Madhya Prant Aur Barar Mein Adivasi Samsyayen
(0)
₹
1500
1200 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
जनजातीय समाज की अवहेलना सदियों से की जाती रही है और मौजूदा समय में भी बरकरार है, जिनकी अनगिनत समस्याओं को दरकिनार कर उनकी ज़मीनों के मालिकाना हक़ों को उनसे सरकारी या ग़ैर-सरकारी तरीक़ों से हड़पा जाता रहा है। उनकी कठिनाइयों और समस्याओं का सूक्ष्म दृष्टि से आकलन करता यह दस्तावेज़ हमारे सम्मुख उस जीवन-दृश्य को प्रस्तुत करता है, जो नारकीय है। प्रस्तुत पुस्तक मध्यप्रान्त और बरार में रहनेवाले जनजातीय समाज की उन विषम समस्याओं से हमें अवगत कराती है कि कैसे समय-समय पर उनकी ज़मीनों, परम्पराओं, भाषाओं से अलग-थलग करके उन्हें ‘निम्न’ जाँचा गया है और कैसे उन्हें साहूकारी के पंजों में फँसाकर बँधुआ मज़दूरी के लिए बाध्य किया गया है। यहाँ उनकी समस्याओं का एक गम्भीर विश्लेषण है। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पशु-चिकित्सा आदि के नाम पर उन पर जबरन एक ‘सिस्टम’ थोपा गया जिससे उनकी समस्याएँ कम होने के बजाय और बढ़ी हैं। डब्ल्यू.वी. ग्रिग्सन की अंग्रेज़ी पुस्तक से अनूदित यह पुस्तक जहाँ एक तरफ़ जनजातीय समस्याओं पर केन्द्रित हिन्दी पुस्तकों के अभाव को दूर करती है, वहीं दूसरी ओर शोधकर्ताओं और समाज के उत्थान में जुटे कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन भी करती है।
Read moreAbout the Book
जनजातीय समाज की अवहेलना सदियों से की जाती रही है और मौजूदा समय में भी बरकरार है, जिनकी अनगिनत समस्याओं को दरकिनार कर उनकी ज़मीनों के मालिकाना हक़ों को उनसे सरकारी या ग़ैर-सरकारी तरीक़ों से हड़पा जाता रहा है। उनकी कठिनाइयों और समस्याओं का सूक्ष्म दृष्टि से आकलन करता यह दस्तावेज़ हमारे सम्मुख उस जीवन-दृश्य को प्रस्तुत करता है, जो नारकीय है।
प्रस्तुत पुस्तक मध्यप्रान्त और बरार में रहनेवाले जनजातीय समाज की उन विषम समस्याओं से हमें अवगत कराती है कि कैसे समय-समय पर उनकी ज़मीनों, परम्पराओं, भाषाओं से अलग-थलग करके उन्हें ‘निम्न’ जाँचा गया है और कैसे उन्हें साहूकारी के पंजों में फँसाकर बँधुआ मज़दूरी के लिए बाध्य किया गया है।
यहाँ उनकी समस्याओं का एक गम्भीर विश्लेषण है। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पशु-चिकित्सा आदि के नाम पर उन पर जबरन एक ‘सिस्टम’ थोपा गया जिससे उनकी समस्याएँ कम होने के बजाय और बढ़ी हैं।
डब्ल्यू.वी. ग्रिग्सन की अंग्रेज़ी पुस्तक से अनूदित यह पुस्तक जहाँ एक तरफ़ जनजातीय समस्याओं पर केन्द्रित हिन्दी पुस्तकों के अभाव को दूर करती है, वहीं दूसरी ओर शोधकर्ताओं और समाज के उत्थान में जुटे कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन भी करती है।
Book Details
-
ISBN9788126715190
-
Pages575
-
Avg Reading Time19 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Bharat Ke Pratapi Samrat
- Author Name:
Maj (Dr.) Parshuram Gupt
- Book Type:

- Description: पुराणों में दिग्विजयी सम्राटों के अनेक प्रमाण देखे जा सकते हैं। विभिन्न रूपों में आज भी उनके जीवित प्रमाण भारत सहित विश्वभर में बिखरे पड़े हैं। इनकी गौरव गाथाएँ जन-सामान्य की आस्था के केंद्र हैं, जो पग-पग पर उनका मार्गदर्शन भी करती हैं। इस पुस्तक में भगवान बुद्ध के बाद के उन विशिष्ट भारतीय सम्राटों की चर्चा की गई है, जिनकी गौरव-गाथाओं ने काल के कपाल पर अनेक गरिमामय अभिलेख अंकित किए हैं। उनकी दिग्विजयी सेनाओं ने भारत की सीमाओं के बाहर जाकर भी विजय के अनेक कीर्तिमान स्थापित किए हैं। इन विजयों में धम्म विजय महत्त्वपूर्ण है। सम्राट् अशोक और कनिष्क जैसे सम्राटों ने इसमें अग्रणी भूमिका निभाई। विक्रमादित्य, चंद्रगुप्त मौर्य,समुद्रगुप्त, चंद्रगुप्त द्वितीय, हर्षवर्धन, बप्पा रावल, ललितादित्य, मिहिर भोज, महाराणा प्रताप, महाराणा साँगा, परमार भोज, अनंगपाल, राजेंद्र चोल प्रथम, हेमचंद्र विक्रमादित्य व सम्राट् कृष्णदेव राय की अपनी-अपनी गौरव गाथाएँ हैं।इन्होंने जहाँ अपने भुजबल से संपूर्ण भारतवर्ष को एकता के सूत्र में बाँधने काप्रयास किया, वहीं इनके घोड़ों के टापों की धमक पेकिंग से लेकर गांधार तक अनुभव की गई। सम्राट् राजेंद्र चोल प्रथम के नौसैनिक बेड़े श्रीलंका से लेकर दक्षिण पूर्व एशियाके कई भागों तक पहुँचे और वहाँ भारतीय संस्कृति के ध्वजवाहक बने। भारत के प्रतापी सम्राटों के शौर्य, प्रराक्रम, प्रजावत्सलता, सामाजिक-सांस्कृतिक सरोकारों का दिग्दर्शन करवाकर गौरवबोध जाग्रत करनेवाली प्रेरक पुस्तक।
Punjabi Ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
Phulchand Manav
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
RASHTRABHAKT KAVYITRI SUBHADRA KUMARI CHAUHAN
- Author Name:
Ed. Rajasvi
- Book Type:

- Description: """खूब लड़ी मरदानी वो तो झाँसीवाली रानी थी...’ इन पंक्तियों का उद्घोष होते ही इनकी लेखिका सुभद्रा कुमारी चौहान का नाम मन में कौंध जाता है। वीररस से ओत-प्रोत कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्म 16 अगस्त, 1904 को इलाहाबाद के निहालपुर गाँव में हुआ। वे बचपन से कविता लिखने लगी थीं। उनकी कविताओं ने उन्हें पूरे स्कूल में लोकप्रिय बना दिया था। महादेवी वर्मा उनकी बचपन की सहेली थीं। दोनों का साथ लंबे समय तक बना रहा। सुभद्रा की पढ़ाई हालाँकि नौवीं कक्षा के बाद ही छूट गई, लेकिन उनके साहित्य की गहराई से यह अभाव जरा भी नहीं खटकता। वे कांग्रेस की कार्यकर्ता रहीं और बापू की लाडली रहीं। जबलपुर में वर्ष 1922 का ‘झंडा सत्याग्रह’ देश का ऐसा पहला सत्याग्रह था, जिसमें सुभद्रा पहली महिला सत्याग्रही थीं। सुभद्रा बचपन से दबंग, विद्रोही और वीरांगना थीं। उनकी रचनाओं में उनकी स्वाभाविक अभिव्यक्ति देखी जा सकती है। उन्होंने लगभग 88 कविताओं और 46 कहानियों की रचना की, जिसमें अशिक्षा, अंधविश्वास, जातिप्रथा आदि रूढि़यों पर प्रहार किया गया है। ‘झाँसी की रानी’ उनकी सदाबहार रचना है, जो आज भी स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल है और जल्दी ही बच्चे उससे स्वयं को जोड़ लेते हैं। ‘बिखरे मोती’, ‘उन्मादिनी’ और ‘सीधे-सादे चित्र’ उनके तीन लोकप्रिय कहानी-संग्रह हैं। 44 वर्ष की अल्पायु में 15 फरवरी, 1948 को कार द्वारा नागपुर से जबलपुर लौटते समय एक सड़क दुर्घटना में उनका निधन हो गया।"
Bihar School Examination Board, Patna Bihar STET Secondary Teacher Eligibility Test Study Guide Teaching Aptitude & Other Proficiency 2023
- Author Name:
Dr. Ranjit Kumar Singh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Lockdown ke Chalees Din
- Author Name:
Shanta Kumar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Dehari Par Patra
- Author Name:
Nirmal Verma
- Book Type:

-
Description:
यह निर्मल वर्मा के कथाकार जयशंकर को लिखे पत्रों का संकलन है। एक वरिष्ठ लेखक का एक युवा लेखक से हुआ संवाद जो अगस्त 82 से शुरू होकर अगस्त 2005 तक चला।
पत्रों में निर्मल वर्मा का एक अलग ही रूप प्रकट होता है जो खासा मुखर और संवादप्रिय है। पाठकों, प्रशंसकों और मित्रों के ढेरों पत्र उन्हें रोज आते थे; और वे हर पत्र का जवाब देते थे। न सिर्फ़ जवाब देते थे बल्कि उन पत्रों में दूसरों के लिए एक तरह से रचनात्मक पर्यावरण के निर्माण की कोशिश भी करते थे; उन पत्रों में उनका अपना आत्मसंघर्ष और आत्म-मंथन भी व्यक्त होता था।
जयशंकर को लिखे इन पत्रों में ख़ासतौर पर साहित्य, सिनेमा, संगीत और चित्रकला विषयक इतने विवरण आते हैं कि कोई भी युवा लेखक इनसे अपनी अध्ययन-यात्रा के लिए पर्याप्त मार्गदर्शन प्राप्त कर सकता है। इनमें निर्मल जी के रचना-संसार को, उनकी चिन्तन-प्रक्रिया को समझने के सूत्र भी मिलेंगे।
...और ऐसे परामर्श भी—“मैं सोचता हूँ—हर व्यक्ति को गर्मियों के दौरान अपने सारे काम, कर्तव्य और जिम्मेवारियाँ पूरी करने के बाद जाड़े के दिन सिर्फ़ सोचने, सोने और पढ़ने के लिए सुरक्षित रखने चाहिए...और प्रेम करने के लिए भी, यदि ऐसा सुयोग मिल सके।”
Gita Mein Gyanyog
- Author Name:
Champa Bhatia
- Book Type:

- Description: दरणीया चंपा भाटिया की इस पुस्तक की पांडुलिपि से गुजरते हुए मैंने महसूस किया कि यह एक सहज-सरल आध्यात्मिक मन का स्वाभाविक प्रस्फुटन है। न कोई बनावट, न बुनावट। चंपाजी ने आध्यात्मिक-धार्मिक आयोजनों, समागमों में जो सुना, समझा और आत्मसात् किया, उसे जस-की-तस रख दिया है। इस पुस्तक में कहीं भी पांडित्य प्रदर्शन का प्रयास नहीं किया गया है। चंपा भाटिया कोई विदुषी नहीं हैं। वह एक गृहिणी हैं। वे घर-परिवार चलाने के लिए कारोबार भी सँभालती हैं। उसमें से समय निकालकर उन्होंने गीता के श्लोकों के अध्ययन-मनन के उपरांत आम लोगों की समझ में आनेवाली भाषा में तत्त्वज्ञान को निरूपित करने का प्रयास किया है। इस पुस्तक में विभिन्न श्लोकों की व्याख्या करते हुए सतोगुणी, रजोगुणी और तमोगुणी कर्मों की चर्चा तो की गई है, लेकिन निष्काम कर्म (यानी कर्मों के फल का कोई बंधन न होना) को अत्यंत बरीकी से उकेरा गया है। इस पुस्तक में यह पुनर्स्थापित करने का प्रयास किया गया है कि ज्ञाता और ज्ञेय की एकता ही ज्ञान है। ईश्वर को जानने के लिए तीन बुनियादी शर्तें इस पुस्तक में बताई गई हैं—इच्छा (जिज्ञासा), श्रद्धा और समर्पण। इतना अवश्य है कि इसके अध्ययन से जिज्ञासुओं को ईश्वर को जानने-समझने के लिए एक रोशनी जरूर मिलेगी। दूसरे शब्दों में कहें तो गीता के तत्त्वज्ञान के शोधार्थियों, अर्घ्यताओं के लिए यह पुस्तक पाथेय का काम करेगी, ऐसी आशा है। यह उन्हें संतृप्त भले ही न करे, लेकिन अतृप्त मन को तृप्ति की राह तो बताएगी ही। —बैजनाथ मिश्र पत्रकार एवं पूर्व सूचना आयुक्त, झारखंड
Gyanyoga
- Author Name:
Swami Vivekanand
- Book Type:

- Description: No Description Available for this Book
UPSC Crack Karne Ke Gurumantra
- Author Name:
Aditya Bajpai
- Book Type:

- Description: इस पुस्तक का उद्देश्य आपको परीक्षा के अध्ययन के लिए विस्तृत योजना प्रदान करना नहीं है। यह आपको अभिप्रेरित करने वाली पुस्तक भी नहीं है। यह पुस्तक सिविल सेवा की तैयारी के संबंध में Quora पर मेरे द्वार दिए गए लगभग 100+ प्रश्नों के उत्तरों पर आधारित है। यह पुस्तक सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी से संबंधित मौलिक प्रश्नों को तय करने के तरीके के बारे में अभ्यर्थियों को स्पष्ट अंतर्दृष्टि प्रदान करने का एक प्रयास है। सिविल सेवा को ही क्यों चुनें ? सिविल सेवा से आपकी क्या अपेक्षा है? निजी क्षेत्र की नौकरी क्यों नहीं ? कौन-सी सेवा चुननी है? क्या तैयारी के लिए दिल्ली जाना वाकई महत्त्वपूर्ण है? कोचिंग बनाम स्व-अध्ययन ? क्या आपको अपनी नौकरी छोड़ देनी चाहिए? आप अपने जीवन से वास्तव में क्या चाहते हैं? इस पुस्तक में कुछ इस प्रकार के प्रश्नों पर विचार किया गया है।
Do Bailon Ki Jori
- Author Name:
Premchand
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
UPSC CSAT Civil Services Aptitude Test Samanya Adhyayan Solved Papers 2011-2024 Paper-2
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Nazarband Loktantra
- Author Name:
L.K. Advani
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Benjamin Graham: A Complete Biography (The Father of Value Investing)
- Author Name:
Pushkar Kumar
- Book Type:

- Description: Widely known as the “Father of Value Investing”, Benjamin Graham was a British-born American researcher, economist, professor and investor. This book is an attempt by the author to introduce Benjamin Graham and his life to the world. So, that everyone could learn how he became an investing genius and what principles he followed to achieve success. He is the author of the popular investing book named “The Intelligent Investor”. The book is considered the investor’s bible. Graham has also written another founding text in neoclassical investing with David Dodd named “Security Analysis.” Benjamin Graham was the former mentor of the renowned investor Warren Buffett. He had many other outstanding disciples who had achieved substantial success in the world of investment, including Irving Kahn, Charles Brandes, William J. Ruane, Bert Olden and Walter J. Schloss. Moreover, he has been an inspiration to all who have ever wished to enter the world of investment.
Kahaniyon Ki Lata "कहानियों की लता" Book in Hindi
- Author Name:
Lata Kadambari
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
PRAKRITIK AAPDAYEN (NATURAL DISASTER)
- Author Name:
Dr. D.D. Ojha
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Shivgiri
- Author Name:
Karan Singh
- Book Type:

- Description: "‘शिवगिरि’ कश्मीर की पृष्ठभूमि में रचित उपन्यास है और प्रधानतः आध्यात्मिक अन्वेषण के विषय को परखता है। यह न केवल एक उत्कृष्ट कथा है, अपितु प्रगाढ़ आंतरिक संदेशों से भी गर्भित है, जो विवेकी पाठकों के लिए अत्यंत रुचिकर होंगे। आदिशंकराचार्य की रचनाओं में अभिव्यक्त उनके दर्शन की यत्किंचित् व्याख्या एक गुरु और साधक के बीच संवाद के रूप में इस उपन्यास में प्रस्तुत है। गुरु पूछते हैं—‘‘तुम किसकी खोज कर रहे हो?’’ साधक उत्तर देता है—‘‘मैं उपनिषदों द्वारा व्याख्यायित उस आदर्श अवस्था की खोज में हूँ—वह अवस्था, जिसमें सारे दुःखों व संघर्षों का अंत होता है और जिसमें आनंद एवं निश्चिंतता का प्रकाश है।’’ ‘‘तुम्हारा अन्वेषण उचित है, अशोक! तुम वही खोज रहे हो, जो तुम्हारा जन्मसिद्ध अधिकार है।’’ गुरु कहते हैं। सभी आयु वर्ग के पाठकों हेतु जानकारीपरक एवं अत्यंत रुचिकर उपन्यास। "
Deendayal Upadhayaya : Kritatva evam Vichar
- Author Name:
Dr.Mahesh Chandra Sharma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Praja Parishad: A Saga of Sacrifices
- Author Name:
Prof. Kul Bhushan Mohtra
- Book Type:

- Description: This book on ‘Praja Parishad’ gives glimpses of the great struggle and historical narrative to save the J&K State from inimical designs of the elements from within and outside. It reveals much new factual information and saga of struggle of Praja Parishad led from the front by great patriot, Pt. Prem Nath Dogra, peeping into pre and post-1947 period of Jammu and Kashmir. This gives detailed and accurate account of the brave story how the people strove hard for the objective of J&K State’s full integration with India so that they enjoy all democratic rights. The movement was against separatist tendencies and anti-national stance. The protest demonstration was for full integration, no special status and no separate constitution, state flag or nomenclature of Prime Minister and slogan was Ek desh mein ek Vidhan (Constitution), ek Pradhan (head of State) and ek Nishan (flag). A must read complete book on Praja Parishad which tells the saga of dedication, devotion, sacrifice for the integration of India.
Balvant Bhoomihar
- Author Name:
Bhuvneshwar Mishra
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Marathi Ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
Dr. Damodar Khadse
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book