Shaikhchilli Ke Kisse
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जाने-अनजाने में मेरे किस्से तो तुमने जरूर सुने होंगे। किस्से सुनकर हँसते भी होंगे और सोचते होंगे कि अजीब इनसान था शेखचिल्ली। वैसी मेरी गिनती मूर्खों में की जाती थी, लेकिन ऐसा था नहीं। मैं हमेशा यही सोचता था कि लोग खुश रहें, मुसकराते रहें, भले ही मुझे मूर्खतापूर्ण बातें क्यों न करनी पड़ें। आज भी जब लोग मेरे किस्से सुनते और पढ़ते हैं तो स्वयं को हँसने से रोक नहीं पाते। इस भागती-दौड़ती दुनिया में आप भी कुछ देर मेरे किस्से पढि़ए और सारी चिंताएँ भूलकर हँसते-हँसाते रहिए।
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जाने-अनजाने में मेरे किस्से तो तुमने जरूर सुने होंगे। किस्से सुनकर हँसते भी होंगे और सोचते होंगे कि अजीब इनसान था शेखचिल्ली। वैसी मेरी गिनती मूर्खों में की जाती थी, लेकिन ऐसा था नहीं। मैं हमेशा यही सोचता था कि लोग खुश रहें, मुसकराते रहें, भले ही मुझे मूर्खतापूर्ण बातें क्यों न करनी पड़ें। आज भी जब लोग मेरे किस्से सुनते और पढ़ते हैं तो स्वयं को हँसने से रोक नहीं पाते। इस भागती-दौड़ती दुनिया में आप भी कुछ देर मेरे किस्से पढि़ए और सारी चिंताएँ भूलकर हँसते-हँसाते रहिए।
Book Details
-
ISBN9788177211160
-
Pages96
-
Avg Reading Time3 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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