Puchhte Hain Wo Ki Ghalib Kaun Hai Ghalib ke 100 She'ron Ki Vyaakhya
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Discover the enchanting world of Mirza Ghalib, one of the greatest urdupoets, with "Puchhte Hain Wo Ki Ghalib Kaun Hai - Ghalib ke 100 She'ron Ki Vyaakhya." This meticulously crafted book takes you on a poetic journey, unraveling the beauty and depth of Ghalib's verses. With a selection of 100 Ashar (verses), this compilation introduces both well-known and lesser-known gems from Ghalib's treasure trove. Immerse yourself in the profound and evocative poetry as you delve into the explanations and interpretations of each verse. The book provides a captivating blend of renowned Ashar, ensuring you experience the essence of Ghalib's poetic prowess. Whether you're a seasoned Ghalib aficionado or a newcomer to his mesmerizing world, this book offers an exceptional opportunity to savor the fragrance of his poetic garden. In addition to the explanations, this book facilitates a deeper understanding of Ghalib's verses by elucidating the meanings of intricate words. With these insights, you can unravel the true essence of each lion (verse) and relish it in your own unique way. Indulge in the rhythmic cadence of Ghalib's words, and allow his poetry to resonate within your soul. Key Features: Comprehensive compilation of 100 verses of Ghalib and their interpretations. Meticulously curated selection including famous and lesser-known Ashar. Unveils the profound beauty and depth of Ghalib's poetry. Meaning of difficult words provided for enhanced comprehension. Immerse yourself in the essence of Ghalib's poetic garden. Ideal for both seasoned Ghalib enthusiasts and newcomers. Delve into the enchanting world of urdupoetry and its timeless charm. Let "Puchhte Hain Wo Ki Ghalib Kaun Hai - Ghalib ke 100 She'ron Ki Vyaakhya" transport you into the captivating realm of Mirza Ghalib's extraordinary poetic legacy. Embrace the magic of his words, as you unravel the layers of meaning intricately woven into his verses.
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Discover the enchanting world of Mirza Ghalib, one of the greatest urdupoets, with "Puchhte Hain Wo Ki Ghalib Kaun Hai - Ghalib ke 100 She'ron Ki Vyaakhya." This meticulously crafted book takes you on a poetic journey, unraveling the beauty and depth of Ghalib's verses. With a selection of 100 Ashar (verses), this compilation introduces both well-known and lesser-known gems from Ghalib's treasure trove. Immerse yourself in the profound and evocative poetry as you delve into the explanations and interpretations of each verse. The book provides a captivating blend of renowned Ashar, ensuring you experience the essence of Ghalib's poetic prowess. Whether you're a seasoned Ghalib aficionado or a newcomer to his mesmerizing world, this book offers an exceptional opportunity to savor the fragrance of his poetic garden. In addition to the explanations, this book facilitates a deeper understanding of Ghalib's verses by elucidating the meanings of intricate words. With these insights, you can unravel the true essence of each lion (verse) and relish it in your own unique way. Indulge in the rhythmic cadence of Ghalib's words, and allow his poetry to resonate within your soul. Key Features: Comprehensive compilation of 100 verses of Ghalib and their interpretations. Meticulously curated selection including famous and lesser-known Ashar. Unveils the profound beauty and depth of Ghalib's poetry. Meaning of difficult words provided for enhanced comprehension. Immerse yourself in the essence of Ghalib's poetic garden. Ideal for both seasoned Ghalib enthusiasts and newcomers. Delve into the enchanting world of urdupoetry and its timeless charm. Let "Puchhte Hain Wo Ki Ghalib Kaun Hai - Ghalib ke 100 She'ron Ki Vyaakhya" transport you into the captivating realm of Mirza Ghalib's extraordinary poetic legacy. Embrace the magic of his words, as you unravel the layers of meaning intricately woven into his verses.
Book Details
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ISBN9789394494169
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Pages114
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Avg Reading Time4 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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वस्तुतः हिमालय भारतीय संस्कृति के हर नए चरण का पुरातन साथी रहा है। भारतीय जीवन उसकी उजली छाया में पलकर सुन्दर हुआ ये, उसकी शुभ्र ऊँचाई छूने के लिए उन्नत बना है और उसके हृदय से प्रवाहित नदियों में घुलकर निखरा है।
हमारे राष्ट्र के उन्नत शुभ्र मस्तक हिमालय पर जब संघर्ष की नील-लोहित आग्नेय घटाएँ छा गईं, तब देश के चेतना-केन्द्र ने आसन्न संकट की तीव्रानुभूति देश के कोने-कोने में पहुँचा दी।
धरती की आत्मा के शिल्पी होने के कारण साहित्यकारों और चिन्तकों पर विशेष दायित्व आ जाना स्वाभाविक ही था। इतिहास ने अनेक बार प्रमाणित किया है कि जो मानव समूह अपनी धरती से जिस सीमा तक तादात्म्य कर सका है, वह उसी सीमा तक अपनी धरती पर अपराजेय रहा है। आधुनिक युग के साहित्यकार को भी अपने रागात्मक उत्तराधिकार का बोध था। इसी से हिमालय के आसन्न संकट ने उसकी लेखनी को, ओज के शंख और आस्था की वंशी के स्वर दे दिये हैं।
Pratinidhi Kavitayen : Manglesh Dabral
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Mangalesh Dabral
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आलोकधन्वा कहते हैं कि ‘मंगलेश फूल की तरह नाज़ुक और पवित्र हैं।’ निश्चय ही स्वभाव की सचाई, कोमलता, संजीदगी, निस्पृहता और युयुत्सा उन्हें अपनी जड़ों से हासिल हुई है, पर इन मूल्यों को उन्होंने अपनी प्रतिश्रुति से अक्षुण्ण रखा है।
मंगलेश डबराल की काव्यानुभूति की बनावट में उनके स्वभाव की केन्द्रीय भूमिका है। उनके अन्दाज़े-बयाँ में संकोच, मर्यादा और करुणा की एक लर्ज़िश है। एक आक्रामक, वाचाल और लालची समय में उन्होंने सफलता नहीं, सार्थकता को स्पृहणीय माना है और जब उनका मन्तव्य यह हो कि मनुष्य होना सबसे बड़ी सार्थकता है, तो ऐसा नहीं कि यह कोई आसान मकसद है, बल्कि सहज ही अनुमान किया जा सकता है कि यह आसानी कितनी दुश्वार है।
Dukh Naye Kapde Badal Kar
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Shariq Kaifi
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Sadi Patthron Ki
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Narendra Maurya
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Dunia Jaisi Maine Dekhi
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Jagdish Prasad Agrawal
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डॉ. जगदीश अग्रवाल प्रवासी भारतीय संघ से जुड़े हैं। विदेशों में रह रहे भारतीय के भीतर भी यहाँ के तीज-त्योहार, यहाँ के संस्कार, यहाँ के रीति-रिवाज, यहाँ का मौसम, पेड़-पौधे, पक्षी जीवित रहते हैं। विदेशों में बसने के बाद भी रिश्तों की नफ़ासत, रिश्तों के प्रति प्रतिबद्धताएँ बदल नहीं पातीं! कह सकते हैं कि प्रवासी भारतीय विदेशी सरज़मीं पर भारतीयता को जीवित रखने की कला को विकसित करते हैं। कभी यह भारतीयता कविता के रूप में सामने आती है तो कभी कहानी और उपन्यासों के रूप में।
डॉ. जगदीश अग्रवाल का यह कविता-संग्रह एक प्रवासी भारतीय की ऐसी ही भावनाओं को समर्पित है। इसका प्रकाशन एक तरह से प्रवासी भारतीयों को जोड़ने का भी प्रयास है—ऐसे भारतीयों को, जो किसी न किसी रूप में साहित्यिक गतिविधियों से जुड़े हैं।
Ladkiyaan Hain To
- Author Name:
Rajendra Prasad Pandey
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राजेन्द्र प्रसाद पांडेय की कविताओं की दुनिया काफी बड़ी और वैविध्यपूर्ण है। उनमें मनुष्य से लेकर पशु-पक्षियों और अन्य प्राणियों के प्रति भी संवेदना प्रकट हुई है। उनमें सरकारी योजनाओं की निरर्थकता और जनता की स्वार्थ-भावना का भी चित्रण हुआ है। ‘अधबना पुल, ईंटें और पुलघाट’ उनकी ऐसी ही कविता है, जिसमें व्यवस्था की नीतियों का पर्दाफाश हुआ है। ‘परबाबा की विदाई’ में मनुष्य की जिजीविषा, इच्छाओं और सद् विचारों का अच्छा चित्रण हुआ है। ‘सुख के दुख’, ‘कहाँ हो नन्दिता कँवर’, ‘बीज’, ‘दुख है पहचान का मरना’, ‘संस्कार युद्ध’, ‘लालन-पालन’, ‘नाच रही हो माँ’, ‘बेटी’, ‘रक्षाबन्धन पर दीदी को प्रणाम’, ‘पीपल को प्रणाम’ आदि उनकी बेहतरीन कविताएँ हैं। ये कविताएँ एक तरफ मानवीय मूल्यों और रिश्तों को सींचती हैं तो दूसरी तरफ हमारे समय की शिनाख्त करती हैं। साथ ही हमें जगाती और सचेत भी करती हैं।
Dreams Of a Psychopath
- Author Name:
Saumitra +1
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Description Awaited
Mujh Ko Meri Yaad Aa Rahi Hai (Urdu)
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Farhat Ehsas
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The book “Mujh Ko Meri Yaad Aa Rahi Hai: Farhat Ehsaas,” published by Rekhta Publications, is also significant because it includes his poetic works from 1973 to 2023. It contains both ghazals and poems that vividly reflect life's unevenness, human psychology, emotions and feelings, personal anguish, social deviations, societal changes, and a clear spirit of rebellion against tradition. Farhat Ehsaas was born on 25 December 1950 in Bahraich (Uttar Pradesh). After completing his education at Aligarh Muslim University, he became associated with the urduweekly newspaper “Hujuum.” He has proficiency in Urdu, Hindi, Biraj, Awadhi, and various other Indian languages, as well as in English and Western literature. The poetry of Farhat Ehsaas is poetry of life itself. Every aspect of human psychology, emotions, and feelings appears to breathe within it. Rebellion against long-standing and worn-out traditions is an important characteristic of his poetry. His poetry collections “Main Rona Chahta Hoon,” “Shaayari Nahin Hai Yeh,” and “Qashqa Kheencha Dair Mein Baitha” are significant links in this continuum.
Athato Kavya Jigyasa
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Virendra Mullick
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पूजी द्वारा विकासक रूप मे प्रतिपादित बाजारवाद, सबकिछु केँ 'पसार' बना देलकए। प्रशासन, न्याय, वित्त, सूचना, स्वास्थ्य, शिक्षा... सबकिछु बाजार नियंत्रित होइत मनुखक विसंगति केँ ओहि स्तर तक ल' गेलए जे सांस्कृतिक परिचिति पर्यंत विलोपित भ' जाए। अही मर्मांतक पीड़ा सँ आप्लावित अछि ई कविता संग्रह 'अथातो काव्य जिज्ञासा'। कविता बिडंबनापूर्ण परिवेशक प्रतिपक्षी अछि, चिंतित अछि आ अस्तित्वक प्रश्न सँ पाठक केँ आविष्ट करै अछि, सोचबाक लेल, सक्रिय हेबाक लेल उत्प्रेरित करै अछि। पूजी, बाजार आ साम्राज्यवादक वर्चस्व हमर भाषा, हमर संस्कृति, हमर सर्वस्व विश्व मानवीय दृष्टिकोणक संग कविता, मनुष्यताक उत्कर्षक लेल प्रतिबद्ध अछि, बिना कोनो संशय-ओझरौनी के बेस स्पष्ट बिम्ब मे मुखर अछि, सत्यक साक्षात्कार लेल तत्पर अछि। ..... लोकक पेट पर मारैत लात नित नव-नव सिद्धांत आ विज्ञापनक भरमार। सामयिक, असत्य आ अन्यायक बलधकेल अधिनायकवादी सत्ताक पिशाची-नर्तनक काल मे, कविता अपन कर्तव्य सँ संपृक्त अछि, आशा आ विश्वासक संग अडिग अछि। मुदा नागरिक वीर देश केर एखनहु बरूदक ढेरी पर कविताक संग विहुँसि खेलाइछ। एक अग्निजीवी कविक लेल इएह ने काव्य-स्वभाव, कविता-प्रवृत्ति छी! —कुणाल (कवि-रंगकर्मी)
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