक्यों के निरंतर अभ्यास से ही भाषा का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है। चौथे अध्याय में उपसर्ग, प्रत्यय, संधि एवं समास समाहित हैं : व्याकरण पुस्तकों की महत्ता विषय के चयन में नहीं उनकी सुबोध एवं सुग्राह्य प्रस्तुति में होती है। व्याकरण की सार्थकता इसमें है कि वह साध्य नहीं, अपितु भाषा की सम्यक् समझ एवं प्रयोग का साधन बने।
Hindi Sahitya Ka Itihas
- Author Name:
Acharya Ramchandra Shukla
- Book Type:

- Description:
"हिंदी साहित्य का भंडार पर्याप्त समृद्ध है। गद्य तथा पद्य की लगभग सभी विधाओं का प्रचुर मात्रा में साहित्य-सर्जन हुआ है। अनेक कालजयी कृतियाँ सामने आईं। लेखक-कवियों ने भी सर्जना के उच्च मानदंड स्थापित किए, जिन पर साहित्य-सृजन को कालबद्ध किया गया; वह युग उनके नामों से जाना गया। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने गहन शोध और चिंतन के बाद हिंदी साहित्य के पूरे इतिहास पर विहंगम दृष्टि डाली है। हिंदी भाषा के मूर्धन्य इतिहासकार- साहित्यकार आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने हिंदी साहित्य का जो इतिहास रचा है, वह सर्वाधिक प्रामाणिक तथा प्रयोगसिद्ध ठहरता है। इससे पहले भी हिंदी का इतिहास लिखा गया; पर आचार्यजी का ज्ञान विस्तृत फलक पर दिग्दर्शित है। इसमें आदिकाल यानी वीरगाथा काल का अपभ्रंश काव्य एवं देशभाषा काव्य के विवरण के बाद भक्तिकाल की ज्ञानमार्गी, प्रेममार्गी, रामभक्ति शाखा, कृष्णभक्ति शाखा तथा इस काल की अन्य रचनाओं को अपने अध्ययन का केंद्र बनाया है। इसके बाद के रीतिकाल के सभी लेखक-कवियों के साहित्य को इसमें समाहित किया है। अध्ययन को आगे बढ़ाते हुए आधुनिक काल के गद्य साहित्य, उसकी परंपरा तथा उत्थान के साथ काव्य को अपने विवेचन केंद्र में रखा है। हिंदी साहित्य का क्षेत्र चहुँदिशि विस्तृत है। हिंदी साहित्य के इतिहास को सम्यक् रूप में तथा गहराई से जानने-समझने के लिए आचार्य रामचंद्र शुक्ल का यह इतिहास-ग्रंथ सर्वाधिक उपयुक्त है।
Achchhi English Kaise Bolen
- Author Name:
A.K. Gandhi
- Book Type:

- Description:
"बाजार में अंग्रेजी बोलना सीखाने का दावा करनेवाली अनेक पुस्तकें हैं, लेकिन प्रस्तुत पुस्तक उन सभी से स्तर, ज्ञान तथा अभ्यास में कहीं बेहतर है, क्योंकि इसमें उन गुणों का समावेश किया गया है, जिनके आधार पर व्यवहार में छात्रों को अंग्रेजी बोलना सिखाया गया है। इस पुस्तक में दी गई तकनीक छात्रों पर आजमाई गई है, तथा इसके सकारात्मक परिणाम प्राप्त भी हुए हैं। इसका कारण है कि इसमें वैज्ञानिक, मनोवैज्ञानिक तथा शैक्षिक-मनोवैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर पाठों की रचना की गई है। प्रस्तुत पुस्तक में अंग्रेजी के सभी आयामों को 30 दिन के पाठों में समेटा गया है तथा प्रत्येक दिन के अभ्यास को शीर्षकों में विभाजित किया गया है, जिससे पाठकगण अंग्रेजी के साथ बेहतर तारतम्य स्थापित कर पाएँ। आसानी से अच्छी अंग्रेजी सिखानेवाली एक व्यावहारिक पुस्तक। "
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book