Ab Main Aksar Main Nahi Rehta

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Author:

Anwar Shaoor

Language:

Hindi

Category:

Poetry

299

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अनवर शऊर की शायरी में शामिल विषय बहुत ही संवेदनशील प्रकृति के हैं, जो इंसान के आंतरिक और बाहरी मुआमलों के साथ संवाद करते हैं। उनकी शायरी में रूमानियत और सौन्दर्य की छाप स्पष्ट रूप से महसूस की जा सकती है। आदमी, तिलिस्म, इंतज़ार, धोका, जुस्तजू, शराब, शाम, रात, ग़म, तलाश, ज़हर, सोहबत, हमदम, ज़िन्दाँ, सय्याद, बदन, हैरत, सफ़र, मशक़्क़त जैसे विषयों की गहराई से उनकी शायरी भरी हुई है। अनवर शऊर धीमे लहजे के मालिक हैं, उनकी शायरी में मदहोशी की अवस्था अपनी सरमस्ती से महक रही होती है। ग़ज़ल के रूमानी शायर होने के बावजूद उनकी एक अलग शनाख़्त क़ता लेखक की भी है। ज़िंदगी के रोज़मर्रा के विषयों को एक क़ता में समो देने का हुनर उन्हें ख़ूब ख़ूब आता है।

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ISBN
9788192664873
Pages
176
Avg Reading Time
6 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Format:

Piracy Free

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About the Book

अनवर शऊर की शायरी में शामिल विषय बहुत ही संवेदनशील प्रकृति के हैं, जो इंसान के आंतरिक और बाहरी मुआमलों के साथ संवाद करते हैं। उनकी शायरी में रूमानियत और सौन्दर्य की छाप स्पष्ट रूप से महसूस की जा सकती है। आदमी, तिलिस्म, इंतज़ार, धोका, जुस्तजू, शराब, शाम, रात, ग़म, तलाश, ज़हर, सोहबत, हमदम, ज़िन्दाँ, सय्याद, बदन, हैरत, सफ़र, मशक़्क़त जैसे विषयों की गहराई से उनकी शायरी भरी हुई है। अनवर शऊर धीमे लहजे के मालिक हैं, उनकी शायरी में मदहोशी की अवस्था अपनी सरमस्ती से महक रही होती है। ग़ज़ल के रूमानी शायर होने के बावजूद उनकी एक अलग शनाख़्त क़ता लेखक की भी है। ज़िंदगी के रोज़मर्रा के विषयों को एक क़ता में समो देने का हुनर उन्हें ख़ूब ख़ूब आता है।

Book Details

  • ISBN
    9788192664873
  • Pages
    176
  • Avg Reading Time
    6 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

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Ab Main Aksar Main Nahi Rehta presents a curated selection of ghazals by Anwar Shaoor, published as part of Rekhta's Numainda Kalaam (Representative Works) series. The title itself — "Now I am often not myself" — signals the book's quiet preoccupation with erosion: of certainty, of presence, of the stable self. Shaoor writes with a voice that turns inward without retreating, addressing alienation and memory in the measured cadences of classical Urdu ghazal form.

This collection is shaped for readers who value restraint and emotional precision over rhetorical flourish. Each couplet functions as a discrete meditation, yet the cumulative effect is of a singular mind grappling with displacement — geographic, emotional, existential. Rekhta's editorial hand ensures the selection reflects both craft and thematic coherence, making this volume an accessible yet serious entry point into Shaoor's sensibility. For those who seek contemporary Urdu verse rooted in tradition but attuned to the fractures of modern subjectivity, this slim volume rewards slow, repeated reading.

यह किताब पढ़ते समय मुझे किस तरह का अनुभव होगा?

यह संग्रह आपको ख़ामोश चिंतन की ओर ले जाता है। अनवर शऊर की ग़ज़लें तेज़ नहीं, बल्कि धीमी और गहरी होती हैं — हर शे'र एक ठहराव माँगता है। आप यहाँ आत्म-विस्थापन, स्मृति की धुंध, और अपने आप से दूर हो जाने की अनुभूति पाएँगे। यह किताब उन पाठकों को सम्मान देती है जो भावनात्मक सटीकता और शब्दों की मितव्ययिता को पहचानते हैं।

यह किताब किस तरह के पाठक के लिए सबसे उपयुक्त है?

  • जो पाठक उर्दू ग़ज़ल की पारम्परिक बुनावट में आधुनिक संवेदना खोजते हैं।
  • जो रेख़्ता मंच से परिचित हैं और उर्दू शायरी की सजीव परम्परा से जुड़ना चाहते हैं।
  • जिन्हें धीमी, आत्मपरक कविता में आनंद मिलता है — जल्दबाज़ी में यह किताब नहीं खुलती।

इस किताब का विषय आज के भारतीय पाठकों के लिए सांस्कृतिक या ऐतिहासिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है?

यह किताब आत्म-विस्मृति और आधुनिक अलगाव को उर्दू की शास्त्रीय भाषा में व्यक्त करती है — एक ऐसी चिंता जो आज के शहरी, प्रवासी, और डिजिटल रूप से विखंडित जीवन में गहरी अनुगूँज रखती है। रेख़्ता की नुमाइन्दा कलाम श्रृंखला उर्दू को सजीव साहित्यिक परम्परा के रूप में संरक्षित करती है, न कि संग्रहालय की वस्तु के रूप में।

इस विषय पर अनवर शऊर का नज़रिया क्या ख़ास बनाता है?

अनवर शऊर का स्वर नाटकीयता से परहेज़ करता है। वे विरह, स्मृति और पहचान के संकट को भव्य उद्घोषणा में नहीं, बल्कि संयमित इशारों में व्यक्त करते हैं। उनकी ग़ज़लें अक्सर अपने आप से संवाद जैसी लगती हैं, जहाँ पाठक श्रोता नहीं, साझीदार बन जाता है। यह चुनाव रेख़्ता द्वारा किया गया है, जो उनके काम में संगति और गहराई को रेखांकित करता है।

यह किताब पढ़ने के बाद पाठक के मन में क्या रह जाता है?

यह किताब आपको एकान्त की भाषा देती है — वह शब्दावली जो आपकी अपनी खोई हुई उपस्थिति को नाम दे सके। पाठक अक्सर महसूस करते हैं कि इन ग़ज़लों ने उनके अनकहे अनुभवों को आकार दिया है। यह एक ऐसी किताब है जो वापस लौटने को कहती है — हर बार एक नया शे'र आपकी वर्तमान मनःस्थिति से मेल खाता है।

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