Mrityu Se Agey
About the book
राजशाही के भ्रष्टाचार, कर्तव्यों के निर्वहन में उसकी विफलता, बढ़ती वासना से उत्पन्न नारी असुरक्षा, सामान्य व्यक्ति का जीवन संघर्ष, भगवान के प्रति उसकी आस्था और निराशा की उथल पुथल के बीच जीवन का यथार्थ खोजती कविताओं का संग्रह है "मृत्यु से आगे" मानव जीवन की संवेदनाओं एवं सामाजिक बदलाव को गहराई से समझने वाले कवि रजनीश के लिए कवितायें मात्र काल्पनिक दस्तावेज़ नही अपितु काव्यात्मकता एक बोध है जो ना केवल मानव की सोच बल्कि उसकी आत्मा को भी प्रभावित करता है I
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About the Book
राजशाही के भ्रष्टाचार, कर्तव्यों के निर्वहन में उसकी विफलता, बढ़ती वासना से उत्पन्न नारी असुरक्षा, सामान्य व्यक्ति का जीवन संघर्ष, भगवान के प्रति उसकी आस्था और निराशा की उथल पुथल के बीच जीवन का यथार्थ खोजती कविताओं का संग्रह है "मृत्यु से आगे" मानव जीवन की संवेदनाओं एवं सामाजिक बदलाव को गहराई से समझने वाले कवि रजनीश के लिए कवितायें मात्र काल्पनिक दस्तावेज़ नही अपितु काव्यात्मकता एक बोध है जो ना केवल मानव की सोच बल्कि उसकी आत्मा को भी प्रभावित करता है I
Book details
- Format
- Paperback
- Publisher
- Author'S Ink Publications
- Weight
- 140 grams
- ISBN-13
- 9789385137013
- Pages
- 110
- Reading time
- ~2 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 25.4 × 20.3 cm
- Language
- Hindi
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Mrityu Se Agey is not a collection of consoling verse—it is Rajneesh's unflinching examination of power's moral collapse and the ordinary life caught beneath it. The poems move through scenes of rajshahi (monarchic) corruption and the dereliction of duty, through women rendered unsafe by unchecked desire, and through individuals who petition the divine even as their faith fractures. Rajneesh treats poetry as a form of bodh—awakening—that reaches not just the mind but the soul. Each poem is a documentary fragment grounded in lived reality, not fantasy, probing the churn between hope and despair that defines the human condition in contemporary India. The collection asks: what lies beyond death when life itself is a struggle for meaning? For readers drawn to verse that confronts rather than comforts, Mrityu Se Agey offers an encounter with the raw truth of social transformation and the sensibilities that survive it.
मृत्यु से आगे पढ़कर मुझे कैसा अनुभव होगा?
यह संग्रह आपको एक तीव्र, बेचैन करने वाला अनुभव देगा—ये कविताएँ सांत्वना नहीं देतीं, बल्कि समाज की कड़वी सच्चाइयों से रूबरू कराती हैं। रजनीश की रचनाएँ भ्रष्टाचार, असुरक्षा और आस्था के टूटने को इतनी गहराई से छूती हैं कि पाठक के मन में सवाल उठने लगते हैं। यह एक ऐसी यात्रा है जो आत्मा को झकझोरती है और पढ़ने के बाद लंबे समय तक मन में गूँजती रहती है।
यह किताब किस तरह के पाठकों के लिए उपयुक्त है और इसे पढ़ने के लिए किस तैयारी की ज़रूरत है?
- वे पाठक जो समकालीन भारतीय समाज की विसंगतियों को समझना चाहते हैं
- जो काव्य में केवल सुंदरता नहीं बल्कि यथार्थ की तलाश करते हैं
- जो सत्ता, लिंग असुरक्षा और आध्यात्मिक संकट जैसे गंभीर विषयों से जूझने को तैयार हैं
- इसके लिए खुले मन और असहज सच्चाइयों को स्वीकारने की इच्छा चाहिए
राजशाही भ्रष्टाचार और नारी असुरक्षा जैसे विषय आज के भारतीय पाठकों के लिए क्यों प्रासंगिक हैं?
हालाँकि राजशाही शब्द ऐतिहासिक लगता है, पर सत्ता का भ्रष्टाचार और कर्तव्य-विफलता आज भी भारत में जीवंत मुद्दे हैं। बढ़ती वासना से उत्पन्न नारी असुरक्षा आज के समय में और भी गहरी चिंता है—यौन हिंसा, असमान शक्ति संबंध और महिलाओं की सुरक्षा रोज़ सुर्खियों में आते हैं। रजनीश इन्हें काव्यात्मक बोध के माध्यम से उजागर करते हैं, जिससे समकालीन भारतीय पाठक अपनी वर्तमान वास्तविकता से सीधा संवाद पाते हैं।
रजनीश की कविताओं में क्या विशिष्टता है जो उन्हें अन्य समकालीन कवियों से अलग करती है?
रजनीश के लिए कविता काल्पनिक दस्तावेज़ नहीं बल्कि बोध है—एक जागृति जो मन और आत्मा दोनों को प्रभावित करती है। वे सामाजिक बदलाव और मानव संवेदनाओं को गहराई से समझते हुए यथार्थ को काव्य में ढालते हैं। उनकी रचनाएँ आस्था और निराशा के बीच की उथल-पुथल को बिना किसी सजावट के प्रस्तुत करती हैं, जिससे पाठक को प्रामाणिक और कच्चा अनुभव मिलता है।
यह संग्रह पढ़ने के बाद पाठक के मन में क्या छूट जाता है—भावनात्मक, बौद्धिक या सांस्कृतिक रूप से?
- भावनात्मक रूप से: बेचैनी और आत्मचिंतन की गहरी अनुभूति, जो आराम से ज़्यादा जागरूकता देती है
- बौद्धिक रूप से: सत्ता, लिंग और आस्था के बीच जटिल संबंधों की समझ
- सांस्कृतिक रूप से: समकालीन भारतीय समाज की विसंगतियों का दस्तावेज़ जो भविष्य में भी प्रासंगिक रहेगा
