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भगवान श्री राम की कथा बहुत पुरानी है और इसे बहुत से लोगों ने बहुत तरीक़े से कहा है। एक तरीका महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद का है और यह तरीका उन्होंने बच्चों के लिए विकसित किया है। उनके कहने का तरीका इतना सरल, कौतुकपूर्ण और जीवंत है कि जो लोग यह कथा जानते हैं, उन्हें भी पढ़ने में रस मिलेगा। मुंशी प्रेमचंद रामकथा के उन मार्मिक स्थलों को पहचानते हैं जो बच्चों के लिए रुचिकर और श्रेयस्कर दोनों हैं। लेकिन पढ़ते हुए यह ध्यान रखना ज़रूरी हैकि यह इतिहास या महाकाव्य नहीं, उपन्यास है।
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भगवान श्री राम की कथा बहुत पुरानी है और इसे बहुत से लोगों ने बहुत तरीक़े से कहा है। एक तरीका महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद का है और यह तरीका उन्होंने बच्चों के लिए विकसित किया है। उनके कहने का तरीका इतना सरल, कौतुकपूर्ण और जीवंत है कि जो लोग यह कथा जानते हैं, उन्हें भी पढ़ने में रस मिलेगा। मुंशी प्रेमचंद रामकथा के उन मार्मिक स्थलों को पहचानते हैं जो बच्चों के लिए रुचिकर और श्रेयस्कर दोनों हैं। लेकिन पढ़ते हुए यह ध्यान रखना ज़रूरी हैकि यह इतिहास या महाकाव्य नहीं, उपन्यास है।
Book Details
-
ISBN9788119745296
-
Pages160
-
Avg Reading Time5 hrs
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Age0-11 yrs
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Country of OriginIndia
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प्रेमचन्द ने अपनी कहानियों के रचना-शिल्प में घटनाओं के बजाय स्थितियों और सन्दर्भों को ज़्यादा महत्त्व दिया है। उनकी कहानियाँ इसी नाते घटना-प्रधान कहानियाँ नहीं हैं और न ही घटना-प्रधान कहानियों की तरह वे पाठकों में कौतूहल या जिज्ञासा वृत्ति उपजाती हैं। उनकी कहानियों का पाठक ‘आगे क्या होगा’ की जिज्ञासा के बजाय चित्रित स्थितियों और प्रसंगों के बीच से उभरते हुए प्रेमचन्द के संवेदनात्मक उद्देश्य के साथ हो जाता है और उसके विकास में रुचि लेने लगता है। प्रेमचन्द अपने पाठक को अपनी संवेदना के वृत्त में इस तरह ले लेते हैं कि वह उनकी बुनी हुई स्थितियों और उनके रचे चरित्रों के साथ-साथ आगे बढ़ता जाता है। वह कहानीकार का हमसफ़र बन जाता है।
प्रेमचन्द की कहानियों के रचना-शिल्प को बारीकी से देखें तो स्पष्ट होगा कि प्रेमचन्द एक रचनाकार के रूप में कहानी में अनावश्यक दख़ल नहीं देते। वे अपने संवेदनात्मक उद्देश्य को कहानी में बुनी गई स्थितियों और प्रसंगों के माध्यम से उजागर करते हैं और चूँकि इन स्थितियों और प्रसंगों का सम्बन्ध उनकी कल्पना से न होकर जीवन के यथार्थ और जीवन की सच्चाइयों से होता है, अतएव पाठक के दिल-दिमाग़ में उनकी विश्वसनीयता आप से आप अंकित हो जाती है।
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