Jugani
(0)
Author:
Bhavana ShekharPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
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अपनी दूसरी पुस्तक ‘जुगनी’ में पन्द्रह कहानियों के माध्यम से भावना शेखर ने आसपास घटती साधारण घटनाओं को भी असाधारण बनाने की अपनी संवेदनशीलता का परिचय दिया है। सरल भाषा में परिपक्व भावनाओं को गूँथा गया है। अधिकांश कहानियाँ नारी पात्रों के इर्द-गिर्द घूमती हैं और सफलतापूर्वक उनके अन्तर्मन में झाँकने का प्रयास करती हैं। भावना शेखर नारी-मन की कुशल चितेरी हैं—कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी।</p> <p>सदियों से दमित-कुंठित और शोषित नारी का चित्रण करना लेखिका का अभीष्ट नहीं वरन् अन्याय से लोहा लेती नारी को अन्ततः विजयी दर्शाना इन्हें अवश्य प्रिय लगता है। प्रायः हर कहानी एक ‘पॉजिटिव नोट’ पर समाप्त होती है।</p> <p>वृन्दा हो या नीलांजना, देव या जुगनी—पात्रों का चरित्र-चित्रण तो प्रभावशाली है ही, पुरुष और नारी पात्रों की देहयष्टि का वर्णन भी लेखिका बेबाकी से कर जाती हैं—चाहे वह ‘त्रिकोण’ का हेमन्त हो या ‘वन्ध्या’ की अम्बिका या गोगो या ‘मलेच्छन’ की नैन्सी।</p> <p>भावना शेखर के लेखन में प्रकृति के साथ पात्रों का सहज ही साहचर्य स्थापित हो जाता है। पहाड़ों से अपने जुड़ाव के कारण वे पाठकों को भी प्रकृति-भ्रमण की ओर बरबस खींच लेती हैं। अपनी कहानियों के माध्यम से न केवल बचपन में बार-बार लौटती हैं, अपितु सम्पूर्ण मानव जीवन की गतिविधियों पर एक दर्शनशास्त्री की तरह अपनी निश्छल टिप्पणी भी देती हैं।</p> <p>संक्षेप में, पुस्तक की सभी कहानियाँ धारदार और असरदार हैं। अतः निस्सन्देह पठनीय और संग्रहणीय हैं।</p> <p>—डॉ. नरेन्द्रनाथ पांडेय
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अपनी दूसरी पुस्तक ‘जुगनी’ में पन्द्रह कहानियों के माध्यम से भावना शेखर ने आसपास घटती साधारण घटनाओं को भी असाधारण बनाने की अपनी संवेदनशीलता का परिचय दिया है। सरल भाषा में परिपक्व भावनाओं को गूँथा गया है। अधिकांश कहानियाँ नारी पात्रों के इर्द-गिर्द घूमती हैं और सफलतापूर्वक उनके अन्तर्मन में झाँकने का प्रयास करती हैं। भावना शेखर नारी-मन की कुशल चितेरी हैं—कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी।</p>
<p>सदियों से दमित-कुंठित और शोषित नारी का चित्रण करना लेखिका का अभीष्ट नहीं वरन् अन्याय से लोहा लेती नारी को अन्ततः विजयी दर्शाना इन्हें अवश्य प्रिय लगता है। प्रायः हर कहानी एक ‘पॉजिटिव नोट’ पर समाप्त होती है।</p>
<p>वृन्दा हो या नीलांजना, देव या जुगनी—पात्रों का चरित्र-चित्रण तो प्रभावशाली है ही, पुरुष और नारी पात्रों की देहयष्टि का वर्णन भी लेखिका बेबाकी से कर जाती हैं—चाहे वह ‘त्रिकोण’ का हेमन्त हो या ‘वन्ध्या’ की अम्बिका या गोगो या ‘मलेच्छन’ की नैन्सी।</p>
<p>भावना शेखर के लेखन में प्रकृति के साथ पात्रों का सहज ही साहचर्य स्थापित हो जाता है। पहाड़ों से अपने जुड़ाव के कारण वे पाठकों को भी प्रकृति-भ्रमण की ओर बरबस खींच लेती हैं। अपनी कहानियों के माध्यम से न केवल बचपन में बार-बार लौटती हैं, अपितु सम्पूर्ण मानव जीवन की गतिविधियों पर एक दर्शनशास्त्री की तरह अपनी निश्छल टिप्पणी भी देती हैं।</p>
<p>संक्षेप में, पुस्तक की सभी कहानियाँ धारदार और असरदार हैं। अतः निस्सन्देह पठनीय और संग्रहणीय हैं।</p>
<p>—डॉ. नरेन्द्रनाथ पांडेय
Book Details
-
ISBN9788126717583
-
Pages126
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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यशपाल के लेखकीय सरोकारों का उत्स सामाजिक परिवर्तन की उनकी आकांक्षा, वैचारिक प्रतिबद्धता और परिष्कृत न्याय-बुद्धि है। यह आधारभूत प्रस्थान बिन्दु उनके उपन्यासों में जितनी स्पष्टता के साथ व्यक्त हुए हैं, उनकी कहानियों में वह ज़्यादा तरल रूप में, ज़्यादा गहराई के साथ कथानक की शिल्प और शैली में न्यस्त होकर आते हैं। उनकी कहानियों का रचनाकाल चालीस वर्षों में फैला हुआ है। प्रेमचन्द के जीवनकाल में ही वे कथा-यात्रा आरम्भ कर चुके थे, यह अलग बात है कि उनकी कहानियों का प्रकाशन किंचित् विलम्ब से आरम्भ हुआ। कहानीकार के रूप में उनकी विशिष्टता यह है कि उन्होंने प्रेमचन्द के प्रभाव से मुक्त और अछूते रहते हुए अपनी कहानी-कला का विकास किया। उनकी कहानियों में संस्कारगत जड़ता और नए विचारों का द्वन्द्व जितनी प्रखरता के साथ उभरकर आता है, उसने भविष्य के कथाकारों के लिए एक नई लीक बनाई, जो आज तक चली आ रही है। वैचारिक निष्ठा, निषेधों और वर्जनाओं से मुक्त न्याय तथा तर्क की कसौटियों पर खरा जीवन—ये कुछ ऐसे मूल्य हैं जिनके लिए हिन्दी कहानी यशपाल की ऋणी
है।‘उत्तराधिकारी’ कहानी-संग्रह में उनकी ये कहानियाँ शामिल हैं: ‘उत्तराधिकारी’, ‘ज़ाब्ते की कार्रवाई’, ‘अगर हो जाता?’, ‘अंग्रेज़ का घुँघरू’, ‘अमर’, ‘चन्दन महाशय’, ‘कुल-मर्यादा’, ‘डिप्टी साहब’ और ‘जीत की हार’।
Apni Vapasi
- Author Name:
Chitra Mudgal
- Book Type:

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समकालीन भारतीय कथाकारों में चित्रा मुद्गल का विशिष्ट स्थान है। उनकी समाज सापेक्ष सृजनात्मकता के ज़द में कहना ग़लत न होगा—समूचा भारतीय समाज है। अपनी मिट्टी के रंगों का भूगोल है। जाहिर है उसी माटी-पानी में गुँथा-मड़ा, अवाक् कर देने वाली विसंगतियों में जीता, साँसें भरता वह आमजन है, जो व्यवस्था और पूँजी की मिलीभगत की विसात का मोहरा बना हुआ है। ग़ज़ब तो यह है, उसके ज़हालत और संघर्ष को कहीं विराम मिलता हुआ नज़र नहीं आ रहा।
यह भी कहना चाहता हूँ, महिला कथाकारों पर जिस तरह के सीमा संकेत लगाए जाते हैं, दायरों और दरीचों के सन्दर्भ में, चित्रा जी उन सभी सीमाओं का अतिक्रमण सहज रूप से इसलिए कर सकी हैं कि उनका संवेद घर-परिवार-रिश्ते-नातों की बारिकियों को उसके भीतरी संवेगों में जिस नफ़ासत से कथात्मक सौन्दर्य में बाँधता है, उसी गहराई और कलात्मकता से देहरी के बाहर निकल अपसंस्कृति की आँधी में डूब रही ज़िन्दगी के तनावों और आर्थिक दबावों, चाहे वह एक्जीक्यूटिव क्लास हो या फ्रीलांसर वर्ग—सभी को रेखांकित करने में सफल होती हैं।
मैं यह भी कहना चाहता हूँ, उनकी ज्यादातर कहानियों के चरित्र भावुकता की तर्कहीन नदी में न बहकर आर्थिक दबाव की परिणतियों को स्वीकार करते हुए ही अधिक प्रभावपूर्ण बनते हैं।
—शानी
Hanukiah Ari Hogada Deepa 1939-2015
- Author Name:
Vittal Shenoy
- Book Type:

- Description: DESCRIPTION AWAITED
Maseeha Ki Aankhein
- Author Name:
Balram
- Book Type:

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‘मसीहा की आँखें’ में दो किस्म की लघुकथाएँ हैं—पहली लघुकहानी जैसी तो दूसरी लघुव्यंग्य जैसी। दोनों ही किस्म की रचनाएँ अपने लघु कलेवर में गहरी चोट करने की क्षमता से लैस हैं। बलराम का यह संग्रह सही अर्थों में लघुकथा को बहुविध स्थापित तो करता ही है, उसके प्रतिमानों को सर्जनात्मक लेखन से पुष्ट भी कर देता है। अब इसमें कोई सन्देह नहीं रह गया है कि लघुकथा एक सशक्त विधा है। संवाद, संवेदना, भाषा, चरित्र, शिल्प और परिवेश के वे सारे तत्त्व इसके भी वैसे ही अंग हैं, जैसे उपन्यास और कहानी के होते हैं। बलराम ने इसके जरिये उन सारी दलीलों को खारिज कर दिया है कि लघुकथा का कोई भविष्य नहीं। वास्तविकता तो यह है कि आज जब व्यक्ति के पास अधिक समय नहीं है, इस भागमभाग भरी जिन्दगी में यही विधा सबसे कारगर और प्रभावी है। ‘डायरी’ लघुकथा विधा की विकास यात्रा तो कराती ही है, उसके सौन्दर्यशास्त्रीय पक्ष पर भी गहरा मंथन करती है। उल्लेखनीय लघुकथाओं के विवेचन के साथ बलराम ने उनके प्रतिमानों को स्थिर, विन्यास को सुदृढ़ और सर्जनात्मक विधा के रूप में उनकी अन्तर्क्रिया को समझने की एक नई व्यवस्था दी है, जो न सिर्फ लेखकों के लिए उपयोगी है, बल्कि उनके लिए भी विशेष रूप से लाभप्रद है, जो लघुकथा को सही अर्थों में समझना चाहते हैं।
—ज्योतिष जोशी
Khachchar Aur Admi
- Author Name:
Yashpal
- Book Type:

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यशपाल के लेखकीय सरोकारों का उत्स सामाजिक परिवर्तन की उनकी आकांक्षा, वैचारिक प्रतिबद्धता और परिष्कृत न्याय-बुद्धि है। यह आधारभूत प्रस्थान बिन्दु उनके उपन्यासों में जितनी स्पष्टता के साथ व्यक्त हुए हैं, उनकी कहानियों में वह ज़्यादा तरल रूप में ज़्यादा गहराई के साथ कथानक की शिल्प और शैली में न्यस्त होकर आते हैं। उनकी कहानियों का रचनाकाल चालीस वर्षों में फैला हुआ है। प्रेमचन्द के जीवनकाल में ही वे कथा-यात्रा आरम्भ कर चुके थे, यह अलग बात है कि उनकी कहानियों का प्रकाशन: किंचित् विलम्ब से आरम्भ हुआ। कहानीकार के रूप में उनकी विशिष्टता यह है कि उन्होंने प्रेमचन्द के प्रभाव से मुक्त और अछूते रहते हुए अपनी कहानी-कला का विकास किया। उनकी कहानियों में संस्कारगत जड़ता और नए विचारों का द्वन्द्व जितनी प्रखरता के साथ उभरकर आता है उसने भविष्य के कथाकारों के लिए एक नई लीक बनाई, जो आज तक चली आ रही है। वैचारिक निष्ठा, निषेधों और वर्जनाओं से मुक्त न्याय तथा तर्क की कसौटियों पर ख़रा जीवन—ये कुछ मूल्य हैं जिनके लिए हिन्दी कहानी यशपाल की ऋणी है।
‘खच्चर और आदमी’ कहानी-संग्रह में उनकी ये कहानियाँ शामिल हैं : ‘वैष्णवी’, ‘मक्खी या मकड़ी’, ‘उपदेश’, ‘कलाकार की आत्महत्या आदमी या पैसा?’ ‘जीव दया’, ‘चोरी और चोरी’, ‘अश्लील!’, ‘सत्य का द्वन्द्व तथा खच्चर और आदमी’।
A Boundless Moments
- Author Name:
Paramita Satpathy +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: English translation by Snehaprava Das from the Odia original of Paramita satpathy's Sahitya akademi award winning collection of stories,Prapti.
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