Ghazal Usne Chhedi 2
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देवनागरी लिपि में उर्दू शाइ’री पढ़ने वालों को समर्पित इस संकलन की ये दूसरी किताब मुख्यतः, दिल्ली के उजड़ने के बा’द लखनऊ में जमने वाली शाइ’री की महफ़िल से सम्बंधित शाइ’रों और शाइ’री की रचनात्मक विशेषताओं को रेखांकित करती ISBN 9788192664842 urduGhazal is one of the most prominent forms of urdupoetry that have survived the passage of time. Despite almost eight hundred years of its existence, ghazal hasn’t lost its sheen. Instead, it still resonates in the hearts of poetry enthusiasts with the same fervor. Ghazal in its journey from Amir Khusro to what it is today has seen many ups and downs. Farhat Ehsas is one of the most prominent contemporary urdupoets, and he has tried to capture this journey of Ghazal with the help of ‘Ghazal usne chhedi’ series. With the help of these books one can enjoy the beautiful journey of ghazal. These books are in Devanagri script and meanings are also attached with the difficult words to make it convenient for readers.
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देवनागरी लिपि में उर्दू शाइ’री पढ़ने वालों को समर्पित इस संकलन की ये दूसरी किताब मुख्यतः, दिल्ली के उजड़ने के बा’द लखनऊ में जमने वाली शाइ’री की महफ़िल से सम्बंधित शाइ’रों और शाइ’री की रचनात्मक विशेषताओं को रेखांकित करती ISBN 9788192664842 urduGhazal is one of the most prominent forms of urdupoetry that have survived the passage of time. Despite almost eight hundred years of its existence, ghazal hasn’t lost its sheen. Instead, it still resonates in the hearts of poetry enthusiasts with the same fervor. Ghazal in its journey from Amir Khusro to what it is today has seen many ups and downs. Farhat Ehsas is one of the most prominent contemporary urdupoets, and he has tried to capture this journey of Ghazal with the help of ‘Ghazal usne chhedi’ series. With the help of these books one can enjoy the beautiful journey of ghazal. These books are in Devanagri script and meanings are also attached with the difficult words to make it convenient for readers.
Book Details
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ISBN9788192664842
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Pages279
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Avg Reading Time9 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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यह संस्करण उसी परिमार्जित एवं शुद्धतम पाठ की प्रस्तुति है जिसका आरम्भ उनकी एक सुदीर्घ भूमिका से होता है। इस भूमिका में प्रो. अग्रवाल ने पाठ-परिमार्जन की इस पूरी श्रम-साध्य प्रक्रिया पर तो प्रकाश डाला ही है, कबीर पर अपने अब तक के अध्ययन से प्राप्त अद्यतन धारणाओं को भी सूत्र रूप में दे दिया है।
पाठकों को ज्ञात ही है कि ‘अकथ कहानी प्रेम की : कबीर की कविता और उनका समय’ (2009) में उन्होंने कबीर के बहाने उस मध्यकाल में भारत की आधुनिकता की पहचान की थी, जो औपनिवेशिक आधुनिकता से पहले ही भारत के लोकवृत्त में प्रकट हो चुकी थी।
‘कबीर-ग्रंथावली’ की इस प्रस्तुति में वे न सिर्फ़ कबीर की वाणी को शुद्धतम रूप में हमें दे रहे हैं, बल्कि कबीर-अध्ययन के इतिहास की गुत्थियों को सुलझाते हुए उन्हें ठीक से पढ़ने-जानने की समझ भी हमें प्रदान कर रहे हैं।
Niyati Ka Yayawar
- Author Name:
Harish Anand
- Book Type:

- Description:
कोई भी रचनाकार अन्ततः अपने समय को समझने और उसे व्याख्यायित करने का शब्दयोग ही तो साधता है। ‘अपने समय’ की परिभाषा हर रचनाकार के लिए अलग-अलग होती है। ...यही ‘समय’ कवि हरीश आनंद की रचनाओं का बीज शब्द है। ‘नियति का यायावर’ संग्रह की कविताओं में समय के अनेक आयामों से साक्षात्कार किया गया है। इस प्रक्रिया में कवि व्यक्ति और समाज के बीच मंडित विखंडित सभ्यता के प्रारूपों का विश्लेषण करता रहता है। ‘यायावर’ अज्ञेय का प्रिय शब्द है।...और हरीश आनंद का भी। उन्हें क्षण की चेतावनी याद रहती है ‘अरे यायावर, रहेगा याद!’ हरीश की कविताएँ वस्तुतः वे सघन अन्तःयात्राएँ हैं जिनकी कुछ स्मृतियाँ शब्दों में समा गई हैं। यही कारण है कि ये कविताएँ विवरणों के अरण्य में भटकती नहीं हैं। संकेतों, बिम्बों, अनुभूतियों व व्यंजनाओं से समृद्ध ये कविताएँ आत्म से आत्मीय संवाद स्थापित करती हैं। इनमें विषय-वैविध्य है। जीवन-दर्शन की अबूझ सच्चाइयों से लेकर उत्तर-आधुनिकता की सभ्यता-समीक्षा तक हरीश आनंद की कविताओं की आवाजाही है। हरीश आनंद का कवि स्वभाव है कि वे शब्दों को उनके प्रचलित अर्थों से विचलित करते हुए नए निहितार्थों का उत्खनन करते हैं। ‘अर्थ’ कविता में वे शब्दों की ओर से एक गुहार लगाते हैं कि ‘हम तुम्हारी कुंठाओं की/परिभाषाएँ नहीं हैं।’ कवि के स्वभाव में दार्शनिकता सहज रूप से समाविष्ट है, अमूर्तन और पारिभाषिक पुनर्कथन वाले अर्थ में नहीं। हरीश आनंद की दार्शनिकता जीवन की सार्थकता का अनुसंधान करती है। ‘नियति का यायावर’ इसलिए भी एक महत्त्वपूर्ण कविता-संग्रह है क्योंकि इसमें संवेदनाओं के कई मन्द्र स्वर सुनने को मिलते हैं। कवि ने रंगमंचीय सन्दर्भों का भी अच्छा उपयोग किया है। यह सब सम्भव हुआ है एक प्राणवान, अर्थसम्पन्न और अनवरुद्ध भाषा में। हरीश आनंद शब्दों में निहित गतिशीलता व अर्थसम्भावना के पारखी रचनाकार हैं। स्वाभाविक रूप से यह संग्रह किसी भी पाठक का सहचर बन सकता है।
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