Yuddha Aur Shanti Mein Mera Jeevan
(0)
Author:
Lt. Gen. J.F.R. JacobPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies₹
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जिन यहूदियों ने भारत को अपना ठिकाना बनाया था, वे यहाँ किसी प्रतिकूल भेदभाव के बिना खूब फले-फूले । इनमे से बगदादी गडरिआ समुदाय की संख्या बहुत कम थी, लेकिन उसने भारत के महानतम समकालीन सिपाहियों में से एक लेफ्टिनेंट जनरल जैकब को पैदा किया | यह पुस्तक उन्हीं की रोमांचकारी कथा है । जैकब का जन्म एक यहूदी कारोबारी परिवार में हुआ था। जब द्वितीय विश्वयुद्ध शुरू हुआ तो 1941 में जैकब अपने परिवार को सूचना दिए बिना नाजियों से लड़ने के लिए सेना में भरती हो गए। उन्हें भारतीय तोपखाने में कमीशन दिया गया था और उन्होंने मध्य-पूर्व, बर्मा एवं सुमात्रा में अनेक कारवाइयों में भाग लिया था। जैकब अत्यंत कुशाग्र बुद्धि थे। उन्होंने इन्फैंट्री एवं आर्टिलरी ब्रिगेडों की कमान सँभाली थी। वे तोपखाना विद्यालय के प्रधानाचार्य रहे और अंत में पूर्वी सेना के कमांडर-इन-चीफ भी रहे। यह एक ऐसे युवा यहूदी अधिकारी की दिलचस्प कहानी है, जिसने कोई समझौता किए बिना अपने सिद्धांतों एवं मान्यताओं के आधार पर चुनौतियों को स्वीकार किया। उन्होंने कुछ ऐसे बहादुर एवं विश्वसनीय लोगों के साथ कंधे-से-कंधा मिलाकर काम किया, जो उस समय भारतीय राजनीतिक एवं सैन्य अखाड़े के पहलवान माने जाते थे। उन्होंने ढाका के पतन की सफल रणनीति काररवाइयों का पर्यवेक्षण स्वयं किया और शत्रु को बिना शर्त सार्वजनिक आत्मसमर्पण करने के लिए विवश कर दिया, जो जनरल नियाजी एवं उनके 93,000 सैनिकों द्वारा किया गया इतिहास का एकमात्र बिना शर्त सार्वजनिक आत्मसमर्पण था। अत्यंत सुबोधगम्य शैली में लिखी इस आत्मकथा में एक ऐतिहासिक दस्तावेज के रूप में जीवन सजीव हो उठा है। यह मात्र एक महान् सैनिक की जीवनगाथा ही नहीं है, अपितु इसमें कुछ उन अत्यंत प्रभावशाली एवं देदीप्यमान व्यक्तित्वों की झलकियाँ भी हैं, जिन्होंने उन अशांत युगों का इतिहास लिखा था।
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जिन यहूदियों ने भारत को अपना ठिकाना बनाया था, वे यहाँ किसी प्रतिकूल भेदभाव के बिना खूब फले-फूले । इनमे से बगदादी गडरिआ समुदाय की संख्या बहुत कम थी, लेकिन उसने भारत के महानतम समकालीन सिपाहियों में से एक लेफ्टिनेंट जनरल जैकब को पैदा किया | यह पुस्तक उन्हीं की रोमांचकारी कथा है ।
जैकब का जन्म एक यहूदी कारोबारी परिवार में हुआ था। जब द्वितीय विश्वयुद्ध शुरू हुआ तो 1941 में जैकब अपने परिवार को सूचना दिए बिना नाजियों से लड़ने के लिए सेना में भरती हो गए। उन्हें भारतीय तोपखाने में कमीशन दिया गया था और उन्होंने मध्य-पूर्व, बर्मा एवं सुमात्रा में अनेक कारवाइयों में भाग लिया था।
जैकब अत्यंत कुशाग्र बुद्धि थे। उन्होंने इन्फैंट्री एवं आर्टिलरी ब्रिगेडों की कमान सँभाली थी। वे तोपखाना विद्यालय के प्रधानाचार्य रहे और अंत में पूर्वी सेना के कमांडर-इन-चीफ भी रहे। यह एक ऐसे युवा यहूदी अधिकारी की दिलचस्प कहानी है, जिसने कोई समझौता किए बिना अपने सिद्धांतों एवं मान्यताओं के आधार पर चुनौतियों को स्वीकार किया। उन्होंने कुछ ऐसे बहादुर एवं विश्वसनीय लोगों के साथ कंधे-से-कंधा मिलाकर काम किया, जो उस समय भारतीय राजनीतिक एवं सैन्य अखाड़े के पहलवान माने जाते थे। उन्होंने ढाका के पतन की सफल रणनीति काररवाइयों का पर्यवेक्षण स्वयं किया और शत्रु को बिना शर्त सार्वजनिक आत्मसमर्पण करने के लिए विवश कर दिया, जो जनरल नियाजी एवं उनके 93,000 सैनिकों द्वारा किया गया इतिहास का एकमात्र बिना शर्त सार्वजनिक आत्मसमर्पण था।
अत्यंत सुबोधगम्य शैली में लिखी इस आत्मकथा में एक ऐतिहासिक दस्तावेज के रूप में जीवन सजीव हो उठा है। यह मात्र एक महान् सैनिक की जीवनगाथा ही नहीं है, अपितु इसमें कुछ उन अत्यंत प्रभावशाली एवं देदीप्यमान व्यक्तित्वों की झलकियाँ भी हैं, जिन्होंने उन अशांत युगों का इतिहास लिखा था।
Book Details
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ISBN9788197069291
-
Pages264
-
Avg Reading Time9 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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...यदि मैं आपको एक भी सत्य बात कहता हूँ तो वह उसकी और केवल उसकी है और यदि मैंने आपसे कोई भ्रान्तिपूर्ण या ग़लत बातें कही हैं, तो वे सब मेरी अपनी हैं, उनका उत्तरदायित्व मेरे ऊपर है।’’
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- Description: ‘बिनपटाची चौकट' दोन खांबांवर उभी आहे.एक खांब आहे, ऋजुतेचा आणि दुसरा खांब आहे, क्रूरतेचा.या दोन्ही अनुभवांतूनइंदूचे आयुष्य आकाराला आले आहेआणि म्हणून ते विदारक आहे.सरळसोट जगणे असते तर‘बिनपटाची चौकट' उभीच राहिली नसती.पट नसलेली चौकट समाजव्यवस्थेची आहे,मनुष्यसमूहाची आहे आणिआतल्या आत खदखदणाऱ्याआत्मप्रत्ययी अनुभवांची आहे.इंदूमती जोंधळे यांची ‘बिनपटाची चौकट'यातनामय परिक्रमेचानितळ आविष्कार आहे.गेल्या दशकातील मराठी निर्मितीनेज्याचा अक्षरवाङ्मयात गौरवाने समावेश करावाअसे हे आत्मकथन आहे.‘स्मृतीचित्रा'पेक्षाही हे अधिक दाहक आहे.- डॉ. गंगाधर पानतावणे(फेबु्रवारी, 1999) Binpatachi Chaukat | Indumati Jondhale बिनपटाची चौकट | इंदुमती जेोंधळे
Path
- Author Name:
Rajesh Maheshwari
- Book Type:

-
Description:
आत्मकथा सिर्फ़ ज़िन्दगी के क़िस्सों का बयान ही नहीं, वह अपने आपसे मिलने की एक ईमानदार कोशिश भी होती है। इस कोशिश में राजेश माहेश्वरी की यह कृति ‘पथ’ सचमुच पथ-प्रदर्शक का काम करती है।
जीवन मनुष्य के ख़ुद बनाए से बनता है, पैतृक सम्पदा कुछ दूर और देर तक ही साथ दे सकती है। राजेश जी इस कड़वे सच के स्वीकार के साथ अपने जीवन में वंचनाओं और प्रपंचों से जूझते हुए विवेक एवं परिश्रम के बलबूते ऐसी बुलन्दी अर्जित करते हैं जो असम्भव हरगिज़ नहीं लगती, बल्कि यह भरोसा जगाती है कि विपरीत परिस्थितियाँ हों तो अपने विवेक की पतवार को सकारात्मक सोच के साथ हर पल थामे रहने से सब सँभल जाता है।
ज़िन्दगी में अकसर ऐसे पल आते हैं, जब हम दोराहे पर खड़े होते हैं। ऐसे में ‘पथ’ के ये शब्द—‘जीवन में कठिनाइयों के आने पर चिन्ता नहीं करनी चाहिए। दुनिया में ऐसी कोई कठिनाई या समस्या नहीं है जिसका निदान सम्भव न हो’—एक दोस्त की तरह सम्बल देनेवाले हैं।
संघर्ष के पथ पर चलते हुए विश्वास की लौ को जगाए रखने की प्रेरणा से भरपूर है यह ‘पथ’।
Ek Kahani Yah Bhi
- Author Name:
Mannu Bhandari
- Book Type:

- Description: 'आपका बंटी'और 'महाभोज'जैसे उपन्यास और अनेक बहुपठित-चर्चित कहानियों कीलेखिका मन्नू भंडारी इस पुस्तक में अपने लेखकीय जीवन की कहानी कह रही हैं ।यह उनकी आत्मकथा नहीं है,लेकिन इसमें उनके भावात्मक और सांसारिक जीवन केउन पहलुओं पर भरपूर प्रकाश पड़ता है जो उनकी रचना-यात्रा में निर्णायक रहे ।एक ख्यातनामा लेखक की जीवन-संगिनी होने का रोमांच और एक जिद्दी पति कीपत्नी होने की बाधाएँ,एक तरफ अपनी लेखकीय जरूरतें (महत्वाकांक्षाएँ नही)और दूसरी तरफ एक घर को सँभालने का बोझिल दायित्व,एक धुर आम आदमी की तरहजीने की चाह और महान उपलब्धियों के लिए ललकता,आसपास का साहित्यिकवातावरण-ऐसे कई-कई विरोधाभासों के बीच से मनजी लगातार गुजरती रहीं,लेकिनउन्होंने अपनी जिजीविषा,अपनी सादगी,आदमीयत और रचना-संकल्प को नहीं टूटनेदिया । आज भी जब वे उतनी मात्रा में नहीं लिख रही हैं,ये चीजें उनके साथहैं,उनकी सम्पत्ति हैं ।यह आत्मस्मरण मनजी की जीवन-स्थितियों के साथ-साथ उनके दौर की कईसाहित्यिक-सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों पर भी रोशनी डालता है और नईकहानी दौर की रचनात्मक बेकली और तत्कालीन लेखकों की ऊँचाइयों-नीचाइयों सेभी परिचित कराता है । साथ ही उन परिवेशगत स्थितियों को भी पाठक के सामनेरखता है जिन्होंने उनकी संवेदना को झकझोरा ।
Aap-Biti
- Author Name:
Marc Chagall
- Book Type:

- Description: इन सफों का वही अर्थ है जो चित्रित सतह का है। यदि मेरे चित्रों में छिपने की कोई जगह होती, तो मैं उसमें सरक जाता...या शायद वे मेरे किसी चरित्र के पीछे चिपके होते या ‘संगीतकार’ के पाजामे के पीछे होते जिसे मैंने अपने म्यूरल में चित्रित किया है?...कौन जानता कि पीठ पर क्या लिखा है? आर.एस.एफ़.एस.आर. के समय में। मैं चाहकर चिल्लाता : हमारे बिजली के मचान हमारे पैरों तले सरक रहे हैं, क्या तुम महसूस कर सकते हो? और क्या हमारी सुघतय कला में पूर्व चेतावनी नहीं थी, हालाँकि हम लोग वास्तव में हवा में हैं और एक ही रोग से ग्रस्त, स्थायित्व के लिए लालायित। वे पाँच साल मेरी आत्मा मथते हैं। मैं दुबला हो चूका हूँ। मैं भूखा भी हूँ। मैं तुम्हें देखना चाहता हूँ फिर से, बी...सी...पी...मैं थक चूका हूँ। मुझे अपनी पत्नी और बेटी के साथ आना चाहिए। मुझे तुम्हारे नज़दीक आकर लेटना चाहिए। और, शायद, यूरोप मुझसे प्रेम करे, उसके साथ, मेरा रूस।
Ajaatshatru Atalji
- Author Name:
Bharat Bhushan
- Book Type:

- Description: "• शांति के पक्षधर होने के बावजूद प्रधानमंत्री के रूप में अटलजी ने परमाणु परीक्षण कर पूरी दुनिया को अहम संदेश दिया था। • ठंड के मौसम में बस लेकर लाहौर पहुँचकर अटलजी ने भारत-पाक रिश्तों में एक नई ऊर्जा पैदा की थी। • आज भले ही अटलजी भौतिक रूप में हमारे मध्य न हों, लेकिन अपने ओजस्वी, तेजस्वी, यशस्वी विचारों के कारण वे सदैव हम भारतीयों के हृदय में रहेंगे। • अपने राजनीतिक विरोधियों को भी अपना बना लेने में अटलजी माहिर थे। सबको साथ लेकर चलने की अद्भुत कला उनमें थी। • अपने विचारों की वजह से अटलजी देश ही नहीं विदेशों में भी लोकप्रिय थे। • अटलजी अपनी बोलने की कला से गंभीर माहौल को भी खुशनुमा बना देते थे। • संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी में दिए गए भाषण से अटलजी की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अलग ही छवि बनी, जिसकी उनके राजनीतिक विरोधियों ने भी प्रशंसा की। अपनी मर्मस्पर्शी लेखनी, ओजस्वी वक्तृत्वकला, संवेदनशील कविता, राजनीतिक दृढ़ता, अप्रतिम राष्ट्रनिष्ठा और प्रेरणाप्रद पारस्परिकता केकारण ही अटलजी बने अजातशत्रु। "
Mahamanav Mahapandit
- Author Name:
Kamla Sankrityayan
- Book Type:

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Description:
'महामानव महापण्डित’ शीर्षक यह कृति भारतीय साहित्य के अप्रतिम क्रान्तिधर्मी रचनाकार राहुल सांकृत्यायन के व्यक्तित्व और कृतित्व पर केन्द्रित है। लेकिन इसका महत्त्व सिर्फ़ यही नहीं है, बल्कि यह भी है कि राहुल-व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं को उनकी ही अन्तरंग आँखों ने देखा और लेखा है। ज़ाहिर है, कमला सांकृत्यायन की क़लम से लिखे गए ये संस्मरणात्मक और मूल्यांकनपरक लेख एक गहरी आत्मीयता से तो आप्लावित हैं ही, अपनी पारदर्शिता में भी विशिष्ट हैं। आकस्मिक नहीं कि पुस्तक के नाम में पहले 'महामानव’ शब्द है और फिर 'महापण्डित’।
पुस्तक में कुल पन्द्रह लेख हैं। इनमें से कुछ तो राहुल जी के लेखकीय, बौद्धिक कर्म का विवेचन करते हैं और कुछ उनके स्वभाव, पारिवारिक जीवनचर्या एवं रुचियों आदि को उजागर करते हैं। ऐसा करते हुए इन लेखों में जो श्रद्धाभाव है, उसके साथ एक प्रकार की नि:संगता भी है, जिससे यह कृति अनावश्यक भावुकता से मुक्त रह सकी है।
कहने की आवश्यकता नहीं कि इस पुस्तक से गुजरते हुए पाठकगण राहुल जी को अपने बहुत निकट महसूस कर सकेंगे।
Glory Beyond Dreams
- Author Name:
Sanjay Sharma
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- Book Type:

- Description: Ten brilliant stories of ten bravehearts who have brought endless glory to India, our motherland, under unbelievable circumstances. Each braveheart has been shot down with obstacles unfathomable yet written their fate rather than letting life write it for them—and their fate has been to hail the Indian tricolour across various sports scenes in various countries. Glory Beyond Dreams is home to these unstoppable para-heroes who have brought success and pride to our country time and again: Yuvraj Singh; Arvind Prabhoo; Palak Kohli; Gaurav Khanna; Pranav Desai; Aryan Joshi; Suyash Jadhav; Ajay Kumar Reddy; Sandeep Singh Dhillon; Rajinder Singh Rahelu, and chronicled in this book is a collection of their jaw-dropping life stories; stories of grit, strength, guts, and glory.
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