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धीरेन्द्र सिंह ‘फ़य्याज़’ ज़बान और अदब के एक सन्जीदा क़ारी और शाइ’र हैं। उनका मुतालआ’ वसीअ’ है और वो मौजूदा अदबी और शाइ’राना मसाइल पर गहरी नज़र रखते हैं। फ़य्याज़ जितने सन्जीदा क़ारी हैं उतने ही सन्जीदा लेखक और शाइ’र भी हैं। पढ़ने-पढ़ाने की अपनी बेहतरीन सलाहियत के बाइ'स साहित्य के समकालीन परिदृश्य में अपने क़ारईन और शागिर्दों के दर्मियान वो बे-हद सम्मानित और प्रिय हैं। उनकी पैदाइश 10 जुलाई, 1987 में खजुराहो के नज़्दीक चन्दला नाम के एक क़स्बे में हुई। फ़य्याज़ इन दिनों मुस्तक़िल तौर पर इन्दौर में रहते हैं।
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धीरेन्द्र सिंह ‘फ़य्याज़’ ज़बान और अदब के एक सन्जीदा क़ारी और शाइ’र हैं। उनका मुतालआ’ वसीअ’ है और वो मौजूदा अदबी और शाइ’राना मसाइल पर गहरी नज़र रखते हैं। फ़य्याज़ जितने सन्जीदा क़ारी हैं उतने ही सन्जीदा लेखक और शाइ’र भी हैं। पढ़ने-पढ़ाने की अपनी बेहतरीन सलाहियत के बाइ'स साहित्य के समकालीन परिदृश्य में अपने क़ारईन और शागिर्दों के दर्मियान वो बे-हद सम्मानित और प्रिय हैं। उनकी पैदाइश 10 जुलाई, 1987 में खजुराहो के नज़्दीक चन्दला नाम के एक क़स्बे में हुई। फ़य्याज़ इन दिनों मुस्तक़िल तौर पर इन्दौर में रहते हैं।
Book Details
-
ISBN9789391080761
-
Pages160
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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