Pratinidhi Kahaniyan : Rajendra Yadav
Author:
Rajendra YadavPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections0 Ratings
Price: ₹ 159.2
₹
199
Available
समकलीन हिन्दी कहानी के विकास में राजेंद्र यादव एक अपरिहार्य और महत्त्वपूर्ण नाम है। हिन्दी कहानी की रूढ़ रूपात्मकता को तोड़ते हुए नई कहानी के क्षेत्र में जितने और जैसे कथा-प्रयोग उन्होंने किए हैं, उतने किसी और ने नहीं। राजेन्द्र यादव की कहानियाँ स्वाधीनता-बाद के विघटित हो रहे मानव-मूल्यों, स्त्री-पुरुष सम्बन्धों, बदलती हुई सामाजिक और नैतिक परिस्थितियों तथा पैदा हो रही एक नई विचार दृष्टि को रेखांकित करती हैं। उनकी कहानियों की व्यक्ति-चेतना सामाजिक चेतना से निरपेक्ष नहीं है; क्योंकि एक अनुभूत सामाजिक यथार्थ ही उनका यथार्थ है। यथार्थबोध के सम्बन्ध में उनकी अपनी मान्यता है कि ‘जो कुछ हमारे संवेदन के वृत्त में आ गया है, वही हमारा यथार्थ है...लेकिन इस यथार्थ को कलात्मक और प्रामाणिक रूप से सम्प्रेषणीय बनने के लिए ज़रूरी है कि हम इसे अपने से हटकर या उठकर देख सकें, उसे माध्यम की तरह इस्तेमाल कर सकें।’</p>
<p>इस संकलन में लेखक की कई महत्त्वपूर्ण कहानियाँ शामिल हैं, जिनमें नए मानव-मूल्यों और युगीन यथार्थ की मार्मिक अभिव्यक्ति हुई है। अपनी शिल्प-संरचना में ये इतनी सहज और विश्वसनीय हैं कि पाठक-मन परत-दर-परत उनमें उतरता चला जाता है।
ISBN: 9788126703135
Pages: 146
Avg Reading Time: 5 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Highway E 47
- Author Name:
Smt. Archana Painuly
- Book Type:

- Description: नारी-विमर्श अपने आप में साहित्य में एक महत्त्वपूर्ण विधा रही है। स्त्रा्वादी साहित्य महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों को परिभाषित तथा नारीवादी लक्ष्यों का समर्थन करता है। नारी-विमर्श पर आधारित संकलन की ये बारह कहानियाँ विविध नारी पात्रों को लेकर बुनी गई हैं, जो एक तरफ समकालीन जीवन के जटिल और क्रूर यथार्थ को चिह्नित करती हैं तो दूसरी तरफ स्त्रा्-जीवन के विभिन्न पक्षों को उद्घाटित करती हैं। समाज के प्रत्येक वर्ग की स्त्रा् के जीवन को प्रस्तुत करती हैं ये कहानियाँ। एक व्यापक भूमंडल को आच्छादित किए इन कहानियों में मानव जीवन के कई रंग बिखरे हुए हैं। पाठकों को भिन्न-भिन्न परिवेश में जी रही महिलाओं के जीवन से रूबरू करवाती, हमारी पारंपरिक सोच और रूढ़िवादी विचारों को झकझोरती ये कहानियाँ अत्यंत सजीव हैं। अहं, अन्याय, अकेलापन, विमुखता, प्रतिरोध, यंत्रणा, वेदना, लाचारी...तमाम अंतर्द्वंद्वों से जूझती, स्वयं के लिए सही संतुलन प्राप्त करने के लिए संघर्ष करती इन कहानियों की दमदार महिलाएँ पाठकों को प्रेरणा प्रदान करती हैं। पारिवारिकता और सामाजिकता की ये कहानियाँ नारी-सशक्तीकरण परिवेश का सशक्त स्वर हैं।
Aadim Ratri Ki Mehak
- Author Name:
Phanishwarnath Renu
- Book Type:

-
Description:
फणीश्वरनाथ रेणु के कथा साहित्य को आंचलिक कहा गया है किन्तु उनकी कहानियाँ (तथा उपन्यास भी) जहाँ एक ओर ग्राम्य-जीवन की आंचलिकता को ही नहीं उसकी सम्पूर्ण आन्तरिकता को व्यक्त करती हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण तथा शहरी जीवन के अन्त:सम्बन्धों की वास्तविकता का भी उद्घाटन करती हैं। रेणु की कहानियों में अत्यन्त ‘निजी’ को व्यापक सामाजिक यथार्थ से जोड़ पाने की अद्भुत क्षमता है और ऐसा वे अपूर्व काव्यात्मक रचाव के साथ कर पाते हैं। इस प्रक्रिया में उनकी कहानियाँ संगीत की सरहदों को छूने लगती हैं। उनके सहज प्रतीत होनेवाले कथा-शिल्प से अनायास ‘ऑडियो-विजुअल’ प्रभाव उत्पन्न होने लगता है। उनकी टेकनीक एक सर्ररियलिस्टिक पैटर्न निर्मित करती है जिसमें एक ‘प्रिज़्म’ की तरह छनकर रंगारंग विचारों तथा भावनाओं की घुलनशीलता शामिल हो जाती है। उनकी कहानियाँ हमारी सम्पूर्ण संवेदनाओं को एक साथ तृप्त करती हैं। अगर उनमें गहरी लयबद्ध ऐन्द्रिकता है तो बिना बौद्धिकता का छद्म धारण किए ही ‘वस्तु सत्य’ के मर्म तक पहुँच जानेवाली विश्लेषणपरकता भी है। आज़ादी के बाद के राजनैतिक परिवर्तनों का दस्तावेज़ी बयान प्रस्तुत करनेवाली कहानियों में यह तथ्य ख़ूब उभरकर आता है—‘जलवा’ तथा ‘आत्म-साक्षी’ जैसी कहानियों में तटस्थ राजनैतिक बोध की निर्ममता के साथ उस क्रूर ‘ट्रेजडी’ का एहसास भी है जिसमें कोमल मानवीय सच्चाइयों के निर्दयता से कुचले जाने का इतिहास अंकित है। ‘आदिम रात्रि की महक’ की कहानियों में एक नैसर्गिक विनोद वृत्ति है जो एक साथ भाषा, स्थितियों तथा चरित्रों से छेड़छाड़ करती चलती है—चुलबुलेपन की हद तक जाकर। लेकिन उनमें कब अचानक एक करुण मानवीय बोध उतर आता है, इसका पता पाठक को तब चलता है जब उसकी ‘हँसी’ में सहसा एक ‘हूक’ शामिल हो जाती है। ऐसे विरल संयोगों के हिन्दी में रेणु एकमात्र कथाकार हैं।
—विजय मोहन सिंह
Lomari Ki Japmala
- Author Name:
Unita Sachchidanand
- Book Type:

-
Description:
प्रस्तुत लोककथा संग्रह में जहाँ जानवरों की कहानियाँ हैं, वहीं अध्यात्म और नैतिक मूल्यों से जुड़ी जापान की बहुचर्चित कथाएँ भी।
लेखिका ने स्वयं तोक्यो से दूर जापानी ग्रामीण क्षेत्रों में कहानियों की तलाश के दौरान परम्परागत जापानी कथा–वाचकों की दो कहानियाँ ‘एक एहसान बढ़ा पाँच मान’ और ‘बुज्जा का अंडा’ का अभिलेखन किया है।
‘लुढ़कता खड़ाऊँ’ में हँसी और मज़ाक़ का पुट है, तो ‘लोमड़ी की जपमाला’ में लोमड़ी और मनुष्य के बीच की हास्यास्पद लड़ाई।
सरल बाल–सुलभ भाषा में जापानी कथाओं का यह दूसरा भाग मनोरंजन के साथ बच्चों में नैतिक मूल्यों को स्थापित करने में सहायक होगा, ऐसी उम्मीद है।
Pratinidhi Kahaniyan: Manzoor Ehtesham
- Author Name:
Manzoor Ehtesham
- Book Type:

- Description: बड़े मानवीय विज़न और अपने परिवेश में धड़कते जीवन की सूक्ष्म हरकतों को एक सहज भाषा में पकड़ने वाले कथाकार मंज़ूर एहतेशाम की ये कहानियाँ हमें उनकी कथा-विधियों और विश्व दृष्टि, दोनों से परिचित कराती हैं। अपने यादगार उपन्यासों से जाने जानेवाले मंज़ूर अपनी कहानियों के छोटे फलक में बड़े सवाल उठाते हैं, जिनके दायरे में राजनीति, समाज, मनुष्य निर्मित आपदाओं से लेकर धार्मिक जड़ताओं से उपजी अमानवीयता तक आ जाती है। शिल्प के स्तर पर जोखिम उठाते हुए वे कैसे अपने समय के सत्य के पीछे दूर तक चले जाते हैं, इस संचयन में शामिल कहानियों से हमें यह भी पता चलता है। इस प्रस्तुति की सम्पादक वन्दना राग की यह टिप्पणी ठीक ही है कि ‘अपनी ख़ूबसूरत भाषा और बिम्बों के साथ-साथ मुलायम अहसासों का ऐसा ताना-बाना रचनेवाले’ कथाकार कम ही होंगे।
Hijarat Se Pahale
- Author Name:
Vandana Rag
- Book Type:

-
Description:
सूक्ष्म अन्तर्दृष्टि और गहरे भावनात्मक प्रवाह की धनी कथाकार वंदना राग का यह नया कहानी-संग्रह उनके कथाकार की क्षमताओं के नए क्षितिजों से परिचित कराता है। परिपक्व भाषा-संस्कार और अपने पात्रों के माध्यम से अपने समय-समाज के स्याह-सफ़ेद पर वयस्क दृष्टि डालते हुए वंदना राग अपनी कहानियों में जीवन की जिन विडम्बनाओं और छवियों को चिह्नित करती हैं, उनसे हम अपने समय के ख़ाली स्थानों को समझ और पकड़ सकते हैं।
वंदना राग के पात्र अपनी संश्लिष्टता और वैविध्य में अपने समकालीन सच्चाइयों को इतने विश्वसनीय ढंग से उजागर करते हैं कि उनकी कहानियाँ अपने समय की समीक्षा करती नज़र आती हैं। जिए हुए और जिए जा रहे अपने वक़्त का साक्ष्य उनकी भाषा में भी दिखाई देता है जो सिर्फ़ कहानी को बयान नहीं करती, उसकी अन्तर्ध्वनियों को चिह्नित भी करती जाती हैं।
इस संग्रह में शामिल दसों कहानियाँ इस तथ्य की साक्षी हैं कि हिन्दी की युवा कहानी अपने कथ्य के ज़रिए अपने वक़्त को जितनी गम्भीरता से पकड़ने की कोशिश कर रही है, वह उल्लेखनीय है, और वंदना राग ने इस परिदृश्य में अपनी सतत और रचनात्मक उपस्थिति से बार-बार भरोसा जगाया है। संग्रह में शामिल ‘विरासत’, ‘क्रिसमस कैरोल’, ‘मोनिका फिर याद आई’ और ‘हिजरत से पहले’ जैसी कहानियाँ पाठकों को लम्बे समय तक याद रहेंगी।
Encouragement Short Stories (Volume-5)
- Author Name:
Dr.Sanjay Rout
- Book Type:

- Description: In a world that can often feel overwhelming, Encouragement Short Stories (Volume-5) by author Dr.Sanjay Rout is the perfect reminder that hope and resilience are always within our reach. Through a collection of heartwarming and inspiring tales, Dr.Sanjay weaves together narratives that showcase the power of determination, perseverance, and the human spirit. From stories of ordinary people who find the courage to overcome incredible obstacles to tales of individuals who discover new paths in life after experiencing loss and adversity, Encouragement Short Stories (Volume-5) is a powerful testament to the power of hope. With Dr.Sanjay's expert storytelling and keen eye for detail, readers will be transported to new worlds and meet unforgettable characters. And with each story, they'll be reminded of their own incredible strength and capacity to achieve greatness - no matter what challenges they may face. Whether you're in need of a dose of inspiration or simply enjoy heartwarming stories that make you smile, Encouragement Short Stories (Volume-5) is a must-read. So pick up a copy today and discover the incredible power of hope and perseverance.
Na Bhoolanewali 100 Kahaniyan
- Author Name:
J.P. Vaswani
- Book Type:

- Description: दादा जे.पी. वासवानी हमेशा से उत्कृष्ट किस्सागो रहे हैं। उनकी अनौपचारिक वार्त्ताओं, प्रवचनों और पुस्तकों में भी पुराणों की कहानियाँ बहुतायत से बिखरी होती हैं, ताकि वे उन बातों को सुस्पष्ट कर सकें, जिन्हें वे चाहते हैं कि हम आत्मसात् कर लें। ये कहानियाँ इतनी यादगार हैं कि एक लंबे समय तक हमारे दिलों में बसी रहती हैं तथा उन संदेशों या जीवन-मूल्यों को हृदयंगम करने में हमारी मदद करती हैं, जिन्हें दादा ने इतने रचनात्मक रूप में हमारे सामने रखा है। इस पुस्तक में, पूज्य दादा की वार्त्ताओं और पुस्तकों से चुनी हुई एक सौ कहानियाँ संगृहीत हैं। प्रत्येक कहानी के साथ आपके द्वारा मनन करने के लिए आदरणीय दादा का या उनका पसंदीदा विचार तथा एक पुस्तक के रूप में व्यावहारिक अभ्यास भी दिया गया है, जो दादा की अपनी विशेषता है, जिसका अनुसरण करके आप लाभान्वित हो सकते हैं। न भूलनेवाली एक सौ रोचक-ज्ञानवर्धक कहानियों का प्रेरणादायक संग्रह।
Snow monkey ko pizza mat khilao
- Author Name:
Arun Pandey
- Book Type:

- Description: Collection of Short Stories
Maai Ka Shokgeet
- Author Name:
Doodhnath Singh
- Book Type:

-
Description:
‘माई का शोकगीत’ समेत इस संग्रह की पाँचों कहानियाँ इसका प्रमाण हैं कि दूधनाथ सिंह अपनी गद्य-भाषा पर कविता की तरह काम करते थे। और इस भाषा के माध्यम से वे जिस कथा को पकड़ते थे, वह हमारे जीवन का एक प्रामाणिक चित्र होता है।
‘हुँड़ार’ का निर्लज्ज और लम्पट चरित्र रायसाहब हो या ‘गुप्तदान’ के पांडेजी—ये सब वे चरित्र हैं जो होते तो हमारे आसपास ही हैं, लेकिन उन पर अक्सर हमारी निगाह नहीं जाती। हमारे देखने की व्यवस्थासम्मत आदतों के चलते ये पात्र हमारी निगाह से छूटते रहते हैं, जब तक कि कोई हमारा ध्यान उधर न ले जाए। ‘हुँड़ार’ का ‘मैं’ रायसाहब के आगमन पर अपने ‘कई तरह के गुस्से’ का जिस प्रकार विवरण देता है, वह अनायास ही हमें कुछ ऐसी उपस्थितियों के प्रति सजग कर देता है, जो अन्यथा हमें नहीं दिखतीं।
संग्रह की शीर्षक कहानी ‘माई का शोकगीत’ स्त्रियों पर घरेलू हिंसा का रोमांचकारी दस्तावेज़ है। इसमें एक स्त्री की कथा राष्ट्रीय स्वतंत्रता आन्दोलन की कथा के समानान्तर चलती है और पाठक के सामने यह सवाल छोड़ती है कि राष्ट्रों के इतिहास के समक्ष क्या व्यक्ति का इतिहास कोई अहमियत नहीं रखता?
Salaam
- Author Name:
Omprakash Valmiki
- Book Type:

-
Description:
‘दलित लेखन दलित ही कर सकता है’ को पारम्परिक सोच के ही नहीं, प्रगतिशील कहे जानेवाले आलोचकों ने भी संकीर्णता से लिया है। दलित-विमर्श साहित्य में व्याप्त छद्म को उघाड़ रहा है। साहित्य में जो भी अनुभव आते हैं वे सार्वभौमिक और शाश्वत नहीं होते।
इन सन्दर्भों में ओमप्रकाश वाल्मीकि की कहानियाँ दलित जीवन की संवेदनशीलता और अनुभवों की कहानियाँ हैं, जो एक ऐसे यथार्थ से साक्षात्कार कराती हैं, जहाँ हज़ारों साल की पीड़ा अँधेरे कोनों में दुबकी पड़ी है।
वाल्मीकि के इस संग्रह की कहानियाँ दलितों के जीवन-संघर्ष और उनकी बेचैनी के जीवन्त दस्तावेज़ हैं, दलित जीवन की व्यथा, छटपटाहट, सरोकार इन कहानियों में साफ़-साफ़ दिखाई पड़ते हैं।
ओमप्रकाश वाल्मीकि ने जहाँ साहित्य में वर्चस्व की सत्ता को चुनौती दी है, वहीं दबे-कुचले, शोषित-पीड़ित जन-समूह को मुखरता देकर उनके इर्द-गिर्द फैली विसंगतियों पर भी चोट की है। जो दलित विमर्श को सार्थक और गुणात्मक बनाती है।
समकालीन हिन्दी कहानी में दलित-चेतना की दस्तक देनेवाले कथाकार ओमप्रकाश वाल्मीकि की ये कहानियाँ अपने आप में विशिष्ट हैं। इन कहानियों में वस्तु जगत का आनन्द नहीं, दारुण दुःख भोगते मनुष्यों की बेचैनी है।
Gohanlagua
- Author Name:
Naseem Saketi
- Book Type:

-
Description:
नसीम साकेती निरन्तर लेखन में सक्रिय हैं, शाश्वत मूल्यों को समेटता इनका कथा जगत् बहुआयामी रहा है। क़लम की नोक को स्पर्श करती इनकी जीवन्त कहानियाँ अपने समय के यथार्थ तथा मानव जीवन-मूल्यों को विभिन्न कोणों से पड़ताल करती विशिष्ट शैली में सुखद एहसास देती हैं।
लेखक के मस्तिष्क की शिराओं ने छोटी-छोटी रोज़मर्रा की घटनाओं में से कथा-तत्त्वों के फूल चुनकर उनसे कथा के विभिन्न आकार के गुलदस्ते तैयार किए हैं। जिनसे आम आदमी की ज़िन्दगी की ख़ुशबू पाठक के मन-मस्तिष्क में भरकर दिल की गहराइयों में उतर जाती है और पाठक सोचने लगता है कि ऐसी घटनाओं तथा चरित्रों को तो हम अपने इर्द-गिर्द रोज़ देखते तथा महसूस करते हैं, जिसे लेखक ने शब्दों के माध्यम से कहानी का जामा पहना दिया है।
Dafa 604
- Author Name:
Apoorv Agarwal
- Book Type:

- Description: किसी भी समाज की कोई भी इकाई समाज के नैतिक मूल्यों, मान-मर्यादाओं और अनुशासन के मानदंडों का प्रतिबिम्ब होती है। फिर चाहे यह न्यायपीठों, न्यायाधीशों, या सत्य, न्याय और धर्म की रक्षा की प्रतिज्ञा लेनेवाले क़ानूनविद् ही क्यों न हों, जिन्हें समाज ने लोकतंत्र का प्रमुख आधार-स्तम्भ माना है। प्रस्तुत कहानियाँ हमें इसी क़ानूनी दाँव-पेच की जीती-जागती दुनिया में ले जाती हैं, जहाँ एक न्यायाधीश न्याय-परायणता निभाने के लिए अपने सर्वस्व की बलि दे देता है, तो दूसरा, सामाजिक बुराइयों के आगे घुटने टेक पूरे पेशे की पवित्रता भंग कर देता है। हिन्दी साहित्य की ये श्रेष्ठ कहानियाँ हमें उन पेचदार क़ानूनविदों से भी मिलवाती हैं, जिनके लम्बे होशियार हाथों में क़ानून की लगाम है। ‘दफ़ा 604’ उन्हीं की क़ानून-पटुता की सच्चाई उकेरती कहानियों का संग्रह है, जिसमें मानव-चरित्र के कई राग-रंग आलोकित होते हैं।
Shreshth Kahaniyan : Mannu Bhandari
- Author Name:
Mannu Bhandari
- Book Type:

-
Description:
“कथा-साहित्य में अक्सर ही नारी का चित्रण पुरुष की आकांक्षाओं (दमित आकांक्षाओं) में प्रेरित होकर किया गया है।” मन्नू भंडारी ने कहीं लिखा है। लेखकों ने या तो नारी की मूर्ति को अपनी कुंठाओं के अनुसार विकृतियों से तोड़-मरोड़ दिया है, या अपनी स्वप्न-नारी की तस्वीर उतारी है। वह देवी और दानवी के दो छोरों के बीच टकराती ‘पहेली’ नहीं, हाड़-मांस की मानवी भी है, इसे प्रायः सभी एक सिरे नज़रअन्दाज़ करते रहे हैं। साहित्य की युगों पुरानी कथा-रूढ़ियों के मलबे के नीचे से नारी के मौलिक व्यक्तित्व का अन्वेषण, उसके चरित्र का यथार्थ निरूपण-जैसी गहरी अन्तर्दृष्टि और निस्संग विश्लेषण की अपेक्षा रखता है।
वह मन्नू के पास है या नहीं—यह अभी कह पाना बहुत कठिन है। लेकिन मन्नू की कहानियों की दो विशेषताएँ उसे अपने समकालीनों से अलग करती हैं...व्यर्थ के भावोच्छ् वास में नारी के आँचल का दूध और आँखों का पानी दिखाकर उसने पाठकों की दया नहीं वसूली...वह एकदम यथार्थ के धरातल पर नारी का नारी की दृष्टि से अंकन करती है...लेकिन अन्य ‘यथार्थवादियों' की तरह शिल्पगत परिमार्जन या कहानी के आधारभूत कलात्मक संयम को भी हाथ से नहीं जाने देती...वे ‘परफ़ेक्ट’ कहानियाँ हैं...आधुनिक पाठक की कला-रुचि पर खरी उतर सकनेवाली कहानियाँ हैं, पुराने पाठक के लिए रोचक और सहज...
भ्रम और सेक्स के दुहरे जटिल-शोषण के संस्कारों के जाल से नारी के मौलिक और स्वतंत्र व्यक्तित्व को खोज निकालने के लिए जिस साहस और निर्भीकता की आवश्यकता है, वे ही मन्नू के सबसे सशक्त हथियार हैं...‘भारतीय नारी’ और ‘नारी की एकनिष्ठ गरिमा’ के नाम पर कुछ झूठे सन्तोष आख़िर उसे कब तक दबाए रहेंगे? क्या ‘यह भी सच’ नहीं है कि अपनी पूरी ईमानदारी से भावना के धरातल पर दो पुरुषों को भी नारी प्यार करती है! क्या यह आवश्यक ही है कि एक प्यार की स्वीकृति स्वयं को झूठा सिद्ध करके ही सम्भव हो? क्यों नारी एक की भोग्या बनकर दूसरे हर व्यक्ति के लिए जूठी हो जाती है, नीचे गिर जाती है? एक ऐसी ऊँचाई भी तो हो सकती है जहाँ शरीर का एक से अधिक सम्बन्ध बहुत नगण्य होकर दीखे...जहाँ नारी के शील को लेकर काठ की हाँडी की तरह एक बार शेष हो जाने की धारणाएँ प्रचलित हों, उस समाज में ये साहसिक प्रयोग कम ख़तरनाक नहीं हैं...और इन लांछनाओं का प्रारम्भ उसकी ‘गीत का चुम्बन’ कहानी से ही शुरू हो गया था...
लेकिन नारी-अस्तित्व के पारिवारिक और सामाजिक पक्ष के प्रति भी मन्नू पूर्ण सजग है... नागरिक सभ्यता की मशीनी ज़िन्दगी में ‘क्षय’ होती युवती, खुला आकाश खोजने वह भागे भले ही प्रकृति की गोद में, परन्तु शीघ्र ही यह भी महसूस करती है कि जिसे उसने उलझनों, घुटन से दूर खुला विस्तार समझा था, वह वास्तव में रुँधे पानी की मच्छर-पोषित काहिया सतह है... आकाश वहीं खोजना होगा जहाँ प्रवाह है...भँवर है तो क्या हुआ?
रूढ़िविद्रोही कथानकों, भावधरातलों का चयन, स्वानुभूति की प्रामाणिक सहजता मन्नू की शक्ति भी है, और सीमा भी...
Karja Ke Khatir
- Author Name:
Rana Pratap Singh
- Book Type:

- Description: Stories
Mansarovar Vol. 2 : Lottery Aur Anya kahaniyan
- Author Name:
Premchand
- Rating:
- Book Type:

- Description: प्रेमचन्द की रचनाएँ आधुनिक भारत को समझने का एक महत्त्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्हीं के समय से भारतीय पुनर्जागरण का प्रारम्भ होता है, जिसके पैरों की आहट उनकी रचनाओं में महसूस होती है। राष्ट्रीय जीवन की परिवर्तनशीलता, क्रिया-प्रतिक्रिया, प्रगति एवं प्रतिक्रियावादिता, धर्म की, मानवता की परछाइयाँ प्रेमचन्द की रचनाओं में झलकती हैं। —डॉ. जाफ़र रज़ा
Vimarsh Naqqashidar Cabinet
- Author Name:
Pankaj Subeer
- Book Type:

- Description: Book
Vashinda @ Teesari Duniya
- Author Name:
Pankaj Mitra
- Book Type:

-
Description:
पंकज मित्र हिन्दी के सर्वप्रिय कथाकारों में हैं जिन्हें हमेशा ही पढ़ा जाता है। ग्रामीण और क़स्बाई समाज की गहरी पड़ताल और सघन संवेदना तथा थोड़े व्यंग्य के साथ समाज के ठेठ देसी यथार्थ की अक्काशी करनेवाले कथाकार के रूप में उन्होंने अपना एक विशेष स्थान बनाया है।
इस संग्रह में शामिल कहानियाँ गाँव-समाज में होनेवाले नित नए बदलावों को रेखांकित करते हुए देश का एक नया कथा-वृत्तान्त रचती हैं जिसमें युवा पीढ़ी, उसकी उम्मीदें, निराशाएँ, बदलते जीवन-मूल्य और चाकू के फल की तरह गाँव की हवा में घुसता शहर कई तरह से उजागर हुआ है। ये कहानियाँ बताती हैं कि गाँव या कहें वह भारतीय चेतना जो एक भाव-धारा की तरह गाँव से चलकर क़स्बों और फिर शहरों तक में हमारी ख़ास पहचान होती हैं, भूमंडलीय वास्तविकता के सामने जो रूप धारण करती हैं, वह एक अलग ही भाव-भूमि है। उसका सम्बन्ध न योरोप-अमेरिका से जुड़ता है और न भारत की अपनी मिट्टी से। यह एक ख़तरनाक भूगोल है जिसके समतल होने तक शायद हम बहुत कुछ गँवा दें। ‘फ़ेसबुक मेन्स पार्लर’, ‘अधिग्रहण’ आदि कहानियाँ इस यथार्थ को बहुत कलात्मकता के साथ रेखांकित करती हैं।
देश के इस बदलते सामाजिक-सांस्कृतिक भूगोल में स्त्री फिर एक उम्मीद की तरह दिखती है, वह शायद इसलिए कि उसे अपना रास्ता बनाना है, ऐसा कोई रास्ता उसके पास था नहीं जिसके खो जाने का भय उसे हो। ‘जलेबीबाई डॉट कॉम’ इस सन्दर्भ में पठनीय है। ‘मनेकि लबरा नाई की दास्तान’ अपने शिल्प और अपने मंतव्य दोनों में कथाकार की क्षमता को गहराई से रेखांकित करती है।
Kannad Ki Shresth Kahaniyan
- Author Name:
Tippeswami
- Book Type:

-
Description:
कन्नड़ के सात लेखक ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ से सम्मानित हुए हैं। इनमें मास्ती और अनन्तमूर्ति तो इस विद्या के सर्वाधिक चर्चित ही नहीं, अपितु इस विद्या को गति देनेवाले कथाकारों में गिने जाते हैं। कन्नड़ कहानियों के पीछे एक सौ वर्षों का इतिहास है। इस कालखंड में हज़ारों कहानियाँ अपने समय और समाज के साथ संवाद करने में सक्षम रही हैं और दुर्लभ मिसालें रची हैं।
प्रस्तुत पुस्तक में चौबीस कन्नड़ कथाकारों की एक-एक कहानी को चुना गया है। चयन को लेकर यह दावा नहीं है कि इन कथाकारों की यही सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ हैं। बावजूद इसके इतना तो कहा ही जा सकता है कि शामिल कथाकारों की उन कहानियों को पुस्तक में संगृहीत करने की कोशिश की गई है, जो अपनी भाषा में पाठकों द्वारा सराही गई और काफ़ी चर्चित रही हैं। उम्मीद है कि ये कहानियाँ हिन्दी पाठकों को भी पसन्द आएँगी।
Jaanch Abhi Jari Hai
- Author Name:
Mamta Kaliya
- Book Type:

- Description: प्रस्तुत कहानी-संग्रह ‘जाँच अभी जारी है’ में मशहूर कहानीकार ममता कालिया की 16 अनुपम कहानियाँ संगृहीत हैं जो वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों को उजागर करती हैं। इस कहानी-संग्रह में ‘सेमिनार’, ‘उमस’, ‘जाँच अभी जारी है’, ‘रजत जयन्ती’, ‘इक्कीसवीं सदी’, ‘दाम्पत्य’, ‘नया त्रिकोण’, ‘प्रिया पाक्षिक’, ‘अनुभव’, ‘पहली’, ‘नायक’, ‘वर्दी’, ‘चोट्टिन’, ‘झूठ’, ‘शॉल’ तथा ‘इरादा’ आदि कहानियाँ संगृहीत हैं। नए कलेवर में सजाया-सँवारा गया ममता जी का प्रस्तुत कहानी-संग्रह पाठकों को अवश्य पसन्द आएगा।
Aparajita
- Author Name:
Shivani
- Book Type:

- Description: महिला कथाकारों में जितनी ख्याति और लोकप्रियता शिवानी ने प्राप्त की है, वह एक उदाहरण है श्रेष्ठ लेखन के लोकप्रिय होने का। शिवानी लोकप्रियता के शिखर को छू लेनेवाली ऐसी हस्ती हैं, जिनकी लेखनी से उपजी कहानियाँ कलात्मक और मर्मस्पर्शी होती हैं। अन्तर्मन की गहरी पर्तें उघाड़ने वाली ये मार्मिक कहानियाँ शिवानी की अपनी मौलिक पहचान हैं जिसके कारण उनका अपना एक व्यापक पाठक वर्ग तैयार हुआ। इनकी कहानियाँ न केवल श्रेष्ठ साहित्यिक उपलब्धियाँ हैं, बल्कि रोचक भी इतनी अधिक हैं कि आप एक बार शुरू करके पूरी पढ़े बिना छोड़ ही न सकेंगे। प्रस्तुत संग्रह में ‘दंड’, ‘मन का प्रहारी’, ‘श्राप’, ‘लिखूँ...’, ‘मेरा भाई’, ‘अपराजिता’, ‘निर्वाण’, ‘सौत’, ‘तीन कन्या’, ‘चन्नी’ एवं ‘धुआँ’ कहानियाँ संकलित हैं। हर कथा अपनी मोहक शैली में अभिभूत कर देने की अपार क्षमता रखती है। कलात्मक कौशल के साथ रची गई ये कहानियाँ हमारी धरोहर हैं जिन्हें आज की नई पीढ़ी अवश्य पढ़ना चाहेगी।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book