Qissa Janaki Raman Pande Aur Anya Kahaniyaan
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Author:
Zakiya MashhadiPublisher:
Rekhta FoundationLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
299
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ये किताब उर्दू की वरिष्ठ लेखिका ज़किया मशहदी की दस कहानियों का संकलन है जिन्हें विषयों की विविधता के अनुसार चयनित किया गया है। समाज में बढ़ती असहिष्णुता, उग्रता, उपभोक्ता संस्कृति आदि इस किताब की मुख्य झलकियाँ हैं। ज़किया मशहदी ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लखनऊ विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान में एम. ए. किया और कुछ समय तक वहाँ लॉरेटो कॉन्वेंट कॉलेज में मनोविज्ञान की लेक्चरर भी रहीं। लेखिका मूलरूप से कहानीकार हैं परन्तु उन्होंने हिन्दी, उर्दू, और अंग्रेज़ी भाषाओं में अनुवाद कार्य भी किए हैं एवं नवसाक्षरों के लिए सरल हिन्दी व उर्दू में पठन सामग्री भी तैयार की। इन तीनों छेत्रो में उन्हें महत्वपूर्ण पुरस्कार प्राप्त हुए।
Read moreAbout the Book
ये किताब उर्दू की वरिष्ठ लेखिका ज़किया मशहदी की दस कहानियों का संकलन है जिन्हें विषयों की विविधता के अनुसार चयनित किया गया है। समाज में बढ़ती असहिष्णुता, उग्रता, उपभोक्ता संस्कृति आदि इस किताब की मुख्य झलकियाँ हैं। ज़किया मशहदी ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लखनऊ विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान में एम. ए. किया और कुछ समय तक वहाँ लॉरेटो कॉन्वेंट कॉलेज में मनोविज्ञान की लेक्चरर भी रहीं। लेखिका मूलरूप से कहानीकार हैं परन्तु उन्होंने हिन्दी, उर्दू, और अंग्रेज़ी भाषाओं में अनुवाद कार्य भी किए हैं एवं नवसाक्षरों के लिए सरल हिन्दी व उर्दू में पठन सामग्री भी तैयार की। इन तीनों छेत्रो में उन्हें महत्वपूर्ण पुरस्कार प्राप्त हुए।
Book Details
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ISBN9789394494770
-
Pages192
-
Avg Reading Time6 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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चित्रा मुद्गल मध्यवर्गीय स्त्री-जीवन की आकांक्षाओं और अभावों को गहरे भाव के साथ देखती-लिखती रही हैं। उनकी अनेक कहानियाँ मानक के रूप में देखी और सराही गई हैं।
अपने लम्बे साहित्यिक जीवन में उन्होंने न सिर्फ सामान्य अनुभवों से इतर कथाओं को सम्भव किया, बल्कि भाषा के स्तर पर भी अपनी एक विशिष्ट शैली ईजाद की। इस संग्रह की कुछ कहानियों में प्रयुक्त भाषा को देखते हुए कहा जा सकता है कि रचनाकार ने सिर्फ पात्रों के जीवन और आचार-व्यवहार का ही नहीं, उनकी सामाजिक-सांस्कृतिक विशिष्टताओं का भी गहरा अध्ययन किया है।
उनकी इन कहानियों में उस स्त्री का स्वर सुनाई पड़ता है जो अपने जीवन को धीरे-धीरे बदलते हुए समाज को भी बदल रही है। पारिवारिक जीवन के तौर-तरीकों में विन्यस्त उत्पीड़न के बिम्बों को तो उन्होंने बारीकी से पकड़ा ही है।
‘दुलहिन’ चित्रा मुद्गल का सबसे पहला संग्रह जिसे उन्होंने अपने लेखकीय जीवन की पहली कृति के रूप में संकलित किया था।
Mansarovar Vol. 3 : Uddhar Aur Anya Kahaniyan
- Author Name:
Premchand
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स्पष्टता के मैदान में प्रेमचन्द बड़ी-से-बड़ी बात को बड़े उलझन के अवसर पर कुछ इस तरह सुलझा कर कह जाते हैं कि मुश्किल-से-मुश्किल बात हमारे रोजमर्रा के, घरेलू जीवन की जानी-पहचानी चीज हो जाती है। उनकी बातों में कुछ ऐसा अनुभव का मर्म भरा होता है कि आदमी उसे कंठस्थ कर लेना चाहता है। उनकी बात स्पष्ट, दो टूक निर्णय होती है। और उनकी कलम सब जगह पहुँचती है, अँधेरे में भी धोखा नहीं देती। —जैनेन्द्र कुमार
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