Rishton ki Chhatri
(0)
Author:
Man Mohan BhatiaPublisher:
FlyDreams PublicationsLanguage:
HindiCategory:
Academics-and-references₹
149
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Available
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दिल की बेचैनी ने आज जल्दी जगा दिया। श्रीमती जी अपनी खूबसूरती लिए आराम से सो रहीं थी, मैं उठ कर बाहर आ गया। अख़बार वाला आज जल्दी अख़बार रख गया था। अख़बार उठाया तो वो दूर से टाटा करता हुआ नज़र आया। चेहरे पर ख़ुद-ब-ख़ुद एक मुस्कान ठहर गई।अख़बार पढ़ तैयार हुआ, तब तक पत्नी ने गरम चाय, अपने नरम होठों के साथ पीला दी। दफ्तर तक जाने में किए ऑटो-वाले ने, आज फिर कोई मज़ेदार किस्सा सुनाया, दिल खुश हो गया। ऑफ़िस का दिन भी सह-कर्मियों के साथ हँसी-मज़ाक में निकल गया। सालों से इनके साथ रिश्ता घर-सा हो गया है।वापसी में पत्नी जी के लिए एक खास गजरा लिया, जो फूलवाले ने आदत में डाल दिया है। बच्चों के लिए फल ले लिए। ज़िन्दगी कुछ ऐसे ही चलती जा रही है।बेमौसम बरसात हो गयी, छतरी थी नहीं, भीग गए। घर पहुँचे, तो सब ने घेर लिया, लगे ‘हाल’ पूछने। कपड़े बदल सोफे पर बैठा, तो चाय के साथ पकोड़े तैयार थे। बिना बोले श्रीमती जी ने सर दबाना शुरू कर दिया और बच्चों ने पाँव। सबको यों पास देख, दिल को सुकून मिला, लगा जैसे जिंदगी की धुप-छाँव, इन सभी रिश्तों की छतरी तले आराम से निकल जाएगी। रात, हमसफ़र के साथ, एक-दूसरे की बाहों में सिमट, चैन से सो गया।
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दिल की बेचैनी ने आज जल्दी जगा दिया। श्रीमती जी अपनी खूबसूरती लिए आराम से सो रहीं थी, मैं उठ कर बाहर आ गया। अख़बार वाला आज जल्दी अख़बार रख गया था। अख़बार उठाया तो वो दूर से टाटा करता हुआ नज़र आया। चेहरे पर ख़ुद-ब-ख़ुद एक मुस्कान ठहर गई।अख़बार पढ़ तैयार हुआ, तब तक पत्नी ने गरम चाय, अपने नरम होठों के साथ पीला दी। दफ्तर तक जाने में किए ऑटो-वाले ने, आज फिर कोई मज़ेदार किस्सा सुनाया, दिल खुश हो गया। ऑफ़िस का दिन भी सह-कर्मियों के साथ हँसी-मज़ाक में निकल गया। सालों से इनके साथ रिश्ता घर-सा हो गया है।वापसी में पत्नी जी के लिए एक खास गजरा लिया, जो फूलवाले ने आदत में डाल दिया है। बच्चों के लिए फल ले लिए। ज़िन्दगी कुछ ऐसे ही चलती जा रही है।बेमौसम बरसात हो गयी, छतरी थी नहीं, भीग गए। घर पहुँचे, तो सब ने घेर लिया, लगे ‘हाल’ पूछने। कपड़े बदल सोफे पर बैठा, तो चाय के साथ पकोड़े तैयार थे। बिना बोले श्रीमती जी ने सर दबाना शुरू कर दिया और बच्चों ने पाँव। सबको यों पास देख, दिल को सुकून मिला, लगा जैसे जिंदगी की धुप-छाँव, इन सभी रिश्तों की छतरी तले आराम से निकल जाएगी। रात, हमसफ़र के साथ, एक-दूसरे की बाहों में सिमट, चैन से सो गया।
Book Details
-
ISBN9788193952504
-
Pages155
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age11-18 yrs
-
Country of OriginIndia
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