Toote Ghonsle Ke Pankh
About the book
यह एक महिला की डायरी के शिल्प में लिखा गया उपन्यास है। यह शिल्प इसलिए सही है कि डायरी में ही कोई नौजवान महिला जीवन के अनुभव, अपनी पसन्द-नापसन्द एवं समाज और अपनी निजी प्रतिक्रियाओं को दर्ज करती है। ऐसा लेखन जिस तरह स्वतःस्फूर्त होता है, वैसे ही स्पष्ट भी। यह उपन्यास पाठक को उबाऊ नहीं लगता। लेकिन उपन्यास की सबसे ख़ास बात है—उसके कथ्य और शिल्प का नयापन। नौजवानों की धमनियों में दौड़नेवाले ख़ून की गर्मी का अहसास और उत्साह इस उपन्यास की पंक्ति-पंक्ति में निहित है, जिसे हर पढ़नेवाला अनुभव करेगा। —अपराजित नायक, (आलोचक) उपन्यास की मुख्य पात्र दिशा चौधरी को पता चलता है कि ज्योतिरिन्द्र मोइत्रा का देहान्त क़रीब बीस वर्ष पूर्व हो चुका और सत्यजित राय की ‘कंचनजंघा’ का पक्षी-प्रेमी मामा (पहाड़ी सान्याल द्वारा अभिनीत) ज्योतिरिन्द्र मोइत्रा की नक़ल है। यह मैं नहीं जानता था, सो इस उपन्यास से मुझे कवि, गीतकार और संगीतज्ञ ज्योतिरिन्द्र मोइत्रा के बारे में नई जानकारी मिली। —प्रो. पवित्र सरकार, (आलोचक व शिक्षाविद्) ‘टूटे घोंसले के पंख’ हालाँकि आकार में छोटा है, लेकिन निस्सन्देह इसने बांग्ला लेखन को एक नई शक्ल दी है। —प्रो. कार्तिक लाहिड़ी, (उपन्यासकार व आलोचक) ‘टूटे घोंसले के पंख’ यह अहसास कराता है कि इसका लेखक एक समर्थ उपन्यासकार है। पुस्तक लेखक के भाव को प्रदर्शित करती है लेकिन यह कभी अतिरिक्त भावुकता की तरफ़ नहीं मुड़ती। मनोवेग और बुद्धि का एक सटीक सम्मिश्रण यह उपन्यास बांग्ला उपन्यास लेखन की मौजूदा शैली से नितान्त भिन्न है। —आशीष बर्मन, (उपन्यासकार व आलोचक) आपके उपन्यास को पढ़ते हुए मैं चकित हुआ। विषय का चयन, कथानक के कहने का ढंग, भाषा और दिशा, चौधरी के चरित्र का रूपांकन—सभी कुछ आपकी अनोखी कल्पना और शिल्प की गवाही देते हैं। —प्रो. शिबनारायोन राय, (आलोचक व सम्पादक)
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About the Book
यह एक महिला की डायरी के शिल्प में लिखा गया उपन्यास है। यह शिल्प इसलिए सही है कि डायरी में ही कोई नौजवान महिला जीवन के अनुभव, अपनी पसन्द-नापसन्द एवं समाज और अपनी निजी प्रतिक्रियाओं को दर्ज करती है। ऐसा लेखन जिस तरह स्वतःस्फूर्त होता है, वैसे ही स्पष्ट भी। यह उपन्यास पाठक को उबाऊ नहीं लगता। लेकिन उपन्यास की सबसे ख़ास बात है—उसके कथ्य और शिल्प का नयापन। नौजवानों की धमनियों में दौड़नेवाले ख़ून की गर्मी का अहसास और उत्साह इस उपन्यास की पंक्ति-पंक्ति में निहित है, जिसे हर पढ़नेवाला अनुभव करेगा।
—अपराजित नायक, (आलोचक)
उपन्यास की मुख्य पात्र दिशा चौधरी को पता चलता है कि ज्योतिरिन्द्र मोइत्रा का देहान्त क़रीब बीस वर्ष पूर्व हो चुका और सत्यजित राय की ‘कंचनजंघा’ का पक्षी-प्रेमी मामा (पहाड़ी सान्याल द्वारा अभिनीत) ज्योतिरिन्द्र मोइत्रा की नक़ल है। यह मैं नहीं जानता था, सो इस उपन्यास से मुझे कवि, गीतकार और संगीतज्ञ ज्योतिरिन्द्र मोइत्रा के बारे में नई जानकारी मिली।
—प्रो. पवित्र सरकार, (आलोचक व शिक्षाविद्)
‘टूटे घोंसले के पंख’ हालाँकि आकार में छोटा है, लेकिन निस्सन्देह इसने बांग्ला लेखन को एक नई शक्ल दी है।
—प्रो. कार्तिक लाहिड़ी, (उपन्यासकार व आलोचक)
‘टूटे घोंसले के पंख’ यह अहसास कराता है कि इसका लेखक एक समर्थ उपन्यासकार है। पुस्तक लेखक के भाव को प्रदर्शित करती है लेकिन यह कभी अतिरिक्त भावुकता की तरफ़ नहीं मुड़ती। मनोवेग और बुद्धि का एक सटीक सम्मिश्रण यह उपन्यास बांग्ला उपन्यास लेखन की मौजूदा शैली से नितान्त भिन्न है।
—आशीष बर्मन, (उपन्यासकार व आलोचक)
आपके उपन्यास को पढ़ते हुए मैं चकित हुआ। विषय का चयन, कथानक के कहने का ढंग, भाषा और दिशा, चौधरी के चरित्र का रूपांकन—सभी कुछ आपकी अनोखी कल्पना और शिल्प की गवाही देते हैं।
—प्रो. शिबनारायोन राय, (आलोचक व सम्पादक)
Book details
- Format
- Paperback
- Publisher
- Rajkamal Prakashan Samuh
- Edition
- 1st
- Publication year
- 2001
- Weight
- 250 grams
- ISBN-13
- 9788183612715
- Pages
- 120
- Reading time
- ~4 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 14 × 22 cm
- Language
- Hindi
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