Kabir Granthawali : Parimarjit Paath
Author:
KabirPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Poetry0 Ratings
Price: ₹ 399.2
₹
499
Available
कबीर-पंथियों में जो स्थान ‘बीजक’ का है, अकादमिक हलक़ों में वही स्थान श्यामसुन्दर दास द्वारा सम्पादित ‘कबीर-ग्रंथावली’ का है। तमाम विवादों और असहमतियों के बावजूद आज भी कबीर के प्रामाणिक पाठ के लिए अध्येता ‘ग्रंथावली’ का ही सहारा लेते हैं।</p>
<p>ऐसे में अगर यह पता चले कि ‘ग्रंथावली’ में संकलित कबीर भले ही अन्य संग्रहों के मुक़ाबले ज़्यादा पूरे हों, लेकिन जो पाठ यहाँ प्रकाशित है, उसमें अनेक ऐसी भूलें हैं, जो अर्थ का अनर्थ ही नहीं कर रहीं, बल्कि कवि के मंतव्य को ही उलट दे रही हैं, तो क्या हो...</p>
<p>आश्चर्य नहीं कि लगभग एक सदी से अनेक संस्करणों में व्यवहृत ‘ग्रंथावली’ के इस पक्ष पर प्रो. पुरुषोत्तम अग्रवाल की निगाह रुकी और उन्होंने अपने विशद अध्ययन और कबीर के प्रति अपने असाधारण प्रेम के चलते इसके परिमार्जन का बीड़ा उठाया।</p>
<p>यह संस्करण उसी परिमार्जित एवं शुद्धतम पाठ की प्रस्तुति है जिसका आरम्भ उनकी एक सुदीर्घ भूमिका से होता है। इस भूमिका में प्रो. अग्रवाल ने पाठ-परिमार्जन की इस पूरी श्रम-साध्य प्रक्रिया पर तो प्रकाश डाला ही है, कबीर पर अपने अब तक के अध्ययन से प्राप्त अद्यतन धारणाओं को भी सूत्र रूप में दे दिया है।</p>
<p>पाठकों को ज्ञात ही है कि ‘अकथ कहानी प्रेम की : कबीर की कविता और उनका समय’ (2009) में उन्होंने कबीर के बहाने उस मध्यकाल में भारत की आधुनिकता की पहचान की थी, जो औपनिवेशिक आधुनिकता से पहले ही भारत के लोकवृत्त में प्रकट हो चुकी थी।</p>
<p>‘कबीर-ग्रंथावली’ की इस प्रस्तुति में वे न सिर्फ़ कबीर की वाणी को शुद्धतम रूप में हमें दे रहे हैं, बल्कि कबीर-अध्ययन के इतिहास की गुत्थियों को सुलझाते हुए उन्हें ठीक से पढ़ने-जानने की समझ भी हमें प्रदान कर रहे हैं।
ISBN: 9788119159284
Pages: 480
Avg Reading Time: 16 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: चंदायन हिजरी 781 (1379 ई.) की रचना है। इसकी रचना मौलाना दाऊद ने फीरोज़शाह तुगलक के युग में की थी। चंदायन काव्य की दृष्टि से ही नहीं, सांस्कृतिक और भाषा वैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण है। चंदायन की कथा का मूल स्त्रोत लोरिकी, लोरिकायन या चनैनी है। ये तीनों नाम एक ही लोक महाकाव्य के हैं। लोरिकी को ही चनैनी भी कहा जाता है। अवधी क्षेत्र में चनैनी इस महाकाव्य को नायिका चनवा (चंदा) के नाम पर दिया गया है। चंदायन के कवि मौलाना दाऊद ने लोक महाकाव्य से कथा लेकर चंदा का नख-शिख, नगर वर्णन, बारहमासा में विरह का गम्भीर चित्र जोड़कर इस काव्य को एक श्रेष्ठ साहित्यिक काव्य बना दिया है। चंदायन के नाम से अब हिन्दी साहित्य के विद्यार्थी अपरिचित नहीं रह गये हैं। हिन्दी और अंग्रेजी में लिखे गये निबन्धों में मौलाना दाऊद की कृति चंदायन पर विस्तार से विचार किया है। इस द्वितीय भाग में चंदायन की व्याख्या, शब्दार्थ तथा सांस्कृतिक टिप्पणियाँ तथा विशिष्ट शब्दों की व्युत्पत्ति विस्तार से दी गयी है। पाठकों की सुविधा के लिए दो सौ छंदों की विशद् शब्दानुक्रमणिका दी गयी है। इससे चंदायन की भाषा का स्वरूप समझने में सहायता मिल सकती है।
Mahaprashthan
- Author Name:
Shri Naresh Mehta
- Book Type:

- Description: ‘महाप्रस्थान’ का स्रोत ‘महाभारत’ है। सहस्रों वर्षों से भारतीय साहित्य इस महागाथा के अखूट स्रोत से अभिनव सृष्टि करता रहा है। कवि ने अपने आधुनिक चिन्तन के लिए इनका आश्रय लिया है। पुस्तक का विषय पांडवों का ‘स्वर्गारोहण’ है, जिसमें युधिष्ठिर के माध्यम से कवि ने राज्य-व्यवस्था की अकूत शक्ति से उत्पन्न संकट और उसके बरक्स व्यक्ति की रक्षा जैसे प्रश्न उठाए हैं, जो चिरन्तन हैं, परन्तु आपात्काल के सन्दर्भ में प्रासंगिक प्रश्न भी हो गए हैं।
Samanantar
- Author Name:
Ramdhari Singh Dinkar
- Book Type:

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Description:
‘समानान्तर’ रामधारी सिंह ‘दिनकर’ द्वारा अनूदित विश्व-काव्य की श्रेष्ठ कृतियों का संकलन है।
इस पुस्तक में एक तरफ़ जहाँ हमें—पुर्तगीजी, स्पेनिश, अंग्रेज़ी, जर्मन, फ़्रेंच, अमरीकी, चीनी, पोलिश एवं भारतीय भाषाओं में मलयालम की अछूती भावभूमि और नवीन भंगिमाओं वाली कविताएँ मिलती हैं तो दूसरी तरफ़ डी.एच. लारेंस की वे कविताएँ भी जो यूरोप और अमरीका में बहुत लोकप्रिय नहीं हो सकीं, लेकिन जिनका राष्ट्रकवि दिनकर जी ने चयन ही नहीं, बल्कि सरल भाषा-शैली में हिन्दी में अनुवाद भी किया और जो भारतीय चेतना के आसपास चक्कर काटती हैं।
अनूदित होते हुए भी नितान्त मौलिक प्रतीत होनेवाली कालजयी कविताओं का एक अनूठा संकलन है ‘समानान्तर’।
My Odyssey
- Author Name:
Apoorva Ravi
- Rating:
- Book Type:

- Description: Every human being traverses through the different stages of life experiencing love, loss, and loneliness. The book, ‘My Odyssey’ speaks about the author's tryst with life, learning to love, encountering loss, and experiencing loneliness. There are instances where the author ‘sees light and hope' in different forms. The book talks about the author’s mental health journey, relationships with people, and herself coupled with her lyrical reflections on life through poems. The author hopes that her book will help people embrace the love that they receive, accept the loss that they encounter, experience the inevitable loneliness with grace, and find hope in the little things of life.
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