Asamanya Vyavahar Ki Manogatiki
(0)
Author:
J. F. BrownPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Society-social-sciences₹
1295
1036 (20% off)
Available
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जे.एफ. ब्राउन द्वारा लिखी बहुचर्चित पुस्तक ‘द साइकोडायनैमिक्स ऑफ एबनॉर्मल बिहेवियर’ का पहला संस्करण 1940 में प्रकाशित हुआ था। तब से अब तक यह पुस्तक विशिष्ट बनी हुई है। एक बुनियादी पाठ्य पुस्तक के रूप में इसे कालजयी कृति का महत्त्व प्राप्त है। ‘असामान्य व्यवहार की मनोगतिकी’ इसी पुस्तक का हिन्दी अनुवाद है। विषय की अधिकारी विद्वान डॉ. शोभना शाह ने अनुवाद करते हुए पारिभाषिक शब्दावली, तकनीकी विवरण और जटिल विवेचन की बहुलता के बाद भी सुगमता, स्पष्टता एवं सम्प्रेषणीयता का ध्यान रखा है। अनुवादक डॉ. शोभना शाह पुस्तक के महत्त्व को इन शब्दों में रेखांकित करती हैं, ‘‘यह पुस्तक फ्रायड के मनोविश्लेषण सिद्धान्त के आधार पर मानव मन की सूक्ष्म परतों को खोलती है और मानव विकास की विविध मनोगत्यात्मक अवस्थाओं की व्याख्या बड़े सरल और सुग्राही शब्दों में करती है। इस दृष्टि से यह एक अद्वितीय कृति है। ‘यद्यपि इस पुस्तक के बाद अनेक पुस्तकें लिखी गईं परन्तु इस पुस्तक का अपना विशिष्ट स्थान है। इसमें विविध असामान्यताओं की आधारभूत व्याख्या बड़े विश्वसनीय तरीके से सरल शब्दों में की गई है। इसे संभवतया असामान्य मानव व्यवहार पर बाद में लिखे गए साहित्य की दिशा-निर्देशक कहा जा सकता है। अनेक रूपों में एक महत्त्वपूर्ण पुस्तक।
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जे.एफ. ब्राउन द्वारा लिखी बहुचर्चित पुस्तक ‘द साइकोडायनैमिक्स ऑफ एबनॉर्मल बिहेवियर’ का पहला संस्करण 1940 में प्रकाशित हुआ था। तब से अब तक यह पुस्तक विशिष्ट बनी हुई है। एक बुनियादी पाठ्य पुस्तक के रूप में इसे कालजयी कृति का महत्त्व प्राप्त है। ‘असामान्य व्यवहार की मनोगतिकी’ इसी पुस्तक का हिन्दी अनुवाद है। विषय की अधिकारी विद्वान डॉ. शोभना शाह ने अनुवाद करते हुए पारिभाषिक शब्दावली, तकनीकी विवरण और जटिल विवेचन की बहुलता के बाद भी सुगमता, स्पष्टता एवं सम्प्रेषणीयता का ध्यान रखा है। अनुवादक डॉ. शोभना शाह पुस्तक के महत्त्व को इन शब्दों में रेखांकित करती हैं, ‘‘यह पुस्तक फ्रायड के मनोविश्लेषण सिद्धान्त के आधार पर मानव मन की सूक्ष्म परतों को खोलती है और मानव विकास की विविध मनोगत्यात्मक अवस्थाओं की व्याख्या बड़े सरल और सुग्राही शब्दों में करती है। इस दृष्टि से यह एक अद्वितीय कृति है।
‘यद्यपि इस पुस्तक के बाद अनेक पुस्तकें लिखी गईं परन्तु इस पुस्तक का अपना विशिष्ट स्थान है। इसमें विविध असामान्यताओं की आधारभूत व्याख्या बड़े विश्वसनीय तरीके से सरल शब्दों में की गई है। इसे संभवतया असामान्य मानव व्यवहार पर बाद में लिखे गए साहित्य की दिशा-निर्देशक कहा जा सकता है।
अनेक रूपों में एक महत्त्वपूर्ण पुस्तक।
Book Details
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ISBN9788126722853
-
Pages536
-
Avg Reading Time18 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: इस युग की सबसे बड़ी उलझन वैदिक परिभाषाओं की खोज है। सायण ने हमें वेदों के शब्दार्थ से परिचित कराया। सायण की सहायता के बिना इस महासमुद्र में हम न जाने कहाँ होते। किन्तु यज्ञीय कर्मकाण्ड की व्याख्या के लिए मन्त्रों का विनियोग तो वैदिक अर्थों का एक अंश मात्र था। वेद के पश्चिमी विद्वानों ने सायण के प्रदर्शित मार्ग से वेदों का अनुशीलन किया, किन्तु उन्होंने भाषाशास्त्र और तुलनात्मक धर्म-विज्ञान इन दो नए अस्त्रों से वैदिक अर्थों की जिज्ञासा को आगे बढ़ाया। आत्म-विद्या के जिज्ञासुओं के लिए मन्त्रों की भाषा और परिभाषाओं को स्पष्ट करने की आवश्यकता है। हमारी दृष्टि में वेदार्थ को अवगत करने के लिए ऊपर के सभी मतों में सत्य का अंश है। जिस विधि से मन्त्रों पर नया प्रकाश पड़े, जिस अर्थ से आत्म-विद्या का कोई नया क्षेत्र या पहलू प्रकाशित हो, वही दृष्टिकोण, प्रमाण या सामग्री स्वागत के योग्य है। वेद के जिज्ञासु छात्र का मन सब ओर से उन्मुक्त रहता है। उसके मन में चतुर्दिश दीप्तिपटों से प्रकाश और वायु का स्वच्छन्द प्रवेश होता है। वह आलोक का स्वागत करता है और उस महान् व्यापक ज्योति के लिए अपने चक्षु खोलता है, जो पृथिवी और द्युलोक के अन्तराल में भरी हुई है। मित्र और वरुण अथवा ऋत और सत्य नामक सृष्टि के द्वन्द्वात्मक तत्त्व की ही ज्योति हमारे भीतर-बाहर, सब ओर व्याप्त है। इसी को ‘उरु-ज्योतिः’ कहा गया है। भारतीय धर्म, संस्कृति-दर्शन-परंपरा के अप्रतिम हस्ताक्षर श्री वासुदेवशरण अग्रवाल के चिंतनपरक लेखों का संकलन।
1000 Sangh Prashnottari
- Author Name:
Anish Bhasin
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- Description: विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की उपस्थिति समाज के लगभग हर क्षेत्र में अनुभव की जा सकती है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बारे में चाहे किसी भी विरोधी या आलोचक ने कुछ भी आरोप क्यों न लगाया हो, कुछ भी कहा हो; परंतु जब भी अपने देशवासियों पर विपत्ति आई है, संघ के स्वयंसेवकों ने सदा जनता की सेवा की है और उसके बदले में कभी किसी चीज की अपेक्षा नहीं की। संघ के कार्यकर्ताओं (स्वयंसेवकों) ने देशभक्ति एवं निस्स्वार्थ सेवा का आदर्श प्रस्तुत किया है, जिसके चलते सर्वोदय नेता श्री प्रभाकर राव ने आर.एस.एस. को ‘रेडी फॉर सेल्फलेस सर्विस’ (निस्स्वार्थ सेवा के लिए तत्पर) का नया नाम दिया। प्रस्तुत पुस्तक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबंधित समस्त जानकारी (तथ्यों की) वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के रूप में दी गई है। पुस्तक को तैयार करते समय संघ से संबंधित उन सभी महत्त्वपूर्ण विषयों को सम्मिलित करने का प्रयास किया गया है, जिसके बारे में आमतौर पर कम जानकारी उपलब्ध है। प्रस्तुत पुस्तक में संघ का प्रादुर्भाव, प्रार्थना, भगवा ध्वज (गुरु), शाखा, संघ शिक्षा वर्ग, संघ की भौगोलिक रचना, गणवेश, खेल, उत्सव, साहित्य, संपूर्ण संघ परिवार, संघ से जुड़ी संस्थाएँ, संघ के सभी सरसंघचालक, संघ के प्रमुख व्यक्तित्व जैसे सर्वश्री दीनदयाल उपाध्याय, नानाजी देशमुख, दत्तोपंत ठेंगड़ी आदि संघ द्वारा की गई समाज-सेवा आदि से संबंधित एक हजार प्रश्न दिए गए हैं। आशा है यह पुस्तक संघ के विषय में अधिकाधिक जानने के जिज्ञासु पाठकों का ज्ञानवर्धन करके उन्हें राष्ट्र-निर्माण में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए प्रेरित करेगी।
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