Humse Kya Ho Saka Mohabbat Mein

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Language:

Hindi

Category:

Poetry

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रघुपति सहाय ‘फ़िराक़’ गोरखपुरी 1896 में, गोरखपुरी (उत्तर प्रदेश) के एक साहित्यिक घराने में पैदा हुए। उनके पिता भी ‘इर्बत’ गोरखपुरी के उपनाम के साथ उर्दू शायरी करते थे। ‘फ़िराक़’ ने फ़ारसी और उर्दू घर में पढ़ी और फिर जुबिली कालेज, गोरखपुरी में शिक्षा हासिल की| कई साल आज़ादी की लड़ाई में शरीक रहे और फिर इलाहाबाद युनिवर्सिटी के अंग्रेज़ी विभाग में लेक्चरर हो गए जहाँ से प्रोफ़ेसर के तौर पर रिटायर हुए। ‘फ़िराक़’ साहब ने, उर्दू-फ़ारसी शाइ’री के साथ-साथ भारतीय और यूरोपीय साहित्य और दर्शन की परंपरा के गहरे ज्ञान की रौशनी से उर्दू शाइ’री को एक नया दिमाग़ और नया भाव-संसार दिया। वो युग-प्रवर्त्तक शाइ’र थे जिन्होंने उर्दू शाइ’री में आधुनिकता का रास्ता रौशन किया। उन्हें भारतीय ज्ञानपीठ के अलावा कई और सम्मान भी मिले।

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ISBN
9789391080693
Pages
206
Avg Reading Time
7 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Format:

Piracy Free

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About the Book

रघुपति सहाय ‘फ़िराक़’ गोरखपुरी 1896 में, गोरखपुरी (उत्तर प्रदेश) के एक साहित्यिक घराने में पैदा हुए। उनके पिता भी ‘इर्बत’ गोरखपुरी के उपनाम के साथ उर्दू शायरी करते थे। ‘फ़िराक़’ ने फ़ारसी और उर्दू घर में पढ़ी और फिर जुबिली कालेज, गोरखपुरी में शिक्षा हासिल की| कई साल आज़ादी की लड़ाई में शरीक रहे और फिर इलाहाबाद युनिवर्सिटी के अंग्रेज़ी विभाग में लेक्चरर हो गए जहाँ से प्रोफ़ेसर के तौर पर रिटायर हुए। ‘फ़िराक़’ साहब ने, उर्दू-फ़ारसी शाइ’री के साथ-साथ भारतीय और यूरोपीय साहित्य और दर्शन की परंपरा के गहरे ज्ञान की रौशनी से उर्दू शाइ’री को एक नया दिमाग़ और नया भाव-संसार दिया। वो युग-प्रवर्त्तक शाइ’र थे जिन्होंने उर्दू शाइ’री में आधुनिकता का रास्ता रौशन किया। उन्हें भारतीय ज्ञानपीठ के अलावा कई और सम्मान भी मिले।

Book Details

  • ISBN
    9789391080693
  • Pages
    206
  • Avg Reading Time
    7 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

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Humse Kya Ho Saka Mohabbat Mein gathers the ghazals of Firaq Gorakhpuri (1896–1982), a poet who studied Persian and Urdu at home, English literature at Allahabad University, and spent years in the independence struggle before teaching as a professor of English. What makes Firaq singular is his ability to hold classical ghazal form in one hand and modernist European philosophical inquiry in the other. His verse examines love not as ecstasy but as emotional archaeology—what we intended, what we managed, and the distance between the two. The title itself is a question posed to the self: what did we achieve in love? Trained in the Persian tradition yet shaped by early 20th-century Indian intellectual life, Firaq brought introspective honesty and a conversational urbane tone into Urdu's lyric vocabulary. His poetry speaks to readers who recognize love as a site of self-knowledge rather than surrender.

यह किताब पढ़कर मुझे कैसा अनुभव मिलेगा?

यह किताब आपको भावनात्मक आत्मनिरीक्षण की ओर ले जाती है। फ़िराक़ की ग़ज़लें प्रेम को एक प्रश्न के रूप में प्रस्तुत करती हैं—हमने क्या चाहा था और क्या पाया। यहाँ विरह का रोमांस नहीं, बल्कि अपनी भावनाओं के प्रति ईमानदारी है। लय संवादात्मक है, शास्त्रीय उर्दू परंपरा में आधुनिक दार्शनिक चिंतन समाया हुआ है।

यह किताब किस तरह के पाठकों के लिए उपयुक्त है?

  • जो पाठक शास्त्रीय उर्दू शायरी और आधुनिक दार्शनिक सोच का संगम चाहते हैं
  • जो प्रेम को भावनात्मक पुरातत्व के रूप में देखना चाहते हैं
  • जो ग़ज़ल को केवल रूमानी अभिव्यक्ति से परे आत्मज्ञान का माध्यम मानते हैं
  • जिन्हें बीसवीं सदी के भारतीय साहित्यिक आंदोलन में रुचि है

इस किताब का विषय आज के भारतीय पाठकों के लिए सांस्कृतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है?

फ़िराक़ की शायरी उस दौर की याद दिलाती है जब भारतीय बुद्धिजीवी परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन खोज रहे थे। आज़ादी की लड़ाई में शामिल रहकर भी उन्होंने साहित्य को राजनीति से अलग भावनात्मक सत्य का क्षेत्र बनाया। उनकी ग़ज़लें आज भी उन पाठकों से जुड़ती हैं जो पहचान, प्रेम और आत्म-अन्वेषण के प्रश्नों से जूझ रहे हैं।

फ़िराक़ की शायरी को अन्य उर्दू शायरों से क्या अलग करता है?

फ़िराक़ ने यूरोपीय साहित्य और दर्शन का गहरा अध्ययन किया और उसे उर्दू-फ़ारसी की शास्त्रीय परंपरा के साथ मिलाया। उनकी आवाज़ संवादात्मक और शहरी है—प्रेम को वे भावनात्मक पुरातत्व की तरह खोदते हैं। वे पूछते हैं कि हमसे क्या हो सका, और इस प्रश्न में ईमानदारी और आधुनिक चेतना दोनों हैं।

यह किताब पढ़ने के बाद पाठक के मन में क्या रह जाता है?

यह किताब आपको अपनी भावनाओं के प्रति अधिक ईमानदार बनाती है। फ़िराक़ की ग़ज़लें प्रेम को आदर्श नहीं, एक जटिल मानवीय अनुभव के रूप में दिखाती हैं। पाठक के पास एक दार्शनिक दृष्टि रह जाती है—प्रेम केवल पाना नहीं, बल्कि स्वयं को समझने का माध्यम है। यह भावनात्मक परिपक्वता की किताब है।

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