Jeevan Karja Gadi Hai
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collection of ghazals
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collection of ghazals
Book Details
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ISBN9789385013522
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Pages96
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Avg Reading Time3 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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- Book Type:

- Description: Poems
Nadi Usi Tarah Sunder Thi Jaise Koi Bagh
- Author Name:
Sanjay Alung
- Book Type:

-
Description:
मैंने संजय अलंग के कविता-संग्रह ‘नदी उसी तरह सुन्दर थी जैसे कोई बाघ’ को एक पाठक की तरह देखा। कई कविताओं के कथ्य और शिल्प ने मुझे रोककर उसे दुबारा पढ़ने को बाध्य किया।
इस संग्रह की 'सुन्दर' शीर्षक कविता में, संजय सौन्दर्य की अवधारणा पर गोया एक विमर्श सृजन करते हैं। आलोचना या कथा में विमर्श सहज सम्भव होता है किन्तु कवि ने इसे कविता के माध्यम से करने की कोशिश की है। इसे देखिए—‘गुलाब उसी तरह सुन्दर था जैसे कोई नदी/नदी उसी तरह सुन्दर थी जैसे कोई बाघ/ बाघ उसी तरह सुन्दर था जैसे कोई मैना/...स्वाद और सुन्दरता/ सभी जगह थी/ बस उसे देखा जाना था/ख़ुशी के साथ।’
बकौल मुक्तिबोध संवेदना जो ज्ञानात्मक होती है। संजय की कविताएँ कुछ चकित करने के साथ ही चीज़ों को रूढ़ अवधारणाओं से मुक्त होकर देखने और पढ़ने की माँग करती हैं। कविताओं में महीन विमर्श निहित है जो दार्शनिक स्तर के बावजूद अमूर्त नहीं यथार्थवादी है और सोचने को बाध्य करता है। कविताओं के कथ्य में आप अपने को पाते हैं और विमर्श में सम्मिलित हो जाते हैं। उनका शिल्प आपको अपने साथ बनाए रखता है।
संग्रह की ही कविता ‘बँटे रंग' उस राजनीति की याद दिलाती है, जो न सिर्फ़ तामसी, राजसी और सात्त्विक, बल्कि स्त्रियों के रंगों को पुरुषों के रंगों से अलग बताती है। यह धूर्तता और संकीर्णता को उजागर करनेवाली अभिव्यक्ति और उत्कृष्ट कविता है। संजय अलंग की रचना-प्रक्रिया में संगतियों और विसंगतियों की यह खोज निरन्तर चलती रहती है और उनके कथ्य को विचारणीय बनाती है।
कड़ी मेहनत से सब कुछ पा लेने का भ्रम फैलाकर मज़दूरों का शोषण, उपासना-स्थलों के फ़र्श पर गिरे हुए प्रसाद की चिपचिपाहट से उपजी वितृष्णा और मंडी या सट्टा बाज़ार में धन्धेबाज़ों की तरह ग्राहकों को पुकारते पुजारी कैसे मनुष्यता और आस्था के मूल्यों को घृणित और पतनशील बना देते हैं; संजय अलंग की कविताएँ उसकी अनेक झलकियाँ प्रस्तुत करती हैं। यह उजागर होता है कि, आराध्य पीछे छूट जाता है और छूटता चला जाता है।
कविताओं में प्रतीक और बिम्ब मौलिक और मुखर होकर उभरे हैं। बूँदाबाँदी के दिन, एक छाते में साथ-साथ सिहरते हुए क्षणों का एक सुन्दर और मौलिक बिम्ब है। 'शाह अमर हो गया लाल क़िले के साथ' कविता प्रतीकों को नया विस्तार देती है।
कविताएँ विषय वैविध्य से भरपूर हैं। कवि की दृष्टि तीक्ष्ण है। वह रोज़मर्रा की गतिविधियों को भी खोजपूर्ण दृष्टि से देखता है। यह दृष्टि विश्लेषणपरक है जो अदृश्य को देखने की उत्सुकता से भरी है। ‘क्रमांक वाला विश्व’ कविता-दृष्टि तीक्ष्णता की ओर ध्यान आकृष्ट करती है।
Is Bhanwar Ke Paar
- Author Name:
Shashi Shekhar Sharma
- Book Type:

-
Description:
अगर काव्य को जीवन के सामासिक एवं वैयक्तिक सरोकारों की पहचान का एक बिम्बात्मक माध्यम माना जाए तो शशि शेखर के इस संग्रह की कविताएँ उन सरोकारों को अनुभूति के कई स्तरों पर टटोलती हैं। एक स्तर पर मनुष्य के निजी अनुभवों का विराट एवं अत्यन्त ही दुरूह संसार है तो दूसरे स्तर पर समाज के सामूहिक जीवन का उल्लास एवं उसकी विवशताएँ हैं।
ये कविताएँ इन स्तरों के अन्तर्सम्बन्धों की पहचान तो करती ही हैं, उनकी पुनर्व्याख्या के माध्यम से वर्तमान के अपसंस्कारों की ओर हमारा ध्यान भी खींचती हैं। समसामयिक जीवन का सामाजिक, सैद्धान्तिक एवं वैचारिक अनुभव ख़ूब मुखर होकर इन कविताओं में ध्वनित हुआ है। जहाँ वर्तमान राष्ट्रीय परिदृश्य को इतिहास के परिप्रेक्ष्य में जोड़कर देखा गया है, वहीं उस परिदृश्य के तात्कालिक महत्त्व एवं उसकी कुरूप विडम्बनाओं को भी रेखांकित किया गया है, और ऐसा करते समय ये कविताएँ ‘अच्छा’ समझे जाने की चिन्ता से पूरी तरह मुक्त हैं।
अपनी बात बिना लाग–लपेट कहने का आग्रह इन कविताओं की महत्त्वपूर्ण पहचान है। इस आग्रह के कारण ही ये कविताएँ सहसा हमें आईने के सामने खड़ा कर देती हैं। शशि शेखर ने समान सामर्थ्य के साथ काव्य की अनेक विधाओं का प्रयोग किया है। चाहे गीत हों या दोहे, मुक्त छन्द हों या ग़ज़ल, हर पैमाने में उनके अनुभवों का रस ख़ूब पककर छलका है। इस हिसाब से ये कविताएँ पूरे तौर पर हिन्दुस्तानी मिज़ाज की हैं। भाषा और बिम्ब के सन्दर्भ में भी हमारी वैविध्यपूर्ण जीवन–शैली—शहरी और ग्रामीण, खड़ी बोली और उर्दू—के परस्पर रिश्तों की विरासत इन कविताओं में स्पष्ट रूप से मुखरित होती है। सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि ये कविताएँ पाठक से सीधे संवाद की अपेक्षा से अनुप्राणित हैं।
Kachhar-Katha
- Author Name:
Harish Chandra Pandey
- Book Type:

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Description:
कुछ ही कवि चेतना की चोट से अब तक की परिभाषाओं को धीरे-धीरे ढहाकर अपनी कविता का परिसर निर्मित कर पाते हैं। हिन्दी के हरीश चन्द्र पाण्डे उनमें से एक हैं। उनमें सायास लिखने की न तो बहुत उठाबैठक है, न अनायास लिखने का क्रीड़ा-विलास और निष्प्रयोजनीयता। बल्कि उनकी कविता की चौहद्दी से बाहर भी संवेदना की बहुत सारी हरी-हरी दूब मुलमुलाकर झाँकती मिलती है।
‘गले को ज्योति मिलना’ से लगायत ‘फूल को खिलते हुए सुनना’ जैसे तमाम प्रयोग हरीश चन्द्र पाण्डे के काव्य-संसार में पारम्परिक इन्द्रियबोध को धता बताकर सर्वथा नई तरह की अनुभूति का अहसास कराने में सक्षम हैं। आभासी दृश्यों के घटाटोप को भेदती हुई उनकी कविताएँ उन अनगिन आवाज़ों को ठहरकर सुनने का प्रस्ताव करती हैं जिनमें एतराज़, चीत्कार, हँसी और ललकार के अनेक कंठ ध्वनित होते हैं और ‘हर आवाज़ चाहती है कि उसे ग़ौर से सुना जाए’। क्योंकि हमारी दुनिया ‘अँधेरे के टापू’ में तब्दील होती जा रही है और भयावह अँधेरे को बेकाबू हाथी के अक्स में ढालती जा रही है।
कोई देखे या न देखे लेकिन एक ‘सूर गायक’ इसे यहाँ अपनी प्रज्ञाचक्षु से देख भी रहा है और उसे अपनी आवाज़ भी दे रहा है—एक ऐसी आवाज़ जिससे लोकगीत कहते हैं कि हमें अपना कंठ दें दो और निर्गुण कहते हैं कि हमें। हरीश चन्द्र पाण्डे की कविताएँ ऐसी ही आवाज़ों की सम्पुंज हैं जो बादल छँटने की आवाज़ भी सुन सकती हैं जो एकदम बेआवाज़ हैं। यहाँ हमारे समय की वे बर्बरताएँ भी दर्ज हैं जहाँ कॉलेज जातीं, खुसुरफुसुर करतीं, चहचहातीं, पढ़ाई-लिखाई के दबाव झेलतीं और किशोरवय को सेलीब्रेट करतीं लड़कियों के आसपास ही कोई लड़का घात लगाए केमिस्ट की दुकान से एसिड की बोतल ख़रीद रहा है।
इस ब्रोकर समय में ज़मीन से आसमान तक बेच देने की हवस जिस तरह मनुष्यता के लिए ख़तरे की घंटी है, उसे कवि की उठी हुई तर्जनी सधे ढंग से लक्ष्य करती है। इसीलिए अपने नतोन्नत पहाड़ों पर खिलते बुरूंश के फूलों से लेकर गंगा-जमुना के अवतल कछारों तक पसरी हरीश चन्द्र पाण्डे की कविताएँ अपनी सौन्दर्यदृष्टि, प्रतिरोधी चेतना, भावाभिव्यक्ति और इन्द्रियबोध से कविता की तथाकथित मुख्यधारा से अलग उद्गम और सरणी निर्मित करती हैं। उनका प्रस्तावित नया संग्रह 'कछार-कथा' कोई मील का पत्थर नहीं बल्कि कवि के काव्य-परिसर को और आगे तक देखने का आमंत्रण है। —अष्टभुजा शुक्ल
Mall mein Kabutar
- Author Name:
Dr. Vinay Kumar
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- Description: poetry
Talash
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Govind Geete
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- Description: Book
Seeds of Light
- Author Name:
Jaskiran Singh
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- Description: This book contains the workings of my heart. My attempt to find the silver lining in the most painful moments. I have depicted the inner journey akin to a blossoming flower. If you are afraid of feeling, this book will help you to honour that. Any reader, no matter how novice on the spiritual journey or how refined- can find peace in contemplation and reflection. “Seeds of Light” will enrich your soul, enrapturing the mind with the elements of love, pain, joy, and truth. -Jaskiran Singh
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