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Book Details
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ISBN9789391080242
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Pages129
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Avg Reading Time4 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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- Description: अनूप मणि त्रिपाठी की व्यंग्य रचनाओं को पढ़ने के पहले मुझे लगता था कि हर व्यंग्य का स्वाद एक जैसा होता है। उनके इस संग्रह को आद्योपांत पढ़ने के बाद समझ में आया कि खुद उनकी हर रचना का स्वाद अलग है। राजनीति के विद्रूप, निष्ठुरता और नंगई को जिस तरह गले से पकड़कर वे अनावृत करते और उस पर चोट करते हैं वह अद्वितीय है। उनका व्यंग्य औरों से इस मामले में अलग और मूल्यवान है कि वह पाठक की समझ पर लानत ही नहीं भेजता, उसे समझदार भी बनाता है। जनता का ध्यान कैसे असली और ज्वलन्त मुद्दों से भटकाकर नकली और काल्पनिक मुद्दों में उलझाया जाता है इसके एक से एक नमूने आपको कदम कदम पर मिलते हैं। 'बहती लाशों की कहानियाँ' पढ़कर लगता है व्यंग्य नहीं पढ़ रहे, कोई हॉरर फिल्म देख रहे हैं। भाषा की विदग्धता का उदाहरण देने से इसलिए बच रहा हूँ कि आख़िर कितने उदाहरण देंगे। फिर भी बानगी के लिए एक उदाहरण दे रहा हूँ। शीर्षक है—‘साँपों की सभा’। ‘वह धारा प्रवाह बोलता रहा, ‘बस हमें सपने और भय दोनों साथ-साथ दिखाने होंगे! अच्छे-अच्छे शब्दों के चयन पर ध्यान केन्द्रित करना होगा!’ उसने चूहे की डेड बॉडी पर एक नजर मारी। फिर बोला, ‘देखिए! कैसे हमारे रंग में यह रँगने के लिए तैयार हो गया!’ वह आगे बोला, ‘जहर भरिए, खूब भरिए, मगर उपदेश की शक्ल में...आप देखेंगे कि उपदेश स्वतः उन्माद में बदलता जाएगा...बस फैलकर हर जगह हमें अपना काम लगातार करते रहना है। क्या समझे!’ एक बूढ़ा साँप जोश में बोला, ‘समझ गए! हमें लोकतंत्र को लोकतांत्रिक ढंग से खत्म करना है...’ दरअसल इन रचनाओं की शैलीगत व्याप्ति इतनी अधिक है कि इन्हें केवल व्यंग्य के खाँचे में रखना इनकी मारक क्षमता को कम करके आँकना होगा। यह कोई और विधा है जिसकी तिलमिलाहट अन्दर तक कँपकँपी पैदा कर देती है और जिसे उपयुक्त नाम दिया जाना अभी बाकी है। हाँ, जब तक इसका उपयुक्त नामकरण न हो जाए तब तक व्यंग्य से काम चलाना पड़ेगा। इन रचनाओं से गुजरने के बाद मेरा मानना है कि अनूप मणि त्रिपाठी आज की मारक व्यंग्य विधा के सर्वाधिक सशक्त हस्ताक्षर हैं। —शिवमूर्ति
Bihar Per Mat Hanso
- Author Name:
Gautam Sanyal
- Book Type:

- Description: गौतम सान्याल ने अनेक विधाओं में महत्त्वपूर्ण लेखन किया है। यह तथ्य ध्यान देने योग्य है कि भाषा की व्यंजनाशक्ति उनकी रचनाशीलता का मुख्य तत्त्व है। इस तत्त्व का पूर्ण विकास गौतम सान्याल के व्यंग्य लेखन में हुआ है। ‘बिहार पर मत हँसो’ पुस्तक में उपस्थित व्यंग्य इस बात के प्रमाण हैं। यह सच है कि व्यंग्य विधा है या नहीं, इस पर बहुत बहस हो चुकी है, फिर भी इतना मानना होगा कि व्यंग्य ने अपनी अलग सत्ता स्थापित कर ली है। गौतम इस विधा को अनूठे विषय चयन और अद्भुत भाषा-शैली के द्वारा नई अर्थवत्ता प्रदान करते हैं। व्यंग्य में परम्परागत तरीक़े से चले आ रहे लेखन को ‘पीं.पीं-एच.डी., जो मैंने नहीं की’ व ‘अहो भूत, तुम कहाँ हो’ जैसे आलेख नया मोड़ देते हैं। कथावस्तु की दृष्टि से साहित्य, हिन्दी-समाज, सिद्धान्त, स्त्री-विमर्श, शिक्षा आदि क्षेत्रों की विसंगतियाँ लेखक की दृष्टि में हैं। भारतीय समाज की ज्वलन्त समस्याओं में से एक साम्प्रदायिकता पर ‘द न्यू मनोहर पोथी : इज दैट क्लियर टू यू’ जैसा सतर्क व रचनात्मक व्यंग्यालेख पाठक को प्रमुदित कर देता है। गौतम सान्याल के सधे वाक्य शब्दों में निहित विशेषार्थ भली प्रकार प्रस्तुत करते हैं, 'भविष्य में यह देश कहाँ जाएगा? भविष्य में यह देश कहीं नहीं जाएगा, यहीं रहेगा। इस पर भविष्य टूट पड़ेगा। तारभाषा में सार कहता हूँ, सो ध्यान से सुनो। इस देश का भविष्य एक गढ़पोखर है।’ भाषा, साहित्य और संस्कृति के विविध पक्ष संश्लिष्ट होकर इन व्यंग्यों में समाहित हैं। समग्रत: प्रस्तुत व्यंग्य पुस्तक विधा और विन्यास दोनों क्षेत्रों में एक उपलब्धि है।
Shikayat Mujhe Bhee Hai
- Author Name:
Harishankar Parsai
- Rating:
- Book Type:

- Description: शिकायत मुझे भी है' में हरिशंकर परसाई के लगभग दो दर्जन निबन्ध संगृहीत हैं और इनमें से हर निबन्ध आज की वास्तविकता के किसी न किसी पक्ष पर चुटीला व्यंग्य करता है। परसाई के लेखन की यह विशेषता है कि वे केवल विनोद या परिहास के लिए नहीं लिखते। उनका सारा लेखन सोद्देश्य है और सभी रचनाओं के पीछे एक साफ-सुलझी हुई वैज्ञानिक जीवन-दृष्टि है, जो समाज में फैले हुए भ्रष्टाचार, ढोंग, अवसरवादिता, अन्धविश्वास साम्प्रदायिकता आदि कुप्रवृत्तियों पर तेज रोशनी डालने के लिए हर समय सतर्क रहती है। कहने का ढंग चाहे जितना हल्का-फुल्का हो, किन्तु हर निबन्ध आज की जटिल परिस्थितियों को समझने के लिए एक अन्तर्दृष्टि प्रदान करता है। इसलिए जो आज की सच्चाई को जानने में रुचि रखते हैं, उनके लिए यह पुस्तक संग्रहणीय है।
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