Mahan Vaigyanik Mahilaye
Author:
Gunakar MuleyPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Science0 Ratings
Price: ₹ 240
₹
300
Available
प्राचीनकाल से नारी को सर्जनात्मक शक्ति का प्रतीक माना जाता रहा है। सम्भवतः इसीलिए प्रकृति की कल्पना भी नारी रूप में ही की गई है। स्त्री का सहजबोध, उसकी जिजीविषा और रचनात्मकता उसे पुरुष से श्रेष्ठ नहीं तो उसके बराबर तो बना ही देती है।
फिर भी यह आश्चर्यजनक है कि प्राचीनकाल में रानियाँ हुईं, वीरांगनाएँ हुईं, सन्त और कवयित्रियाँ हुईं, लेकिन एक लम्बे कालखंड तक किसी महिला वैज्ञानिक के बारे में कोई जानकारी नहीं मिलती। पहली महिला वैज्ञानिक के रूप में हमें चौथी सदी में सिकन्दरिया के यूनानी विद्या केन्द्र में हाइपेशिया का पता चलता है।
लेकिन आधुनिक युग में जैसे-जैसे शिक्षा और समानता-आधारित लोकतंत्र का विकास हुआ, हमें अनेक महिला वैज्ञानिकों की जानकारी मिलती है जिन्हें समय-समय पर नोबेल पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया और विज्ञान के क्षेत्र में जिनका योगदान किसी पुरुष वैज्ञानिक से कम नहीं है।
यह पुस्तक हाइपेशिया से लेकर आधुनिक युग तक की ऐसी ही दस महिला वैज्ञानिकों और उनकी वैज्ञानिक उपलब्धियों का परिचय देती है। कहने की आवश्यकता नहीं कि इस पुस्तक से विज्ञान में रुचि रखनेवाले पाठकों को कई स्तरों पर लाभ होगा।
ISBN: 9788126722723
Pages: 84
Avg Reading Time: 3 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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आइंस्टाइन के इस क्रान्तिकारी सिद्धान्त के बाद परमाणु का विखंडन सम्भव हुआ और अपार ऊर्जा का स्रोत मनुष्य के हाथ लगा। पिछले नौ दशकों में भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में असाधारण प्रगति हुई है जिसके चलते हम विज्ञान की नई क्रान्ति के द्वार पर खड़े हैं।
हिन्दी में विज्ञान को सरल भाषा में जनसाधारण तक सफलतापूर्वक पहुँचाने वाले गुणाकर मुळे की यह पुस्तक मूलतः 1972 में ‘साप्ताहिक हिन्दुस्तान’ में प्रकाशित उनकी लेखमाला का संकलित रूप है। इन लेखों को चित्रों तथा हिन्दी-अंग्रेज़ी पारिभाषिक शब्दावली से समृद्ध कर, और उपयोगी रूप में इस पुस्तक में प्रस्तुत किया गया है।
कहने की ज़रूरत नहीं कि मुळे जी की अन्य पुस्तकों की तरह यह पुस्तक भी न सिर्फ़ विज्ञान में रुचि रखनेवाले पाठकों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी, बल्कि साधारण पाठकों में वैज्ञानिक विषयों के प्रति नई रुचि भी जाग्रत करेगी।
भौतिकी के जिन विषयों को इस पुस्तक में समाहित किया गया है, उनमें प्रमुख रूप से सापेक्षवाद और क्वांटम सिद्धान्त, परमाणु ऊर्जा और प्राथमिक कणों की दुनिया के साथ-साथ भौतिक विज्ञानों के भविष्य पर एक सामग्री विश्लेषण भी शामिल है।
Ganit Ki Paheliyan
- Author Name:
Gunakar Muley
- Book Type:

- Description: गणित जितना कठिन है, उतना ही मनोरंजक भी है। सामान्यतः गणित को एक कठिन विषय माना जाता है, लेकिन वास्तव में ऐसा है नहीं, कुछ लोग इसमें उतना ही आनन्द लेते हैं जितना किसी खेल में। वस्तुतः गणित है भी ऐसा ही विषय जिसकी गुत्थियों को समझना-खोलना अपने आप में बेहद मनोरंजक है। प्रसिद्ध विज्ञान-लेखक गुणाकर मुळे की इस पुस्तक में कुछ ऐसी पहेलियों को संकलित किया गया है जो न सिर्फ़ गणित के अबूझ दिखनेवाले रहस्यों का रास्ता बताती हैं, बल्कि गणित के प्रति रुचि भी जाग्रत् करती हैं। पुस्तक में अंकगणित, ज्यामिति, प्रायिकता-सिद्धान्त व तार्किक गणित पर आधारित पहेलियों के साथ-साथ अन्य प्रचलित पहेलियाँ भी संकलित की गई हैं। कहने की आवश्यकता नहीं कि पहेलियों के माध्यम से गणित की जानकारी बढ़ानेवाली यह पुस्तक उन पाठकों के लिए अत्यन्त उपयोगी सिद्ध होगी जो गणित को हौवा समझते हैं।
Sansar Ke Mahan Ganitagya
- Author Name:
Gunakar Muley
- Book Type:

- Description: वैज्ञानिकों ने भौतिक जगत् के अन्वेषण के लिए गणित का उपयोग परमावश्यक माना है। लेकिन इतने महत्त्व का विषय होते हुए भी अंग्रेज़ी तक में गणित के इतिहास और गणितज्ञों के बारे में जानकारी देनेवाले ज़्यादा ग्रन्थ नहीं हैं। जो हैं, उनमें भारत या पूर्व के अन्य देशों की गणितीय उपलब्धियों के बारे में बहुत कम सूचनाएँ मिलती हैं। इस दृष्टि से प्रस्तुत पुस्तक की उपादेयता स्वयंसिद्ध है। यह इसलिए और भी महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि हिन्दी में यह अपने विषय की सम्भवतः पहली कृति है। इस ग्रन्थ में विद्वान लेखक ने यूनानी गणितज्ञ यूक्लिड (300 ई.पू.) से लेकर जर्मन गणितज्ञ डेविड हिल्बर्ट (1862-1943) तक संसार के उनचालीस गणितज्ञों के जीवन और कृतित्व का परिचय दिया है। इनमें पाँच भारतीय गणितज्ञ भी हैं—आर्यभट, ब्रह्मगुप्त, महावीराचार्य, भास्कराचार्य और रामानुजन, जो संसार के श्रेष्ठ गणितज्ञों के समुदाय में स्थान पाने के निश्चय ही अधिकारी हैं। हम न्यूटन, गॉस, आयलर, रीमान, कान्तोर आदि महान गणितज्ञों के गणितीय सिद्धान्तों के बारे में पढ़ते हैं, उनका उपयोग करते हैं। मगर इन गणितज्ञों के संघर्षमय जीवन के बारे में हमारी जानकारी नहीं के बराबर होती है। प्रस्तुत ग्रन्थ में गणितज्ञों को कालक्रमानुसार रखा गया है, इसलिए इस ग्रन्थ से प्राचीन काल से लेकर वर्तमान सदी के आरम्भ काल तक के गणित के बहुमुखी विकास की भी सिलसिलेवार जानकारी मिल जाती है। ग्रन्थ के अन्त में पारिभाषिक शब्दावली, सहायक ग्रन्थ-सूची, नामानुक्रमणिका, विषयानु- क्रमणिका आदि के छह परिशिष्ट हैं। संसार के महान गणितज्ञों के जीवन और कृतित्व से सम्बन्धित यह प्रेरणाप्रद जानकारी इस ग्रन्थ में मिलेगी, हिन्दी में पहली बार
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