Masroof Aurat

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Author:

Tasnif Haider

Language:

Hindi

249

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इस किताब में आपको जिन कहानीकारों की कहानियाँ मिलेंगी, वो बहुत से लोगों के लिए नए हैं। इस किताब के ज़रीए कोशिश की गई है कि उन आवाज़ों को इकठ्ठा किया जाए जो अक्सर नज़र-अन्दाज़ कर दी गई हैं। इन कहानियों के ज़रीए आपको ये बताने की कोशिश की गई है कि हमारे समाज में जहाँ औरतें हमारे आस-पास साँस ले रही हैं, पैदा होते ही उन पर किस तरह पत्थर फेंकने शुरू कर दिए जाते हैं। ये कहानियाँ औरतों के साथ होने वाले ज़ुल्म का दस्तावेज़ भी हैं और समाज में उनको ना-समझ और दूसरा दर्जा देने वाले मर्दों का आईना भी।

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ISBN
9789394494725
Pages
141
Avg Reading Time
5 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Format:

Piracy Free

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About the Book

इस किताब में आपको जिन कहानीकारों की कहानियाँ मिलेंगी, वो बहुत से लोगों के लिए नए हैं। इस किताब के ज़रीए कोशिश की गई है कि उन आवाज़ों को इकठ्ठा किया जाए जो अक्सर नज़र-अन्दाज़ कर दी गई हैं। इन कहानियों के ज़रीए आपको ये बताने की कोशिश की गई है कि हमारे समाज में जहाँ औरतें हमारे आस-पास साँस ले रही हैं, पैदा होते ही उन पर किस तरह पत्थर फेंकने शुरू कर दिए जाते हैं। ये कहानियाँ औरतों के साथ होने वाले ज़ुल्म का दस्तावेज़ भी हैं और समाज में उनको ना-समझ और दूसरा दर्जा देने वाले मर्दों का आईना भी।

Book Details

  • ISBN
    9789394494725
  • Pages
    141
  • Avg Reading Time
    5 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

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Masroof Aurat is not an anthology of celebrated names — it is a deliberate act of recovery. The collection gathers stories by Hindi women writers who have been systematically overlooked, offering narratives that document the arc of violence a woman endures from the moment she is born. These are not tales of triumph or escape; they are unflinching testimonies of cruelty embedded in the everyday. The editors frame this work as both dastaawaiz — a documentary record — and aaina — a mirror held up to men who treat women as intellectually inferior and socially secondary. Published by Rekhta Publications, the book positions itself within a tradition of feminist realism that demands recognition for voices erased by dominant literary canons. Each story breathes in the narrow corridors of patriarchy, charting the stones thrown at daughters and the silences imposed on mothers.

यह किताब पढ़ते समय मुझे कैसा अनुभव मिलेगा?

यह किताब आपको भावनात्मक रूप से झकझोरेगी। ये कहानियाँ आराम या मनोरंजन के लिए नहीं हैं — ये समाज की उस कठोर सच्चाई को उजागर करती हैं जो औरतों के साथ जन्म से ही शुरू हो जाती है। हर कहानी एक दस्तावेज़ है जो पाठक को असहज करती है, सोचने पर मजबूर करती है। यह पढ़ना एक गंभीर, विचारशील अनुभव है जो आपके भीतर सवाल छोड़ जाएगा।

यह किताब किसके लिए सबसे उपयुक्त है और पाठक से क्या अपेक्षा करती है?

  • उन पाठकों के लिए जो नारीवादी साहित्य और सामाजिक यथार्थवाद में रुचि रखते हैं
  • जो लोग मुख्यधारा की साहित्यिक कैनन से बाहर की आवाज़ें सुनना चाहते हैं
  • जो भारतीय समाज में लैंगिक हिंसा के ऐतिहासिक और समकालीन रूपों को समझना चाहते हैं
  • यह किताब आसान पठन नहीं है — यह भावनात्मक परिपक्वता और कठिन सच्चाइयों का सामना करने की तैयारी माँगती है

इस किताब का विषय आज के भारतीय पाठकों के लिए सांस्कृतिक या ऐतिहासिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है?

आज भी भारत में कन्या भ्रूण हत्या, घरेलू हिंसा, और महिलाओं को दोयम दर्जे का नागरिक मानने की प्रवृत्ति जारी है। यह किताब उन आवाज़ों को मंच देती है जिन्हें साहित्य में नज़रअंदाज़ किया गया — यह सांस्कृतिक स्मृति का पुनर्निर्माण है। समकालीन नारीवादी आंदोलनों के संदर्भ में, यह संकलन ऐतिहासिक गवाही और वर्तमान प्रतिरोध के बीच सेतु बनाता है।

इस विषय पर लेखकों का दृष्टिकोण क्या विशिष्ट बनाता है?

इस संकलन की विशिष्टता इसके संपादकीय चयन में है — यह जानबूझकर उन महिला कहानीकारों को शामिल करता है जो साहित्यिक इतिहास से बाहर रह गईं। ये कहानियाँ महिमामंडन नहीं करतीं, बल्कि क्रूरता का दस्तावेज़ीकरण करती हैं। लेखिकाएँ पुरुषवादी समाज को आईना दिखाती हैं — बिना किसी रोमानी आवरण के, बिना किसी मुक्ति की झूठी उम्मीद के।

यह किताब पाठक के मन में भावनात्मक, बौद्धिक या सांस्कृतिक रूप से क्या छोड़ जाती है?

  • भारतीय समाज में लैंगिक हिंसा की गहरी जड़ों की समझ
  • उन महिला आवाज़ों के प्रति सम्मान जिन्हें साहित्यिक इतिहास ने भुला दिया
  • यह सवाल कि हम अपने आस-पास की महिलाओं के साथ कैसा व्यवहार करते हैं
  • एक बेचैनी जो पाठक को निष्क्रिय नहीं रहने देती — यह किताब कार्रवाई की माँग करती है

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