The Eloquence of Ghalib
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"The Eloquence of Ghalib" is a captivating English poetry book that pays homage to the poetic genius of Mirza Ghalib. This collection captures the essence of Ghalib's literary prowess and brings his profound verses to life in English. Each poem in this collection is a masterful expression, echoing the spirit of Ghalib's eloquence. The book explores a spectrum of themes, from love and melancholy to the profound musings of life, ensuring a diverse and enriching poetic experience. The timeless reverie of Ghalib's poetry shines through "The Eloquence of Ghalib," making it a cherished literary treasure. Whether you are a dedicated poetry enthusiast or new to Ghalib's world, this book is an ideal gift and a must-have for those who appreciate the beauty of his words, now accessible in English. Crafted with premium materials, this book ensures durability, allowing you to revisit the timeless charm of Ghalib's poetry for years to come.
Read moreAbout the Book
"The Eloquence of Ghalib" is a captivating English poetry book that pays homage to the poetic genius of Mirza Ghalib. This collection captures the essence of Ghalib's literary prowess and brings his profound verses to life in English. Each poem in this collection is a masterful expression, echoing the spirit of Ghalib's eloquence. The book explores a spectrum of themes, from love and melancholy to the profound musings of life, ensuring a diverse and enriching poetic experience. The timeless reverie of Ghalib's poetry shines through "The Eloquence of Ghalib," making it a cherished literary treasure. Whether you are a dedicated poetry enthusiast or new to Ghalib's world, this book is an ideal gift and a must-have for those who appreciate the beauty of his words, now accessible in English. Crafted with premium materials, this book ensures durability, allowing you to revisit the timeless charm of Ghalib's poetry for years to come.
Book Details
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ISBN9789394494312
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Pages146
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Avg Reading Time5 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को ‘ग़ालिब’ ये ख़याल अच्छा है हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले उन के देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक़ वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ाइल जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है आख़िर इस दर्द की दवा क्या है इश्क़ पर जोर नहीं है ये वो आतिश ‘ग़ालिब’ कि लगाये न लगे और बुझाये न बुझे
Ishqnama
- Author Name:
Khwaja Ruknuddin Ishq
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इस किताब में ख़्वाजा रुकनुद्दीन इश्क़ के प्रसिद्ध फ़ारसी और उर्दू कलाम का संग्रह किया गया है. सूफ़ी-संतों के कलाम जनमानस में लोकप्रिय तो रहे हैं, लेकिन हिन्दी के पाठकों को इन्हें पढ़ने का अवसर कभी नहीं मिला. हिंदी पाठकों के लिए पहली बार ख़्वाजा रुकनुद्दीन इश्क़ का कलाम देवनागरी में पेश किया जा रहा है. इस किताब के संपादक रय्यान अबुल
उलाई हैं.
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