Dinkar Ke Geet
(0)
₹
250
₹ 200 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
भारतीय संस्कृति और परम्परा से गहरे जुड़े दिनकर के इस गीत-संग्रह में विविधता और बहुलता एक बड़े कैनवस पर देखने को मिलती है।</p> <p>इस संग्रह में मातृभूमि की सौंधी गंध और करुण वेदना का मार्मिक मिश्रण इस तरह मूर्त है कि संवाद सहज ही स्थापित किया जा सकता है। यहाँ प्रेम अनेक रूपों में अपने वैशिष्ट्य को लिए हुए है। ऐतिहासिक और मिथकीय पात्र भी इतने जाने-पहचाने कि सम्बद्धता एक मौलिक पाठ की तरह ध्वनित होती प्रतीत होती है। और इतना ही नहीं, इन गीतों में गायक भी हैं, नायक भी; पंछी भी हैं, परियाँ भी; सावन भी है, भ्रमरी भी; प्रतीक्षा भी है, आश्वासन भी; स्वाधीनता के लिए आह्वान भी है, हाथों में मशाल भी। इन गीतों को एक सम्पूर्णता में देखें तो कह सकते हैं कि ये एक राष्ट्रकवि द्वारा रचित ज़मीनी गीत हैं। दिनकर जी का कहना भी है कि, “ये गीत इसलिए हैं कि ये गाए जा सकते हैं, बहुत कुछ उसी प्रकार जैसे छन्द में रची हुई प्रत्येक कविता गाई जा सकती है। वैसे इस संग्रह में दो-चार ऐसे भी गीत हैं जो स्वराज्य की लड़ाई के समय छात्रावासों में गाए जाते थे, सड़कों पर, सभाओं और जुलूसों में तथा कभी-कभी गुसलख़ानों में भी गाए जाते थे। मेरा सौभाग्य कि जनता ने मेरी कई कविताओं को भी गीत बना दिया। ‘माया के मोहक वन की क्या कहूँ कहानी परदेसी’ इस कविता को तो मिथिला के नटुए भी नाच-नाच कर गाते हैं।”</p> <p>‘दिनकर के गीत’ पाठ और गायन दोनों में एक-सा आस्वाद पैदा करनेवाला एक बेमिसाल और विरल संग्रह है।
Read moreAbout the Book
भारतीय संस्कृति और परम्परा से गहरे जुड़े दिनकर के इस गीत-संग्रह में विविधता और बहुलता एक बड़े कैनवस पर देखने को मिलती है।</p>
<p>इस संग्रह में मातृभूमि की सौंधी गंध और करुण वेदना का मार्मिक मिश्रण इस तरह मूर्त है कि संवाद सहज ही स्थापित किया जा सकता है। यहाँ प्रेम अनेक रूपों में अपने वैशिष्ट्य को लिए हुए है। ऐतिहासिक और मिथकीय पात्र भी इतने जाने-पहचाने कि सम्बद्धता एक मौलिक पाठ की तरह ध्वनित होती प्रतीत होती है। और इतना ही नहीं, इन गीतों में गायक भी हैं, नायक भी; पंछी भी हैं, परियाँ भी; सावन भी है, भ्रमरी भी; प्रतीक्षा भी है, आश्वासन भी; स्वाधीनता के लिए आह्वान भी है, हाथों में मशाल भी। इन गीतों को एक सम्पूर्णता में देखें तो कह सकते हैं कि ये एक राष्ट्रकवि द्वारा रचित ज़मीनी गीत हैं। दिनकर जी का कहना भी है कि, “ये गीत इसलिए हैं कि ये गाए जा सकते हैं, बहुत कुछ उसी प्रकार जैसे छन्द में रची हुई प्रत्येक कविता गाई जा सकती है। वैसे इस संग्रह में दो-चार ऐसे भी गीत हैं जो स्वराज्य की लड़ाई के समय छात्रावासों में गाए जाते थे, सड़कों पर, सभाओं और जुलूसों में तथा कभी-कभी गुसलख़ानों में भी गाए जाते थे। मेरा सौभाग्य कि जनता ने मेरी कई कविताओं को भी गीत बना दिया। ‘माया के मोहक वन की क्या कहूँ कहानी परदेसी’ इस कविता को तो मिथिला के नटुए भी नाच-नाच कर गाते हैं।”</p>
<p>‘दिनकर के गीत’ पाठ और गायन दोनों में एक-सा आस्वाद पैदा करनेवाला एक बेमिसाल और विरल संग्रह है।
Book Details
-
ISBN9789389243734
-
Pages144
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Threads of Trust
- Author Name:
Ankit Mishra
- Rating:
- Book Type:

- Description: Threads of Trust is a manifestation of an ordinary person’s life to discover love, sensuality, separation, and itself. Each poem lingers in the duality of life between the erotic and exotic, the lost and the aware, the breaking and the healing, and the life and the death itself. These poems will take readers on a subconscious journey where longing often defeats the logic, a paradoxical reality of all living well. These poems will leave the readers with the task of weaving the broken threads of trust. Perhaps this is what poetry is—a perpetually broken thread.
Whistling Words
- Author Name:
Sonal Lobo
- Book Type:

- Description: Poetry can never be easily defined, it’s just the flow of thoughts and words all formed together to form a beautiful and colourful pattern. The poems in this book will surely take you to a fantastic world lingering in your hearts with soft whistles.
Divya Kaidkhane Mein
- Author Name:
Rakesh Ranjan
- Book Type:

-
Description:
पिछले लगभग एक दशक से राकेश रंजन की कविताएँ पढ़ता रहा हूँ। इधर जो युवा हस्ताक्षर उभरकर आए हैं, उनमें वे कई दृष्टियों से मुझे अत्यन्त महत्त्वपूर्ण लगते रहे हैं। उनके पिछले दो संग्रहों की कविताएँ भी मैंने चाव से पढ़ी थीं और अब यह संग्रह 'दिव्य क़ैदख़ाने में' सामने है। सबसे पहले तो इस शीर्षक ने ही मेरा ध्यान आकर्षित किया, जिसमें एक गहरी व्यंजना छिपी हुई है और आज की राजनीतिक स्थिति को देखते हुए इसकी व्यंजकता और बढ़ जाती है।
राकेश रंजन में कुछ बातें ऐसी हैं, जो उन्हें अपनी पीढ़ी से एकदम पृथक् व्यक्तित्व प्रदान करती हैं। यह बात विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि इस कवि ने हिन्दी कविता की परम्परा के सकारात्मक तत्त्वों को एक गहरे काव्य-विवेक के साथ न केवल आत्मसात् किया है, बल्कि उसे एक नया आयाम देने का भी प्रयास किया है। इस संग्रह के पाठकों से यह बात अलक्षित नहीं रह जाएगी कि इस कवि का मुख्य स्वर व्यंग्य और विडम्बना से भरा है और शायद यह इस गड्डमड्ड समय को व्यक्त करने का सबसे भरोसेमन्द हथियार भी है। इस ज़मीन पर राकेश रंजन अकेले खड़े हैं और मुझे लगता है कि इस बिन्दु पर वे नागार्जुन की परम्परा के अन्यतम उत्तराधिकारी कहे जा सकते हैं। उन्हीं की भाँति इस कवि ने छन्द और बेछन्द दोनों का पूरी सामर्थ्य के साथ इस्तेमाल किया है। इस संग्रह में मुझे यह देखकर विशेष रूप से प्रसन्नता हुई कि इस युवा कवि ने शायद पहली बार कवित्त-जैसे लगभग छोड़ दिए गए छन्द को एक नई भंगिमा के साथ अपनी कविता में अवतरित किया है। एक और अन्य वैशिष्ट्य भी अलग से रेखांकित किया जा सकता है कि राकेश रंजन गहरे अर्थ में एक राजनीतिक-चेतना-सम्पन्न कवि हैं और यहाँ भी वे नागार्जुन की परम्परा के ही वाहक दिखाई पड़ते हैं।
मुझे विश्वास है कि 'दिव्य क़ैदख़ाने में' की कविताएँ समकालीन हिन्दी कविता के पाठक को एक नई काव्यात्मक उत्तेजना प्रदान करेंगी और किसी हद तक आज की कविता को एक नई दिशा की ओर ले जाती हुई प्रतीत होंगी।
—केदारनाथ सिंह
Boond Boond Ghazal
- Author Name:
Dr. Vinod Prakash Gupta 'Shalabh'
- Book Type:

-
Description:
डॉ. विनोद प्रकाश गुप्ता 'शलभ' की ग़ज़लें इन अर्थों में विशिष्ट हैं कि इनका शाइर विस्तृत जीवन-अनुभव के साथ-साथ सूक्ष्म निरीक्षण और विश्लेषणात्मक विवेक से परिपूर्ण है। जहाँ एक तरफ़ वह विविधता के विराटत्व से विचलित न होकर उसमें निर्भीकतापूर्वक वास करते हुए उसी के सार से अपने सृजन को रूप-रंग देने की कला से परिचित है तो दूसरी तरफ़ वह सूक्ष्म से सूक्ष्म तथ्य की परख और उसके सम्पूर्ण सत्य के विभिन्न आयामों को भी उजागर करने में सक्षम है।
‘बूँद-बूँद ग़ज़ल’ के शाइर की मान्यताएँ, मंतव्य और सपने भी ठोस धरातल पर खड़े प्रतीत होते हैं, जहाँ संशय के लिए कोई स्थान नहीं है। वह पूरी पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ अपनी जीवन-दृष्टि का खुलासा करता है, पूरी शक्ति से अपने पक्ष का समर्थन करता है और विपक्ष को ललकारता है। इसी से शाइर का आत्मविश्वास पाठक का आत्मविश्वास बन जाता है।
खरापन इन ग़ज़लों का प्राण है। इस संग्रह के अश’आर समकालीन पीढ़ी के सरोकारों की दूर-दूर तक फैली ज़मीन पर हिरणों की तरह कुलाँचे मारकर आपका ध्यान कभी इस ओर तो कभी उस ओर खींचते हैं। जीवन्तता ‘शलभ’ जी के सम्पूर्ण साहित्य को तरंगित रखती है। इन ग़ज़लों में स्थायी आकर्षण उत्पन्न करने के पर्याप्त तत्त्व उपलब्ध हैं और इसी कारण पाठक अश’आर से जुड़ जाता है और जुड़ा रहता है।
‘शलभ’ जी की शब्दावली और संवेदनाओं के सूत्र जगह-जगह पाठक को चौंकाते हैं। ग़ज़ल कहने की उनकी शैली में अनोखे शब्दचयन और शब्दक्रम महती भूमिका निभाते हैं। उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे ग़ज़ल में नए प्रयोग करने से नहीं हिचकते।
‘शलभ’ जी के पहले ग़ज़ल-संग्रह ‘आओ नई सहर का नया शम्स रोक लें’ की तरह ही यह संग्रह भी अपने उल्लेखनीय और विशिष्ट योगदान के लिए प्रस्तुत है।
—विजय कुमार स्वर्णकार
Prasad Ka Sampoorna Kavya
- Author Name:
Satyaprakash Mishra
- Book Type:

-
Description:
कवि जयशंकर प्रसाद आधुनिक हिन्दी कविता में 'छायावादी काव्य आन्दोलन' के जनक, प्रवक्ता और उन्नायक हैं। उन्होंने खड़ी बोली को काव्य-भाषा के रूप में अनिर्णय के प्रथम दौर से मुक्त करके उसे अद्भुत रूप से समृद्ध और अभिव्यक्ति सम्पन्न बनाया। उनकी काव्य भाषा में गहरी अनुभूति सम्पन्नता और रोमांसलता का एक सांस्कारिक तेवर विद्यमान है। गोस्वामी तुलसीदास की तरह ही वे भाषित संक्षिप्तता और बिम्बात्मक क्षमता का मर्म पहचानने वाले कवि हैं।
‘गीति तत्त्व’ प्रसाद की कविता का दूसरा प्रमुख गुण है। अनुभूतियों की भीतरी झनझनाहट उनके गीतों से लेकर उनके महाकाव्य 'कामायनी' तक में समान रूप से विद्यमान हैं। प्रसाद अपनी कविताओं के माध्यम से मनुष्य जाति की उन्हीं अनुभूतियों को चित्रित करते हैं जिनमें एक भीतरी करुणा का आवेश हो और जो शब्द का स्पर्श पाते ही संगीत की प्राणवक्ता से झंकृत हो उठें। ‘झरना’, ‘आँसू’ और ‘लहर’ के गीत इसका प्रमाण तो हैं ही, ‘कामायनी’ की सम्पूर्ण अर्थवत्ता इसी गीत्यात्मक अनुगूँज से भ्री हुई है।
प्रसाद का अपने सारे ऐतिहासिक, दार्शनिक और ‘मिथकीय’ आवरण के बावजूद अपने वर्तमान में ही प्रामाणिक है। इतिहास, दर्शन और पुराण-कथाओं का उपयोग प्रसाद जी ने अपनी संस्कृति धरोहर को पुनरुज्जीवित करने के लिए तो किया ही है, उसके माध्यम से अपने समय के भारतीय राष्ट्रीय स्वतंत्रता आन्दोलन के मुख्य तेवर को पहचानने का काम भी वे करते हैं। इसीलिए उनकी कविताओं में राष्ट्रीयता का एक गहरा सरोकार विद्यमान है।
Sipi Aur Shankha
- Author Name:
Ramdhari Singh Dinkar
- Book Type:

-
Description:
– ‘सीपी और शंख' रामधारी सिंह ‘दिनकर’ द्वारा अंग्रेज़ी से अनूदित विश्व की श्रेष्ठ कविताओं का संग्रह है। बावजूद इसके ये दिनकर जी के व्यक्तित्व के रूपों को उद्घाटित करती उनकी अपनी मौलिक रचनाएँ भी प्रतीत होती हैं, क्योंकि उन्होंने भावों से प्रेरणा लेते हुए अपनी तरफ़ से ऐसे-ऐसे चित्रों की सृष्टि कर डाली है जो मूल में कहीं नहीं। इसलिए इन कविताओं में दिनकर जी के अपने चिन्तन और भाषा का परस्पर अन्योन्य सम्बन्ध भी परिलक्षित होते हैं।
संग्रह में पुर्तगीज़ी, स्पेनिश, अंग्रेज़ी, जर्मन, फ़्रेंच, अमरीकी, चीनी, पोलिश और भारतीय भाषाओं में मलयालम की अछूती भावभूमि और नवीन भंगिमाओं वाली कविताएँ शामिल हैं। रूमानी, आत्मपीड़न के अतिरिक्त भक्तिभाव से पूर्ण इन कविताओं की मुख्य विशेषता रस-प्रवणता, लावण्ययुक्त बिम्ब और श्रम की प्रतिष्ठा है।
इस संग्रह की कौन सी कविता किस कवि की कविता का प्रतिबिम्ब है, यह सूचित करने को पुस्तक के अन्त में एक सूची भी दी गई है ताकि सहज ही सृजन के विभिन्न आयामों से जुड़ा जा सके। निस्सन्देह, कविता में नवीन रुचि रखनेवाले पाठकों को दिनकर जी की यह कृति पसन्द ही नहीं आएगी, बल्कि अविस्मरणीय भी साबित होगी।
Herwa
- Author Name:
Sunita Jain
- Book Type:

- Description: Poems
Samanantar
- Author Name:
Ramdhari Singh Dinkar
- Book Type:

-
Description:
‘समानान्तर’ रामधारी सिंह ‘दिनकर’ द्वारा अनूदित विश्व-काव्य की श्रेष्ठ कृतियों का संकलन है।
इस पुस्तक में एक तरफ़ जहाँ हमें—पुर्तगीजी, स्पेनिश, अंग्रेज़ी, जर्मन, फ़्रेंच, अमरीकी, चीनी, पोलिश एवं भारतीय भाषाओं में मलयालम की अछूती भावभूमि और नवीन भंगिमाओं वाली कविताएँ मिलती हैं तो दूसरी तरफ़ डी.एच. लारेंस की वे कविताएँ भी जो यूरोप और अमरीका में बहुत लोकप्रिय नहीं हो सकीं, लेकिन जिनका राष्ट्रकवि दिनकर जी ने चयन ही नहीं, बल्कि सरल भाषा-शैली में हिन्दी में अनुवाद भी किया और जो भारतीय चेतना के आसपास चक्कर काटती हैं।
अनूदित होते हुए भी नितान्त मौलिक प्रतीत होनेवाली कालजयी कविताओं का एक अनूठा संकलन है ‘समानान्तर’।
Pratinidhi Kavitayein : Gagan Gill
- Author Name:
Gagan Gill
- Book Type:

- Description: गगन गिल की कविताओं की एक यात्रा स्पष्ट दिखाई देती है—बाहर से भीतर की ओर की। ‘एक दिन लौटेगी लड़की’ शीर्षक उनका संग्रह अपने समय की एक घटना थी। हिन्दी के कविता-संसार ने उसे ख़ूब ही उत्साह से ग्रहण किया था। इस संग्रह की कविताओं ने भीतर से उदास लेकिन फिर भी संसार में अपनी जगह को लेकर पर्याप्त सजग एक लड़की की छवि को प्रकाशित किया। भीतर की वह उदासी, अकेलापन, अपने ‘होने’ और अपने एक ‘स्त्री होने’ का वह अहसास जैसे बड़ा होता गया; संसार का बाहरी शोर और दिल की थपक-थपक जैसे आमने-सामने खड़ी इकाइयाँ हो गईं। इस दौर में उन्होंने जो लिखा वह सृष्टि के पवित्रतम की खोज थी, जो मनुष्य के आत्म की कंदराओं में स्थित होता है। आकांक्षाओं से मुक्त, अपने होने की कील से बिंधा हुआ, सम्पूर्ण और व्यथित। इस चयन में उनकी पूरी चेतना-यात्रा को सुविचारित ढंग से सँजोया गया है—‘मैं जब तक आई बाहर’ संग्रह तक, जिसमें पीड़ा का संचार भीतर और बाहर दोनों तरफ़ होता है। देश और काल की पौरुषपूर्ण व्यवस्था के बीच स्त्री की सूक्ष्म असहमति और अपने दुःख को देखने का साक्षी भाव उनके संवेदनशील और सटीक शब्द-संयोजन में एक अविस्मरणीय अनुभव की तरह अंकित होता है।
Jaldhaar
- Author Name:
Ushakiran Khan
- Book Type:

- Description: Book
Lokpriyata Ke Shikhar Geet
- Author Name:
Vishnu Saxena
- Book Type:

-
Description:
गीत तो गंगा की पावन पवित्र धारा के समान है। गीत का इतिहास बताता है कि हज़ारों वर्षों से चली आ रही इस परम्परा के साथ भले ही वक़्त छेड़छाड़ करता रहा हो, लेकिन उसके मूल स्वरूप को कोई नहीं बिगाड़ पाया, इसलिए ये गंगा पहले भी अपनी शान्त लहरों से जनमानस को आप्लावित करती रही और आज भी कर रही है।
मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक, गीत अपना अस्तित्व बनाए रखता है, इसलिए हर अवसर पर गीत किसी न किसी रूप में हमारे सामने आकर खड़ा हो जाता है। वैसे अब तक गीतों के अनेक संकलन प्रकाशित हो चुके हैं लेकिन यह संकलन कई मायनों में अपने आप में इसलिए अनूठा है कि इसमें उन गीतों को शामिल किया गया है जो अपने समय में लोगों के गले का कंठहार बने। ये गीत इतने लोकप्रिय हुए कि कवि की पहचान बन गए।
प्रस्तुत संकलन में काव्य मंच के सभी लोकप्रिय गीतकारों के सर्वप्रिय, चर्चित गीतों को तो शामिल किया गया है, इसके अलावा उन गीतों को भी स्थान दिया गया है जो गीत लोकप्रिय तो होने चाहिए थे, लेकिन उन्हें समय पर उचित मंच नहीं मिला। इसलिए गीतकारों के गीतों की संख्या में भी समानुपात नहीं रखा गया है।
विश्वास है, हिन्दी गीतों का यह ख़ूबसूरत गुलदस्ता हिन्दी काव्य-प्रेमियों को महक तो देगा ही, साथ में तृप्ति का आभास भी कराएगा...।
Pakistani Urdu Shayari Vol. 3
- Author Name:
Narendra Nath
- Book Type:

-
Description:
भारत के मुक़ाबले पाकिस्तान में रचनाकारों के सामने कहीं ज़्यादा चुनौतियाँ रही हैं। ‘पाकिस्तानी उर्दू शायरी’ शृंखला के सम्पादक इस तथ्य को रेखांकित करते हुए कहते हैं कि हिन्दुस्तान में जिस विद्रोह को हेडलाइन बनाया जा सकता है, पाकिस्तान में उसी विद्रोह को वर्ग पहेली के गुप्तार्थों की तरह रचना में छिपाया जाता है। इसलिए वहाँ के लेखकों-शायरों ने अपने तर्ज़े-बयाँ को ऐसे तराशा है कि जो कहना था, वह तो कहा ही गया, उससे कविता का मेयार भी उठा।
‘पाकिस्तानी उर्दू शायरी’ शीर्षक यह शृंखला और इसमें शामिल रचनाएँ बताती हैं कि उधर के शायरों ने अपनी राजनीतिक चुनौतियों का सामना करते हुए कैसे अपनी कहन को और ज़्यादा असरदार, ज़्यादा मारक और अचूक बनाया है।
इनमें से अनेक नाम हिन्दी पाठक के लिए नये होंगे, क्योंकि ऐसे लोग कुछ ही हैं जिनकी रचनाएँ हिन्दी लिप्यंतरण में इधर आईं और मक़बूल हुईं। इस शृंखला का उद्देश्य ही दरअसल पाकिस्तान के उन शायरों को हिन्दी समाज तक पहुँचाना है जिन्होंने बहुत अच्छा लिखा है, लेकिन जो अभी तक किसी हिन्दी संकलन में नहीं आ पाए।
यह शृंखला और इसमें शामिल रचनाएँ यह भी बताती हैं कि बँटवारे के बावजूद भारत और पाकिस्तान का आधारभूत ‘ईथॉस’ एक ही है; कितने शे’र, कितनी नज़्में बिना बाधा के अपने बिम्बों और रूपकों के साथ हमारी अपनी कविताओं के साथ आ बैठती हैं। इस खंड में बारह शायरों की ग़ज़लें, नज़्में और फुटकर शे’र शामिल हैं।
Vachanas of Sarvajna
- Author Name:
Rajendra Chenni
- Book Type:

- Description: Sarvajna is a saint peot of medieval Kannada. In spirit he was a global citizen of the time. For poets like him, the life is greater than poetry or literature. This great message upholding universal human values and the dignity of mankind was through compassion and serving the fellow beings. Sarvajna's rich and practical wisdom portrayed in his Vachanas (triplets) may guide the readers across the world.
Mere Desh Mein Kahte Hain Dhanyavad
- Author Name:
Sharad Chandra
- Book Type:

-
Description:
रने एमिल शार्, जिन्हें अल्बैर् कामू अपने समय का महानतम कवि मानते थे, का जन्म दक्षिणी फ्रांस के प्रोवॉन्स प्रदेश के एक नामी और ख़ूबसूरत क़स्बे, ईल-सुर-सोर्ग में, 7 जून, 1907 को हुआ था। उन्होंने अपने जीवन का ज़्यादातर समय पेरिस और प्रोवान्स में बिताया।
शार् ने अपने बिम्ब और प्रतिमाएँ दक्षिण फ्रांस में बीते अपने बचपन से और वहाँ के प्राकृतिक दृश्यों से ली हैं। वो कोई देहाती कवि नहीं थे, लेकिन देहात के दृश्यों का प्रभाव उनकी कविताओं में भरपूर मिलता है। प्रकृति के प्रति शार् की आस्था उतनी ही दृढ़ थी जितनी अपनी कविताओं के शिल्प के प्रति। उन्होंने सोर्ग नदी के प्रदूषण, वान्तू—जिस पर प्रैटार्क ने 1336 में विजय प्राप्त की थी—और मौं मिराइल पहाड़ों की चोटियों पर न्यूक्लियर रिएक्टरों के लगाने पर शहरी आपत्ति जताई थी।
शार् की सृजनात्मक दृष्टि पर, उनके कविता लिखने के उद्देश्य और शिल्प पर जिन लोगों का प्रभाव रहा, उनमें ग्रीक दार्शनिक हेरा क्लाइटस, फ़्रैंच कलाकार जॉर्ज दि लातूर और कवि आर्थर रैम्बो को प्रमुख माना जाता है। रैम्बो का साया उनके बिम्बों पर स्पष्ट दिखता है, ख़ास तौर से उनकी सूक्ष्म, घनीभूत गद्य कविताओं में। शार् पर एक और प्रभाव रहा अति यथार्थवाद का।
शार् एक ही विधा में लिखना पसन्द नहीं करते। उन्होंने मुख्य रूप से तीन विधाओं (forms) में कविताएँ लिखी हैं : मुक्त छन्द, गद्य कविता, और सूक्ति। वो अपनी पद्य कविताओं (Verse Poems) और गद्य कविताओं में उन्हीं विषयों को परिवर्द्धित करते हैं जिन्हें उन्होंने अपनी सूक्तियों में उठाया।
अपनी आख़िरी किताब के प्रकाशन तक शार् इस धारणा के समर्थक रहे कि कला, साहित्य और संगीत पारस्परिक रूप से प्रतिरोध की आवश्यक अभिव्यक्ति में जुड़े हुए हैं।
Prarthnaye Kuchh is Tarah se Karo
- Author Name:
Mukesh Nirvikar
- Book Type:

- Description: मुकेश निर्विकार की कविताओं में एक जागृत प्रतिरोध के साथ-साथ असीम जिजीविषा प्रतिबिम्बित होती है जो कवि और उसकी कविताओं की शक्ति है। —अश्वघोष, ('निकट' पत्रिका से) मुकेश निर्विकार की कविताओं की विशेषता है कि वह दार्शनिक धरातल पर चीज़ों को देखते हैं, मगर उससे कविता में कहीं भी उलझाव नहीं आने देते। बल्कि, दर्शन विसंगतियों को संघनित कर देखने के काम आता है। उनकी कविताएँ गूढ़ यथार्थ को बहुत पारदर्शी ढंग से सामने लाती हैं। कविताएँ कभी सृष्टि के रहस्यों पर बातें करती हैं तो कभी रोटी की मुश्किलों पर। कवि पूरे जीवन-जगत का सीधा मुकाबला करता है। —मनोज कुमार झा, ('पाखी' पत्रिका से) 'हत्यारी सदी में जीवन की खोज' की कविताओं के ज़रिए कवि ने अंधेरों की पुनर्रचना करते हुए निरन्तर अराजक हो रहे समय के क्रूर-यथार्थ को उजागर किया है। समग्र रूप में सभी कविताएँ जीवन के उजास की कविताएँ हैं। इनमें सर्वत्र एक गहरी आशावादिता के युगबोध का 'अंडर-करेन्ट' है। कई कविताओं का कथ्य तो विचलित कर देने वाला है। विलक्षण काव्य-भाषा के ज़रिए कवि ने ढेरों मौलिक बिम्ब रचे हैं, जिनकी सतरंगी छवियाँ किसी पाठक को सहज ही सम्मोहित कर देती है। मानवीय सरोकारों से जुड़ी और उनके कोमल भावों को दीमक की तरह चाटती क्रूर विसंगतियों का कवि ने सहज ही चित्रण किया है। रोज़ी-रोटी की तलाश में भटकता कामगार हो या महानगरीय जीवन के संत्रास को भोगता आम आदमी, कवि की नज़र हर तरफ है। जनसत्ता कुछ लोग कविता में जीवन की तलाश करते हैं। कुछ लोग कविता में जीवन को ढूँढ़ लेते हैं। मुकेश निर्विकार ने जि़न्दगी को कविता में इस तरह उतारा है कि उनकी कविताएँ दोनों तरह के लोगों के काम आती है। सरल और सहज शब्दों के ज़रिये भी उनकी कविताओं में कटाक्ष का स्वर बुलन्द है। अमर उजाला
Sukanya
- Author Name:
Ramawatar Shashi
- Book Type:

- Description: Poems
Avyakt
- Author Name:
Navin Mishra
- Book Type:

-
Description:
अभिव्यक्ति किसी भी कला को और उसकी ज़्यादातर आपूर्ति उसके स्वयं के परिवेश की परिकल्पना से होती है। जो भी व्यक्ति के साथ होता है, उन सभी अनुभवों को कमोबेश क्रम से प्रस्तुत करता है और वह साहित्य हो जाता है।
कई बार स्वयं को लगता है कि क्या यह सचमुच मैंने लिखा है? एक मोड़ पर आकर वह दैवीय शक्ति से अनुगृहीत हो जाता है। मैंने स्वयं लिखा है कि कविता किसी सुदूर तारागणों के पास से उन्हीं की धूल से अटी धरती तक पहुँचती है, फिर वह मुझमें बस जाती है, कविता मेरी हो जाती है—बस कविता हो जाती है।
मेरा योगदान सिर्फ़ इतना है कि मैंने ईमानदारी से उन क्षणों का, उन सम्बन्धों का चित्रण किया। वही लिखा जो सत्य था, जो पवित्र था और जो लेशमात्र भी कृत्रिम न था।
Thithurate Lamp Post
- Author Name:
Adnan Kafeel 'Darwesh'
- Book Type:

-
Description:
अदनान कफ़ील ‘दरवेश’ की कविता को पढ़ते हुए लगता है जैसे हम अपने समय में फिर से दाख़िल हो रहे हैं। यह एक गतिमान समय है जिसमें आगे-पीछे आवाजाही करते हुए जितना आप अतीत में जाते हैं उतना ही वर्तमान में और भविष्य में भी। कवि ने समय की जो विभाजक रेखा बनाई है, वह स्वयं भी उस रेखा से पीछे जाकर ही वर्तमान के चेहरे के नाक-नक़्श उकेरता है। इस समय की ठीक-ठीक शक्ल पहचानने के लिए शायद समय में यह आवाजाही ज़रूरी है। बिना इसके इसे पहचानना सम्भव नहीं है।
वर्तमान, जिसकी विडम्बनाओं, विद्रूपताओं और नई तकनीकों के प्रतिदिन बदलते चेहरे को हम जानते हैं। उसकी बर्बरता और अमानवीयता को हम जानते हैं और समय की गति को अचानक बदल देने वाले परिवर्तनों को भी हमने बहुत क़रीब से देखा है। लेकिन अदनान की कविता को पढ़ने के बाद चीज़ें ज़्यादा साफ़ नज़र आने लगती हैं। जैसे हमारे ऐनक का नम्बर एकाएक बदल गया हो। शायद इस कविता की एक बड़ी ख़ूबी यह भी है कि वह प्रत्यक्षतः जानने और कविता को पढ़कर जानने के बीच के अन्तर का एहसास हमें कराती है। अदनान की कविता बहुत मुखर होकर स्वयं बहुत ऊँची आवाज़ में नहीं बोलती, जीवन की वास्तविकताएँ ही उसमें से बोलती हैं। इसलिए उसकी आवाज़ ज़्यादा विश्वसनीय लगती है। उसकी कविता में वाचिक कविता जैसा प्रवाह और उसकी प्रति-गति कविता के क़द को ऊँचा कर देती है। वह हमारी संवेदनाओं को झिंझोड़कर जागृत कर देती है और चीज़ों और स्थितियों के प्रति ज़्यादा वस्तुनिष्ठ बना देती है।
अदनान की कविता अपनी अस्मिता और परम्पराओं को बचाते हुए हमारे समय के सांस्कृतिक आघात के प्रति असहमति और प्रतिरोध की कविता है। वह हिन्दी कविता के अनुभवों के लैंडस्केप को अपने अनुभवों और मिथकों से पूरा करने की बहुत सजग कोशिश है।
–राजेश जोशी
Sheeshon Ka Masiha
- Author Name:
Faiz Ahmed 'Faiz'
- Book Type:

- Description: शीशों का मसीहा की शुरुआत होती है फ़ैज़ के एक लेख से जो उन्होंने अपने बारे में लिखी है, ज़ाहिर है बहुत संकोच के साथ क्योंकि उनके मुताबिक अपने बारे में बात करना ‘बोर लोगों का शग़ल है।’ लेकिन आगे जो वे बताते हैं, वो फ़ैज़ के पाठकों के लिए काफ़ी काम का है; उनसे हम इस किताब में संकलित उनकी नज़्मों, ग़ज़लों और अशआर की पृष्ठभूमि को जानते हैं। ‘नक़्शे-फ़रियादी’ के बारे में बताते हैं कि इसकी शुरुआती नज़्में जिस फ़ज़ा में आईं वह तालिबे-इल्मी का दौर था जिसमें ‘इब्तिदा-ए-इश्क़’ का तहय्युद भी शामिल था कि ‘ख़ुदा वो वक़्त न लाए कि सोगवार हो तू’; लेकिन यह दौर लम्बा न चलाए—कॉलेज के बड़े-बड़े बाँके तीसमारखाँ रोजी-रोटी की तलाश में गलियों की ख़ाक फाँकने लगे; और दिल कह उठा—‘मुझसे पहली-सी मुहब्बत मेरे महबूब न माँग’। फिर फ़ैज़ पत्रकारिता, ट्रेड यूनियन, और जेलख़ाना जिसके बारे में उनका कहना है कि ‘जेलख़ाना’ आशिक़ी की तरह ख़ुद का बुनियादी तजुर्बा है। इस तजुर्बे की साक्षी हैं ‘दस्ते-सबा’ और ‘ज़िन्दाँनामा’। ‘शीशों का मसीहा’ इस तरह हमें फ़ैज़ की रचना-यात्रा को समझने का एक रास्ता देती है।
Raho Tum Nakshatra Ki Tarah
- Author Name:
Monalisa Zena
- Book Type:

-
Description:
‘भारतीय भाषाओं की विचार-सम्पदा, सृजन-सम्पदा, कला-चिन्तन आदि हिन्दी में लगातार प्रस्तुत करना रज़ा पुस्तक माला का एक ज़रूरी हिस्सा है। सौभाग्य से हिन्दी में दूसरी भाषाओं के प्रति खुलेपन और ग्रहणशीलता की लम्बी परम्परा रही है। हमारा प्रयत्न अपने समय और परिसर में इस परम्परा को सजीव-सशक्त बनाने का है। मोनालिसा ज़ेना ओड़िया की समकालीन कवयित्री हैं : उनकी कविता की सहज ऐन्द्रियता और निर्भीकता, प्रेम का उनका निस्संकोच अन्वेषण, परम्परा से उलझने का उनका जीवट आदि ऐसे गुण हैं जो उनकी कविता को, कई अर्थों में, विशिष्ट बनाते हैं। उनका हिन्दी अनुवाद में यह संग्रह हम सहर्ष प्रस्तुत कर रहे हैं।”
—अशोक वाजपेयी
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book