Beti Bachao
Author:
Shakuntala SharmaPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Other0 Ratings
Price: ₹ 240
₹
300
Unavailable
Awating description for this book
ISBN: 9789384343415
Pages: 120
Avg Reading Time: 4 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Vijayi Bhav
- Author Name:
Dr.A.P.J. Abdul Kalam/Arun Kumar Tiwari
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
The Law of Attraction and Practical Mental Influence
- Author Name:
William Walker Atkinson
- Book Type:

- Description: In this New Thought classic, Atkinson looks at the law of attraction in the thought world. He points out the similarities between the law of gravitation and the mental law of attraction. He explains that thought vibrations are as real as those manifesting as light, heat, magnetism and electricity. The difference is in the vibratory rate which also explains the fact that thought vibrations cannot usually be perceived by our 5 senses. This is a really inspiring book. It gets you focused on your dreams and goals with very simple to understand directions. Everyone who reads and applies the information with a spirit of enthusiasm can feel the transformation in his life.
Europe Ka Sanskritik Kendra FRANCE
- Author Name:
Ramesh Pokhriyal 'Nishank'
- Book Type:

- Description: This book doesn’t have any description
Yenangvikarh
- Author Name:
Smt. Meera Jaiswal
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Mannu Bhandar Ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
Mannu Bhandari
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Mahatma Gandhi ki Jharkhand Yatra
- Author Name:
Shri Anuj Kumar Sinha
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Premchand Ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
Premchand
- Book Type:

- Description: दस-बारह रोज और बीत गए। दोपहर का समय था। बाबूजी खाना खा रहे थे। मैं मुन्नू के पाँवों में पीनस की पैजनियाँ बाँध रहा था। एक औरत घूँघट निकाले हुए आई और आँगन में खड़ी हो गई। उसके वस्त्र फटे हुए और मैले थे, पर गोरी सुंदर औरत थी। उसने मुझसे पूछा, ‘‘भैया, बहूजी कहाँ हैं?’’ मैंने उसके निकट जाकर मुँह देखते हुए कहा, ‘‘तुम कौन हो, क्या बेचती हो?’’ औरत-‘‘कुछ बेचती नहीं हूँ, बस तुम्हारे लिए ये कमलगट्टे लाई हूँ। भैया, तुम्हें तो कमलगट्टे बड़े अच्छे लगते हैं न?’’ मैंने उसके हाथ में लटकती हुई पोटली को उत्सुक आँखों से देखकर पूछा, ‘‘कहाँ से लाई हो? देखें।’’ स्त्री, ‘‘तुम्हारे हरकारे ने भेजा है, भैया!’’ मैंने उछलकर कहा, ‘‘कजाकी ने?’’ स्त्री ने सिर हिलाकर ‘हाँ’ कहा और पोटली खोलने लगी। इतने में अम्माजी भी चौके से निकलकर आइऔ। उसने अम्मा के पैरों का स्पर्श किया। अम्मा ने पूछा, ‘‘तू कजाकी की पत्नी है?’’ औरत ने अपना सिर झुका लिया। -इसी पुस्तक से उपन्यास सम्राट् मुंशी पेमचंद के कथा साहित्य से चुनी हुई मार्मिक व हृदयस्पर्शी कहानियों का संग्रह।
General Bipin Rawat: The Warrior
- Author Name:
Manjeet Negi
- Book Type:

- Description: India’s first CDS General Bipin Rawat was a valiant warrior with indomitable willpower and unprecedented vision. During his military tenure, he provided intense and brilliant leadership. He was well aware that the mission he was leading, was visionary, far-reaching, for the betterment of the Forces and in the interest of the nation. He always first experimented all his suggested reforms on himself, before implementing these in the Forces. He followed ‘zero tolerance’ policy against corruption and ethical conduct in the Forces. He was the greatest pioneer of ‘Make in India’ in the Forces. He strongly supported the production of weapons and other defence equipment in the country itself. General Bipin Rawat’s impressive personality, his steely character and superb efficiency, quite simple behaviour were all so very natural and devoid of artificiality and so efficacious that any person coming in his contact, was naturally influenced by him. His military strategies, readiness to act, deep studies, analytical, fearless, sincere and bold statements, industrious nature, humane impartiality and ‘zero tolerance’ for corruption were so strong that any impartial and neutral person was forced to support his views. This book is a glorious tale of valiant and inspirational life of General Bipin Rawat, the pride of Indians.
Meri Jeevan Yatra
- Author Name:
Dr. A.P.J. Abdul Kalam
- Book Type:

- Description: "रामेश्वरम में पैदा हुए एक बालक से लेकर भारत के ग्यारहवें राष्ट्रपति बनने तक का डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जीवन असाधारण संकल्प शक्ति, साहस, लगन और श्रेष्ठता की चाह की प्रेरणाप्रद कहानी है। छोटी कहानियों और पार्श्व चित्रों की इस शृंखला में डॉ. कलाम अपने अतीत के छोटे-बड़े महत्त्वपूर्ण पलों को याद करते हैं और पाठकों को बताते हैं कि उन पलों ने उन्हें किस तरह प्रेरित किया। उनके प्रारंभिक जीवन पर गहरी छाप छोड़ने वाले लोगों और तदनंतर संपर्क में आए व्यक्तियों के बारे में वे उत्साह और प्रेम के साथ बताते हैं। वे अपने पिता और ईश्वर के प्रति उनके गहरे प्रेम, माता और उनकी सहृदयता, दयालुता, उनके विचारों और दृष्टिकोणों को आकार देनेवाले अपने गुरुओं समेत सर्वाधिक निकट रहे लोगों के बारे में भी उन्होंने बड़ी आत्मीयता से बताया है। बंगाल की खाड़ी के पास स्थित छोटे से गाँव में बिताए बचपन के बारे में तथा वैज्ञानिक बनने, फिर देश का राष्ट्रपति बनने तक के सफर में आई बाधाओं, संघर्ष, उनपर विजय पाने आदि अनेक तेजस्वी बातें उन्होंने बताई हैं। ‘मेरी जीवन-यात्रा’ अतीत की यादों से भरी, बेहद निजी अनुभवों की ईमानदार कहानी है, जो जितनी असाधारण है, उतनी ही अधिक प्रेरक, आनंददायक और उत्साह से भर देनेवाली है। आभार मेरी जीवन-यात्रा घटनाओं से भरे जीवन का विवरण है। मेरे मित्र हैरी शेरिडॉन करीब बाईस वर्षों से मेरे साथ रहे हैं और अनेक घटनाओं के भागीदार बने हैं। उन्होंने मेरे साथ सुख और दु:ख, दोनों झेले हैं। शेरिडॉन हर तरह के उतार-चढ़ावों में मेरे साथ रहे हैं और जब कभी मुझे जरूरत पड़ी, उन्होंने मेरी पूरी-पूरी सहायता की। ईश्वर उन्हें और उनके परिवार को सदैव सुखी रखे। मैं सुदेषणाशोम घोष को भी धन्यवाद देना चाहूँगा, जो पुस्तक की परिकल्पना से लेकर उसे आकार देने तक मेरे साथ रहीं। पुस्तक प्रकाशित होने तक वे धैर्य के साथ निरंतर मुझसे जुड़ी रहीं। मैं उनके प्रयासों को नमन करता हूँ।
Anand Prakash Jain ki lokpriya kahaniyan
- Author Name:
Anand Prakash Jain
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Sabhyatayen Aur Sanskritiyan
- Author Name:
Daya Krishna
- Book Type:

-
Description:
आधुनिक भारत में जो शीर्षस्थानीय दार्शनिक हुए हैं, उनमें डॉ. दया कृष्ण का विशेष स्थान है। उन्होंने पश्चिमी दर्शनशास्त्र के गहन अध्येता के रूप में शुरुआत की थी पर बाद में उन्होंने भारतीय दार्शनिक और बौद्धिक परम्परा में गहरी पैठ बनाई। उन्होंने अनेक भारतीय विचारों और सिद्धान्तों पर पुनर्विचार किया, कुछ का बदली हुई परिस्थिति में पुनराविष्कार किया। उन्होंने निरी नई व्याख्या से हटकर कई नई जिज्ञासाएँ विन्यस्त कीं और कई पुराने प्रश्नों के नए उत्तर खोजने का दुस्साहस किया। सभ्यताओं और संस्कृतियों के बीच सम्बन्ध और अन्तर पर उन्होंने नई गम्भीरता से विचार किया और उन्हें लेकर इतिहास-लेखन के लिए कुछ मौलिक प्रस्तावना की। हिन्दी में निरन्तर क्षीण हो गई विचार-परम्परा में यह हिन्दी अनुवाद समृद्ध विस्तार करेगा, ऐसी आशा है।
—अशोक वाजपेयी
Bhoomanadlikaran Aur Media
- Author Name:
Kumud Sharma
- Book Type:

- Description: तमाम व्यावसायिकता के नारों के बीच भारतीय मीडिया को यह समझना होगा कि वह लोकतंत्र का शक्तिशाली स्तंभ है और राष्ट्रीय संस्कारों तथा लोकतांत्रिक मूल्यों का संवाहक भी । वह दिशादर्शन के गहरे दायित्व-बोध से भी जुड़ा हुआ है । भारतीय मीडिया-चाहे वह इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हो अथवा प्रिंट मीडिया-दोनों का ही सैद्धांतिक स्वरूप राष्ट्रीय समता, अखंडता और संप्रभुता बनाए रखने के उद्देश्य के साथ-साथ देश की जनता में सांस्कृतिक, राजनीतिक और आर्थिक दृष्टि से एक अनुकूल और प्रेरक सोच पैदा करने के उद्देश्य से गढ़ा गया है । शिक्षा तथा साक्षरता के माध्यम से समाज के विकास को गति देना भी उनका लक्ष्य है । उसके उद्देश्यों में जागृति पैदा करना, सूचना देना तथा व्यापक रूप से जनता के जीवन-स्तर को उठाना भी शामिल है । भूमंडलीकरण की प्रक्रिया में मीडिया के सिद्धांत और व्यवहार के बीच की खाई बढ़ गई है । व्यावसायिकता से उपजी तमाम चुनौतियों के बीच भारतीय मीडिया को अपनी यह चमक पुन: कायम करनी होगी । उसे इन्हीं चुनौतियों से गुजरकर वह राह पकड़नी होगी, जिसपर चलकर वह देश के व्यापक फलक पर व्याप्त भ्रष्टता और विसंगति को चुनौती दे सके; ' साम्राज्यवादी सूचनाओं के इंद्रजाल ' से मुक्त होकर राष्ट्रीय प्रतिबद्धता का पाठ पढ़ा सके तथा ग्लैमर, चकाचौंध के आवरण को चीरकर समाज को स्वस्थ दिशा दे सके । -इसी पुस्तक से
Mahaparakram (Hindi Translation Of 1971—Stories Of Grit And Glory): महापराक्रम (1971 के भारत-पाक युद्ध की साहसिक कहानियाँ) Book
- Author Name:
Ian Cardozo
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Ajneya Aur Unke Upanyas
- Author Name:
Gopal Ray
- Book Type:

- Description: उपन्यास की रचना-प्रक्रिया तो सैद्धान्तिकी गढ़ती ही है लेकिन एक आलोचक का दायित्व होता है कि वह रचना को व्यावहारिक मनोभूमि पर परखे। गोपाल राय ने अज्ञेय के उपन्यासों को उपन्यास की सैद्धान्तिकी के आधार पर देखते हुए उसके विश्लेषण को व्यावहारिक धरातल पर उकेरा है। यह पुस्तक वस्तुत: अज्ञेय के उपन्यासों की व्याख्या के क्रम में एक आरम्भिक मूल्यांकन का प्रयास है। अज्ञेय का उपन्यास-संसार मूल रूप में ‘शेखर : एक जीवनी’ (भाग-एक 1940 एवं भाग-दो 1944), ‘नदी के द्वीप’ (1951) और ‘अपने-अपने अजनबी’ (1961) तक विस्तृत है। आलोचक गोपाल राय ने इन्हीं उपन्यासों की रचना-भूमि पर अपनी लेखनी चलाई है। इस पुस्तक में अज्ञेय की जीवनी-रेखा, रचना परिवेश, साहित्य सम्बन्धी विचार का परिचयात्मक मूल्यांकन करते हुए; अज्ञेय के औपन्यासिक-संसार की व्यावहारिक समीक्षा लिखी गई है। ‘हिन्दी उपन्यास साहित्य में अज्ञेय का स्थान’ शीर्षक अध्याय उपन्यासकार अज्ञेय के लिए मूल्यांकन के प्रतिमान बनाने का कार्य भी करता है। इस तरह यह पुस्तक अज्ञेय के उपन्यासों के रूप और वस्तु की संरचना पर मूल्यांकन की प्राथमिक पहल करती जान पड़ती है। आशा है कि गोपाल राय की यह आलोचना कृति रचनकार अज्ञेय और उनके उपन्यासों की पड़ताल में पाठकों के बीच एक सेतु-निर्माण का कार्य करेगी।
BPSC Bihar Teacher Recruitment Phase II Class 6 To 12 NCERT/SCERT Based Chapterwise MCQs General Studies Book
- Author Name:
Dr. Ranjit Kumar Singh, IAS (AIR-49)
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Agnirath Ka Sarthi Manu Sharma
- Author Name:
Dr. Indivar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Nai Sadi Ka Katha Samay
- Author Name:
Pankaj Subeer
- Book Type:

- Description: Book
Priyatama
- Author Name:
Phani Mohanty
- Book Type:

- Description: चारों दिशाएँ, चौदह भुवन खाली-खाली लगते हैं, एक अध-जला दीया की रस्सी की तरह नाम के वास्ते हाथ-पैर पसारकर, गिरा हुआ हूँ मैं। यह कैसा जीवन है प्रियतमा? हर पल मैं कितने शब्द जोड़ता हूँ और तोड़ता हूँ, जुड़े-तुड़े इन्हीं शब्दों से मैं एक वाक्य की माला भी बना नहीं सका, इस जीवन में। करोड़ों तारों और चाँद और सूरज के मेले में, तुम ही तो मेरे साक्षी हो, तुम ही मेरे साक्षी हो भाव में रहकर भी कवि मर सकता है, अभाव के नरक में। इस जीवन को अकेले में जाने दो, प्रियतमा, चाहे तुम जितने न पहुँचनेवाले दुनिया में, तुम ही मेरी प्रथम और आखिरी वर्णमाला तुम ही मेरा प्रथम और आखिरी वादा। —इसी पुस्तक से
Arthik Vikas Aur Sansadiya Loktantrik Pranali Book In Hindi
- Author Name:
Narendra Pathak
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Rangbhoomi
- Author Name:
Premchand
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book