🇮🇳 India’s home-grown full-stack ecosystem for Publishers, Authors, Writers, and Readers. 🎊🎊 Celebrate Your Language, Authors from Your Own Land, with Rachnaye!!! 🎊🎊 Enjoy 🎧 Audiobooks at Rachnaye, download the Rachnaye App from Play Store or App Store

20vin Sadi Mein Bhautik Vigyan

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


About the book

सभी वैज्ञानिक विषयों का मूल भौतिकी है, इसी से जैव-भौतिकी, रसायन-भौतिकी और आनुवंशिकी जैसी विज्ञान-सरणियों का उदय हुआ। भौतिक तकनीकी से ही लेसर और कम्प्यूटर जैसे साधनों की खोज हुई। कहा जाता है कि व्यापक आपेक्षिकता का सिद्धान्त आज तक का सबसे सुन्दर सिद्धान्त रहा है। आइंस्टाइन के इस क्रान्तिकारी सिद्धान्त के बाद परमाणु का विखंडन सम्भव हुआ और अपार ऊर्जा का स्रोत मनुष्य के हाथ लगा। पिछले नौ दशकों में भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में असाधारण प्रगति हुई है जिसके चलते हम विज्ञान की नई क्रान्ति के द्वार पर खड़े हैं। हिन्दी में विज्ञान को सरल भाषा में जनसाधारण तक सफलतापूर्वक पहुँचाने वाले गुणाकर मुळे की यह पुस्तक मूलतः 1972 में ‘साप्ताहिक हिन्दुस्तान’ में प्रकाशित उनकी लेखमाला का संकलित रूप है। इन लेखों को चित्रों तथा हिन्दी-अंग्रेज़ी पारिभाषिक शब्दावली से समृद्ध कर, और उपयोगी रूप में इस पुस्तक में प्रस्तुत किया गया है। कहने की ज़रूरत नहीं कि मुळे जी की अन्य पुस्तकों की तरह यह पुस्तक भी न सिर्फ़ विज्ञान में रुचि रखनेवाले पाठकों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी, बल्कि साधारण पाठकों में वैज्ञानिक विषयों के प्रति नई रुचि भी जाग्रत करेगी। भौतिकी के जिन विषयों को इस पुस्तक में समाहित किया गया है, उनमें प्रमुख रूप से सापेक्षवाद और क्वांटम सिद्धान्त, परमाणु ऊर्जा और प्राथमिक कणों की दुनिया के साथ-साथ भौतिक विज्ञानों के भविष्य पर एक सामग्री विश्लेषण भी शामिल है।

Read more

₹ 200

160 20% off

Unavailable

Rachnaye membership

Pick a membership and see exactly what it gets you

  • 15 Free Deliveries
  • 1 Free Book up to ₹500 MRP

Format

This Book is out of stock
Frequently bought together
20vin Sadi Mein Bhautik Vigyan This book ₹160
Taaron Bhara Aakash Gunakar Muley ₹399
Akshar Katha Gunakar Muley ₹399
3 books selected ₹998 ₹958
This Book is out of stock

100% Original

Fast Dispatch

Secure Payment

About the Book

सभी वैज्ञानिक विषयों का मूल भौतिकी है, इसी से जैव-भौतिकी, रसायन-भौतिकी और आनुवंशिकी जैसी विज्ञान-सरणियों का उदय हुआ। भौतिक तकनीकी से ही लेसर और कम्प्यूटर जैसे साधनों की खोज हुई। कहा जाता है कि व्यापक आपेक्षिकता का सिद्धान्त आज तक का सबसे सुन्दर सिद्धान्त रहा है।

आइंस्टाइन के इस क्रान्तिकारी सिद्धान्त के बाद परमाणु का विखंडन सम्भव हुआ और अपार ऊर्जा का स्रोत मनुष्य के हाथ लगा। पिछले नौ दशकों में भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में असाधारण प्रगति हुई है जिसके चलते हम विज्ञान की नई क्रान्ति के द्वार पर खड़े हैं।

हिन्दी में विज्ञान को सरल भाषा में जनसाधारण तक सफलतापूर्वक पहुँचाने वाले गुणाकर मुळे की यह पुस्तक मूलतः 1972 में ‘साप्ताहिक हिन्दुस्तान’ में प्रकाशित उनकी लेखमाला का संकलित रूप है। इन लेखों को चित्रों तथा हिन्दी-अंग्रेज़ी पारिभाषिक शब्दावली से समृद्ध कर, और उपयोगी रूप में इस पुस्तक में प्रस्तुत किया गया है।

कहने की ज़रूरत नहीं कि मुळे जी की अन्य पुस्तकों की तरह यह पुस्तक भी न सिर्फ़ विज्ञान में रुचि रखनेवाले पाठकों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी, बल्कि साधारण पाठकों में वैज्ञानिक विषयों के प्रति नई रुचि भी जाग्रत करेगी।

भौतिकी के जिन विषयों को इस पुस्तक में समाहित किया गया है, उनमें प्रमुख रूप से सापेक्षवाद और क्वांटम सिद्धान्त, परमाणु ऊर्जा और प्राथमिक कणों की दुनिया के साथ-साथ भौतिक विज्ञानों के भविष्य पर एक सामग्री विश्लेषण भी शामिल है।

Book details

Fast dispatchShips within 48 hours
Secure paymentOnline, or cash on delivery on eligible orders
100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Hardbound
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
2nd
Publication year
2015
Weight
258 grams
ISBN-13
9788126722730
Pages
108
Reading time
~4 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 22 cm
Language
Hindi

Recommended for you

Customer reviews

Be the first to write a review

Read this one? Tell other readers what you thought about the story, the translation and the print.

Offers

Loading offers…

whatsapp