Goonj

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Author:

Rahat Indori

Language:

Hindi

Category:

Poetry

299

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भावनाएँ और संवेदनाएँ अक्सरहां मनरूपी समंदर में मौन बवंडर बन सोया करती हैं। शब्दों के कंकड़ जब इस बवंडर को जागृत करते हैं, तब कहीं जाकर काव्य अपना स्वरुप लेती है। काव्य-संग्रह “गूंज” यथार्थ और कल्पना, सत्य और असत्य, सुख और दुःख, प्रेम और द्वेष, जैसी सभी संवेदनाओं को स्वयं में निहित कर आपके समक्ष प्रस्तुत कि गयी है। काव्यों का ये संकलन आपके मन को प्रेम से स्पर्श भी करेगा तथा आपके अस्तित्व के आगे कई अनछुए पहलुओं एवं सवालों को प्रस्तुत भी करेगा। सुकून की अनुभूति एवं विचारों के द्वंद की गूंज, आपको काव्य-संग्रह “गूंज” में स्पष्ट रूप से सुनाई देगी।

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ISBN
9788198105080
Pages
51
Avg Reading Time
2 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Format:

Piracy Free

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About the Book

भावनाएँ और संवेदनाएँ अक्सरहां मनरूपी समंदर में मौन बवंडर बन सोया करती हैं। शब्दों के कंकड़ जब इस बवंडर को जागृत करते हैं, तब कहीं जाकर काव्य अपना स्वरुप लेती है। काव्य-संग्रह “गूंज” यथार्थ और कल्पना, सत्य और असत्य, सुख और दुःख, प्रेम और द्वेष, जैसी सभी संवेदनाओं को स्वयं में निहित कर आपके समक्ष प्रस्तुत कि गयी है। काव्यों का ये संकलन आपके मन को प्रेम से स्पर्श भी करेगा तथा आपके अस्तित्व के आगे कई अनछुए पहलुओं एवं सवालों को प्रस्तुत भी करेगा। सुकून की अनुभूति एवं विचारों के द्वंद की गूंज, आपको काव्य-संग्रह “गूंज” में स्पष्ट रूप से सुनाई देगी।

Book Details

  • ISBN
    9788198105080
  • Pages
    51
  • Avg Reading Time
    2 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

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Goonj is a Hindi poetry collection that begins where language meets the silent storm of human feeling. The anthology's premise — that emotions lie dormant in the ocean of the mind until words disturb them into form — grounds every verse in lived contradiction: yatharth aur kalpana, truth and untruth, love and hate. Unlike poetry that offers only consolation or only critique, Goonj promises both the comfort of recognition and the disquiet of unanswered questions, presenting facets of existence the reader may not have named before. Published by Rekhta Publications, a house synonymous with Urdu and Hindi literary heritage, this collection inherits a tradition of sukoon (tranquillity) laced with dvandva (inner conflict). For readers seeking poetry that neither soothes completely nor unsettles entirely, but leaves a resonance — a goonj — long after the page is turned, this anthology offers that rare duality.

गूंज कविता-संग्रह पढ़ने से मुझे कैसा अनुभव होगा?

गूंज एक ऐसी काव्य-यात्रा है जो आपको सुकून और बेचैनी दोनों देती है। यह संग्रह प्रेम को छूता है, लेकिन साथ ही ऐसे सवाल खड़े करता है जो आपने खुद से कभी नहीं पूछे। हर कविता आपके भीतर सोई भावनाओं को जगाती है और उन्हें शब्दों में ढालती है। पढ़ते समय आप यथार्थ और कल्पना, सुख और दुःख के बीच झूलते हैं, और पढ़ने के बाद एक गूंज मन में बनी रहती है।

गूंज किस तरह के पाठक के लिए उपयुक्त है और इसे पढ़ने के लिए क्या चाहिए?

यह संग्रह उन पाठकों के लिए है जो सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि आत्म-चिंतन चाहते हैं। यदि आप जीवन की विरोधाभासी संवेदनाओं — प्रेम और द्वेष, सत्य और असत्य — को समझने में रुचि रखते हैं, तो यह पुस्तक आपके लिए है। इसे पढ़ने के लिए खुले मन और धैर्य की जरूरत है, क्योंकि हर कविता एक नया पहलू खोलती है। समकालीन हिंदी काव्य में रुचि रखने वाले और गहरी भावनाओं को महसूस करने वाले पाठकों के लिए यह आदर्श है।

आज के भारतीय पाठकों के लिए गूंज की सांस्कृतिक प्रासंगिकता क्या है?

गूंज उन द्वंद्वों को स्वर देता है जो आधुनिक भारतीय जीवन में हर जगह मौजूद हैं — परंपरा और आधुनिकता, व्यक्तिगत सुख और सामाजिक अपेक्षाएँ। यह संग्रह हिंदी काव्य की उस परंपरा को आगे बढ़ाता है जहाँ भावनाएँ केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामूहिक अनुभव का हिस्सा होती हैं। रेख़्ता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित होने के कारण यह उर्दू-हिंदी साहित्यिक विरासत से भी जुड़ा है, और समकालीन भारत में सांस्कृतिक पहचान के सवालों को छूता है।

गूंज की काव्य-शैली को अन्य हिंदी कविता-संग्रहों से क्या अलग बनाता है?

गूंज की विशिष्टता इसकी संतुलित द्वैत में है — यह न केवल सुकून देती है और न केवल विचलित करती है, बल्कि दोनों को एक साथ प्रस्तुत करती है। यह यथार्थ और कल्पना को अलग नहीं करती, बल्कि उन्हें एक ही काव्य-स्थान में रखती है। संग्रह की भाषा सरल है लेकिन गहराई लिए हुए, और हर कविता पाठक के अस्तित्व के अनछुए पहलुओं को उजागर करती है। यह एक ऐसी आवाज़ है जो मौन को तोड़ती है और गूंज छोड़ जाती है।

गूंज पढ़ने के बाद पाठक के मन में क्या रह जाता है?

  • भावनात्मक गूंज: कविताएँ मन में एक स्थायी अनुभूति छोड़ती हैं, जैसे किसी पत्थर की लहरें पानी में फैलती रहती हैं।
  • अनुत्तरित प्रश्न: यह संग्रह आपको अपने अस्तित्व के बारे में सोचने पर मजबूर करता है, सभी जवाब नहीं देता।
  • सांस्कृतिक जुड़ाव: हिंदी काव्य की समृद्ध परंपरा से एक नया रिश्ता बनता है।
  • आत्म-चिंतन की आदत: पढ़ने के बाद आप अपनी भावनाओं को शब्दों में ढालने लगते हैं।

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