Bhago Nahin Duniya Ko Badlo
(0)
Author:
Rahul SankrityayanPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Society-social-sciences₹
299
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राहुल सांकृत्यायन का समूचा जीवन घुमक्कड़ी का था। भिन्न-भिन्न भाषा, साहित्य एवं प्राचीन संस्कृत-पाली-प्राकृत-अपभ्रंश आदि भाषाओं का अनवरत अध्ययन-मनन करने का अपूर्व वैशिष्ट्य उनमें था। उनके घुमक्कड़ जीवन के मूल में अध्ययन की प्रवृति ही सर्वोपरि रही। राहुल जी जब जिसके सम्पर्क में गए, उसकी पूरी जानकारी हासिल की। जब वे साम्यवाद के क्षेत्र में गए, तो कार्ल मार्क्स, लेनिन, स्तालिन आदि के राजनीतिक दर्शन की पूरी जानकारी प्राप्त की। यही कारण है कि उनके साहित्य में जनता, जनता का राज्य और मेहनतकश मजदूरों का स्वर प्रबल और प्रधान है। उनकी रचनाओं में प्राचीन के प्रति आस्था, इतिहास के प्रति गौरव और वर्तमान के प्रति सधी हुई दृष्टि का समन्वय देखने को मिलता है। यह केवल राहुल जी थे जिन्होंने प्राचीन और वर्तमान भारतीय साहित्य-चिन्तन को समग्रत: आत्मसात् कर हमें मौलिक दृष्टि देने का निरन्तर प्रयास किया। ‘भागा नहीं दुनिया का बदलो’ राहुल जी की अनुपम क्रान्तिकारी रचना है। यह कहानियों और उपन्यास के बीच की एक अनोखी राजनीतिक कथाकृति है। इस कृति की रचना का विशेष उद्देश्य यह है कि कम पढ़े-लिखे लोग राजनीति को समझ सकें। उन्हें अपनी अच्छाई-बुराई भी मालूम हो और उन्हें इसका भी ज्ञान हो कि राजनीति की दुनिया में कैसे-कैसे दाँव-पेंच खेले जाते हैं। राहुल-साहित्य में इस कृति का एक विशिष्ट स्थान है।
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राहुल सांकृत्यायन का समूचा जीवन घुमक्कड़ी का था। भिन्न-भिन्न भाषा, साहित्य एवं प्राचीन संस्कृत-पाली-प्राकृत-अपभ्रंश आदि भाषाओं का अनवरत अध्ययन-मनन करने का अपूर्व वैशिष्ट्य उनमें था। उनके घुमक्कड़ जीवन के मूल में अध्ययन की प्रवृति ही सर्वोपरि रही।
राहुल जी जब जिसके सम्पर्क में गए, उसकी पूरी जानकारी हासिल की। जब वे साम्यवाद के क्षेत्र में गए, तो कार्ल मार्क्स, लेनिन, स्तालिन आदि के राजनीतिक दर्शन की पूरी जानकारी प्राप्त की। यही कारण है कि उनके साहित्य में जनता, जनता का राज्य और मेहनतकश मजदूरों का स्वर प्रबल और प्रधान है।
उनकी रचनाओं में प्राचीन के प्रति आस्था, इतिहास के प्रति गौरव और वर्तमान के प्रति सधी हुई दृष्टि का समन्वय देखने को मिलता है। यह केवल राहुल जी थे जिन्होंने प्राचीन और वर्तमान भारतीय साहित्य-चिन्तन को समग्रत: आत्मसात् कर हमें मौलिक दृष्टि देने का निरन्तर प्रयास किया।
‘भागा नहीं दुनिया का बदलो’ राहुल जी की अनुपम क्रान्तिकारी रचना है। यह कहानियों और उपन्यास के बीच की एक अनोखी राजनीतिक कथाकृति है। इस कृति की रचना का विशेष उद्देश्य यह है कि कम पढ़े-लिखे लोग राजनीति को समझ सकें। उन्हें अपनी अच्छाई-बुराई भी मालूम हो और उन्हें इसका भी ज्ञान हो कि राजनीति की दुनिया में कैसे-कैसे दाँव-पेंच खेले जाते हैं। राहुल-साहित्य में इस कृति का एक विशिष्ट स्थान है।
Book Details
-
ISBN9789348157713
-
Pages264
-
Avg Reading Time9 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: सौर और पवन ऊर्जा के क्षेत्र में विश्व स्तर पर भारत के नेतृत्व को लेकर जो प्रशंसा की जाती है और हम ख़ुद भी जो सारे विश्व को पीछे छोड़ देने का दम भरते हैं, वह पूरी तरह से दिवास्वप्न है। वास्तविकता यह है कि हम इन दोनों ही क्षेत्रों में सिर्फ़ उपभोक्ता हैं, उत्पादक नहीं। हम अपने यहाँ इन ऊर्जाओं के लिए बस मार्केट बना रहे हैं। यही सच्चाई है। पुस्तक देश-विदेश के तमाम वैकल्पिक ऊर्जा सम्बन्धी आँकड़ों का तार्किक विश्लेषण कर, तकनीकी विशेषज्ञों के समय-समय पर व्यक्त मतों का निहितार्थ निकालते हुए, जर्मनी, आस्ट्रेलिया, अमेरिका जैसे विकसित देशों के विशेषज्ञों, सरकारी अधिकारियों, बहुराष्ट्रीय कम्पनियों एवं वर्ल्ड बैंक आदि से प्राप्त जानकारियों एवं अनुभवों के निष्कर्ष के आधार पर राष्ट्रहित में लिखी गई है। इस पुस्तक का उद्देश्य है सरकार और जनसाधारण तक यह सन्देश पहुँचाना कि हमें अपने ढंग से वैकल्पिक ऊर्जा के उत्पादन और संरक्षण का प्रयास करना चाहिए।
Gods, Giants And The Geography Of India
- Author Name:
Nalini Ramachandran
- Rating:
- Book Type:

- Description: In the east, a pirate king finds his plans foiled by a formidable force of nature.In the north, a majestic mountain range emerges from a demon's tantrum. In the west, a sea keeps a city safely hidden in its deep waters. In the south, the avatar of a god gives a forest its name. Long ago, before science came up with explanations for the events that occurred in nature, people turned to stories to make sense of the wondrous workings of the natural world. And so, a life-giving stream became the gift of a goddess, a hot spring arose from the breath of a celestial snake and a heap of broken boulders served as a testament to a divine battle. Zigzagging through myths, folklore, local history and geological theories, this extraordinary book draws fascinating connections between ancient tales and the science behind the spectacular geography of India. Join Nalini Ramachandran on a most unusual, adventure-filled expedition up, down and across the country's varied terrain!
Aupniveshik Aabkari
- Author Name:
Girija Pande
- Book Type:

- Description: नशे का इतिहास चाहे आदमी के इतिहास से कुछ कम पुराना हो पर इसे सुव्यवस्थित आर्थिक स्रोत का रूप औपनिवेशिक काल में मिला। इतिहास में अपने धर्म और समाज के लिए मरने वालों की अपेक्षा बहुत अधिक अपने पीने की आदत और अफीम से मरे हैं। एल्डस हक्सले ने इस उत्कंठा को मुक्ति या मृत्यु के लिए नहीं, दासता को अंगीकार कर मृत्यु की ओर बढ़ना बताया है। नशे के इस तंत्र ने औपनिवेशिक व्यवस्था को अर्थाधार दिया और नशे से अपरिचित समाजों में भी इसका रोपण किया। औपनिवेशिक आबकारी के जन्म से पूर्व उत्तराखंड में शराबखोरी और इससे उत्पन्न सामाजिक, सांस्कृतिक तथा आर्थिक विकृतियों व बिखराव की समस्या नहीं जन्मी थीं। जिन स्थानीय लघु समाजों में शराब का प्रचलन था उसे भोजन पद्धति का सदियों से विकसित रूप माना जा सकता है, पर जिन बड़े सामाजिक हिस्सों में इसका फैलाव पिछली एक सदी में हुआ, वह औपनिवेशिक विकास से सम्बद्ध है। औपनिवेशिक सत्ता के विस्तार के साथ नशीले पदार्थों का असाधारण प्रचलन हुआ और औपनिवेशिक सत्ता के अस्त होने के बाद इसे देशी त्वरा मिली जिसने पहाड़ी सामाजिक, आर्थिक ढाँचे को ही विकृत और ध्वस्त कर दिया। वन, खनन, बड़े बाँधों, विकृत पर्यटन की तरह नशा सिर्फ एक विषय नहीं, पहाड़ी जनजीवन को नष्ट करने का एक नियोजित षड्यंत्र है। नशे के विरुद्ध, आज़ादी से पूर्व और बाद में उठे प्रतिरोधों की पृष्ठभूमि का पहली बार इतनी गहनता और तत्परता से अध्ययन किया गया है ताकि आज की समस्या की जड़ों तक जाया जा सके। यह अध्ययन न सिर्फ अतीत के बारे में हमारी आँखें खोलता है बल्कि वह आज के नशा-परिदृश्य समझने की पृष्ठभूमि भी प्रस्तुत करता है।
Choori Bazar Mein Ladki
- Author Name:
Krishna Kumar
- Book Type:

- Description: यह पुस्तक लड़कियों के मानस पर डाली जानेवाली सामाजिक छाप की जाँच करती है। वैसे तो छोटी लड़की को बच्ची कहने का चलन है, पर उसके दैनंदिन जीवन की छानबीन ही यह बता सकती है कि लड़कियों के सन्दर्भ में 'बचपन' शब्द की व्यंजनाएँ क्या हैं। कृष्ण कुमार ने इन व्यंजनाओं की टोह लेने के लिए दो परिधियाँ चुनी हैं। पहली परिधि है घर के सन्दर्भ में परिवार और बिरादरी द्वारा किए जानेवाले समाजीकरण की। इस परिधि की जाँच संस्कृति के उन कठोर और पैने औज़ारों पर केन्द्रित है जिनके इस्तेमाल से लड़की को समाज द्वारा स्वीकृत औरत के साँचे में ढाला जाता है। दूसरी परिधि है शिक्षा की जहाँ स्कूल और राज्य अपने सीमित दृष्टिकोण और संकोची इरादे के भीतर रहकर लड़की को एक शिक्षित नागरिक बनाते हैं। लड़कियों का संघर्ष इन दो परिधियों के भीतर और इनके बीच बची जगहों पर बचपन भर जारी रहता है। यह पुस्तक इसी संघर्ष की वैचारिक चित्रमाला है।
Aadhunik Bharat Mein Samajik Parivartan
- Author Name:
M.N. Shrinivas
- Book Type:

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Description:
भारत के प्रमुख समाज एवं नृ-विज्ञानवेत्ता एम.एन. श्रीनिवास की यह महत्त्वपूर्ण कृति विश्व-कवि रवीन्द्रनाथ ठाकुर-स्मृति-भाषणमाला के सारभूत तत्त्वों पर आधारित है। आधुनिक भारतीयता के सन्दर्भ में रवीन्द्रनाथ ठाकुर की विचारक के रूप में एक अलग महत्ता है। अपनी अमरीकी और यूरोपीय यात्राओं के दौरान विश्वकवि ने जो विचार प्रकट किए हैं, वे इस बात का प्रमाण हैं कि भारतीय सामाजिक परिवर्तनों में पाश्चात्य प्रभावों के प्रति उनकी गहरी रुचि थी।
स्वाधीनता-प्राप्ति के बाद भारतीय समाज में पश्चिमीकरण की प्रक्रिया और भी तेज़ हुई है, जिसके व्यापक प्रभावों को सांस्कृतिक जीवन पर स्पष्ट देखा जा सकता है। लेखक ने इन प्रभावों को संस्कृतीकरण और पश्चिमीकरण के सन्दर्भ में व्याख्यायित किया है तथा एक अखिल भारतीय परिप्रेक्ष्य में देखने की आवश्यकता बताई है। उसके अनुसार पश्चिमीकरण भारतीय समाज के किसी विशेष अंश तक सीमित नहीं है और उसका महत्त्व—उससे प्रभावित होनेवालों की संख्या और प्रभावित होने के प्रकार, दोनों ही दृष्टियों से—लगातार बढ़ रहा है। वस्तुत: आधुनिक भारतीय समाज के अन्तर्विकास और उसके अन्तर्विरोधों को समझने के लिए यह एक मूल्यवान पुस्तक है।
Bharat Ke Gaon
- Author Name:
M.N. Shrinivas
- Book Type:

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Description:
भारत, ब्रिटेन और अमेरिका के प्रमुख समाजशास्त्रियों द्वारा लिखे गए निबन्धों के इस संग्रह में भारत के चुनिन्दा गाँवों और उनमें हो रहे सामाजिक–सांस्कृतिक परिवर्तनों के विवरण प्रस्तुत हैं। हर निबन्ध एक क्षेत्र के एक ही गाँव या गाँवों के समूह के गहन अध्ययन का परिणाम है। यह निबन्ध एक विस्तृत क्षेत्र का लेखा–जोखा प्रस्तुत करते हैं, उत्तर में हिमाचल प्रदेश से लेकर दक्षिण में तंजौर तक और पश्चिम में राजस्थान से लेकर पूर्व में बंगाल तक।
सर्वेक्षित गाँव सामुदायिक जीवन के विविध प्रारूप प्रस्तुत करते हैं, लेकिन इस विविधता में ही कहीं उस एकता का सूत्र गुँथा है जो भारतीय ग्रामीण दृश्य का लक्षण है। निबन्धों में गहरी धँसी जाति व्यवस्था और गाँव की एकता का प्रश्न हाल के वर्षों में बढ़े औद्योगिकीरण और शहरीकरण के ग्रामीण विकास के लिए सरकारी योजनाओं और शिक्षा के प्रभाव से जुड़े कुछ ऐसे पक्ष हैं जिनकी विद्वत्तापूर्ण पड़ताल हुई है। आज भी, भारत एक कृषि प्रधान देश है जिसकी 80 प्रतिशत जनसंख्या उसके पाँच लाख गाँवों में रहती है, और उन्हें बदल पाने के लिए उनके जीवन की स्थितियों की जानकारी ज़रूरी है। ‘भारत के गाँव’ जिज्ञासु सामान्य जन और ग्रामीण भारत को जाननेवाले विशेषज्ञों के लिए ग्रामीण भारत का परिचय उपलब्ध कराती है।
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