DeewaaneGhalib: SariireKhaama
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Deewaan-e-Ghalib :Sariir-e-Khaama' is the English translation of Ghalib's numerous splendid ghazals by Najeeb Jung. In this book, Najeeb Jung provides a fascinating English interpretation of the poetic excellence of Mirza Ghalib compiled in 'Deewan-e-Ghalib'. Most certainly, this narration of Ghalib is unique - it comes from the heart, the words not taken from any dictionary or style - and that is why I find it close to my heart. Truly, Najeeb bhai has blended Ghalib’s urdukalaam into English with such a unique flow that the intoxication has doubled. Gulzar Poet, Lyricist & Film Director Najeeb Jung sahab has undertaken a bold venture and that too with a poet like Mirza Ghalib whose poetry by universal acclaim is soaked in mysticism and philosophy. This volume shall bring some of Ghalib’s poetry within the reach of those who cannot access it in the original script. I felicitate Najeeb Jung sahab for undertaking this laudable venture. Mohammad Hamid Ansari Former Vice President of India Former Chairman of the Rajya Sabha & Author Najeeb Jung realizes that in innumerable translations of Ghalib in English, the cultural and linguistic connotations have been relegated to the margins in exchange for fluency and domestication and he tries to provide what eludes Robert Bly, Francis Pritchett, Adrienne Rich, Ralph Russel, and others. His translation is an intricate encounter with the text and a deep awareness of the cultural and social conditions and literary convictions of Ghalib’s times. An effort that will attract loving readers. Gopi Chand Narang Author, urduCritic, Theorist & linguist
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Deewaan-e-Ghalib :Sariir-e-Khaama' is the English translation of Ghalib's numerous splendid ghazals by Najeeb Jung. In this book, Najeeb Jung provides a fascinating English interpretation of the poetic excellence of Mirza Ghalib compiled in 'Deewan-e-Ghalib'. Most certainly, this narration of Ghalib is unique - it comes from the heart, the words not taken from any dictionary or style - and that is why I find it close to my heart. Truly, Najeeb bhai has blended Ghalib’s urdukalaam into English with such a unique flow that the intoxication has doubled. Gulzar Poet, Lyricist & Film Director Najeeb Jung sahab has undertaken a bold venture and that too with a poet like Mirza Ghalib whose poetry by universal acclaim is soaked in mysticism and philosophy. This volume shall bring some of Ghalib’s poetry within the reach of those who cannot access it in the original script. I felicitate Najeeb Jung sahab for undertaking this laudable venture. Mohammad Hamid Ansari Former Vice President of India Former Chairman of the Rajya Sabha & Author Najeeb Jung realizes that in innumerable translations of Ghalib in English, the cultural and linguistic connotations have been relegated to the margins in exchange for fluency and domestication and he tries to provide what eludes Robert Bly, Francis Pritchett, Adrienne Rich, Ralph Russel, and others. His translation is an intricate encounter with the text and a deep awareness of the cultural and social conditions and literary convictions of Ghalib’s times. An effort that will attract loving readers. Gopi Chand Narang Author, urduCritic, Theorist & linguist
Book Details
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ISBN9789391080860
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Pages525
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Avg Reading Time18 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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Bharat-Bharati
- Author Name:
Maithlisharan Gupt
- Book Type:

- Description:
v data-content-type="html" data-appearance="default" data-element="main"><p>‘भारत-भारती’ मैथिलीशरण गुप्त की सर्वाधिक प्रचलित कृति है। यह सर्वप्रथम संवत् 1969 में प्रकाशित हुई थी और अब तक इसके पचासों संस्करण निकल चुके हैं। एक समय था जब ‘भारत-भारती’ के पद्य प्रत्येक हिन्दी-भाषी के कंठ पर थे। गुप्त जी का प्रिय हरिगीतिका छन्द इस कृति में प्रयुक्त हुआ है। भारतीय राष्ट्रीय चेतना की जागृति में इस पुस्तक का हाथ रहा है। यह काव्य तीन खण्डों में विभक्त है : <br />(1) ‘अतीत’ खंड, (2) ‘वर्तमान’ खंड, (3) ‘भविष्यत्’ खंड। ‘अतीत’ खंड में भारतवर्ष के प्राचीन गौरव का बड़े मनोयोग से बखान किया गया है। भारतीयों की वीरता, आदर्श, विद्या-बुद्धि, कला-कौशल, सभ्यता-संस्कृति, साहित्य-दर्शन, स्त्री-पुरुषों आदि का गुणगान किया गया है। ‘वर्तमान’ खंड में भारत की वर्तमान अधोगति का चित्रण है। इस खंड में कवि ने साहित्य, संगीत, धर्म, दर्शन आदि के क्षेत्र में होनेवाली अवनति, रईसों और उनके सपूतों के कारनामें, तीर्थ और मन्दिरों की दुर्गति तथा स्त्रियों की दुर्दशा आदि का अंकन किया है। ‘भविष्यत्’ खंड में भारतीयों को उद्बोधित किया गया है तथा देश के मंगल की कामना की गई है।</p>
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