Ghazal Ka Shor
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रेख़्ता नुमाइन्दा कलाम ज़फ़र इक़बाल के कलाम का इन्तिख़ाब। A volume of Zafar Iqbal’s poetry in Devanagari, brilliantly selected and compiled by Rekhta Publications. Zafar Iqbal is one of the finest urdupoets of the subcontinent, based in Okara, Pakistan. Zafar Iqbal is considered unique for his style of writing as well as diction, which is entirely different from traditional urdupoetry. In contrast to traditional urdupoets, Zafar Iqbal establishes love as physical and scientific rather than supernatural. He is known as poet of a new tone and new concept. Meanings are attached with the difficult words, which makes it easier for a commoner to get close to the flavor of couplets.
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रेख़्ता नुमाइन्दा कलाम ज़फ़र इक़बाल के कलाम का इन्तिख़ाब। A volume of Zafar Iqbal’s poetry in Devanagari, brilliantly selected and compiled by Rekhta Publications. Zafar Iqbal is one of the finest urdupoets of the subcontinent, based in Okara, Pakistan. Zafar Iqbal is considered unique for his style of writing as well as diction, which is entirely different from traditional urdupoetry. In contrast to traditional urdupoets, Zafar Iqbal establishes love as physical and scientific rather than supernatural. He is known as poet of a new tone and new concept. Meanings are attached with the difficult words, which makes it easier for a commoner to get close to the flavor of couplets.
Book Details
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ISBN9788194415015
-
Pages240
-
Avg Reading Time8 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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हिन्दी के आधुनिक कबीर नागार्जुन की कविता के बारे में डॉ. रामविलास शर्मा ने लिखा है : ‘‘जहाँ मौत नहीं है, बुढ़ापा नहीं है, जनता के असन्तोष और राज्यसभाई जीवन का सन्तुलन नहीं है वह कविता है नागार्जुन की। ढाई पसली के घुमन्तू जीव, दमे के मरीज़, गृहस्थी का भार—फिर भी क्या ताक़त है नागार्जुन की कविताओं में! और कवियों में जहाँ छायावादी कल्पनाशीलता प्रबल हुई है, नागार्जुन की छायावादी काव्य-शैली कभी की ख़त्म हो चुकी है। अन्य कवियों में रहस्यवाद और यथार्थवाद को लेकर द्वन्द्व हुआ है, नागार्जुन का व्यंग्य और पैना हुआ है, क्रान्तिकारी आस्था और दृढ़ हुई है, उनके यथार्थ-चित्रण में अधिक विविधता और प्रौढ़ता आई है।...उनकी कविताएँ लोक-संस्कृति के इतना नज़दीक हैं कि उसी का एक विकसित रूप मालूम होती हैं। किन्तु वे लोकगीतों से भिन्न हैं, सबसे पहले अपनी भाषा—खड़ी बोली के कारण, उसके बाद अपनी प्रखर राजनीतिक चेतना के कारण, और अन्त में बोलचाल की भाषा की गति और लय को आधार मानकर नए-नए प्रयोगों के कारण। हिन्दीभाषी...किसान और मज़दूर जिस तरह की भाषा...समझते और बोलते हैं, उसका निखरा हुआ काव्यमय रूप नागार्जुन के यहाँ है।’’
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