Ambedkar : Chitramaya Jeevani
Author:
Rajendra PatoriaPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies0 Ratings
Price: ₹ 480
₹
600
Available
भारतीय संविधान के पिता डॉ. भीमराव अम्बेडकर की सचित्र जीवनी
ISBN: 9789352660131
Pages: 140
Avg Reading Time: 5 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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भारतीय आम आदमी का व्यक्तिगत गीत है भारतीय सिनेमा और राजकपूर इसके श्रेष्ठतम गायकों में से एक हैं। आज़ादी के चालीस वर्षों में आम आदमी के दिल पर जो कुछ बीता, वह राजकपूर ने अपने सिनेमा में प्रस्तुत किया। भविष्य में जब इन चालीस वर्षों का इतिहास लिखा जाएगा तब राजकपूर का सिनेमा अपने वक़्त का बड़ा प्रामाणिक दस्तावेज़ होगा और इतिहासकार उसे नकार नहीं पाएगा।
राजकपूर, नेहरू युग के प्रतिनिधि फ़िल्मकार माने जाते हैं, जैसे कि शास्त्री-युग के मनोज कुमार। इन्दिरा गांधी के युग के मनमोहन देसाई और प्रकाश मेहरा।
आज़ाद भारत के साथ ही राजकपूर की सृजन-यात्रा भी शुरू होती है। उन्होंने 6 जुलाई, 1947 को ‘आग’ का मुहूर्त किया था और 6 जुलाई, 1948 को ‘आग’ प्रदर्शित हुई थी। भारत की आज़ादी जब उफक पर खड़ी थी और सहर होने को थी, तब राजकपूर ने अपनी पहली फ़िल्म बनाई थी। ‘आग’ आज़ादी की अलसभोर की फ़िल्म थी, जब ग़ुलामी का अँधेरा हटने को था और आज़ादी की पहली किरण आने को थी। ‘आग’ में भारत की व्याकुलता है, जो सदियों की ग़ुलामी तोड़कर अपने सपनों को साकार करना चाहता है। राजकपूर की आख़िर फ़िल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ 15 अगस्त, 1985 को प्रदर्शित हुई। इस फ़िल्म में राजकपूर ने उस कुचक्र को उजागर किया है, जो कहता है कि पैसे से सत्ता मिलती है और सत्ता से पैसा पैदा होता है। इस तरह राजकपूर ने अपनी पहली फ़िल्म ‘आग’ से लेकर अन्तिम फ़िल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ तक भारत के जनमानस के प्रतिनिधि फ़िल्मकार की भूमिका निभाई है।
यह राजकपूर जैसे जागरूक फ़िल्मकार का ही काम था कि सन् 1954 और 56 में उसने भारतीय समाज का पूर्वानुमान लगा लिया था और भ्रष्टाचार के नंगे नाच के लिए लोगों को तैयार कर दिया था। ‘जागते रहो’ के समय उनके साथियों ने इस शुष्क विषय से बचने की सलाह दी थी और स्वयं राजकपूर भी परिणाम के प्रति शंकित थे। परन्तु सिनेमा के इस प्रेमी का दिल उस गम्भीर विषय पर आ गया था। जो लोग राजकपूर को काइयाँ व्यापारी मात्र मानते रहे हैं, उन्हें सोचना चाहिए कि बिना नायिका और रोमांटिक एंगल की फ़िल्म ‘जागते रहो’ राजकपूर ने क्यों बनाई?
राजकपूर और आम आदमी का रिश्ता सभी परिभाषाओं से परे एक प्रेमकथा है, जिसमें आज़ाद भारत की दास्तान है। राजकपूर की साढ़े अठारह फ़िल्में आम आदमी के नाम लिखे प्रेम-पत्र हैं। सारा जीवन राजकपूर ने प्रेम के ‘ढाई आखर’ को समझने और समझाने की कोशिश की। राजकपूर भारतीय सिनेमा के कबीर हैं।
राजकपूर का पहला प्यार औरत से था या सिनेमा से—यह प्रश्न उतना ही उलझा हुआ है, जितना कि पहले मुर्ग़ी हुई या अंडा।
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- Description: मक़बूल फ़िदा हुसेन समकालीन भारतीय चित्रकला के अकेले ऐसे उदाहरण हैं जिन्होंने समकालीनता को अन्तरराष्ट्रीय पहचान दिलवाई और जीवन-भर इस दिशा में काम किया। प्रस्तुत पुस्तक में संगृहीत लेख उनकी इसी जीवटता, समर्पण, दूरदृष्टि और अथक परिश्रम को रेखांकित करते हैं। वे न सिर्फ़ सक्रिय रहे, बल्कि उन्होंने अनेक चित्रकारों को प्रेरित भी किया। युवा चित्रकारों के लिए आज भी वे प्रेरणा-स्रोत बने हुए हैं। उनकी चुम्बकीय उपस्थिति, उनका बेफ़िक्राना अन्दाज़, उनके सरोकार आदि सभी इतने व्यापक और पारम्परिक रहे कि उनमें आधुनिकता अपने उच्चतम रूप में प्रकट होती है। हुसेन के चित्रों को यदि एक वाक्य में परिभाषित किया जाए तो वह कुछ इस तरह का हो सकता है— “परम्परा अपनी आधुनिकता को हुसेन के चित्रों में सहजता से प्रकट करती है।” हुसेन पर लिखे गए इन लेखों को एक जगह एकत्र करने के पीछे मेरी मंशा यह भी रही है कि अलग-अलग समय पर अन्यान्य कारणों से लिखे गए इन निबन्धों में हुसेन की बहुमुखी प्रतिभा का स्वाद पाठकगण ले सकें। हुसेन निश्चित ही देश-काल, धर्म-विधर्म से परे अपनी रचनात्मकता में डूबे एक सच्चे कलाकार थे जिन्होंने जीवन-भर अपने को कसौटी पर कसे रखा। वे सक्रियता के पर्याय थे। —भूमिका से
Meri Jail Diary
- Author Name:
Yashpal
- Book Type:

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Description:
अपनी क्रान्तिकारी एवं साम्राज्य विरोधी गतिविधियों के लिए पुलिस-मुठभेड़ के बाद यशपाल 23 जनवरी, 1932 को इलाहाबाद में गिरफ़्तार हुए। इसके लिए उन्हें आजीवन कारावास की सज़ा हुई। अपने कारावास के दौर में वे नैनी, सुल्तानपुर, बरेली, फतेहपुर आदि विभिन्न जेलों में रहे। राजनीतिक बन्दी होने से बी क्लास की सुविधाओं के कारण, जीवन की कोई विशेष आशा न होने पर भी, उन्होंने अपने इस समय को पढ़ने-लिखने और विभिन्न भाषाएँ सीखने में लगाया। उन्होंने कहानियाँ लिखीं और पढ़ी गई सामग्री के विस्तृत नोट्स लिए। दोस्तोवस्की, जुलियस फ्युचिक, ग्राम्शी और भगत सिंह आदि की तरह जेल-जीवन में एक तरह से उनका अधिकतर समय इस रचनात्मक उद्यम में ही बीता। जेल-प्रवास का दौर यशपाल के लिए वस्तुतः ढेर सारे फ़ैसलों का दौर भी था। जीवित बाहर निकलने के बाद भविष्य की चिन्ता तो थी ही, यह भी तय करना था कि अब करना क्या है।
यशपाल की यह डायरी उनकी रचनात्मक तैयारी का साक्ष्य है। इसमें उन अनेक कहानियों का पहला ड्राफ़्ट मिलता है जो बाद में ‘पिंजरे की उड़ान’ और ‘वो दुनिया’ में संकलित की गई। इस सामग्री में महात्मा गांधी की अहिंसा और सत्याग्रह, लेनिन की राजनीतिक पद्धति और फ़्रायड के मनोविश्लेषण जैसे परस्पर-विरोधी विचार-सरणियों तक पहुँचने और चीज़ों को देखने, समझने की यशपाल की चिन्ता को देखा जा सकता है। कुल मिलाकर यह सारी सामग्री उनकी उस रचनात्मक बेचैनी का साक्ष्य है जिससे उबरकर ही वे एक पत्रकार और लेखक के रूप में अपना रूपान्तरण करते हैं। इन्हें उनके जीवन के समान्तर रखकर पढ़ा जा सकता है। ये सिर्फ़ कुछ उदाहरण हैं कि यशपाल की यह जेल-डायरी उन्हें कैसे एक बेहतर रूप में समझने का अवसर देती है।
Antim Sataren
- Author Name:
Anita Rakesh
- Book Type:

- Description: कथाकार मोहन राकेश के साथ बिताए अपने समय को लेकर अनीता राकेश के संस्मरणों की दो पुस्तकें हिन्दी पाठकों की प्रिय पुस्तकों में पहले से शामिल हैं—'चन्द सतरें और' तथा 'सतरें और सतरें'। उसी शृंखला में यह उनकी अगली पुस्तक है जिसे उन्होंने 'अन्तिम सतरें' नाम दिया है। इस पुस्तक में उन्होंने जितना अपने बीते समय का अवलोकन किया है, उतने ही चित्र अपने वर्तमान से भी प्रस्तुत किए हैं। बीते दिनों की यादों में जहाँ राकेश के साथ हुई कुछ झड़पें उन्हें याद आती हैं, वहीं राकेश की माताजी के साथ गुजरे अपने सबसे पूर्ण, सबसे आर्द्र क्षणों को भी वे याद करती हैं। बहैसियत लेखक राकेश जब अपने पति और पिता रूप के साथ लगभग नाइंसाफ़ी पर उतर आते, तब उन्हें अपने सिर पर अम्मा का ही साया मिलता, राकेश जब अपने कमरे का दरवाज़ा बन्द कर इनसानी रिश्तों की पेचीदगियों को सुलझाने की लेखकीय कोशिशें कर रहे होते, अनीता जी अम्मा के स्नेह के उसी साये तले रहतीं, खातीं-पीतीं, सोतीं, बीमार होतीं और फिर ठीक होतीं। इस समय वे अपने एक बेटे के साथ दिल्ली में रहती हैं। इस पुस्तक में राकेश और अम्मा के अलावा सबसे ज्यादा जगह उसी को मिली है। यह पुस्तक राकेश के व्यक्तित्व के कुछ पहलुओं से हमें परिचित कराती है, लेकिन उससे ज़्यादा इस समय में जबकि साहित्य और पुस्तकों का बाज़ार बाक़ी बाज़ारों से मुक़ाबला करने के लिए तरह-तरह की मुद्राओं से लगभग खिजा रहा है, लेखकों और लेखकों के आश्रितों की स्थिति पर हमें सोचने पर विवश करती है।
Stephen Hawking : Anant-Yatri
- Author Name:
Chandramani Singh
- Book Type:

- Description: ‘स्टीफेन हॉकिंग : अनन्त-यात्री’ महान वैज्ञानिक स्टीफेन हॉकिंग का वैज्ञानिक जीवनवृत्त है जिसमें उनकी वैज्ञानिक उपलब्धियों के साथ-साथ उनके जीवन के छुए-अनछुए पहलुओं की चर्चा की गयी है। अपने परिजनों एवं समाज के प्रति उनकी संवेदनशीलता एवं सम्पूर्ण मानवता की रक्षा के लिए दिये गये उनके सुझावों की संजीदगी उन्हें अन्य से पृथक कर महानतम बना देती है और ऐसे लोग कभी-कभी इस धरती पर जन्म लेते हैं।
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