The Song Of The Cell
Author:
Siddhartha MukherjeePublisher:
Penguin IndiaLanguage:
EnglishCategory:
Science0 Ratings
Price: ₹ 497.17
₹
599
Available
From Pulitzer Prize-winning and #1 New York Times bestselling author of The Emperor of All Maladies and The Gene, The Song of The Cell is the third book in this extraordinary writer’s exploration of what it means to be human-rich with Siddhartha Mukherjee’s revelatory and exhilarating stories of scientists, doctors, and all the patients whose lives may be saved by their work.
In the late 1600s, a distinguished English polymath, Robert Hooke, and an eccentric Dutch cloth merchant, Antonie van Leeuwenhoek, look down their handmade microscopes. What they see introduces a radical concept that sweeps through biology and medicine, touching virtually every aspect of the two sciences and altering both forever. It is the fact that complex living organisms are assemblages of tiny, self-contained, self-regulating units. Our organs, our physiology, our selves-hearts, blood, brains-are built from these compartments. Hooke christens them ‘cells’.
The discovery of cells-and the reframing of the human body as a cellular ecosystem-announced the birth of a new kind of medicine based on the therapeutic manipulations of cells. A hip fracture, a cardiac arrest, Alzheimer’s, dementia, AIDS, pneumonia, lung cancer, kidney failure, arthritis, COVID-all could be viewed as the results of cells, or systems of cells, functioning abnormally. And all could be perceived as loci of cellular therapies.
In The Song of the Cell, Mukherjee tells the story of how scientists discovered cells, began to understand them, and are now using that knowledge to create new humans. He seduces readers with writing so vivid, lucid, and suspenseful that complex science becomes thrilling. Told in six parts, laced with Mukherjee’s own experience as a researcher, doctor, and prolific reader,
ISBN: 9780143467984
Pages: 576
Avg Reading Time: 19 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: विज्ञान की दृष्टि से प्राचीन भारत विश्व के अग्रणी देशों में रहा है। चिकित्सा के क्षेत्र में ‘चरक-संहिता’ और ‘सुश्रुत-संहिता’ के साथ-साथ संसार-भर में प्रचलित शून्य पर आधारित दाशमिक स्थानमान अंक-पद्धति इसका प्रमाण है। धातुकर्म के क्षेत्र में, दिल्ली में कुतुब मीनार के निकट स्थित सोलह सौ वर्ष पुराना लौह-स्तम्भ भी प्राचीन भारत की वैज्ञानिक चेतना का ज्वलन्त उदाहरण है। यह पुस्तक विज्ञान-विषयों के अग्रणी लेखक गुणाकर मुळे की ओर से भारतीय वैज्ञानिक चेतना के प्रति एक कृतज्ञता-ज्ञापन है। विज्ञान की जटिल गुत्थियों को सरल शब्दों में जन-जन तक पहुँचाने की मुहिम में जीवन-भर कटिबद्ध रहे श्री मुळे ने इस पुस्तक में वेदों में वैज्ञानिक अवधारणाओं से लेकर प्राचीन भारत में गणित के विकास, आयुर्वेद के उद्भव और उन्नयन के साथ-साथ वराहमिहिर और नागार्जुन आदि वैज्ञानिकों के अवदान पर प्रकाश डाला है। भारत में प्लास्टिक सर्जरी के इतिहास पर पुस्तक में एक स्वतंत्र अध्याय रखा गया है। इसके अलावा परिशिष्ट में प्राचीन भारत से सम्बन्धित प्रमुख तिथियों का संकलन किया गया है, जिनसे इस देश की वैज्ञानिक चेतना के विकास का एक समग्र मानचित्र हमारे सामने आ जाता है।
Aadhunik Bharat Ke Mahan Vaigyanik
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Gunakar Muley
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- Description: हमारे प्राचीन वैज्ञानिकों ने अपने ग्रन्थ संस्कृत भाषा में लिखे। आधुनिक काल के वैज्ञानिक अपने शोध-निबन्ध अंग्रेज़ी में लिखते हैं। अत: इन वैज्ञानिकों के कृतित्व को आज की जनभाषा में प्रस्तुत करने में जो कठिनाइयाँ होती हैं, उनकी कल्पना करना कठिन नहीं है। पुराने संस्कृत ग्रन्थों के ज्ञान को आज की भारतीय भाषाओं में समझाना उतना कठिन नहीं हैं। परन्तु विरेशी भाषाओं में प्रस्तुत किए गए आधुनिक विज्ञान को जनभाषा में समझाने में अनेक कठिनाइयाँ हैं। आधुनिक विज्ञान अब विशेष सांकेतिक चिन्हों और पारिभाषिक शब्दों में प्रस्तुत किया जाता है। आधुनिक भारत के दस वैज्ञानिकों को मैंने चुना है। दस को ही चुनना था, इसीलिए यह चुनाव। वरना, और भी कई वैज्ञानिकों को चुना जा सकता है। अक्सर यह होता है कि ‘प्रशासक-वैज्ञानिक’ को अधिक प्रसिद्ध मिल जाती है और अपने क्षेत्र में विशेष कार्य करनेवाले वैज्ञानिक जनसाधारण के लिए गुमनाम बने रहते हैं। आशा है, पाठक इस पुस्तक को पसन्द करेंगे। —‘अपनी बात’ से
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