Khaamushi Raasta Nikaalegi

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Language:

Hindi

Category:

Poetry

199

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धीरेन्द्र सिंह ‘फ़य्याज़’ ज़बान और अदब के एक सन्जीदा क़ारी और शाइ’र हैं। उनका मुतालआ’ वसीअ’ है और वो मौजूदा अदबी और शाइ’राना मसाइल पर गहरी नज़र रखते हैं। फ़य्याज़ जितने सन्जीदा क़ारी हैं उतने ही सन्जीदा लेखक और शाइ’र भी हैं। पढ़ने-पढ़ाने की अपनी बेहतरीन सलाहियत के बाइ'स साहित्य के समकालीन परिदृश्य में अपने क़ारईन और शागिर्दों के दर्मियान वो बे-हद सम्मानित और प्रिय हैं। उनकी पैदाइश 10 जुलाई, 1987 में खजुराहो के नज़्दीक चन्दला नाम के एक क़स्बे में हुई। फ़य्याज़ इन दिनों मुस्तक़िल तौर पर इन्दौर में रहते हैं।

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ISBN
9789391080761
Pages
160
Avg Reading Time
5 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Format:

Piracy Free

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About the Book

धीरेन्द्र सिंह ‘फ़य्याज़’ ज़बान और अदब के एक सन्जीदा क़ारी और शाइ’र हैं। उनका मुतालआ’ वसीअ’ है और वो मौजूदा अदबी और शाइ’राना मसाइल पर गहरी नज़र रखते हैं। फ़य्याज़ जितने सन्जीदा क़ारी हैं उतने ही सन्जीदा लेखक और शाइ’र भी हैं। पढ़ने-पढ़ाने की अपनी बेहतरीन सलाहियत के बाइ'स साहित्य के समकालीन परिदृश्य में अपने क़ारईन और शागिर्दों के दर्मियान वो बे-हद सम्मानित और प्रिय हैं। उनकी पैदाइश 10 जुलाई, 1987 में खजुराहो के नज़्दीक चन्दला नाम के एक क़स्बे में हुई। फ़य्याज़ इन दिनों मुस्तक़िल तौर पर इन्दौर में रहते हैं।

Book Details

  • ISBN
    9789391080761
  • Pages
    160
  • Avg Reading Time
    5 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

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Khaamushi Raasta Nikaalegi represents the careful, contemplative voice of Dhirendra Singh 'Fayyaz', a poet born in Chandla near Khajuraho in 1987 and now based in Indore. Fayyaz is not only a serious practitioner of Urdu and Hindi poetic forms but also a devoted teacher and scholar of language and literature. His wide reading and deep engagement with contemporary literary debates inform every line of this collection. The title itself — "silence will find a way" — suggests poetry that does not shout but listens, that emerges from sustained observation rather than performance. Fayyaz's verse is respected among readers and students alike for its intellectual honesty and aesthetic discipline. This is poetry shaped by a mind that reads as deeply as it writes, offering insight into the evolving landscape of Hindi-Urdu shaayari in twenty-first-century India.

यह संग्रह किस तरह का पाठ अनुभव देता है?

यह एक चिन्तनशील और शांत काव्य यात्रा है जो जल्दबाज़ी में कुछ साबित नहीं करना चाहती। धीरेन्द्र सिंह 'फ़य्याज़' की कविताएँ धीमी गति से सोचने और महसूस करने का आमंत्रण देती हैं। यह उन पाठकों के लिए है जो शब्दों की चुप्पी में भी अर्थ सुनना जानते हैं। संग्रह को पढ़ने के बाद मन में एक ठहराव और स्थिरता का अहसास रह जाता है, कोई हड़बड़ी नहीं।

यह संग्रह किन पाठकों के लिए सबसे उपयुक्त है और इसे समझने के लिए क्या ज़रूरी है?

यह संग्रह उन पाठकों के लिए है जो उर्दू-हिन्दी शायरी की परम्परा से परिचित हैं या उसमें रुचि रखते हैं। गम्भीर साहित्यिक चर्चा और समकालीन काव्य-विमर्श को समझने की इच्छा रखने वाले पाठक इसे सराहेंगे। इसे पढ़ने के लिए धैर्य और भाषा के प्रति संवेदनशीलता चाहिए। यदि आप कविता को केवल मनोरंजन की तरह नहीं बल्कि एक बौद्धिक और भावनात्मक अनुशासन मानते हैं, तो यह आपके लिए है।

इस संग्रह की विषय-वस्तु का आज के भारतीय पाठकों के लिए सांस्कृतिक या ऐतिहासिक महत्त्व क्या है?

यह संग्रह उर्दू-हिन्दी की साझा साहित्यिक विरासत को समकालीन संदर्भ में जीवित रखता है। आज जब भाषाओं की सीमाएँ कठोर होती जा रही हैं, फ़य्याज़ जैसे कवि दोनों परम्पराओं को सम्मान देते हुए नयी काव्य-भाषा गढ़ते हैं। यह भारतीय पाठकों को याद दिलाता है कि शायरी सिर्फ़ रोमांस नहीं, बल्कि गम्भीर सोच और सामाजिक चेतना का माध्यम भी है।

इस विषय पर लेखक का दृष्टिकोण क्या विशिष्ट बनाता है?

धीरेन्द्र सिंह 'फ़य्याज़' एक शिक्षक-कवि हैं जो लिखने से पहले पढ़ते हैं। उनकी कविताओं में विद्वता और संयम का संतुलन है। वे मौजूदा अदबी मसाइल पर गहरी नज़र रखते हैं और अपनी रचनाओं में उसे प्रतिबिम्बित करते हैं। उनकी आवाज़ शोरगुल वाली नहीं बल्कि आत्मविश्वास से भरी है, जो परम्परा का सम्मान करते हुए नयी ज़मीन तोड़ती है।

यह संग्रह पाठक के साथ भावनात्मक, बौद्धिक या सांस्कृतिक रूप से क्या छोड़ जाता है?

  • एक गहरी आन्तरिक शान्ति और सोचने की नयी दिशा
  • उर्दू-हिन्दी साहित्यिक परम्परा के प्रति नयी समझ और सम्मान
  • यह बोध कि कविता शोर में नहीं बल्कि खामोशी में भी अपना रास्ता निकाल सकती है
  • समकालीन भारतीय काव्य-परिदृश्य में एक ईमानदार और सन्जीदा आवाज़ का अनुभव

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