Kusum Khemani ki Lokpriya Kahaniyan

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Author:

Kusum Khemani

Language:

Hindi

175

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कुसुम खेमानी का नारी-विमर्श बिल्कुल अलग ढंग का है। वे अपनी स्त्रियों का ऐसा आदर करती हैं कि उनके स्वभाविक व्यक्तित्व के कारण वे किसी और दुनिया की लगने लगती हैं, जबकि वे इस धरती पर ही हैं। जडि़याबाई का उपन्यास भी ऐसी ही एक स्त्री की प्रगति की कहानी है, जो एक धनी परिवार की होने के बावजूद बचपन से ही संवेदनशील और करुणामयी है, और जीवन के मूल्यों में जीते हुए आश्चर्यजनक रूप से गांधीजी के ट्रस्टीशिप सिद्धांत की कट्टर अनुयायी बन जाती है। जडि़याबाई अपने शब्दों और कार्यों दोनों में ही पंचशील के पाँचों सिद्धांतों का पालन करती हैं और सर्वे भवन्तु सुखिनः के लिए अपने ‘तन-मन-धन’ सब कुछ अर्पित कर देती हैं। उनका आचार-व्यवहार पूरे ब्रह्मांड के तत्वों के प्रति श्रद्धापूर्ण है। वे पृथ्वी और उसके वासियों में ही उस परा-लौकिक दिव्य शक्ति को महसूस करती रहती हैं और सदैव उससे श्रद्धावान बनी रहती हैं। वे उस अनंत को मंदिर, मस्जिद और शिवालय में नहीं ढूंढ़तीं, बल्कि इस धरती के कण-कण में उसकी उपस्थिति को अनुभव करती रहती हैं।

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ISBN
9789386300430
Pages
176
Avg Reading Time
6 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Format:

Piracy Free

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About the Book

कुसुम खेमानी का नारी-विमर्श बिल्कुल अलग ढंग का है। वे अपनी स्त्रियों का ऐसा आदर करती हैं कि उनके स्वभाविक व्यक्तित्व के कारण वे किसी और दुनिया की लगने लगती हैं, जबकि वे इस धरती पर ही हैं। जडि़याबाई का उपन्यास भी ऐसी ही एक स्त्री की प्रगति की कहानी है, जो एक धनी परिवार की होने के बावजूद बचपन से ही संवेदनशील और करुणामयी है, और जीवन के मूल्यों में जीते हुए आश्चर्यजनक रूप से गांधीजी के ट्रस्टीशिप सिद्धांत की कट्टर अनुयायी बन जाती है। जडि़याबाई अपने शब्दों और कार्यों दोनों में ही पंचशील के पाँचों सिद्धांतों का पालन करती हैं और सर्वे भवन्तु सुखिनः के लिए अपने ‘तन-मन-धन’ सब कुछ अर्पित कर देती हैं। उनका आचार-व्यवहार पूरे ब्रह्मांड के तत्वों के प्रति श्रद्धापूर्ण है। वे पृथ्वी और उसके वासियों में ही उस परा-लौकिक दिव्य शक्ति को महसूस करती रहती हैं और सदैव उससे श्रद्धावान बनी रहती हैं। वे उस अनंत को मंदिर, मस्जिद और शिवालय में नहीं ढूंढ़तीं, बल्कि इस धरती के कण-कण में उसकी उपस्थिति को अनुभव करती रहती हैं।

Book Details

  • ISBN
    9789386300430
  • Pages
    176
  • Avg Reading Time
    6 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

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