jadoo : Ek Hansi, Ek Heroine
(0)
Author:
Ravindra ArohiPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
199
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जीवन की उदासियों के रंग इतने गाढ़े और प्रबल हैं कि वे असहनीय हैं। अकसर फ़िक्शन जीवन से अधिक दुर्दान्त रूप में उपस्थित होता है। उपस्थित होकर वह क्या करता है? ‘यह क्या’ रवीन्द्र आरोही की कहानियों का मूल सत्त्व है। इन कहानियों में उदासी, पीड़ा, छल और प्रेम यानी जीवन का सब कुछ है। पर वह इन रूपों में है कि सहनीय है और सहने का साहस भी देता है।</p> <p>रवीन्द्र की कहानियाँ उदासियों से जीवन का सौन्दर्य शिल्प रचती हैं। इनमें एक नदी है जो लोक चेतना की ठसक के साथ क़स्बों, गाँवों और नगरों के बीच डोलती है और पिछले वक़्तों से किन्हीं अनाम बिन्दु तक की कथा यात्रा करती है। जिस प्रकार आँसू वेदना के अणुसूत्र हैं वैसे ही इन कहानियों में स्मृति के अणुसूत्र हैं। स्मृतिविहीन निचाट संसार के समानान्तर स्मृतिलोक रचती इन कहानियों में वैसा कोई पात्र नहीं है जिसके प्रेम में आप न पड़ जाएँ।</p> <p>—उपासना
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जीवन की उदासियों के रंग इतने गाढ़े और प्रबल हैं कि वे असहनीय हैं। अकसर फ़िक्शन जीवन से अधिक दुर्दान्त रूप में उपस्थित होता है। उपस्थित होकर वह क्या करता है? ‘यह क्या’ रवीन्द्र आरोही की कहानियों का मूल सत्त्व है। इन कहानियों में उदासी, पीड़ा, छल और प्रेम यानी जीवन का सब कुछ है। पर वह इन रूपों में है कि सहनीय है और सहने का साहस भी देता है।</p>
<p>रवीन्द्र की कहानियाँ उदासियों से जीवन का सौन्दर्य शिल्प रचती हैं। इनमें एक नदी है जो लोक चेतना की ठसक के साथ क़स्बों, गाँवों और नगरों के बीच डोलती है और पिछले वक़्तों से किन्हीं अनाम बिन्दु तक की कथा यात्रा करती है। जिस प्रकार आँसू वेदना के अणुसूत्र हैं वैसे ही इन कहानियों में स्मृति के अणुसूत्र हैं। स्मृतिविहीन निचाट संसार के समानान्तर स्मृतिलोक रचती इन कहानियों में वैसा कोई पात्र नहीं है जिसके प्रेम में आप न पड़ जाएँ।</p>
<p>—उपासना
Book Details
-
ISBN9789392186073
-
Pages152
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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ಸಾಹಿತ್ಯ ಅಕಾದೆಮಿಯ ಪ್ರಧಾನ ಉದ್ದೇಶದಂತೆ ಇತರ ಭಾರತೀಯ ಭಾಷೆಗಳಿಗೆ ಅನುವಾದಗೊಳ್ಳಲು ಒಂದು ಪ್ರಾತಿನಿಧಿಕ ಕಥಾ ಸಂಕಲನವನ್ನು ಸಂಪಾದಿಸಿಕೊಡುವಂತೆ 2008ರಲ್ಲಿ ಅಕಾದೆಮಿಯ ಕನ್ನಡ ಸಲಹಾ ಸಮಿತಿ ಲೇಖಕರಾದ ಶ್ರೀ ಫಕೀರ್ ಮಹಮದ್ ಕಟ್ಟಾಡಿ ಹಾಗೂ ಡಾ.ಕೃಷ್ಣಮೂರ್ತಿ ಹನೂರು ಅವರನ್ನು ಕೇಳಿಕೊಂಡಿತು. ಅದಕ್ಕನುಗುಣವಾಗಿ ಆಧುನಿಕ ಕನ್ನಡ ಕಥಾಲೋಕದ ಹಿರಿಯ ಚೇತನ ಮಾಸ್ತಿಯವರಿಂದ ಮೊದಲುಗೊಂಡು ವಿವಿಧ ಮನೋಧರ್ಮಗಳಿಗೆ ಸೇರಿದಂತಹ ಮೂವತ್ತು ಕಥೆಗಾರರ ಕಥೆಗಳನ್ನು ಸಂಪಾದಕರು ಇಲ್ಲಿ ಕೊಟ್ಟಿದ್ದಾರೆ. ಕಳೆದೊಂದು ಶತಮಾನದಲ್ಲಿ ಕನ್ನಡ ಕಥಾ ಜಗತ್ತು ತೆರೆದುಕೊಂಡ ಪ್ರಕ್ರಿಯೆ, ಅದರ ವೈವಿಧ್ಯತೆ ಹಾಗೂ ಅನಾವರಣಗೊಂಡ ರೀತಿಯನ್ನು ಸಮರ್ಥವಾಗಿ ಪ್ರತಿಪಾದಿಸುವ ಕಥೆಗಳು ಈ ಸಂಕಲನದಲ್ಲಿವೆ. ಶ್ರೀ ಫಕೀರ್ ಮಹಮದ್ ಕಟ್ಟಾಡಿ ಹಾಗೂ ಡಾ.ಕೃಷ್ಣಮೂರ್ತಿ ಹನೂರು ಇಬ್ಬರೂ ವಿಶಿಷ್ಟ ಕಥೆಗಾರರಾಗಿ ಪ್ರಸಿದ್ದರು ಹಾಗೂ ಕಾದಂಬರಿ, ವಿಮರ್ಶೆ ಇನ್ನಿತರ ಸಾಹಿತ್ಯ ಪ್ರಕಾರಗಳಲ್ಲೂ ಗಣನೀಯ ಕೊಡುಗೆಗಳನ್ನು ನೀಡಿರುವ ಲೇಖಕರಾಗಿ ಜನಪ್ರಿಯರಾಗಿದ್ದಾರೆ.
Pratinidhi Kahaniyan : Govind Mishra
- Author Name:
Govind Mishra
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समकालीन कथा-परिवेश और यथार्थवादी कथा-लेखन के सन्दर्भ में टिप्पणी करते हुए एक जगह गोविन्द मिश्र ने लिखा है कि “यथार्थवादी लेखन के इस युग में लेखक को सामाजिक विसंगतियों की यंत्रणा चित्रित करने के आगे उन बातों और चरित्रों में भी जाना होगा, जिनकी वजह से विसंगतियाँ है”, ताकि न तो मानवीय यंत्रणा के अधूरेपन का अहसास हो और न क्रान्तिकारिता के खोखलेपन का। दरअसल हिन्दी-कहानी के विभिन्न दौरों से निरपेक्ष रहते हुए जिन कथाकारों ने अपनी एक स्वतंत्र पहचान बनाई है, गोविन्द मिश्र उनकी पहली क़तार में आते हैं। यह संकलन उनके कई प्रकाशित कहानी-संग्रहों से उनकी महत्त्वपूर्ण और बहुचर्चित कहानियों का चयन है। इन कहानियों के माध्यम से हम वर्तमान भारतीय समाज के विभिन्न चरित्रों और स्तरों से परिचित होते हैं। अपने कथा-चरित्रों के प्रति लेखक का कोई पूर्वग्रह नहीं, बल्कि वह उन्हें जीवन-स्थितियों के बीच पहचानता है। यही कारण है कि ये कहानियाँ हमें जीवन की विविधता तक ले जाती हैं और हमारे भीतर एक इन्द्रधनुषी संसार सजीव हो उठता है।
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