Gandh Gatha
(0)
Author:
Mrinal PandePublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
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‘गंध गाथा’ समकालीन हिन्दी साहित्य के अग्रणी कथाकारों में एक मृणाल पाण्डे का नया संग्रह है जिसमें शामिल कहानियाँ देखन और कहन दोनों स्तरों पर न सिर्फ़ हमारे सोच को प्रभावित करती हैं बल्कि मर्म को भी गहरे छूती हैं। ‘गंध गाथा’ की कहानियाँ अपने समय के चाक पर रची गई ऐसी कहानियाँ हैं जिनकी जड़ें बौद्ध और जैन जातक कथाओं के सोतों से भी अपनी नमी हासिल करती हैं, और स्त्री-प्रश्न हो या समाज-सत्ता के अन्य मसले, एक बड़े कैनवस पर एक नए आस्वाद को रचते हैं। </p> <p>मृणाल जी के इस संग्रह को पाठक उनके शब्दों में इस तरह भी देख सकते हैं—‘‘हर कथा मेरे लिए कहीं न कहीं टुकड़ा-टुकड़ा मिले जीवन-ज्ञान के बीच सचाई की घनचक्करी तलाश है।...केदारघाटी का हादसा, पार्टीशन की विभीषिका, मनुष्य और पशु के बीच का शब्दहीन प्रेम और बतकही, इनकी बाबत मोटामोटी हम सब जानते हैं। पर इस संकलन की कथाओं में जहाँ, जिस तरह और जिस लिए कुदरत और व्यक्तित्वों के पास-पास सरकने से जो कई तरह के ब्रह्मांड टूटते, मिलते और दूर होते दिखते थे, उनका पीछा मेरे लिए अधिक महत्त्व रखता रहा है। इनमें कई बार जीवन के गहरे लेकिन अनुत्तरित प्रश्नों के छोर पर, जवाब की जो-जो सम्भावनाएँ झिलमिल करती मुझे दिखी हैं, उनका चित्रण सरलीकृत रिपोर्टिंग के परे कहीं अधिक महत्त्व का है।’’</p> <p>हम कह सकते हैं कि ‘गंध गाथा’ एक ऐसा संग्रह है जिसमें रचित लोक अपनी चिन्ताओं से अवगत तो कराता ही है, अपने चिन्तन से समृद्ध भी करता है।
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‘गंध गाथा’ समकालीन हिन्दी साहित्य के अग्रणी कथाकारों में एक मृणाल पाण्डे का नया संग्रह है जिसमें शामिल कहानियाँ देखन और कहन दोनों स्तरों पर न सिर्फ़ हमारे सोच को प्रभावित करती हैं बल्कि मर्म को भी गहरे छूती हैं। ‘गंध गाथा’ की कहानियाँ अपने समय के चाक पर रची गई ऐसी कहानियाँ हैं जिनकी जड़ें बौद्ध और जैन जातक कथाओं के सोतों से भी अपनी नमी हासिल करती हैं, और स्त्री-प्रश्न हो या समाज-सत्ता के अन्य मसले, एक बड़े कैनवस पर एक नए आस्वाद को रचते हैं। </p>
<p>मृणाल जी के इस संग्रह को पाठक उनके शब्दों में इस तरह भी देख सकते हैं—‘‘हर कथा मेरे लिए कहीं न कहीं टुकड़ा-टुकड़ा मिले जीवन-ज्ञान के बीच सचाई की घनचक्करी तलाश है।...केदारघाटी का हादसा, पार्टीशन की विभीषिका, मनुष्य और पशु के बीच का शब्दहीन प्रेम और बतकही, इनकी बाबत मोटामोटी हम सब जानते हैं। पर इस संकलन की कथाओं में जहाँ, जिस तरह और जिस लिए कुदरत और व्यक्तित्वों के पास-पास सरकने से जो कई तरह के ब्रह्मांड टूटते, मिलते और दूर होते दिखते थे, उनका पीछा मेरे लिए अधिक महत्त्व रखता रहा है। इनमें कई बार जीवन के गहरे लेकिन अनुत्तरित प्रश्नों के छोर पर, जवाब की जो-जो सम्भावनाएँ झिलमिल करती मुझे दिखी हैं, उनका चित्रण सरलीकृत रिपोर्टिंग के परे कहीं अधिक महत्त्व का है।’’</p>
<p>हम कह सकते हैं कि ‘गंध गाथा’ एक ऐसा संग्रह है जिसमें रचित लोक अपनी चिन्ताओं से अवगत तो कराता ही है, अपने चिन्तन से समृद्ध भी करता है।
Book Details
-
ISBN9788183619387
-
Pages136
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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Ramdhari Singh Dinkar
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- Description: अनादि काल से ही बोधकथाओं की अपनी महत्ता रही है। इनका मुख्य उद्देश्य यही रहा है कि प्रेरक और गूढ़ प्रसंगों को रोचक शैली में जनमानस तक पहुँचाया जाए ताकि इनमें निहित नीतियों एवं उपदेशों से वे अपने जीवन में सृजनात्मक चेतना विकसित कर सकें। रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की इस पुस्तक ‘उजली आग’ में इस तथ्य को सहज ही जाना-समझा जा सकता है। ‘उजली आग’ बच्चों और किशोरों से लेकर प्रौढ़ पाठकों तक की जीवन-शैली को कुतूहल, मनोरंजन, शिक्षा, मार्गदर्शन आदि के ज़रिए गहरे प्रभावित करनेवाली पुस्तक है। दिनकर की इस अनुपम कृति में जो भी बोधकथाएँ शामिल हैं, जैसे—आदमी का देवत्व, बीज बनने की राह, धर्म लोगे, धर्म? गुफावासी, अफ़सर और पैग़म्बर, उजला हाथी और गेहूँ के खेत, जीवन का बोझ, नर-नारी, माया की रचना, नारी की रुचि, अर्धनारीश्वर, नदी के पार की आग, कलाकार, बनिया और किसान, संसार का इतिहास, पत्थर के दूसरी ओर, पराजय, फूल की आरी, निर्माता और विजेता, सपनों का सपना, सुकरात का मकान, साहसी माता, घोड़ा और ऊँट, ऊँचाई के गीत, शासन और राजनीति आदि, वे सब पढ़ने वाले की जीवन-दृष्टि को गहरे प्रभावित करती है। राष्ट्रकवि की इस पुस्तक से आशा है कि यह जीवन और समाज में अपनी नवीनता से नए परिवेश के निर्माण में अवश्य सहायक सिद्ध होगी।
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