Farishtey
Author:
Rajendra Prasad PandeyPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections0 Ratings
Price: ₹ 476
₹
595
Available
राजेन्द्र प्रसाद पांडेय उन विरले कहानीकारों में से हैं, जो अपने समय, समाज और व्यक्ति के चेहरे पर ओढ़ी हुई कृत्रिम परतों को प्याज के छिलके की तरह उकेरकर तह में छिपे उसके वास्तविक चेहरे को पाठकों के सामने पेश कर देते हैं। ‘बड़प्पन-छुटपन’ ऐसी ही कहानी है। उनकी कहानियाँ व्यक्ति मनोविज्ञान के साथ सामाजिक और समूह मनोविज्ञान का अनुभवजन्य आख्यान भी हैं। वे शहरी और ग्रामीण, दोनों तरह की संवेदना के चितेरे कथाकार हैं। वे वहाँ के सामाजिक परिवेश, स्थिति-परिस्थति और संघर्ष के स्याह-सफेद पक्षों को आमने-सामने रखकर निर्णय के लिए पाठक को स्वतंत्र छोड़ देते हैं। वे समाज के तलहट में जीवनयापन करने वाले लोगों के जीवन के उस क्रूर और विकृत यथार्थ का दस्तावेजीकरण करते हैं, जो इससे पहले हिन्दी कथा संसार में लगभग अनुपस्थित था। उनकी कहानियाँ हर तरह के भ्रष्टाचार के विरुद्ध मुहिम छेड़ती हैं। उनकी कहानी ‘ठठरी’ इसका बेहतरीन उदाहरण है। कहानियाँ उनका अनुभवजन्य यथार्थ बनकर लोगों को संवेदित-उद्वेलित करती हैं, जिनमें देशज भाषा की छौंक सुगन्ध की तरह व्याप्त है। कहानियों का शिल्प बेहद चुस्त है। ‘फरिश्ते’ की कहानियाँ किसी वाद या आन्दोलन से न जुड़कर स्वतंत्रचेता लेखन की राह चलती हैं। इसलिए पाठक से तादात्म्य स्थापित कर उसे अलग तरह का पाठकीय आस्वाद प्रदान करती हैं।</p>
<p>—विनय दास
ISBN: 9788119989041
Pages: 160
Avg Reading Time: 5 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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इन कहानियों का सबसे मुखर और केन्द्रीय, यद्यपि नितान्त अदृश्य चरित्र ‘समय’ है। वस्तुओं, चरित्रों और घटनाओं का अधिष्ठान या निरा एक आयाम होने से अधिक यहाँ यह समय स्वयं वस्तुओं, चरित्रों और घटनाओं के हाथों बनती-मिटती एक हस्ती हैं। ये कहानियाँ समय की रचना करती हैं और (इस तरह) मानो प्रस्तावित करती हैं कि समय का प्रत्येक रूप एक संकल्प-सापेक्ष रचना है।
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