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Atha katha Bajrang bali

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अवधेश प्रीत आठवें दशक के उन चर्चित कथाकारों में हैं, जिनकी कहानियों को शीर्ष आलोचकों से लेकर सुधी पाठकों तक ने खुले दिल से सराहा है। वह अपने समय और समाज के ज़रूरी सवालों से टकराते हैं और उनमें न्यस्त स्याह-सफ़ेद की शिनाख़्त करते हुए पाठकों को उन सच्चाइयों तक ले जाते हैं, जो अक्सर अदीठ रह जाती हैं। अवधेश प्रीत की ‘नृशंस’, ‘अलीमंज़िल’, ‘बाबू जी की छतरी’, ‘तालीम’, ‘तीसरी औरत’, ‘हमज़मीन’, ‘चाँद के पार एक चाभी’ जैसी अनेक कहानियाँ हैं,जो अपने कथ्य-वैविध्य, कथा-भाषा और शिल्पगत प्रयोगों के कारण सुधीजनों का ध्यान आकर्षित करती रही हैं। अवधेश प्रीत अपनी कहानियों के ज़रिये उन संवेदनशील प्रान्तरों में भी पहुँचने से नहीं हिचकते, जहाँ रूढ़ियों को तोड़ने के अनेक जोखिम फन काढ़े खड़े हैं। अवधेश प्रीत के इस संग्रह की कहानियाँ अपने बेबाकपन और कहन की विशिष्टता के कारण चर्चित-प्रशंसित रही हैं। अपनी प्रवाहमयी भाषा, किस्सागोई के दिलचस्प अन्दाज़, यथार्थ, अनुभव और फैंटेसी के प्रयोग से अपने कथा अभीष्ट को उद्घाटित करती ये कहानियाँ मनुष्य की विडम्बना,समाज की संवेदना, साम्प्रदायिकता के रूपान्तरण और राजनीति की जटिलताओं का आख्यान हैं। अनायास नहीं कि इस संग्रह की कहानी 'कजरी' को पढ़कर वरिष्ठ समालोचक विश्वनाथ त्रिपाठी अपनी निजी प्रतिक्रिया में कहते हैं, यह प्रेमचन्द के रंग-ढंग की अद्भुत कहानी है। अवधेश प्रीत की कहानियाँ जितनी पठनीय होती हैं, उतनी ही चाक्षुष भी। यही कारण है कि उनकी अनेक कहानियों के देश की कई रंग-संस्थाओं ने नाट्य-मंचन किये हैं। अपनी पठनीयता और दृश्यात्मकता के संयोग से अवधेश प्रीत अपनी कहानियों में जो जादू जगाते हैं, वो उन्हें अपने समकालीन लेखकों में पृथक पहचान देती हैं। दरअसल, इस संग्रह की कहानियाँ जादुई यथार्थ की नहीं, यथार्थ में निहित जादुई-शक्ति की कहानियाँ हैं।

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अवधेश प्रीत आठवें दशक के उन चर्चित कथाकारों में हैं, जिनकी कहानियों को शीर्ष आलोचकों से लेकर सुधी पाठकों तक ने खुले दिल से सराहा है। वह अपने समय और समाज के ज़रूरी सवालों से टकराते हैं और उनमें न्यस्त स्याह-सफ़ेद की शिनाख़्त करते हुए पाठकों को उन सच्चाइयों तक ले जाते हैं, जो अक्सर अदीठ रह जाती हैं। अवधेश प्रीत की ‘नृशंस’, ‘अलीमंज़िल’, ‘बाबू जी की छतरी’, ‘तालीम’, ‘तीसरी औरत’, ‘हमज़मीन’, ‘चाँद के पार एक चाभी’ जैसी अनेक कहानियाँ हैं,जो अपने कथ्य-वैविध्य, कथा-भाषा और शिल्पगत प्रयोगों के कारण सुधीजनों का ध्यान आकर्षित करती रही हैं। अवधेश प्रीत अपनी कहानियों के ज़रिये उन संवेदनशील प्रान्तरों में भी पहुँचने से नहीं हिचकते, जहाँ रूढ़ियों को तोड़ने के अनेक जोखिम फन काढ़े खड़े हैं।
अवधेश प्रीत के इस संग्रह की कहानियाँ अपने बेबाकपन और कहन की विशिष्टता के कारण चर्चित-प्रशंसित रही हैं। अपनी प्रवाहमयी भाषा, किस्सागोई के दिलचस्प अन्दाज़, यथार्थ, अनुभव और फैंटेसी के प्रयोग से अपने कथा अभीष्ट को उद्घाटित करती ये कहानियाँ मनुष्य की विडम्बना,समाज की संवेदना, साम्प्रदायिकता के रूपान्तरण और राजनीति की जटिलताओं का आख्यान हैं। अनायास नहीं कि इस संग्रह की कहानी 'कजरी' को पढ़कर वरिष्ठ समालोचक विश्वनाथ त्रिपाठी अपनी निजी प्रतिक्रिया में कहते हैं, यह प्रेमचन्द के रंग-ढंग की अद्भुत कहानी है।
अवधेश प्रीत की कहानियाँ जितनी पठनीय होती हैं, उतनी ही चाक्षुष भी। यही कारण है कि उनकी अनेक कहानियों के देश की कई रंग-संस्थाओं ने नाट्य-मंचन किये हैं। अपनी पठनीयता और दृश्यात्मकता के संयोग से अवधेश प्रीत अपनी कहानियों में जो जादू जगाते हैं, वो उन्हें अपने समकालीन लेखकों में पृथक पहचान देती हैं। दरअसल, इस संग्रह की कहानियाँ जादुई यथार्थ की नहीं, यथार्थ में निहित जादुई-शक्ति की कहानियाँ हैं।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Paperback
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
1st
Publication year
2023
Weight
1000 grams
ISBN-13
9788119835621
Pages
160
Reading time
~5 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 22 cm
Language
Hindi

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