Aur Is Bar Jab Tum Nadi Bani
Author:
Shishir UpadhyayPublisher:
Shivna PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Poetry0 Ratings
Price: ₹ 148
₹
185
Available
This book has no description
ISBN: 9789390593156
Pages: 120
Avg Reading Time: 4 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Jayasi Soor Bihari
- Author Name:
Ram Bux Jat
- Book Type:

-
Description:
यह पुस्तक सिविल सेवा, विश्वविद्यालय परीक्षा समेत समस्त प्रकार की प्रतियोगी परीक्षाओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
पुस्तक में जायसी, सूरदास और बिहारी के प्रमुख पद सरलार्थ सहित उपलब्ध कराए गए हैं।
परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक कवि की रचना पर आलोचनात्मक लेख भी पुस्तक में शामिल है।
Amiri Rekha
- Author Name:
Kumar Ambuj
- Book Type:

-
Description:
न्याय और अन्याय, अभाव और रईसी, इच्छा और यथार्थ, पुरातन और नई सभ्यता जैसे अनेक विलोम प्रत्ययों के बीच वैचारिक आवागमन को ये कविताएँ अप्रत्याशित अनूठेपन एवं द्वंद्वात्मकता के साथ सम्भव बनाते हुए नए प्रस्ताव प्रस्तुत करती हैं। यहाँ भाषा, विचार, नैतिकता और स्वप्नशीलता के साथ कलाकर्म की वही अप्रतिम सर्जनात्मकता दृष्टव्य है जिसे कुमार अंबुज की कविता ने लगातार अर्जित किया है और अंबुज हर बार उसे नई ऊँचाइयों, अभिनव जगहों तक ले गए हैं। ये कविताएँ सक्रिय और सकर्मक प्रतिरोध की रचनात्मक कार्रवाई हैं। इनमें जीवन के संगीत, उत्तराधिकार, वैश्विकता, राजनीति, बाज़ार, मनुष्यता, प्रेम और अपमान की, हमारे समय और हमारी भाषा की पुनर्परिभाषाएँ हैं, उनकी आधुनिक पहचान है। साहसिक आत्मावलोकन और प्रवंचनाएँ भी हैं। इन कविताओं से अपने भीतर के टूटे-फूटे मनुष्य की मरम्मत की जा सकती है। इन्हें इनके खुरदुरेपन के लिए प्यार किया जा सकता है और इस बात के लिए भी कि इनके भीतर कितना कुछ है—शान्त, चपल और भविष्य से लबालब भरा हुआ। संवेदित, व्यग्र अभिव्यक्ति, अचूक दृष्टि और पक्षधरता से पुष्ट कविता कुमार अंबुज की अपनी उपलब्धि है, जिसे यहाँ समूची हिन्दी कविता के सन्दर्भ में कुछ अधिक शक्ति के साथ औचक, विस्मयकारी, दुर्लभ, हार्दिक और नव्यतर भंगिमाओं के साथ देखा जा सकता है। किंचित् लम्बे अन्तराल और प्रतीक्षा के बाद प्रकाशित यह संग्रह निश्चय ही नई बहसों, रुझानों, प्रस्थानों और चुनौतियों का कारण बनेगा।
Pragatisheel Sahitya Ki Jimmedari
- Author Name:
Markandey
- Book Type:

-
Description:
हिन्दी साहित्य में मार्कण्डेय की पहचान मुख्यतः कहानीकार के रूप में है। 2-डी, मिन्टो रोड से सीधे जुड़े रहे लोग भी उन्हें एक बेहतरीन क़िस्सागो के रूप में ही याद करते हैं। लेकिन देश और समाज-संस्कृति की लेकर उनकी चिन्ताएँ व ज़िम्मेदारी का भाव उन्हें कहानी से निर्बन्ध भी करता रहता और विचार-रूप में सीधे व्यक्त हो उठता। यह पुस्तक मार्कण्डेय की इस पहचान को सामने लाती है।
इस पुस्तक की अन्तर्वस्तु का फैलाव साहित्य से लेकर राजनीति की हद तक है। मार्कण्डेय यहाँ जिस चिन्तनधारा व इतिहासबोध को अपनाते हैं, वह आधुनिक समाज-विज्ञानों से आता तो है लेकिन अपने समाज की आन्तरिक स्थिति, ‘जन’ तथा ‘लोक’ से अन्तःक्रिया के साथ।
इस पुस्तक में वैचारिक लेखों के आलावा ‘गोदान’ तथा अन्य ग्राम-उपन्यासों पर लिखे लेख तथा पुस्तक समीक्षाएँ भी शामिल हैं। लोक-साहित्य पर दो लेख और दो भाव-चित्र हैं जो आधुनिक और प्रगतिशील दृष्टि को ही अपना प्रस्थान-बिन्दु बनाते हैं। इस पुस्तक में मार्कण्डेय सर्वथा भिन्न रूप में पाठकों से रू-ब-रू होते हैं। मार्कण्डेय के साहित्य-संवाद का यह संस्करण ‘प्रगतिशील साहित्य की ज़िम्मेदारी’ पर खरा उतरता है।
—भूमिका से
Satrang
- Author Name:
Kamal Naseem
- Book Type:

-
Description:
उर्दू ग़ज़लों के चुनिन्दा शे’रों के प्रस्तुत संकलन में अठारहवीं और उन्नीसवीं सदी के सात जाने-माने शायरों और उनके लगभग 800 चुनिन्दा शे’र शामिल किए गए हैं। यह संकलन उस पाठक के लिए है जो उर्दू से प्यार करता है, ग़ज़ल का दीवाना है, ग़ज़ल गायकी का क़द्रदान है, मगर उर्दू की लिपि से वाक़िफ़ नहीं है। उसकी ज़रूरतों और अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए ऐसे शे’र चुने गए हैं जिनमें विचार और भाव की उत्कृष्टता है मगर भाषा अपेक्षाकृत सरल है, जिनकी अदायगी मन को मोह लेती है और धार सीधे दिल में उतर जाती है।
कुछ ग़ज़लों के एक से अधिक शे’र भी संकलन में शामिल हैं। ये बहुधा ऐसी ग़ज़लें हैं जो बहुत लोकप्रिय हैं और शायर की ख़ास पहचान भी। शे’र विषय के अनुरूप संयोजित किए गए हैं। दर्शन, अध्यात्म, रहस्यवाद, हुस्न-ओ-इश्क़, एक विशिष्ट सोच या प्रतीक अथवा किसी विशेष काव्य चरित्र जैसे नासेह, कासिद, वाइज इत्यादि से सम्बद्ध विभिन्न शायरों के शे’र आपको एक ही स्थान पर मिलेंगे।
Khuli Aankh Aur Anya Kavitayen
- Author Name:
Udyan Vajpeyi
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Mahaprashthan
- Author Name:
Shri Naresh Mehta
- Book Type:

- Description: ‘महाप्रस्थान’ का स्रोत ‘महाभारत’ है। सहस्रों वर्षों से भारतीय साहित्य इस महागाथा के अखूट स्रोत से अभिनव सृष्टि करता रहा है। कवि ने अपने आधुनिक चिन्तन के लिए इनका आश्रय लिया है। पुस्तक का विषय पांडवों का ‘स्वर्गारोहण’ है, जिसमें युधिष्ठिर के माध्यम से कवि ने राज्य-व्यवस्था की अकूत शक्ति से उत्पन्न संकट और उसके बरक्स व्यक्ति की रक्षा जैसे प्रश्न उठाए हैं, जो चिरन्तन हैं, परन्तु आपात्काल के सन्दर्भ में प्रासंगिक प्रश्न भी हो गए हैं।
Kuchh Aur Nazmein
- Author Name:
Gulzar
- Book Type:

-
Description:
गुलज़ार के गीत हिन्दी फ़िल्मों की गीत परम्परा में अपनी पहचान ख़ुद हैं, प्रवृत्ति के साथ उनके कवि का जैसा अनौपचारिक और घरेलू रिश्ता है, वैसा और कहीं नहीं मिलता। जितने अधिकार से गुलज़ार क़ुदरत से अपने कथ्य और मन्तव्य के सम्प्रेषण का काम लेते रहे हैं, वैसा भी और कोई रचनाकार नहीं कर पाया है। न फ़िल्मों में और न ही साहित्य में।
इस किताब में वे नज़्में शामिल हैं जिनमें से ज़्यादातर को आप इस किताब में ही पढ़ सकते हैं, यानी कि ये गीतों के रूप में फ़िल्मों के मार्फ़त आप तक कभी नहीं पहुँचीं। इसमें गुलज़ार की कुछ लम्बी नज़्में भी शामिल हैं, कुछ छोटी और कुछ बहुत छोटी जिन्हें उन्होंने ‘त्रिवेणी’ नाम दिया है। इनको पढ़ना एक अलग ही तजुर्बा है।
ADHOORA RASHTRAGAN
- Author Name:
Dr. Omprakash Singh Shant
- Book Type:

- Description: Collection of poems
Shayad
- Author Name:
Sudhir Ranjan Singh
- Book Type:

-
Description:
हाल के दशकों में जिन कवियों ने अपनी प्रतिभा और काव्य-व्यवहार से सर्वाधिक चकित और विस्मित किया है, उनमें सुधीर रंजन सिंह अग्रणी हैं। हिन्दी कविता के लगभग एकरस हो रहे स्वर को सुधीर ने अपनी कविताओं से न केवल भंग किया बल्कि उसे अनेक रंगों, रसों, ध्वनियों से सघन और संकुल किया। नितान्त अछूते, अनाघ्रात विषयों को कविता के कक्ष में आबद्ध करते हुए सुधीर रंजन ने कहन और प्रस्तुति की नई प्रविधि विकसित की जिसके अगले संस्करण के तौर पर इस नए संग्रह को देखा और परखा जा सकता है। कविता के ब्रह्मांड में व्यतीत ये परिवर्तन इतने सूक्ष्म एवं तरंगरूप हैं कि ज़रा-सी असावधानी पाठक को इस सम्पूर्ण ऐश्वर्य से वंचित कर सकती है। प्रस्तुत संग्रह 'शायद’ भी इसी सावधानी की माँग करता है, क्योंकि कई स्तरों पर यहाँ पारम्परिक सौन्दर्य-बोध विखंडित एवं निरस्त होता है :
गिद्ध आँखों से देखें तो
मुरदा होना सबसे सुन्दर होना है
इसीलिए यह पूरी कविता-पुस्तक जीवन का जयघोष है। अनेकानेक व्यक्तियों, चरित्रों, प्रसंगों, अनुभूतियों से समृद्ध यह संग्रह भाषा को भी नई भंगिमा से बरतता और अन्वेषित करता है। इसका एक उदाहरण ‘बैठना क्रिया से अभिप्राय’ कविता है जो सीधे-सीधे एक क्रिया का फलित पाठ है—सात अलग-अलग स्थितियों में, जो मिलकर सम्पूर्ण जीवन-पक्ष रचती हैं और एक गहरे राजनीतिक आशय से सारगर्भित होती हैं। 'धूप से पीठ टिकाए’ जैसे अनेक स्थल हैं जो हमें रोक लेते हैं। ऐसा अमूर्तन पहले नहीं मिलता। सुधीर के यहाँ होनेवाले ये भाषिक 'विचलन’ एक सर्वथा नए जीवन-बोध से उद्धृत हैं जिसका एक अप्रतिम उदाहरण है 'धन्य’ शीर्षक कविता जो पुन: अपने अन्दरूनी आशय में राजनीतिक है पर ऊपर से ऐसा भास नहीं होता। यही कारण है कि ये कविताएँ गम्भीर पाठ की अपेक्षा करती हैं।
सुधीर ने कुछ नए चरित्र भी रचे हैं। इनमें विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं 'सड़क किनारे के मैकेनिक’, 'दर्जी’, 'सोनाराम लोहार’ और 'गायें’। यहाँ गायें भी चरित्र की तरह हैं। बेहद मार्मिक। सुधीर शायद पहली बार कविता की खोजबत्ती को अन्दर की तरफ़ घुमाते हैं जिसका परिणाम है 'आत्मस्वीकृति’ जैसी विलक्षण कविता। 'बिना किसी ग़लती और भूल के मैं कोई काम नहीं कर सकता था।’ इसी आभ्यन्तरीकरण का शायद यह देय हो कि कवि ने मृत्यु एवं अन्त के आभास को लेकर कुछ गहरी कविताएँ लिखी हैं। सुधीर की कविताओं में सान्द्रता एवं बौद्धिक त्वरा बढ़ी है। जीवन के सन्धान, भाषा के आकस्मिक प्रयोग एवं बिम्बों की शृंखला इस संग्रह को विशिष्ट बनाते हैं। शायद, और यही तो नाम है इस पुस्तक का, सुधीर अकेले कवि हैं अपनी पीढ़ी के जो अत्यन्त संयत एवं धीर भाव से गहरी उत्तेजना की सृष्टि करते हैं और शान्त प्रतीत होती सतह को भी घूर्णों से भर देते हैं। सुधीर की कविता भविष्य की वाणी है—किसी एक यात्रा के पहले कई गुना अधिक भोगी भटकन।
—अरुण कमल
Yun To Sab Kuchh Purvavat Hai
- Author Name:
Hema Dikshit
- Book Type:

-
Description:
हेमा दीक्षित ने कठिन काव्य-क्षेत्र में एक सहमा विकम्पित-सा क़दम रखा है। लेकिन जल्दी ही यह साफ़ हो जाता है कि जीवन-संघर्ष में वह कविता को अपना सम्बल और लड़ने का आयुध बनाना चाहती हैं। यह आग्रह उन्हें काव्य व्यक्तित्व देता है और उनके उपक्रम को जेनुइन बनाता है। कविता की अपनी पहली किताब में वह अपने स्वत्व और उसे कह पाने वाली भाषा के आविष्कार में सन्नद्ध दिखती हैं। काव्यशास्त्र में कविता के प्रयोजन के बारे में प्रायः पूछा जाता है कि कविता लिखने का उद्देश्य क्या है? हेमा के लिए इसका उत्तर यह है कि वह अपनी विकलताओं को कविता में लाना चाहती हैं। महत्त्वपूर्ण बात यह है कि जीवन की निजता को कविता में लाते हुए वह बहुत नैसर्गिक तरीक़े से निर्वैयक्तिकता को कविता में अनुस्यूत होने देती हैं। इस तरह निजी दुख सार्वजनीन दुख का प्रतिनिधि बन जाता है, अपना सन्ताप दुनिया का सन्ताप और न्याय को न पाने की निजी त्रासदी तमाम लोगों के न्याय को न पाने की अवस्थिति में बदल जाती है। इस तरह आत्म-सजगता के बावजूद आत्म-गरिमा का क्षरण नहीं होता जो आत्म-विस्तार में बदलकर किसी भी आत्म-ग्रस्तता का निषेध बन जाता है। उनकी कविता का पाठ किसी साँचे में ढले ऐस्थेटिक्स से न तो अनुकूलित है और न उसमें विद्रोह की कोई चौंकाने वाली अनावश्यक भंगिमा ही है। ऐसा भी नहीं कि उनकी सहज साहसिकता कविताओं में अव्यक्त रह जाए। अन्तर्वस्तु को न खोने का हठ यदि कविता का आत्मिक गुण माना जाता हो तो हेमा की कविता में उसकी ख़ला नहीं।
—देवी प्रसाद मिश्र
Indraprasth Ke Kash-Pushp
- Author Name:
Kantesh Mishra
- Book Type:

- Description: भले हम किसी की आशाओं में न हों। हम हों हर प्रकार से बहिष्कृत विकल्प। हमारी प्रार्थना में किसी एक का भी होना, पृथ्वी पर प्रेम की सम्भावना, प्रबल बनाता है। -इसी पुस्तक से
Yugpurush Jaiprakash Narayan
- Author Name:
Uma Shanker Verma
- Book Type:

- Description: जनक्रांति झुग्गियों से न हो जब तलक शुरू, इस मुल्क पर उधार है इक बूढ़ा आदमी। लोकनायक जयप्रकाश नारायण के क्रांतिकारी व्यक्तित्व की झलक देतीं सूर्यभानु गुप्त की उपरोक्त पंक्तियाँ बतलाती हैं कि आम जन में परिवर्तन के सपने को जयप्रकाश नारायण ने कैसे रूपाकार दिया था। युगपुरुष जयप्रकाश में प्रसिद्ध कवि, संपादक उमाशंकर वर्मा ने हिंदी के ऐसे सैकड़ों कवियों की कविताएँ संकलित की हैं, जिन्होंने जयप्रकाश के क्रांतिकारी उद्घोष को सुना और उससे उद्वेलित हुए। भगीरथ, दधीचि, भीष्म, सुकरात, चंद्रगुप्त, गांधी, लेनिन और न जाने कैसे-कैसे संबोधन जे.पी. को दिए कवियों ने। उन्हें याद करते हुए आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी ने सही कहा कि ‘इस देश की संस्कृति का जो कुछ भी उत्तम और वरेण्य है, वह उनके व्यक्तित्व में प्रतिफलित हुआ है।’ आरसी प्रसाद सिंह, इंदु जैन, उमाकांत मालवीय, कलक्टर सिंह केसरी, जगदीश गुप्त, जानकी वल्लभ शास्त्री, धर्मवीर भारती, पोद्दार रामावतार अरुण, बालकवि बैरागी, बुद्धिनाथ मिश्र, रामधारी सिंह दिनकर, कुमार विमल, नीरज आदि प्रसिद्ध कवियों-गीतकारों सहित सैकड़ों रचनाकारों की लोकनायक के प्रति काव्यांजलि को आप यहाँ पढ़ सकते हैं। —कुमार मुकुल
Mohabbat Karke Dekho Na
- Author Name:
Farhat Ehsas
- Book Type:

-
Description:
फ़रहत एहसास अपने समकालीनों में एक मुमताज़ शाइर हैं। इससे पहले फ़रहत एहसास के एक-दो छोटे-छोटे संग्रह उर्दू लिपि में प्रकाशित हुए हैं जो किसी भी तरह उनकी कुल रचनात्मकता की नुमाइंदगी नहीं करते। मेरी दिली ख़्वाहिश थी कि ‘रेख़्ता’ उनकी शाइरी के तमाम रंगों पर आधारित एक संचयन प्रकाशित करे। आज से तीन बरस पहले देखे गए इस ख़्वाब की ताबीर की शक्ल में ये किताब आपके हाथों में है। मैं इसे अपनी ख़ुशनसीबी समझता हूँ कि उनकी शाइरी को उसके हज़ारों पाठकों तक पहुँचाने का श्रेय मेरे हिस्से में आया। इस सफ़र में सबसे मुश्किल मर्हला फ़रहत एहसास को राजी करना था। उनकी तख़लीक़ी बेनियाज़ी उन्हें अपनी शाइरी बाज़ार तक लाने से रोकती रही है। उन्हीं का शे’र है—
एक के बाद एक मज्मूआ मिरा आता रहा
और मैं शाइर बिचारा ग़ैर-मत्बूआ रहा।
ऐसे महत्त्वपूर्ण शाइर के कलाम का इन्तिख़ाब करके हम ख़ुशी और फ़ख़्र महसूस करते हैं। फ़रहत एहसास की शाइरी की तरह उनकी ज़िन्दगी भी मेरे लिए उतनी ही पुरकशिश है। उनसे तआरुफ़ का अर्सा अगरचे अभी मुख़्तसर है लेकिन सोचने पर ऐसा लगता है कि हम बरसों के शनासा हैं। ऐसे हम-रंग और हम-मिज़ाज से मिलना मेरे लिए एक ख़ुशगवार अनुभव रहा।
फ़रहत एहसास के मिज़ाज की क़लन्दरी बेबाक़ी और बज़्लासन्जी, उन्हें हरदिल अज़ीज़ बनाती है। फ़रहत एहसास की दिलचस्पियाँ सिर्फ़ शाइरी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संस्कृति, सभ्यता, इतिहास, धर्मशास्त्र, अध्यात्म, मौसीक़ी और फ़लसफ़े पर उनसे बातचीत एक रौशनी अता करती है। इसके अलावा उनका खुला-डला तर्ज़, व्यापकता और इनसान-दोस्ती का रवैया मेरे लिए ज़ाती तौर पर बहुत मुतास्सिर करनेवाला रहा।
ये मेरी ख़ुशबख़्ती है कि मुझे एक ऐसे शाइर और एक ऐसे इनसान से मिलने, उसके साथ वक़्त गुज़ारने और उनकी शाइरी और शख्स़ियत को इतने क़रीब से जानने का मौक़ा मिला। उम्मीद है कि उर्दू शाइरी के बाज़ौक़ पाठकों में हमारी ये पेशकश भी मक़बूल होगी।
Yaqeen Ki Ayten
- Author Name:
Ashutosh Dube
- Book Type:

- Description: तोष दुबे की कविता में महज़ विषयों की विविधता नहीं, बल्कि करुणा, अवसाद, विडम्बना-बोध और अपराध-बोध के अलग-अलग शेड्स और विस्तार हैं और भाषा कवि के मानस को ऐसी जगह भी प्रक्षेपित करने में सफल है जो बयानों और अतिकथनों के बाहर बनती है। —विजय कुमार आशुतोष दुबे की कविताएँ एक अभयारण्य हैं।...कम लोगों की कविता ऐसी होती है जहाँ इतने अधिक स्रोतों से बेधड़क शब्द चले आएँ और ऐसे अर्थलाघव के साथ...यह काव्य-विवेक आशुतोष में है कि समझें कितना कहना है और रुकना कहाँ है! विडम्बनाओं की गहरी समझ चट-चटाक इनके एक-एक बिम्ब में वैसे खुलती है जैसे कि पानी के छींटे पड़ते ही चिटपिटिया के बीज चट से चटक जाते हैं। —अनामिका आशुतोष दुबे की काव्यानुभूति की बनावट बहुत सूक्ष्म और संश्लिष्ट है। उसमें कई बार सोच के ऐसे समुन्नत स्तर का स्पर्श है, जो हमें दैनंदिन पीड़ाओं के जंजाल से ऊपर उठाता है। कविता की यह मुक्तिकामी भूमिका है।...जैसे एक प्रशान्त और एकाग्र अन्तश्चेतना के सहारे वे चीज़ों के भीतर झाँकते हैं और उसके अनुभव को ऐसा दार्शनिक अर्थ देते हैं, जो कई बार उनसे पहले हमें अप्राप्य ही था। —पंकज चतुर्वेदी शायद ऐसी कविताओं के लिए एक निरायास—किन्तु संयमित प्रतीक्षा करनी पड़ती होगी कि विषय अन्दर उतरे और अपना फ़ॉर्म, अपना शेड, अपना टेम्परेचर, अपनी संक्षिप्तता, अपना भुरभुरापन और...और...लेकर बाहर निकले। लेकर बाहर निकले यानी इनके सहित नहीं, इन्हें ओढ़कर-पहनकर नहीं—इनसे बना हुआ होकर, इनका बना हुआ होकर बाहर निकले। और इन तमाम बातों के कई-कई टुकड़े हैं और हर टुकड़ा ‘हर रात अलग-अलग कमरों में सोता है।’ —प्रभु नारायण वर्मा
Yaden Basant ki
- Author Name:
Leeladhar Mandloi
- Book Type:

- Description: यादें बसंत की खुशबूएँ हैं|
Jo Apna Haal Hai
- Author Name:
Sardar Anwar
- Book Type:

- Description: जो अपना हाल है सब अपनी हरकतों से है! दुआ किसी की नहीं बद् दुआ किसी की नहीं!!
Pukarti Hain Smritiyan
- Author Name:
Anand Pachauri
- Book Type:

- Description: Book
Gangatat
- Author Name:
Gyanendrapati
- Book Type:

-
Description:
आज के महत्त्वपूर्ण हिन्दी कवियों की पंक्ति में ज्ञानेन्द्रपति का होना कविता की कुछ विरल क़िस्में ईजाद करनेवाले एक ऐसे कवि का होना है जिसे दुनिया की हर वस्तु काव्य-सम्भावना से युक्त लगती है। ज्ञानेन्द्रपति की कविताओं में जनपदीय आभा है, स्थानीयता का गौरव है, आंचलिकता का उजास है तथा जीवन और जगत को मथने-भेदनेवाले समकालीन मुद्दों की अनिवार्य अनुगूँज है। वे अपने पसन्दीदा कवियों के यहाँ जिस जीवन-द्रव्य की मौज़ूदगी की बात करते हैं, उनकी कविताओं में उसकी भरपूर उपस्थिति महसूस की जा सकती है। वस्तुनिष्ठता की शर्तों पर कविता की एकरस रीतिबद्धता से अलग राह बनाते हुए ज्ञानेन्द्रपति ने अपने जीवनावलोकनों से बहुधा मनुष्य को केन्द्र में रखते हुए अनेक चरित्रों, पदार्थों, स्थितियों एवं मानवीय उपस्थितियों में परकाया-प्रवेश किया है।
एक दौर में जहाँ राजनीतिक तेवर वाली कविताएँ ही विशेषकर कवियों की पहचान के लिए रेखांकित की जाती थीं, ज्ञानेन्द्रपति ने कविता को निरे राजनीतिक प्रवाह में बहने न देकर उसे अपनी कवि-प्रतिभा से अपने समय की मानवीय कार्रवाई में बदलने का आह्वान किया। ज्ञानेन्द्रपति के लिए कविता कवि की कथनी नहीं, करनी है। इस सदी की कालांकित और कालजयी-सिद्ध होनेवाली कविता लिख रहे ज्ञानेन्द्रपति वस्तुत: निराला और मुक्तिबोध की सजग कवि-चेतना के प्रातिनिधिक कवि के रूप में उभरे हैं।
ज्ञानेन्द्रपति के कवि की विशिष्टता इस बात तक सीमित नहीं है कि उन्होंने वस्तुनिष्ठता के साथ अपने समय के अनुभवों को कविता में साधा-सिरजा और बहुवस्तुस्पर्शी बनाया है, बल्कि इसलिए भी है कि किसी अलौकिक या धार्मिक सत्ता पर आस्तिकता/आस्था का कंधा टिकाए बग़ैर भारतीय जीवन-संस्कृति के मूलाधारों को कवितालोकित कर उन्होंने हमारे इस विश्वास को ही पुख़्ता किया है कि भारतीयता से छिन्नमूल होकर एक भारतीय कवि का अपना रचनाधार जैसे-तैसे भले ही बन जाए, किन्तु उसका जनाधार व्यापक नहीं हो सकता। इस संक्रान्ति-वेला में अपने समय-समाज की चिन्हारी के लिए ही नहीं, बल्कि उद्वेलित करनेवाले उरा आनन्द के लिए भी, जो भाषिक सृजनात्मकता के बल पर कविता के ही दिए-किए सम्भव है, इस संकलन की कविताएँ हिन्दीभाषी जनता द्वारा पीढ़ी-दर-पीढ़ी पढ़ी जाएँगी।
Jharna
- Author Name:
Jaishankar Prasad
- Book Type:

- Description: प्रस्तुत पुस्तक ‘झरना’ में प्रेम के विविध अनुभवों का जीवन्त वर्णन है। ‘प्रेम’ से उत्पन्न निराशा, बेवफाई की वेदना, वियोग की तड़प आदि के अलावा ‘झरना’ में लोक मंगल की भावना और दीन-दुखी और दलितों के दुःख के अन्त में कामना भी है जो प्रेम को उदार बनाती है। यह सूफियों अथवा विवेकानन्द की प्रेम सम्बन्धी अवधारणाओं की भाँति कविताओं के देश का विस्तार भी है।
Teri Hansi Krishn Vivar Si
- Author Name:
Punam Sinha Shreysi
- Book Type:

- Description: Book
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book