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"रेख़्ता क्लासिक्स" सीरीज़ उर्दू के क्लासिकी शायरों के प्रतिनिधि शायरी को नए पाठकों तक पहुँचाने के एक अनूठा प्रयास है। प्रस्तुत किताब में इंशाअल्लाह इंशा की प्रतिनिधि शायरी है जिसका संकलन फ़रहत एहसास साहब ने किया है।
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"रेख़्ता क्लासिक्स" सीरीज़ उर्दू के क्लासिकी शायरों के प्रतिनिधि शायरी को नए पाठकों तक पहुँचाने के एक अनूठा प्रयास है। प्रस्तुत किताब में इंशाअल्लाह इंशा की प्रतिनिधि शायरी है जिसका संकलन फ़रहत एहसास साहब ने किया है।
Book Details
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ISBN9788194876953
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Pages184
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Avg Reading Time6 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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- Description: आग, पहिया और नाव की ही तरह भाषा भी मनुष्य का एक अद्वितीय अविष्कार है ! इस अर्थ में और भी अद्विरिय कि यह उसकी देह और आत्मा से जुडी है ! भाषा के प्रति हाम्र व्यवहार वस्तुतः जनतंत्र और पूरी मनुष्यता के प्रति हमारे व्यवहार को ही प्रकट करता है ! हम एक ऐसे समय से रूबरू हैं जब वर्चस्वशाली शक्तियों की भाषा में उददंडता और आक्रामकता अपने चरम पर पहुँच रही है ! बाज़ार की भाषा ने हमारे आपसी व्यवहार की भाषा को कुचल दिया है ! विज्ञापन की भाषा ने कविता से बिम्बों की भाषा को छिनकर फूहड़ और अश्लीलता की हदों तक पहुंचा दिया है ! इस समय के अंतर्विरोधों और विडम्बनाओं को व्यक्त करने और प्रतिरोध के नए उपकरण तलाश करने की बेचैनी हमारी पूरी कविता की मुख्य चिंता है ! उसमें कई बार निराशा भी हाथ लगती है और उदासी भी लेकिन साधारण जन के पास जो सबसे बड़ी ताकत है और जिसे कोई बड़ी से बड़ी वर्चस्वशाली शक्ति और बड़ी से बड़ी असफलता भी उससे छीन नहीं सकती, वह है उसकी जिद ! मेरी इन कविताओं में यह शब्द कई बार दिखाई देगा ! शायद यह जिद ही है जो इस बाजारू समय में भी कवि को धुंध और विभ्रमों के बीच लगातार अपनी जमीन से विस्थापित किए जा रहे मनुष्य की निरंतर चलती लड़ाई के पक्ष में रचने की ताकत दे रही है ! सबसे कमजोर रोशनी भी सघन अँधेरे का दंभ तोड़ देती है ! इसी उम्मीद से ये कविताएँ यहाँ है !
Uska To Koi Gaon Hoga Hi Nahi
- Author Name:
Manoj Kumar Sharma
- Book Type:

-
Description:
‘‘मनोज कुमार शर्मा की कविताएँ आगामी कविता की ऐसी दस्तकें हैं जिनकी नादमयता में हम लोकभाषा की महीन किन्तु अविच्छिन्न उपस्थिति देख सकते हैं। शायद अच्छी कविता का लक्ष्य भी यही है। इनके पास जो भाषा है, वह आकस्मिक-सी नहीं है बल्कि वह धीरे-धीरे किसी उफनती हुई बाढ़ग्रस्त नदी की वास्तविकता की तरह है।’’
—गंगाप्रसाद विमल
‘‘प्रीत और सौन्दर्य की जो छवियाँ कवि श्री मनोज ने उकेरी हैं, वे हार्दिक हैं।’’
—ताराप्रकाश जोशी
‘‘अभिव्यक्ति का माध्यम शब्द, भाव और शिल्प है। मनोज कुमार शर्मा की कविताएँ अधिक लम्बी नहीं हैं। कहा जा सकता है कि छोटी-छोटी कविताओं में बहुत बड़ी बातों को सहज में कहने का ही नहीं अपितु ध्यान आकर्षित करने का सफल प्रयास है।’’
—मधुमती
(राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर)
Rab - O - Nirat Ki Inayat Hai
- Author Name:
Bhuwan Bhaskar
- Book Type:

- Description: Book
Mummy Yadi Main Badal Hota
- Author Name:
Rameshraaj
- Book Type:

- Description: विगत पचास वर्षों से साहित्य की सेवा में लीन सुकवि रमेशराज ने साहित्य की विभिन्न विधाओं में अनवरत लिखा है। व्यंग्य, लेख, निबंध, लघुकथा, कहानी, गीत, ग़ज़ल से लेकर हाइकु, जनक छंद, रसिया, लांगुरिया, कहमुकरी, चतुष्पदी, कवित्त, घनाक्षरी, दोहे, मुक्तछंद कविताएं, तेवरी, अर्थात् हिंदी साहित्य की लगभग सभी विधाओं पर शास्त्रसम्मत तरीके से अपनी क़लम का जादू बिखेरा है। मौलिक प्रयोगों के अंतर्गत लीक से हटकर दो मौलिक छंद -”नव कुंडलिया राज छंद” तथा “सर्प कुंडली राज छंद” भी छंदकाव्य में जोड़े हैं। बच्चों के लिए कविताएं लिखना निस्संदेह एक सरल कार्य नहीं। रमेशराज ने बच्चों के लिए भी खूब गीत कहानियां लिखी हैं। देश के बड़े-बड़े विद्वान साहित्यकारों को लेकर खूब परिचर्चाएं आयोजित की हैं, जिनमें उन्होंने अपने बाल्यकाल की रोचक घटनाओं पर प्रकाश डाला है। अब तक सात बालगीत संग्रह प्रकाशित होने के उपरांत आपका आठवां सद्यः प्रकाशित बालगीत संग्रह-“मम्मी यदि मैं बादल होता” बच्चों को विभिन्न प्रकार से शिक्षित ही नहीं करता, उन्हें गुणी और ज्ञानवान बनाने का एक उत्तम प्रयास भी करता है। एक बच्चा अपनी मम्मी से बादल बनकर सूखते खेतों पर बरसने की बात कहता है तो दूसरा बच्चा अपनी मम्मी के साथ गीता पढ़ने की बात करता है। पुस्तक के बालगीतों में ऐसे भी कई मोहक दृश्य हैं जिनमें बच्चे तुतलाते हुए मीठी-मीठी बातें करते हैं। नकली मूंछें लगाकर दादा जी बनते हैं। गुब्बारों में हवा भरकर उन्हें फोड़ते हैं और आनंदित होते हैं। जामुन आम और मीठे फल खाने के लिए चुपके से पेड़ों पर चढ़ते हैं। अपनी शरारतों पर मम्मी या दादी की डांट खाने से बचने के लिए तरह तरह के बहाने या किस्से गढ़ते हैं। इन गीतों में बच्चों का हमें नटखट स्वभाव ही देखने को नहीं मिलता, बल्कि कुछ बच्चे ऐसे भी हैं जो भविष्य में बड़े होकर देश के लिए सैनिक बनकर सीमाओं पर दुश्मन के दांत खट्टे करने की बात कहते हैं। वे वीर भगत सिंह, रामप्रसाद बिस्मिल बनना चाहते हैं। शिवाजी की तरह तलवार लेकर अरिदल का विनाश करने की सौगंधें खाते हैं। वे कहते हैं कि संसार को नई रोशनी से जगमग करेंगे। ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटाएंगे। सद्भाव का अमृत सबको पिलाएंगे। कुल मिलाकर रमेशराज ने अपने इस बालगीत संग्रह “मम्मी यदि में बादल होता” में बच्चों के अल्हड़ बेफिक्र नटखट बालजीवन को सजीवता प्रदान की है तो दूसरी तरफ उन्हें ऐसा भावी नागरिक बनाने की कोशिश की है जो अपने पारिवारिक, सामाजिक और राष्ट्र के दायित्वों को समझे और उनका पालन करे। ~विनोद भारती 'व्यग्र'
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