Dr. A.P.J. Abdul Kalam Chitrawali
Author:
Srijan Pal SinghPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Other0 Ratings
Price: ₹ 120
₹
150
Unavailable
Awating description for this book
ISBN: 9789352660735
Pages: 32
Avg Reading Time: 1 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Rangmanch Evam Stri
- Author Name:
Supriya Pathak
- Book Type:

-
Description:
सार्वजनिक स्पेस में स्त्री की आमद भारतीय समाज में एक समानान्तर प्रक्रिया रही है जिसके लिए सारी लड़ाइयाँ स्त्रियों ने ख़ुद लड़ी हैं, बेशक कुछ सहृदय और सुविवेकी पुरुषों का सहयोग भी उन्हें अपनी जगह बनाने में मिलता रहा। रंगमंच के संसार में स्त्रियों का प्रवेश भी इससे कुछ अलग नहीं रहा। बल्कि यह कुछ और कठिन था। शुचिताबोध से त्रस्त जो भारतीय समाज दर्शक-दीर्घा में स्त्रियों के बैठने की भी अलग व्यवस्था चाहता था, वह भला उन्हें मंच पर उतरने की छूट कैसे देता? आज की यह वस्तुस्थिति कि अधिकांश मध्यवर्गीय अभिभावक बेटी को फ़िल्म में जाते देख फूले फिरेंगे, एक अलग चीज़ है, इसे न तो मंच पर आने के लिए स्त्री ने जो संघर्ष किया, उसका ईनाम कह सकते हैं और न यह कि मध्य-वर्ग स्त्री को लेकर हर पूर्वग्रह से मुक्त हो चुका है, यह उसकी किसी और ग्रन्थि का नतीजा है।
समाज की और जगहों पर स्त्री ने जैसे अपनी दावेदारी पेश की, मंच पर और परदे पर भी उसने सम्मानित जगह ख़ुद ही बनाई। यह किताब स्त्री की इसी यात्रा का लेखा-जोखा है। पुस्तक का मानना है कि रंगमंच का डेढ़ सौ वर्षों का इतिहास स्त्रियों के लिए जहाँ बहुत संघर्षमय रहा, वहीं रंगमंच ने उनके लिए एक माध्यम का भी काम किया जहाँ से उनकी इच्छाओं और आकांक्षाओं, पीड़ा और वंचनाओं को वाणी मिली।
पारसी रंगमंच ने, जो भारत में लोकप्रिय रंगमंच का पहला चरण है, इस सन्दर्भ में बहुत बड़ी भूमिका निभाई और भविष्य के लिए आधार तैयार किया। जनाना भूमिका करनेवाले पुरुषों ने उस स्पेस को रचा जहाँ से स्त्रियाँ इस दुनिया में प्रवेश कर सकीं। उन्होंने न सिर्फ़ स्त्रीत्व को एक नया आयाम दिया बल्कि घर के आँगन के बाहर सैकड़ों निगाहों के सामने स्त्री की मौजूदगी क्या होती है, इसका पूर्वाभ्यास समाज को कराया।
ऐसे कई चरण रहे, जिनसे रंगमंच की स्त्री को आज के अपने स्थान पर पहुँचने के लिए गुज़रना पड़ा। यह किताब विभिन्न आयामों से उन तमाम परिस्थितियों और यात्राओं का आधिकारिक ब्यौरा देती है।
Vicharon Ke Gyaraha Adhyaya
- Author Name:
Rabindra Nath Mahto
- Book Type:

- Description: विचारों के ग्यारह अध्याय' झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष श्री रबींद्रनाथ महतो द्वारा लिखित पुस्तक है, जिसमें उन्होंने राज्य गठन आंदोलन के दौरान और अपने लंबे राजनीतिक अनुभव से स्वयं में उपजे विचारों की प्रस्तुति की है। अलग-अलग विषयों पर लिखे गए ग्यारह अध्याय राज्य निर्माण के दर्शन, वर्तमान दशा तथा भविष्य की दिशा के विषय में तथ्यपरक एवं विचारोत्तेजक जानकारी प्रस्तुत करते हैं । संथाल, हूल से गांधीवाद तक, संसदीय परंपराओं से कार्यपालिका, विधायिका तथा न्यायपालिका के पारस्परिक संबंधों तक लेखक ने जहाँ एक ओर अलग-अलग सैद्धांतिक पहलुओं को छूने का प्रयास किया है, वहीं कृषि, शिक्षा, खेल और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर भी अपने विचार प्रस्तुत किए हैं । पुस्तक के अंतिम भाग में अध्यक्ष के रूप में उनके द्वारा विधानसभा में दिए गए कुछ प्रमुख भाषण संकलित हैं।
Dharohar CET Snaktak Star (Rajasthan Common Eligibility Test Graduate Level Study Guide in Hindi)
- Author Name:
Kunwar Kanak Singh Rao
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
101 Weight Loss Tips
- Author Name:
Dr. Anil Chaturvedi
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
NAYI KAHANI AALOCHNA
- Author Name:
Uday Shankar
- Book Type:

- Description: Criticism
Sagar Pradushan
- Author Name:
Shyam Sunder Sharma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
The Invisible Man
- Author Name:
H. G. Wells
- Book Type:

- Description: The Invisible Man is a science fiction novel by H. G. Wells. Originally serialized in Pearson's Weekly in 1897, it was published as a novel the same year. The invisible man to whom the title refers is Griffin, a scientist who has devoted himself to research into optics and who invents a way to change a body's refractive index to that of air so that it neither absorbs nor reflects light. He carries out this procedure on himself and renders himself invisible, but he fails in his attempt to reverse it. Griffin, a practitioner of random and irresponsible violence, has become an iconic character in horror fiction.
Musings on Parenting
- Author Name:
Dr. Meenu Sodhi Sharma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Aandhi
- Author Name:
Gulzar
- Book Type:

-
Description:
साहित्य में मंज़रनामा एक मुकम्मिल फ़ॉर्म है। यह एक ऐसी विधा है जिसे पाठक बिना किसी रुकावट के रचना का मूल आस्वाद लेते हुए पढ़ सके। लेकिन मंज़रनामा का अन्दाज़े-बयान अमूमन मूल रचना से अलग हो जाता है या यूँ कहें कि वह मूल रचना का इन्टरप्रेटेशन हो जाता है।
मंज़रनामा पेश करने का एक उद्देश्य तो यह है कि पाठक इस फ़ॉर्म से रूबरू हो सकें और दूसरा यह कि टी.वी. और सिनेमा में दिलचस्पी रखनेवाले लोग यह देख-जान सकें कि किसी कृति को किस तरह मंज़रनामे की शक्ल दी जाती है। टी.वी. की आमद से मंज़रनामों की ज़रूरत में बहुत इज़ाफ़ा हो गया है।
कथाकार, शायर, गीतकार, पटकथाकार गुलज़ार ने लीक से हटकर शरतचन्द्र की-सी संवेदनात्मक मार्मिकता, सहानुभूति और करुणा से ओत-प्रोत कई उम्दा फ़िल्मों का निर्देशन किया, जिनमें ‘मेरे अपने’, ‘अचानक’, ‘परिचय’, ‘आँधी’, ‘मौसम’, ‘ख़ुशबू’, ‘मीरा’, ‘किनारा’, ‘नमकीन’, ‘लेकिन’, ‘लिबास’, और ‘माचिस’ जैसी फ़िल्में शामिल हैं।
अपने समय की बेहद चर्चित फ़िल्म ‘आँधी’ का यह मंज़रनामा वरिष्ठ साहित्यकार कमलेश्वर के उपन्यास ‘काली आँधी’ से कुछ अलग भी है और नहीं भी। फ़िल्म में किरदारों के एटिट्यूड उपन्यास से अलग हैं। इसमें राजनीति के छल-छद्मों से भरी कथावस्तु के बीच दो दिलों के प्रेम की अन्तःसलिल धारा भी बह रही है जो पाठकों की संवेदना को छू लेती है।
यह पुस्तक पूरी फ़िल्म की एक तरह से औपन्यासिक प्रस्तुति है जो पाठकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरेगी।
Main Buddha Bol Raha Hoon
- Author Name:
Anita Gaur
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Karmayoga
- Author Name:
Swami Vivekanand
- Book Type:

- Description: कर्म शब्द ‘कृ’ धातु से निकला है; ‘कृ’ धातु का अर्थ है—करना। जो कुछ किया जाता है, वही कर्म है। इस शब्द का पारिभाषिक अर्थ ‘कर्मफल’ भी होता है। दार्शनिक दृष्टि से यदि देखा जाए, तो इसका अर्थ कभी-कभी वे फल होते हैं, जिनका कारण हमारे पूर्व कर्म रहते हैं। परंतु कर्मयोग में कर्म शब्द से हमारा मतलब केवल कार्य ही है। मानवजाति का चरम लक्ष्य ज्ञानलाभ है। प्राच्य दर्शनशास्त्र हमारे सम्मुख एकमात्र यही लक्ष्य रखता है। मनुष्य का अंतिम ध्येय सुख नहीं वरन् ज्ञान है; क्योंकि सुख और आनंद का तो एक न एक दिन अंत हो ही जाता है। अतः यह मान लेना कि सुख ही चरम लक्ष्य है, मनुष्य की भारी भूल है। संसार में सब दुःखों का मूल यही है कि मनुष्य अज्ञानवश यह समझ बैठता है कि सुख ही उसका चरम लक्ष्य है।
Hindi Aandolan Aur Nagari Pracharini Sabha
- Author Name:
Amish Verma
- Book Type:

- Description: उन्नीसवीं सदी का उत्तरार्द्ध हिन्दी भाषा के स्वरूप निर्माण के लिए एक महत्त्वपूर्ण दौर था। इस समय हिन्दी को एक सुनिश्चित रूप देने के लिए कई स्तरों पर संगठित प्रयास भी हो रहे थे। हिन्दी को राष्ट्रीयता का आधार-बिन्दु मानकर जहाँ विदेशी शासकों का मुकाबला किया जा रहा था, वहीं उसे हिन्दू धर्म से जोड़कर उसे एक धार्मिक प्रतीक के रूप में भी खड़ा किया जा रहा था। नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना इसी सामाजिक, सांस्कृतिक वातावरण में 1893 में हुई। यह आश्चर्यजनक है कि हिन्दी भाषा और साहित्य के लिए समर्पित इस संस्था को लेकर हिन्दी में कोई महत्त्वपूर्ण अध्ययन अब तक नहीं हुआ है। युवा अध्येता अमिष वर्मा का यह अध्ययन ‘हिन्दी आन्दोलन और नागरीप्रचारिणी सभा’ इस कमी को दूर करता है। सभी उपलब्ध स्रोतों की श्रम-साध्य पड़ताल के आधार पर सम्पन्न यह शोध हिन्दी आन्दोलन के सन्दर्भ में सभा की शुरुआती गतिविधियों और उसकी भाषा-नीति का विश्लेषण करता है। इस पुस्तक से हम हिन्दी-उर्दू के अन्तर्सम्बन्धों के इतिहास से भी परिचित होते हैं। इसमें उन ऐतिहासिक कारणों को समझने का प्रयास किया गया है जिनके चलते ये दोनों भाषाएँ न सिर्फ अलग हो गईं, बल्कि दो अलग धर्मों से भी जुड़ गईं, और अभिव्यक्ति का माध्यम न रहकर राजनीतिक औजार बन गईं। नागरीप्रचारिणी सभा की 1893-1902 की रिपोर्ट और पदाधिकारियों सम्बन्धी अन्य जानकारियाँ इस पुस्तक की विशेष उपलब्धि है जिसे परिशिष्ट में संयोजित किया गया है।
Body Language "बॉडी लैंग्वेज" | Listening to Peoples Thoughts without Saying Anything | Book in Hindi | M.K. Mazumdar
- Author Name:
M.K. Mazumdar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
India's Nuclear Might
- Author Name:
Om Parkash Pahuja
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Saath Ke Hemant
- Author Name:
Umesh Prasad Singh
- Book Type:

- Description: पत्रकार-लेखक-समाजधर्मी हेमंत शर्मा शोख, शरारती, संजीदा, हँसमुख, मिलनसार हैं, साथ ही दायित्वपूर्ण लेखन के अप्रतिम उदाहरण भी । उनका लेखन उत्प्रेरक है, उद्देगजनक भी है और अनुरंजक भी। संवेदना और भाषा के इन अलग-अलग गुण-स्वभाव के लेखक हिंदी में हैं, मगर इन सबका एकत्र संयोग हमें हेमंत में ही दिखाई देता है। हेमंत की शरारत में जो गहरी आत्मीयता है, वह अन्यत्र दुर्लभ है। हेमंत का लेखन जादूगर के तमाशे की तरह है, जो लोगों को अपने काम के रास्ते जाते हुए से बिलमाकर रोक लेता है, बाँध लेता है, विस्मय में डाल देता है, अपने कौशल के लिए वाहवाही निकलवा लेता है। हेमंतजी अपने सक्रिय जीवन के साठ साल पूरे करने जा रहे हैं। बिना किसी सीढ़ी का सहारा लिये, बिना किसी के कंधे पर चढ़े उन्होंने जीवन में स्पृहणीय ऊँचाई प्राप्त की है। इसके पीछे उनकी अथक मेहनत, गहरी सूझ, अटल संकल्प और व्यावहारिक कुशलता का बेजोड़ सम्मिलन है। उन्होंने ख्याति और समृद्धि के ऊँचे शिखर पर आसन जमाया है। हेमंत की उपलब्धियाँ विलक्षण हैं। उनकी प्रतिभा विस्मथघजनक है। उनका व्यवहार विमुग्धकारी है। मीडिया, कला-जगत्, राजनीति और विभिन्न भावभूमि की प्रमुख विभूतियों से उनके नितांत अनौपचारिक और गहरे संबंध हैं। यह कृति उनके ऐसे ही अपनों और आत्मीयों के उनके विषय में व्यक्त भावों का पठनीय संकलन है।
Aavedan-Praroop
- Author Name:
Shivnarayan Chaturvedi
- Book Type:

- Description: सरकारी कार्यालयों के कार्य-व्यवहार का एक आवश्यक पहलू है फ़ाइलों पर की जानेवाली टिप्पणियाँ, विभागीय पत्राचार और विषयानुरूप मसौदे। परम्परागत रूप से इन्हें अंग्रेज़ी में किया जाता है, परन्तु अब कुछ वर्षों से इन्हें हिन्दी में भी किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से विभिन्न पुस्तकें भी प्रकाशित हुई हैं, लेकिन डॉ. शिवनारायण चतुर्वेदी की यह पुस्तक ऐसी तमाम पुस्तकों से अलग हटकर लिखी गई है। सरकारी फ़ाइलों से जुड़े टिप्पण-आवेदन-प्रारूप के महत्त्व को स्वीकारते हुए भी डॉ. चतुर्वेदी का मानना है कि उक्त विषय सरकारी कार्यविधि का केवल एक पक्ष है। दूसरा पक्ष है—छुट्टी, स्थानान्तरण, स्थायीकरण, पदोन्नति, वरिष्ठता-वेतन, अग्रिम वेतन, आवास आदि से जुड़े आवेदन-प्रारूप। यह पुस्तक ऐसे प्रारूपों के कई-कई नमूने प्रस्तुत करती है। इसके अलावा पुस्तक के तीसरे खंड में विभिन्न सरकारी अधिकारियों से पत्र-व्यवहार के प्रारूप दिए गए हैं। सम्पादकों के नाम पत्र, विभिन्न अवसरों से सम्बद्ध निमंत्रण-पत्र आदि भी इसी खंड में शामिल हैं। पुस्तक के तीन-तीन परिशिष्टों में भी कुछ उपयोगी जानकारियाँ निहित हैं। इसी प्रकार प्रस्तुत पुस्तक आवेदन-पत्रों के प्रायः सभी आवश्यक हिन्दी रूपों को समाहित किए हुए है, जिनकी ज़रूरत एक कर्मचारी को अपने जीवन में पड़ती है। कहने की आवश्यकता नहीं कि डॉ. चतुर्वेदी की यह पुस्तक उन तमाम सरकारी कर्मचारियों के दैनंदिन उपयोग से जुड़ी हुई है, जो विभागीय और विभागेतर पत्राचार हिन्दी में करना चाहते हैं। यही नहीं, जैसा कि लेखक ने कहा है, यह पुस्तक हिन्दी-शिक्षण-योजना के अन्तर्गत ‘प्रवीण’ और ‘प्राज्ञ’ परीक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए भी उपयोगी होगी, क्योंकि पिछले अनेक वर्षों में इन परीक्षाओं में प्रारम्भिक आलेखन के अन्तर्गत आवेदन-पत्रों से सम्बन्धित जितने भी प्रश्न आए हैं, उन्हें भी इसमें शामिल कर लिया गया है।
Vyatha Katha
- Author Name:
Jawaharlal Kaul
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Samaj Chintan
- Author Name:
Avinash Rai Khanna
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Shaurya Aur Balidan Ki Kahaniyan
- Author Name:
Shruti
- Book Type:

- Description: No Description Available for this Book
Captain Manoj Kumar Pandey
- Author Name:
Risshi Raj
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book