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Jugani

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अपनी दूसरी पुस्तक ‘जुगनी’ में पन्द्रह कहानियों के माध्यम से भावना शेखर ने आसपास घटती साधारण घटनाओं को भी असाधारण बनाने की अपनी संवेदनशीलता का परिचय दिया है। सरल भाषा में परिपक्व भावनाओं को गूँथा गया है। अधिकांश कहानियाँ नारी पात्रों के इर्द-गिर्द घूमती हैं और सफलतापूर्वक उनके अन्तर्मन में झाँकने का प्रयास करती हैं। भावना शेखर नारी-मन की कुशल चितेरी हैं—कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी। सदियों से दमित-कुंठित और शोषित नारी का चित्रण करना लेखिका का अभीष्ट नहीं वरन् अन्याय से लोहा लेती नारी को अन्ततः विजयी दर्शाना इन्हें अवश्य प्रिय लगता है। प्रायः हर कहानी एक ‘पॉजिटिव नोट’ पर समाप्त होती है। वृन्दा हो या नीलांजना, देव या जुगनी—पात्रों का चरित्र-चित्रण तो प्रभावशाली है ही, पुरुष और नारी पात्रों की देहयष्टि का वर्णन भी लेखिका बेबाकी से कर जाती हैं—चाहे वह ‘त्रिकोण’ का हेमन्त हो या ‘वन्ध्या’ की अम्बिका या गोगो या ‘मलेच्छन’ की नैन्सी। भावना शेखर के लेखन में प्रकृति के साथ पात्रों का सहज ही साहचर्य स्थापित हो जाता है। पहाड़ों से अपने जुड़ाव के कारण वे पाठकों को भी प्रकृति-भ्रमण की ओर बरबस खींच लेती हैं। अपनी कहानियों के माध्यम से न केवल बचपन में बार-बार लौटती हैं, अपितु सम्पूर्ण मानव जीवन की गतिविधियों पर एक दर्शनशास्त्री की तरह अपनी निश्छल टिप्पणी भी देती हैं। संक्षेप में, पुस्तक की सभी कहानियाँ धारदार और असरदार हैं। अतः निस्सन्देह पठनीय और संग्रहणीय हैं। —डॉ. नरेन्द्रनाथ पांडेय

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अपनी दूसरी पुस्तक ‘जुगनी’ में पन्द्रह कहानियों के माध्यम से भावना शेखर ने आसपास घटती साधारण घटनाओं को भी असाधारण बनाने की अपनी संवेदनशीलता का परिचय दिया है। सरल भाषा में परिपक्व भावनाओं को गूँथा गया है। अधिकांश कहानियाँ नारी पात्रों के इर्द-गिर्द घूमती हैं और सफलतापूर्वक उनके अन्तर्मन में झाँकने का प्रयास करती हैं। भावना शेखर नारी-मन की कुशल चितेरी हैं—कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी।

सदियों से दमित-कुंठित और शोषित नारी का चित्रण करना लेखिका का अभीष्ट नहीं वरन् अन्याय से लोहा लेती नारी को अन्ततः विजयी दर्शाना इन्हें अवश्य प्रिय लगता है। प्रायः हर कहानी एक ‘पॉजिटिव नोट’ पर समाप्त होती है।

वृन्दा हो या नीलांजना, देव या जुगनी—पात्रों का चरित्र-चित्रण तो प्रभावशाली है ही, पुरुष और नारी पात्रों की देहयष्टि का वर्णन भी लेखिका बेबाकी से कर जाती हैं—चाहे वह ‘त्रिकोण’ का हेमन्त हो या ‘वन्ध्या’ की अम्बिका या गोगो या ‘मलेच्छन’ की नैन्सी।

भावना शेखर के लेखन में प्रकृति के साथ पात्रों का सहज ही साहचर्य स्थापित हो जाता है। पहाड़ों से अपने जुड़ाव के कारण वे पाठकों को भी प्रकृति-भ्रमण की ओर बरबस खींच लेती हैं। अपनी कहानियों के माध्यम से न केवल बचपन में बार-बार लौटती हैं, अपितु सम्पूर्ण मानव जीवन की गतिविधियों पर एक दर्शनशास्त्री की तरह अपनी निश्छल टिप्पणी भी देती हैं।

संक्षेप में, पुस्तक की सभी कहानियाँ धारदार और असरदार हैं। अतः निस्सन्देह पठनीय और संग्रहणीय हैं।

—डॉ. नरेन्द्रनाथ पांडेय

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Hardbound
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
3rd
Publication year
2009
Weight
282 grams
ISBN-13
9788126717583
Pages
126
Reading time
~4 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14.5 × 22 cm
Language
Hindi

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