Loknayak Jaiprakash Narayan
(0)
₹
250
200 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
"लोकनायक जयप्रकाश नारायण का जन्म 11 अक्तूबर, 1902 को बिहार के सारण जिले के सिताबदियारा गाँव में हुआ। पढ़ाई में वे शुरू से ही कुशाग्र थे, इसलिए राजनीतिशात्र और समाजशात्र में बी.ए. एवं एम.ए. अमेरिका से किए। सन् 1929 में पं. नेहरू के आमंत्रण पर वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए। इस दौरान महात्मा गांधी उनके गुरु और पथ-प्रदर्शक बने। स्वतंत्रता और गांधीजी के निधन के बाद जयप्रकाश नारायण, आचार्य नरेंद्र देव और बसावन सिंह ने पहली विपक्षी सोशलिस्ट पार्टी का गठन किया। बाद में उसका नाम प्रजा सोशलिस्ट पार्टी कर दिया गया। जयप्रकाश नारायण का कहना था कि सिर्फ शासक बदलने से समस्या का हल नहीं होता, जब तक कि सारी व्यवस्था में आमूल परिवर्तन न हो। चंबल के चार सौ डाकुओं का समर्पण; बिहार में अराजक सत्ता व्यवस्था, कुशिक्षा, अपराध व अराजकता के खिलाफ ऐतिहासिक छात्र आंदोलन; व्यवस्था में बदलाव के लिए संपूर्ण क्रांति के आह्वान से लेकर केंद्र में इंदिरा गांधी की तत्कालीन सरकार को सत्ता से उखाड़कर लोकतंत्र की बहाली तक जयप्रकाश नारायण ने विविध सत्याग्रही भूमिकाओं का निर्वहण किया। लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने इस देश में सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन लाने के लिए एक संपूर्ण क्रांति का सपना देखा और देश के सम्मुख उसे प्रस्तुत किया। प्रस्तुत है स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद के क्रांतिकारी विचारक, दूरद्रष्टा और समाज में चेतना जगानेवाले लोकनायक की पठनीय एवं प्रेरणादायी जीवनी।
Read moreAbout the Book
"लोकनायक जयप्रकाश नारायण का जन्म 11 अक्तूबर, 1902 को बिहार के सारण जिले के सिताबदियारा गाँव में हुआ। पढ़ाई में वे शुरू से ही कुशाग्र थे, इसलिए राजनीतिशात्र और समाजशात्र में बी.ए. एवं एम.ए. अमेरिका से किए।
सन् 1929 में पं. नेहरू के आमंत्रण पर वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए। इस दौरान महात्मा गांधी उनके गुरु और पथ-प्रदर्शक बने।
स्वतंत्रता और गांधीजी के निधन के बाद जयप्रकाश नारायण, आचार्य नरेंद्र देव और बसावन सिंह ने पहली विपक्षी सोशलिस्ट पार्टी का गठन किया। बाद में उसका नाम प्रजा सोशलिस्ट पार्टी कर दिया गया।
जयप्रकाश नारायण का कहना था कि सिर्फ शासक बदलने से समस्या का हल नहीं होता, जब तक कि सारी व्यवस्था में आमूल परिवर्तन न हो। चंबल के चार सौ डाकुओं का समर्पण; बिहार में अराजक सत्ता व्यवस्था, कुशिक्षा, अपराध व अराजकता के खिलाफ ऐतिहासिक छात्र आंदोलन; व्यवस्था में बदलाव के लिए संपूर्ण क्रांति के आह्वान से लेकर केंद्र में इंदिरा गांधी की तत्कालीन सरकार को सत्ता से उखाड़कर लोकतंत्र की बहाली तक जयप्रकाश नारायण ने विविध सत्याग्रही भूमिकाओं का निर्वहण किया।
लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने इस देश में सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन लाने के लिए एक संपूर्ण क्रांति का सपना देखा और देश के सम्मुख उसे प्रस्तुत किया।
प्रस्तुत है स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद के क्रांतिकारी विचारक, दूरद्रष्टा और समाज में चेतना जगानेवाले लोकनायक की पठनीय एवं प्रेरणादायी जीवनी।
Book Details
-
ISBN9788177210941
-
Pages80
-
Avg Reading Time3 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Brahmos Ki Safalta Ke Mantra
- Author Name:
A. Sivathanu Pillai
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Mausam
- Author Name:
Gulzar
- Book Type:

-
Description:
साहित्य में ‘मंज़रनामा’ एक मुकम्मिल फ़ार्म है। यह एक ऐसी विधा है जिसे पाठक बिना किसी रुकावट के रचना का मूल आस्वाद लेते हुए पढ़ सकें। लेकिन मंज़रनामा का अन्दाज़े-बयाँ अमूमन मूल रचना से अलग हो जाता है या यूँ कहें कि वह मूल रचना का इंटरप्रेटेशन हो जाता है।
मंज़रनामा पेश करने का एक उद्देश्य तो यह है कि पाठक इस फ़ार्म से रू-ब-रू हो सकें और दूसरा यह कि टी.वी. और सिनेमा में दिलचस्पी रखनेवाले लोग यह देख-जान सकें कि किसी कृति को किस तरह मंज़रनामे की शक्ल दी जाती है। टी.वी. की आमद से मंज़रनामों की ज़रूरत में बहुत इज़ाफ़ा हो गया है।
अथाह प्रेम, प्रेम के गहरे सम्मान और शुद्ध-सुच्चे भारतीय मूल्यों में रसी-पगी गुलज़ार की इस फ़िल्म को न देखा हो ऐसे बहुत कम लोग होंगे। लेकिन मंज़रनामे की शक्ल में इसे पढ़ना बिलकुल भिन्न अनुभव है। इतने कसाव और कौशल के साथ लिखी हुई पटकथाएँ निश्चित रूप से सिद्ध करती हैं कि मंज़रनामा एक स्वतंत्र साहित्यिक विधा है। बार-बार देखने लायक़ फ़िल्म की बार-बार पठनीय पुस्तकीय प्रस्तुति!
Rudra Rachanavali : Vols. 1-4
- Author Name:
Shivprasad Mishra 'Rudra'
- Book Type:

- Description: शिवप्रसाद मिश्र ‘रुद्र' काशिकेय काशी के साहित्यकारों की गौरवशाली परम्परा के महत्त्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं। बहुआयामी व्यक्तित्व से सम्पन्न रुद्र जी उत्कृष्ट कवि, प्रखर कथाकार, सिद्धहस्त नाटककार, कुशल मंच अभिनेता, अध्येता, काशिका के उन्नायक यशस्वी पत्रकार एवं विशिष्ट सम्पादक के समवेत रूप थे। रुद्र साहित्य पर ग़ौर करें तो पाते हैं कि उनकी काव्य-साधना एक दस्तावेज़ है। हिन्दी साहित्य में विशुद्ध हिन्दी ग़ज़ल-लेखन की एक मुकम्मल परम्परा रुद्र की ‘ग़ज़लिका' से ही प्रारम्भ होती है। इसमें हिन्दी की भावभूमि पर उर्दू का तर्ज़ेबयाँ मिलता है। लघु कलेवर में रचित ‘तुलसीदास' खंडकाव्य हो या गीत एवं विविध बोलियों में अनेक प्रकार की कविताएँ सभी अपने समय की जटिलताओं से टकराते एक भिन्न प्रकार के आस्वाद से परिचय कराते हैं। एक गद्यकार के रूप में रुद्र जी अपनी उत्कृष्ट भाव-व्यंजना, विलक्षण शैली एवं मौलिक सर्जनात्मकता के कारण हिन्दी के प्रमुख गद्यकारों में अपना विशिष्ट स्थान रखते हैं। इनके गद्य में काव्यात्मक कल्पना-चारुता के साथ ही एक गत्यात्मक शिल्प-सौन्दर्य उपस्थित है जो उसकी उत्कृष्टता को द्योतित करता है। ग़ौरतलब है कि रुद्र जी सर्वप्रथम कवि रहे हैं, इसलिए उनका कवि-हृदय उनके समूचे साहित्य में प्रतिबिम्बित है। गद्य के सभी रूपों—उपन्यास, कहानी, नाटक, व्यंग्यालेख, निबन्ध, संस्मरण, रेखाचित्र एवं समीक्षा को उन्होंने सफलता के साथ पुष्पित एवं पल्लवित किया है। इन सभी में उनका प्रत्युत्पन्नमतित्व, लोकसम्पृक्ति एवं स्थानीय रंगत विद्यमान है। ‘रुद्र रचनावली' को विधाओं के आधार पर चार खंडों में विभाजित किया गया है; जैसे—काव्य-साहित्य, गद्य-साहित्य, कथा-साहित्य एवं सम्पादित साहित्य। ‘रचनावली’ का यह पहला खंड काव्य-साहित्य पर केन्द्रित है। इसके अन्तर्गत ब्रजभाषा, खड़ी बोली, मिश्रित बोली, काशिका (बनारसी बोली) की कविताएँ हैं। इस खंड में रुद्र जी की प्रकाशित कविताओं के साथ कुछ अप्रकाशित कविताओं को भी सम्मिलित किया गया है। गीतों के अन्तर्गत उनके अप्रकाशित गीतों को रखा गया है। साथ ही, इस खंड में उनके चर्चित लघु खंडकाव्य ‘तुलसी', ग़ज़लों का संग्रह ‘ग़ज़लिका' एवं 'गीत गोविन्द' के काव्यानुवाद को क्रमवार रखा गया है। यह ‘रचनावली' कई दृष्टियों से विशिष्ट है। पहला यह कि रुद्र जी के साहित्य का समग्रता में मूल्यांकन हो सके और दूसरा यह कि जिस ‘रुद्र’ को साहित्य-जगत में एकमात्र कृति 'बहती गंगा’ में समेटकर रख दिया गया है, इस मिथ को तोड़ा जा सके और जाना जा सके कि रुद्र जी ने हिन्दी साहित्य को अपनी लेखनी द्वारा अल्प समय में ही बहुत कुछ दिया है।
Sargam
- Author Name:
Amrit Rai
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
The Ratan Tata Way | Complete Biography & Success Secrets | Business Leadership Principles Visionary Industrial Evolution Inspirational Nation Building
- Author Name:
Vinod Sharma +1
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Christopher Columbus
- Author Name:
Rakesh Ranjan
- Book Type:

- Description: क्रिस्टोफर कोलंबस का जन्म सन् 1449 में जेनोआ (इटली) में हुआ था। उसके पिता एक जहाजी थे, इसलिए बचपन से ही वह समुद्र एवं जलपोतों से लगाव रखता था। इन सबके चलते भूगोल व मानचित्रों के प्रति उसकी जिज्ञासा अत्यंत तीव्र हो गई थी। कोलंबस ने पृथ्वी के नक्शे पर एशिया की स्थिति का जो अनुमान लगाया था, वह गलत निकला और वह समुद्री यात्रा के द्वारा एशिया के बजाय अमेरिका पहुँच गया। इस यात्रा के दौरान किसी को यह जानकारी नहीं थी। इसी कारण एशियाई मार्ग की खोज का श्रेय कोलंबस के बजाय वास्को डि गामा को मिला। वास्को डि गामा कोलंबस की अमेरिका यात्रा के 6 वर्ष बाद सन् 1498 में अफ्रीका का चक्कर लगाता हुआ दक्षिण भारत के कोचीन बंदरगाह पर पहुँचा था। 14 वर्षों तक कोलंबस पुर्तगाल की राजधानी में रहा, लेकिन वहाँ के शासकों ने उसके साथ धोखा किया और उसको शहर से बाहर न जाने का आदेश दिया। परंतु कोलंबस अपने पुत्र डिएगो के साथ वहाँ से निकल भागा। 12 अक्तूबर, 1492 को कोलंबस ने एक नए द्वीप को खोज निकाला। इस स्थल को कोलंबस ने ‘इंडिया’ नाम दिया, जो आज संयुक्त राज्य अमेरिका के 48 राज्यों में से एक ‘इंडियाना’ के नाम से प्रसिद्ध है। इस पुस्तक में कोलंबस के जीवन और उसके साहसिक समुद्री अभियानों का वर्णन, जो सुधी पाठकों को जानकारीपरक एवं रुचिकर लगेगा।
Premmay Ram "प्रेममय राम" | Book in Hindi
- Author Name:
Ram Bachchan Rai
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Bebaak Baat
- Author Name:
Vijay Goyal
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
POSHAK TATTVON SE BHARPOOR SABZIYAN
- Author Name:
Gopi Krishna Kunwar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
4 Stormy Trials of Veer Savarkar
- Author Name:
Harendra Srivastava
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Yogiji Ke Prerak Prasang "योगीजी के प्रेरक प्रसंग" Motivational Incident Compilation of Yogi Adityanath An Indian Hindu Monk and Politician (Uttar Pradesh CM Yogi Adityanath Book in Hindi)
- Author Name:
Sheelwant Singh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
JHARKHAND KE VEER SHAHEED
- Author Name:
Vinay Kumar Pandey
- Book Type:

- Description: झारखंड की रत्नगर्भा धरती पर अनेक ऐसे वीरों और वीरांगनाओं ने जन्म लिया है, जिन्होंने मातृभूमि की आन-बान-शान और सम्मान के लिए अपनी जान तक की कुर्बानी दे दी है। उन्हीं वीर-सपूतों में शीर्ष स्थान पर सितारों की भाँति स्थापित हो चुके हैं--रघुनाथ महतो, तिलका माँसी, तेलंगा खड़िया, अर्जुन सिंह, जग्गू दीवान, कुर्जी मानकी, पोटो सरदार, गोनो पिंगुआ, बुधु भगत, इकुर विश्वनाथ शाहदेव, पांडेय गणपत राय, टिकैत उमराँव सिंह, शेख भिखारी, सिदो, कान्हू, चाँद, भेरव, फूलो, झानो, बिरसा मुंडा, गया मुंडा, जतरा टाना भगत आदि। देश की स्वाधीनता के अमृत महोत्सव पर प्रस्तुत पुस्तक इन्हीं बलिदानी सपूतों की वीर गाथाओं को सँजोने का प्रयास है। इस पुस्तक में जिन वीर-सपूतों की जीवन गाथा का बखान किया गया है, वे निश्चित रूप से अत्यंत साधारण थे, किंतु उन्होंने अपने 'सादा जीवन, उच्च विचार' की शैली में असाधारण कार्य कर न केवल देशवासियों, अपितु सात समुंदर पार से भारत में आकर सत्ता के शीर्ष पर बैठनेवाले सर्वशक्ति-संपनन अंग्रेजों को भी चकित-विस्मित कर दिया। प्रस्तुत पुस्तक उन वीर शहीदों के जीवन के कई अनुछुए पहलुओं पर प्रकाश डालती है, जिनसे जनसाधारण अभी तक अनभिनज्ञ रहा है । जहाँ तक इतिहासकारों की दृष्टि भी पहुँच नहीं पाई है, किंतु मान्यताओं, किंवदंतियों, लोककथाओं और लोकगीतों के रूप में आम झारखंडवासियों के दिलोदिमाग पर अमिट छाप छोड़ते रहे हैं। देश और समाज के भूले-भटके लोगों को राह दिखाने के लिए प्रकाश-स्तंभ स्थापित करने का विनम्र प्रयास है पुस्तक ' झारखंड के वीर शहीद '।
Mahakumbh 2025: Festival of Social Equality Know About India's Kumbh Mela Prayagraj
- Author Name:
Dr. Sheelwant Singh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Safaltam Karobariyon Ki Adbhut Kahaniyan
- Author Name:
Pradeep Thakur
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Trading With Chart Pattern And Price Action Breakout | Price Action Trading | Candlestick Patterns Technical Analysis By Mahesh Chandra Kaushik
- Author Name:
Mahesh Chandra Kaushik
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
JPSC Jharkhand Preliminary Examination-2024 General Studies Paper 1 & 2 | 20 Model Papers with (Previous Years Solved Papers 2003–2021)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Jawahar Lal Nehru
- Author Name:
S.K. Agrawal
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Main J. Krishnamurti Bol Raha Hoon
- Author Name:
Ed. Rajasvi
- Book Type:

- Description: "जिद्दू कृष्णमूर्ति का नाम आध्यात्मिक जगत् में विशेष रूप से उल्लेखनीय है। जब वे मात्र तेरह वर्ष के थे, तभी उनमें एक आध्यात्मिक गुरु होने की विशिष्टताएँ दृष्टिगोचर होने लगी थीं। उन्होंने न केवल भारत में, बल्कि विदेशों में भी आध्यात्मिकता का परचम लहराया। जे. कृष्णमूर्ति के विचार केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि भौतिक दृष्टि से अत्यंत महवपूर्ण हैं, जो जाति, धर्म और संप्रदाय में उलझे, असमंजस में फँसे और दिग्भ्रमित हुए लोगों का यथोचित मार्गदर्शन करते प्रतीत होते हैं। उन्होंने मानव-जीवन के लगभग सभी पहलुओं को अपनी विचारशीलता के दायरे में लाने का सफल प्रयास किया है। किंचित् मात्र भी ऐसा नहीं लगता कि जीवन की कोई भी जटिल वीथि उनकी दृष्टि से ओझल हो गई हो। उनके जीवन का परम लक्ष्य विश्व को शांति, संतुष्टि और संपूर्णता प्रदान करना था, ताकि ईर्ष्या, द्वेष और स्वार्थ का समूल नाश किया जा सके। वे अपने जीवन-लक्ष्य में काफी हद तक सफल रहे। जो भी उनके संपर्क में आया, मानो उनका ही होकर रह गया। उनकी प्रेरक वाणी के कुछ रत्न इस पुस्तक में संकलित हैं।
Fijeedvip Mein Mere 21 Varsh
- Author Name:
Totaram Sanadhya
- Book Type:

- Description: ब्रिटिशकालीन भारतीय पराधीनता का एक त्रासद अध्याय है गिरमिटिया। गिरमिटिया यानी एग्रीमेंट के तहत देश के बाहर कुलीगीरी करने के लिए जबरन भेजा जाना। भूख, बेरोजगारी, उत्पीड़न या गृह कलह के चलते घर-परिवार छोड़नेवाले स्त्री-पुरुषों की मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें झाँसा देकर अज्ञात देश में भेज देना। सन् 1879 से लेकर सन् 1916 तक 60553 भारतीय ‘गिरमिटिया’ बनाकर फिजीद्वीप भेजे जा चुके थे। इन अभिशप्त भारतीयों के शापमोचन के लिए जो लोग आगे आये उनमें एक नाम था पण्डित तोताराम सनाढ्य का। कौन थे ये तोतारामजी? क्या रिश्ता बनता था उनका फिजी से और गिरमिटिया भारतीयों से? परदुखकातर एक सामान्य भारतीय जिन्होंने खुद इक्कीस वर्षों तक गिरमिटिया की यातना-भरी जिन्दगी जी; मुक्ति संघर्ष का आगाज किया। यूँ तो ‘गिरमिटिया’ प्रथा पर प्रेमचन्द और प्रसाद समेत कई दिग्गजों ने लिखा है पर स्वयं का भोगा हुआ सच सिर्फ और सिर्फ तोताराम सनाढ्य का ही है। इतिहास के अध्येताओं से लेकर आम पाठकों तक के लिए जानकारियों से भरी एक रोचक और जरूरी किताब!
Dadi Janki A Century of Service
- Author Name:
Liz Hodgkinson
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book