Kisi Rang Ki Chhaya
Author:
Sunder Chand ThakurPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Poetry0 Ratings
Price: ₹ 316
₹
395
Available
सुन्दर चन्द ठाकुर का पहला कविता-संग्रह ‘किसी रंग की छाया’ अनुभव-सघनता और भाषाई-सजगता दोनों स्तरों पर एक कवि की बुनियादी बेचैनी को दर्ज करता है। सुन्दर की ये कविताएँ संख्या में अट्ठावन हैं लेकिन उनके सरोकारों को गिनना कठिन है। वे स्वाभाविक तौर पर प्रेम, अच्छाई, मनुष्यता और एक बेहतर संसार को तरह-तरह से प्रकट करती हैं या उनके कम होते जाने या न होने का शोक मनाती हैं, जहाँ उनके होने की जरा भी सम्भावना बची हो। यह अकारण नहीं है कि सुन्दर अपनी कविता में बचपन, नींद, घर-परिवार, नदी, जंगल, अभयारण्य आदि परिचित चीजों से होते हुए इतिहास, भूगोल, गणित, भौतिकी और गृह विज्ञान जैसे अपरिचित विषयों तक चले जाते हैं और उनके माध्यम से आज की किसी न किसी मानवीय परिस्थिति पर टिप्पणी करते हैं जो हमारे अन्तस को झकझोरते हुए एक नयी सम्वेदना से भी हमारा परिचय कराती हैं। अपनी गहरी सम्वेदना, सजग दृष्टि और तीक्ष्ण अनुभूतियों के कारण सुन्दर चन्द ठाकुर नदी के भीतर ‘बहती हुई एक और नदी’ को पहचानते हैं और इतिहास के स्नानागारों में 'सदियों के सूखे हुए पानी' को भी तैरता देख लेते हैं। इस संग्रह की ज़्यादातर कविताओं में पहाड़ के आवेग और मैदान की थिरन को हम एक साथ महसूस कर सकते हैं जो शिल्प के स्तर पर कहीं न कहीं सोच की उड़ान और भाषा के संयम में रूपान्तरित हो जाती है। ‘किसी रंग की छाया’ में आशा और निराशा के बीच अनुभवों का एक पूरा वर्ण क्रम है और यह पहचानने की शिद्दत भरी कोशिश है कि वह रंग कौन-सा है और उसकी कैसी छाया है या यह कैसी छाया है और उसका कौन-सा रंग है। यही कोशिश एक सच्चे कवि की पहचान होती है।
ISBN: 9788171196685
Pages: 107
Avg Reading Time: 4 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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तुम मेरा एकमात्र विश्वास हो
मेरी आत्मा के वास्तविक सहचर
प्रेम का यही अकुंठ भाव इन कविताओं का मूल स्वर है। यह प्रेम-कविताओं का संग्रह है जिनकी कमी इधर आकर बहुत खलने लगी है। कविता के केन्द्र से प्रेम का हटना बेशक जीवन का अनुगमन ही है, क्योंकि जीवन का केन्द्र भी आज प्रेम नहीं है, लेकिन इसीलिए प्रेम अपनी तमाम पारदर्शिताओं, स्वच्छताओं और उदात्तताओं के साथ और भी ज़रूरी हो जाता है। वह एक अमूर्त भाव है लेकिन दुनिया में उसका अभाव हमें किसी चीज़ की तरह कचोटता है, जिसे इतनी तमाम चीज़ों की उपस्थिति भी पूर नहीं पाती।
ये कविताएँ हमें प्रेम की याद दिलाती हैं, उसकी उस ताक़त की याद दिलाती हैं जो हमें देह में देह को और आत्मा में आत्मा को अनुभव करने की क्षमता देता है, हमें ज़्यादा सहनशील, सहिष्णु और संसार को ज़्यादा रहने लायक़ बनाता है।
तुम
मेरे पास
सुख की तरह हो
जैसे जड़ों के पास ज़मीन
तुम्हारा स्पर्श मुझे छूता है
जैसे सूरज छूता है पृथ्वी।
Harf-E-Awara
- Author Name:
Abhishek Shukla
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Description:
बहुत से लोग हैं जो अपने आपको लफ़्ज़ देने के लिए शा'इरी इख़्तियार करते हैं मगर कुछ ख़ुशक़िस्मत ऐसे भी हैं जिन्हें ख़ुद शा'इरी अपने आपको ज़ाहिर करने के लिए चुनती है। अभिषेक उन्हीं चन्द ख़ुशक़िस्मतों में शामिल हैं जिन्हें शा'इरी ने इस ज़माने में अपना तर्जुमान मुक़र्रर किया है। ख़ामोशी अभिषेक की शा'इरी की जन्मभूमि है। उसके पास से ख़ामोशी की ख़ुशबू और आँच आती है कि उसके अन्दर तज्रबों का एक आतिशख़ाना है जो एक बाग़ की तरह खिला हुआ है। ख़ामोशी उसका चाक भी है जिस पर वो लफ़्ज़ों की कच्ची मिट्टी से मा'नी की शक्लें बनाता है। अभिषेक ने ये मिट्टी अपनी ज़ात और ज़माने के जिस्म और रूह के तज्रबों को गूँधकर तैयार की है। ये मिट्टी उसकी अपनी है और उससे बनाई जानेवाली सूरतें भी।
—फ़रहत एहसास
Rangayo Jogi Kapda
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